मंथन: विचारधारा के नाम पर बंटता देश

वर्ष 1947 में आज़ादी के साथ देश का बंटवारा भी हुआ था . तब भी विचारधारा के नाम पर देश को बांटा गया था . और आज भी विचारधारा के नाम पर पूरा देश बंटा हुआ है .

हमारे देश में टुकड़े-टुकड़े गैंग की लगातार चर्चा होती है, और ये कहा जाता है कि ये गैंग देश को तोड़ देगा. लेकिन कड़वी सच्चाई ये है कि हमारे देश के टुकड़े-टुकड़े तो पहले ही हो चुके हैं . क्योंकि टुकड़े विचारधारा से होते हैं… सीमाओं से नहीं. वर्ष 1947 में आज़ादी के साथ देश का बंटवारा भी हुआ था . तब भी विचारधारा के नाम पर देश को बांटा गया था . और आज भी विचारधारा के नाम पर पूरा देश बंटा हुआ है .

मध्य प्रदेश में अपनी सरकार बनाने के बाद कांग्रेस पार्टी ने वंदेमातरम की परंपरा को खत्म कर दिया है . पिछले 14 वर्षों से मध्य प्रदेश में सभी मंत्री और अधिकारी हर महीने की पहली तारीख को वंदेमातरम का गान करते थे . लेकिन आज एक जनवरी 2019 के दिन… कांग्रेस की सरकार ने ये 14 वर्ष पुरानी परंपरा तोड़ दी है .

ये विचारधारा के नाम पर बंटे हुए देश का नया राजनीतिक नक्शा है . आज 5 राज्यों में कांग्रेस पार्टी की सरकार है… पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पुडुचेरी . इसके अलावा कर्नाटक में JDS के साथ कांग्रेस की गठबंधन वाली सरकार है . कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जहां कांग्रेस के सहयोगी सत्ता में हैं. ऐसे राज्यों में सबसे ऊपर है, पश्चिम बंगाल, जहां ममता बनर्जी मुख्यमंत्री हैं . इसके अलावा केरल भी है जहां लेफ्ट की सरकार है . देश के राजनीतिक नक्शे में ये वो राज्य हैं जहां वंदेमातरम का विरोध करने वाली विचारधारा की सरकार है .

देश के 16 राज्यों में इस वक्त बीजेपी की सरकार है . ये देश के वो राज्य है जहां वंदेमातरम का समर्थन करने वाली सरकारें है .

ये बंटवारे की वो लकीरें हैं जो नज़र नहीं आतीं. हमें ये कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि वैचारिक रूप से देश का बंटवारा हो चुका है . अगर ऐसी ही स्थिति रही तो कुछ दिनों बाद देश के अंदर एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए, वैचारिक वीज़ा लेना पड़ेगा

इस वैचारिक बंटवारे की नींव में राजनीतिक घृणा है. 2018 में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने राज्यों में CBI के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था . दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस फैसले का स्वागत किया था . एक संघीय ढांचे वाले देश में व्यवस्थाओं को और लोगों को बांटने का ये तरीका बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.

आज एक और घटना ऐसी है.. जिसमें देश का वैचारिक बंटवारा साफ नज़र आता है . गुजरात की सरकार ने ये फैसला किया है कि सभी स्कूलों में अब विद्यार्थी अपनी उपस्थिति दर्ज करते वक्त Yes Sir और Present Sir की जगह जय हिंद या जय भारत कहेंगे . बच्चों में देशभक्ति की भावना को बढ़ाने के लिए गुजरात सरकार ने ये फैसला किया है. गुजरात के स्कूलों में ये फैसला आज से लागू भी हो गया है . लेकिन कांग्रेस पार्टी ने इसका भी विरोध किया है . हमें लगता है कि राष्ट्रीय स्वाभिमान और देशभक्ति से जुड़े मामलों में हर राजनीतिक दल को Party Line छोड़कर राष्ट्रीय हित की Line पर चलना चाहिए .

भारत में आज भी राष्ट्रवाद और देशभक्ति के DNA को बढ़ाना बहुत ज़रूरी है . 1947 में मिली आज़ादी से पहले… एक हज़ार वर्ष से भी ज़्यादा समय तक, भारत गुलाम रहा है . अरब, Turkey, Iran, अफगानिस्तान, मंगोलिया और यूरोप के हमलावरों ने भारत के अलग-अलग हिस्सों पर करीब एक हज़ार 300 वर्षों तक राज किया . भारत को इतनी लंबी गुलामी झेलनी पड़ी क्योंकि भारत के लोगों में राष्ट्रीय एकता की भावना नहीं थी . भारत, जातियों, संप्रदायों और इलाकों में बंटा हुआ था . भारत में राष्ट्रीय भावना पर, जातीय भावना और क्षेत्रीय भावना हावी थी . इसीलिए विदेशियों ने बहुत आसानी से हमारे देश पर कब्ज़ा कर लिया . हमें लगता है कि गुजरात की सरकार ने एक अच्छा कदम उठाया है क्योंकि इससे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और अखंडता का DNA मज़बूत होगा.

Yes Sir और Present Sir के विरोध के पीछे कहीं ना कहीं कांग्रेस पार्टी की अंग्रेजों वाली मानसिकता भी ज़िम्मेदार है . वर्ष 1901 में कांग्रेस पार्टी का कलकत्ता अधिवेशन हुआ था . तब पहली बार महात्मा गांधी ने कांग्रेस पार्टी के इस अधिवेशन में हिस्सा लिया था . उस अधिवेशन में अंग्रेज़ी का बोलबाला था . महात्मा गांधी ने अपनी एक पुस्तक में कांग्रेस की इस मानसिकता का खुलकर विरोध किया था .

इस किताब में एक अध्याय है… जिसका शीर्षक है – देश में कांग्रेस प्रथम बार .
इस अध्याय में महात्मा गांधी ने लिखा है…

कांग्रेस के अधिवेशन में सर फिरोजशाह मेहता ने मेरा प्रस्ताव लेने की बात तो कही थी . लेकिन प्रस्ताव कौन प्रस्तुत करेगा, कब करेगा, ये सोचता हुआ मैं बैठा रहा . हर एक प्रस्ताव पर लंबे-लंबे भाषण होते थे . सारे भाषण अंग्रेजी में . हर एक के साथ प्रसिद्ध व्यक्तियों के नाम जुड़े होते थे . इस नक्कारखाने में मेरी तूती की आवाज कौन सुनेगा ? कुछ ही दिनों में मुझे कांग्रेस की व्यवस्था का ज्ञान हो गया . कई नेताओं से भेंट हुई . मैंने उनकी परंपराएं देखीं . वहां समय की बरबादी होती थी . कांग्रेस में अंग्रेजी भाषा का प्रभाव बहुत ज्यादा था . मैंने इस प्रभाव को भी देखा . इससे उस समय भी मुझे दुःख हुआ था .

अंग्रेज़ी वाली ये मानसिकता कांग्रेस पार्टी के DNA के अंदर मौजूद है. क्योंकि मूल रूप से कांग्रेस पार्टी की स्थापना ही एक अंग्रेज़ A O Hume ने की थी . गांधी जी ज़िंदगी भर कांग्रेस के DNA को बदलने की कोशिश में लगे रहे . लेकिन कांग्रेस का DNA इसके बाद भी नहीं बदला शायद इसीलिए कांग्रेस को जय हिंद और जय भारत के मुकाबले Yes Sir और Present Sir ज़्यादा अच्छा लगता है.

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