‘भारत कोकिला’ सरोजिनी नायडू का निधन हुआ था आज

2 मार्च का इतिहास

देश विदेश के इतिहास में 2 मार्च के दिन यानि आज के दिन में बहुत सी घटित-घटनाएं, विदा लिए महान व्यक्ति, जन्म लिए व्यक्ति से जुडी बहुत सी ऐसी बातें जब हमें कुछ सीख दे जाती है तो आइए आज हम उन्हीं महत्वपूर्ण घटनाएँ जानते।

2 March History

  • 1498 : पुर्तगाल का यात्री वास्को डी गामा और उसका बेड़ा भारत की तरफ अपनी पहली यात्रा के दौरान मोजाम्बीक द्वीप पहुंचा।
  • अमेरिकी कांग्रेस ने 1807 में एक कानून पास कर देश में गुलामों के आयात पर रोक लगा दी थी। दास प्रथा की समाप्ति की दिशा में यह अहम कदम था।
  • अमेरिका ने 1819 में अपना पहला आव्रजन कानून पारित किया।
  • टेक्सास ने 1836 में मेक्सिको से अपनी आजादी की घोषणा की।
  • निड्ल कंपनी एक्सेलसियर ने 1866 में सिलाई मशीन की सुई बनानी शुरू की।
  • दुनिया की पहली वायरलैस टेलीग्राफ कंपनी हवाई में 1901 में खुली।
  • अंतरराष्ट्रीय मार्क्सवाद की पहली बैठक 1919 में मास्को में हुयी।
  • 1969: सुपरसॉनिक विमान कॉनकॉर्ड की पहली उड़ान सफल रही. ये विमान टॉलूज से उड़ा और सिर्फ 27 मिनट की उड़ान के बाद पायलट ने उसे उतारने का फैसला किया.
  • अफ्रीकी महाद्वीप का देश रोडेशिया अब जिम्बाब्बे 1970 में आज ही के दिन एक स्वतंत्र गणराज्य बना।
  • बिहार की राजधानी पटना में 1982 में महात्मा गांधी सेतु का उद्घाटन हुआ।
  • सोवियत संघ ने 1983 में भूमिगत परमाणु परीक्षण किया।
  • 1991: श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में एक हुए एक कार बम विस्फोट में देश के रक्षा उपमंत्री रंजन विजयरत्ने सहित 19 लोग मारे गए.
  • पेरू एवं इक्वाडोर के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के बीच में 1995 में समझौता।
  • 1997 – चीन द्वारा अपने रक्षा बजट में 12 प्रतिशत की वृद्धि।
  • 1999 – व्यापक परमाणु परीक्षण संधि (सी.टी.बी.टी.) पर हस्ताक्षर करने के लिए भारत के साथ किसी गुप्त समझौते के समाचार का सं.रा. अमेरिका द्वारा खंडन।
  • 2000 – चिली के पूर्व सैनिक तानाशाह जनरल आगस्टो पिनोशे ब्रिटेन द्वारा रिहा करने के बाद स्वदेश रवाना।
  • 2002 – कूलम (आस्ट्रेलिया) में राष्ट्रमंडल शिखर सम्मेलन शुरू, पाकिस्तान को पुन: शामिल करने से इन्कार, फ़िलिस्तीन ने इस्रायल से सभी सम्बन्ध तोड़े।
  • भारत ने 2006 में परमाणु शक्ति के सम्बन्ध में अमेरिका के साथ राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के दिल्ली आगमन पर समझौता किया।
  • 2008-
    • आइगेट कॉर्पोरेशन ने फनी मूर्ति को अपना मुख्य परिचालन अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया।
    • हमास के प्रमुख इस्माइल हानिया के दफ़्तर पर इस्रायली युद्धक विमानों ने हमला किया।
    • ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदी नेजाद अपनी ऐतिहासिक यात्रा पर इराक पहुँचे।
    • नेपाल सरकार ने पूर्वी पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक स्वायत्तता की मांग को लेकर संघर्षरत देसी जातीय समूहों के एक गठबंधन से समझौता किया।
    • 2008 : पाकिस्तान के डेरा आदमखेल में स्थानीय आतंकवादियों के खिलाफ बल के गठन पर विचार के लिए बुलाई गई कबीलों के बुजुर्गों की बैठक में बम फटने से 42 लोगों की मौत 58 घायल।
  • 2009- चुनाव आयोग ने 15वीं लोकसभा के चुनाव 16 अप्रैल से 13 मई के बीच 5 चरणों में सम्पन्न करने की घोषणा की।
  • रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसकी अनुषंगी रिलायंस पेट्रोलियम के निवेशकों के निदेशकों के बोर्ड ने दोनों कम्पनियों के विलय के प्रस्ताव को मंज़ू दी दी।
  • जर्मनी में 2012 में अदालत ने एप्पल और सैमसंग के बीच पेटेंट का मुकदमा खारिज किया।

