भूपेंद्र हुड्डा और मोतीलाल वोरा सीबीआई कोर्ट में पेश , 5-5 लाख के बेल बांड पर जमानत : एजेएल केस

पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा। (फाइल)पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा। (फाइल)

  • नेशनल हेराल्ड की मालिक कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को प्लॉट रि-अलॉट करने का मामला
  • दोनों आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी सौंपी, 6 फरवरी को अगली सुनवाई

पंचकूला. नेशनल हेराल्ड की मालिक कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को प्लॉट रि-अलॉट करने के मामले में गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा और मोतीलाल वोरा पंचकूला की सीबीआई कोर्ट में पेश हुए। इस दौरान कोर्ट ने दोनों को राहत देते हुए 5-5 लाख रुपए के बेल बांड पर जमानत दे दी। मामले की अगली सुनवाई 6 फरवरी को होगी।

 इस मामले में सीबीआई ने पिछले साल दिसंबर में चार्जशीट दाखिल की थी।
बीजेपी ने सत्ता में आते ही करवाई थी घोटाले की जांच

आपको बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री पर असोसिएटेड जर्नलस लिमिटेड (एजेएल) को उसके अखबार नैशनल हेरल्ड के लिए पंचकूला में नियमों के खिलाफ जमीन अलॉट करने का आरोप है। मौजूदा बीजेपी सरकार ने साल 2016 में मामला सीबीआई को सुपुर्द कर दिया था। बीजेपी ने सत्ता में आते ही इस मामले की जांच करवाई थी। इससे पहले बीजेपी ने सत्ता में आने से पहले हुड्डा के शासनकाल को मुद्दा बनाया था और सत्ता हासिल करते ही विभिन्न मामलों की जांच करवाई। इनमें एजेएल का मामला भी था। मामले पर बीजेपी सरकार ने विजिलेंस विभाग को मई 2016 को जांच सौंपी थी। मामला हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) की शिकायत पर दर्ज हुआ था। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री इसलिए निशाने पर आए क्योंकि मुख्यमंत्री प्राधिकरण के पदेन अध्यक्ष होते हैं। à¤­à¥‚पेंद्र हुड्डा और मोतीलाल वोरा के लिए इमेज परिणाम
ऐसे किया गया जमीन आवंटन में ‘खेल’ 
आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने 28 अगस्त 2005 को पद का दुरुपयोग करते हुए एजेएल को पंचकूला में जमीन का आवंटन बहाल किया। यह जमीन एजेएल को 30 अगस्त 1982 में आवंटित की गई थी। शर्त यह थी कि कंपनी छह महीने में जमीन पर कंस्ट्रक्‍शन करेगी लेकिन, ऐसा नहीं हुआ तो 30 अक्टूबर 1992 को पंचकूला के संपदा अधिकारी ने जमीन रिज्यूम कर ली। साथ ही 10 फीसदी राशि में कटौती कर बाकि राशि 10 नवंबर 1995 को लौटा दी गई। इसका एजेएल ने विरोध किया और राजस्व विभाग के पास अपील की। यहां भी एजेएल को राहत नहीं मिली। 

आरोप है कि एजेएल को साल 2005 में हुड्डा के मुख्यमंत्रित्वकाल में बड़ी राहत उस समय मिल गई जब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन होने के नाते तब के मुख्यमंत्री हुड्डा ने एजेएल को यह जमीन दोबारा से अलॉट करवाने का रास्ता तैयार कर दिया। बताया जाता है कि तब हुडा के तत्कालीन मुख्य प्रशासक ने तर्क दिया था कि पुरानी कीमत पर जमीन को आवंटित करना संभव नहीं है। बावजूद 28 अगस्त 2005 को पंचकूला की जमीन 1982 की दर पर ही एजेएल को अलॉट हो गई। चार्जशीट पेश होते ही ईडी ने प्लॉट किया अटैच

  1. कोर्ट ने 5 दिसंबर को हुड्डा और वोरा को समन जारी करते हुए पेश होने का आदेश दिया था। दोनों को चार्जशीट की कॉपी सौंपी गई। 6 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर आरोपों पर बहस होगी, जिसके बाद इस मामले में आरोप तय किए जाएंगे।
  2. एजेएल कांग्रेस नेताओं व गांधी परिवार के नियंत्रण वाली कंपनी है। इसे जिस समय प्लॉट रि-अलॉट किया गया, उस समय हुड्डा सीएम के साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के चेयरमैन भी थे। वोरा एजेएल के चेयरमैन रहे हैं।भूपेंद्र हुड्डा और मोतीलाल वोरा के लिए इमेज परिणाम
  3.  ये है पूरा मामला

    24 अगस्त 1982 को पंचकूला सेक्टर-6 में 3360 वर्गमीटर का प्लॉट नंबर सी-17 तत्कालीन सीएम चौधरी भजनलाल ने एजेएल को अलॉट कराया था। कंपनी ने 10 साल तक कंस्ट्रक्शन नहीं किया तो 30 अक्टूबर 1992 को हुडा ने अलॉटमेंट रद्द कर प्लॉट पर वापस कब्जा ले लिया।

  4. 28 अगस्त 2005 को तत्कालीन सीएम हुड्‌डा ने अफसरों के मना करने के बावजूद एजेएल को 1982 की मूल दर पर ही प्लॉट अलॉट करने की फाइल पर साइन कर दिए थे।
  5. इसी दौरान पंचकूला में एसोसिएट जर्नल लिमिटेड को जमीन आबंटित की थी। आरोप है कि एजेएल को यह जमीन आवंटित करने के लिए नियमों की अनदेखी की गई। इससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपए के रेवेन्यू का नुकसान हुआ। ये प्लॉट 496 स्केवयर मीटर से लेकर 1280 स्केवयर मीटर तक के थे, जिसके लिए हुड्डा के पास 582 आवेदन आए थे। अलॉटमेंट के लिए 14 का चयन किया गया था।
  6. खट्टर सरकार ने सत्ता में आते ही इस मामले की जांच विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दी थी। विजिलेंस ने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद सरकार ने मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।

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