भारत लाया जा सकता है 26/11 मुंबई हमलों का षडयंत्रकारी तहव्वुर राणा

पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है तहव्वुर हुसैन राणा

  • अमेरिकी अदालत ने 2013 में राणा को जेल की सजा सुनाई थी

वॉशिंगटन/नई दिल्ली. मुंबई पर 26 नंवबर 2008 को हुए आतंकी हमलों की साजिश रचने वाले तहव्वुर हुसैन राणा को भारत लाया जा सकता है।  मुंबई में 26/11 आंतकी हमले के 10 साल बाद भारत की खुफिया एजेंसी को एक बड़ी कामयाबी मिली है। इस हमले में डेविड कोलमैन हेडली का साथ देने वाले तहव्वुर राणा को जल्द भारत लाया जा सकता है। राणा के प्रत्यर्पण के अनुरोध को स्वीकार कर लिया गया है। राणा पाकिस्तानी सेना का पूर्व फिजिशियन रह चुका है।  à¤¤à¤¹à¤µà¥à¤µà¥à¤° हुसैन राणा के लिए इमेज परिणाम अभी राणा इस मामले में अमेरिकी जेल में 14 साल की सज़ा काट रहा है!  न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि उसे सजा पूरी होने से पहले ही प्रत्यर्पित किया जा सकता है।मुंबई हमलों में 166 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। मरने वालों में कुछ अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे। हमले के आरोप में अमेरिका ने राणा (58 वर्षीय) को 2009 में गिरफ्तार किया था। उसे 2013 में जेल की सजा सुनाई गई थी। सूत्रों ने कहा, ‘राणा की जेल की सज़ा पूरी हो जाने के बाद उसे भारत प्रत्यर्पित किए जाने की प्रबल संभावना है. हम (अमेरिकी और भारतीय अधिकारी) इस पर काम कर रहे हैं.’तहव्वुर राणा को इस आतंकी हमलों की साजिश रचने के आरोप में वर्ष 2009 में गिरफ्तार किया गया था और वर्ष 2013 में उसे 14 साल जेल की सज़ा सुनाई गई थी, जो दिसंबर 2021 में पूरी हो जाएगी.

भारत का विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा कानून एवं विधि मंत्रालय और अमेरिकी विदेश मंत्रालय और न्याय मंत्रालय सभी की अपनी प्रत्यर्पण प्रक्रिया है. उसने कहा कि जब प्रत्यर्पण की बात आती है तो वे अपनी प्रक्रिया को ना धीमा करना चाहते हैं और ना ही तेज करना चाहते हैं. भारतीय दूतावास और राणा के वकील ने हालांकि इस पर कोई टिप्पणी नहीं की.तहव्वुर हुसैन राणा के लिए इमेज परिणाम

प्रत्यर्पण के लिए 26/11 हमलों का हवाला नहीं दे सकता भारत
अधिकारियों के मुताबिक, भारत राणा को प्रत्यर्पित करने के लिए 26/11 हमलों का हवाला नहीं दे सकता। इसकी वजह यह है कि अमेरिका में एक ही अपराध के लिए दो बार सजा नहीं दी जा सकती।सूत्रों के मुताबिक एनआईए के अधिकारियों ने अमेरिकी अधिकारों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की है। इस दौरान अमेरिकी न्याय विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वह 57 वर्षीय राणा के खिलाफ भारत के आरोपों को सही मानते हैं। इनपर चाबाड हाउस और एनडीसी में हमले का भी आरोप है।

अधिकारियों ने कहा कि भारत के प्रत्यर्पण के आवोदन को अमेरिकी अभियोजन पक्ष और फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन (एफबीआई) दोनों ने स्वीकार कर लिया गया है। जिसमें राणा के खिलाफ आईपीसी की धारा के तहत जालसाजी और विश्वास का आपराधिक उल्लंघन के तहत आरोप लगाए गए हैं। इससे पहले अमेरिकी कानून में शामिल ‘जियोपार्डी लॉ’ की धारा बाधा उत्पन्न कर रही थी जिसके तहत एक ही अपराध के लिए किसी व्यक्ति को दो बार सजा नहीं दी जा सकती। इससे राणा के प्रत्यर्पण में परेशानी आ रही थी। तहव्वुर हुसैन राणा के लिए इमेज परिणामलेकिन एनआईए ने 2016 में अपने अनुरोध को दोबारा दोहराया। ऐसे में पहले ही अमेरिका में जेल की सजा काट चुके राणा को भारत लाना मुश्किल हो जाएगा। भारत इस स्थिति से निपटने के लिए राणा के दूसरे अपराधों को आधार बनाकर प्रत्यर्पण की अपील कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, राणा पर नई दिल्ली स्थित नेशनल डिफेंस कॉलेज और चाबड़ हाउसेज पर हमले की साजिश रचने का आरोप है। इसके अलावा उस पर धोखाधड़ी का भी एक केस दर्ज है। इन्हीं मामलों को अधिकारियों के सामने रखकर भारत राणा को भारत लाने की कोशिश करेगा।26/11 Mumbai attack, extradition request of India to get Tahawwur Hussain Rana is accepted

बता दें कि मुंबई में 26/11 को हुए इस आतंकी हमलों  में अमेरिकी नागरिकों सहित करीब 170 लोग मारे गए थे. पाकिस्तान स्थिल लश्कर ए तैयबा के 10 आतंकियों ने मुंबई में यह कत्लेआम मचाया था. उनमें से नौ आतंकियों को तो पुलिस और सुरक्षाबलों ने मार गिराया था. वहीं अजमल कसाब नाम के आतंकी को गिरफ्तार किया गया था, जिसे बाद में फांसी की सज़ा सुनाई गई थी.

अमेरिका से प्रत्यर्पण चुनौतीपूर्ण

भारत सरकार इस वक्त ट्रम्प प्रशासन के साथ मिलकर जरूरी दस्तावेजी कार्यवाही पूरी कर रही है, ताकि जितना जल्दी हो सके राणा को भारत लाया जा सके। हालांकि, अमेरिका की जटिल नौकरशाही और न्यायिक व्यवस्था के चलते जरूरी पेपरवर्क समय पर पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ट्रम्प ने किया था मदद का वादा

मुंबई आतंकी हमले की 10वीं बरसी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट भी किया था। उन्होंने लिखा था, “न्याय के लिए अमेरिका भारत के लोगों के साथ खड़ा है। हम कभी भी आतंकियों को जीतने नहीं देंगे या जीत के करीब नहीं आने देंगे।” ट्रम्प के अलावा विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भी मुंबई हमले में शामिल किसी भी व्यक्ति की जानकारी देने पर 50 लाख डॉलर (करीब 35 करोड़ रुपए) के इनाम का ऐलान किया था।

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