महंत इंद्रेश अस्पताल ने लाश को वसूले १० हजार

गरीब के नसीब मे नही मानवीय संवेदनाएं।
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समय पर इलाज नही मिलने से उत्तरकाशी की सर बडियार पट्टी के ढींगारी गांव निवासी यसबीर सिंह रावत ने महंत इंद्रेश मेडिकल कालेज के icu मे ली अंतिम सांस ।

दूरस्त क्षेत्र के गरीब किसान के लिए वैसे भी देहरादून जैसे महंगे शहर मे इलाज कराना मुश्किल ही था । बड़कोट से देहरादून दून मेडिकल कालेज को रैफर यसबीर को राजधानी के सरकारी मेडिकल कालेज मे भी इलाज नसीब नही हुआ । दून मेडिकल कालेज के डॉक्टरों द्वारा उनके परिजनों को किसी अन्य अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई । साथ आये लोग उन्हें महंत इंद्रेश मेडिकल कालेज ले गए जहां डॉक्टरों ने निर्धारित शुल्क जमा करवा मरीज का icu मे इलाज शुरू किया । इलाज के दौरान ही आज दोपहर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर तीमारदारों को शव को ले जाने को कहा ।

मानवीय संवेदनाएं तब तार तार हुई जब डैडबॉडी लेने गए तीमारदारों को अस्पताल प्रशासन ने शेष नौ हजार पांच सौ रुपए जमा करने को कहा । तीमारदारों ने अपनी गरीबी का हवाला देकर पैसे नही होने की बात कही लेकिन अस्पताल प्रशासन का दिल नही पसीजा । रात आठ से नौ बजे तक किसी तरह इधर उधर से पैसे इकट्ठा कर अस्पताल मे परिजनों ने पैसे जमा किये तब जाकर अस्पताल प्रशासन ने डैडबॉडी परिजनों को सौंपी ।

ट्रस्ट ,चैरिटी का ढोल पीटने वाले संस्थानों की जब यह स्थिति है तो एक तारा से पांचतारा अस्पतालों मे राज्य के किसी गरीब किसान के इलाज की तो कल्पना करना भी बेमानी है ।

-रतन सिंह असवाल

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