2 मार्च को जन्मे व्यक्ति 

  • स्कौटलैंड के राबर्ट द्वितीय का 1316 में जन्म।
  • राजनीतिज्ञ बसंत सिंह खालसा का 1932 में जन्म।
  • 1931 : सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाच्योफ का जन्म, जिन्हें सुधारों की शुरूआत के लिए जाना जाता है, जिनसे शीत युद्ध के खात्मे का रास्ता बना।
  • अंग्रेज क्रिकेटर एंड्र्यू स्ट्रॉस का 1977 में जन्म।
  • अमरीकन अभिनेत्री जेसिका बील का 1982 में जन्म।
  • अमरीकन फुटबाल के खिलाड़ी रैजी बुश का 1985 में जन्म।
  • भारतीय तीरंदाज़ खिलाड़ी जयन्त तालुकदार का 1986 में जन्म।

2 मार्च को हुए निधन

  • छत्रपति शिवाजी महाराज के छोटे पुत्र राजाराम का सन 1700 में सिंहगढ़ में निधन।
  • उत्तर प्रदेश के प्रथम राज्यपाल हरकोर्ट बटलर का 1869 में निधन।
  • भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाली तथा ‘भारत कोकिला’ के नाम से मशहूर सरोजिनी नायडू Sarojini Naidu in Bombay 1946.jpgका 1949 में निधन।सरोजिनी नायडू (१३ फरवरी १८७९ – २ मार्च १९४९) का जन्म भारत के हैदराबाद नगर में हुआ था। इनके पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय एक नामी विद्वान तथा माँ कवयित्री थीं और बांग्ला में लिखती थीं। बचपन से ही कुशाग्र-बुद्धि होने के कारण उन्होंने १२ वर्ष की अल्पायु में ही १२हवीं की परीक्षा अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण की और १३ वर्ष की आयु में लेडी ऑफ दी लेक नामक कविता रची। सर्जरी में क्लोरोफॉर्म की प्रभावकारिता साबित करने के लिए हैदराबाद के निज़ाम द्वारा प्रदान किए गए दान से “सरोजिनी नायडू” को इंग्लैंड भेजा गया था सरोजिनी नायडू को पहले लंदन के किंग्स कॉलेज और बाद में कैम्ब्रिज के गिरटन कॉलेज में अध्ययन करने का मौका मिला।वे १८९५ में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैंड गईं और पढ़ाई के साथ-साथ कविताएँ भी लिखती रहीं। गोल्डन थ्रैशोल्ड उनका पहला कविता संग्रह था। उनके दूसरे तथा तीसरे कविता संग्रह बर्ड ऑफ टाइम तथा ब्रोकन विंग ने उन्हें एक सुप्रसिद्ध कवयित्री बना दिया।

    १८९८ में सरोजिनी नायडू, डॉ॰ गोविंदराजुलू नायडू की जीवन-संगिनी बनीं। १९१४ में इंग्लैंड में वे पहली बार गाँधीजी से मिलीं और उनके विचारों से प्रभावित होकर देश के लिए समर्पित हो गयीं। एक कुशल सेनापति की भाँति उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय हर क्षेत्र (सत्याग्रह हो या संगठन की बात) में दिया। उन्होंने अनेक राष्ट्रीय आंदोलनों का नेतृत्व किया और जेल भी गयीं। संकटों से न घबराते हुए वे एक धीर वीरांगना की भाँति गाँव-गाँव घूमकर ये देश-प्रेम का अलख जगाती रहीं और देशवासियों को उनके कर्तव्य की याद दिलाती रहीं। उनके वक्तव्य जनता के हृदय को झकझोर देते थे और देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए प्रेरित कर देते थे। वे बहुभाषाविद थी और क्षेत्रानुसार अपना भाषण अंग्रेजी, हिंदी, बंगला या गुजराती में देती थीं। लंदन की सभा में अंग्रेजी में बोलकर इन्होंने वहाँ उपस्थित सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया था।Image result for ‘भारत कोकिला’ के नाम से मशहूर सरोजिनी नायडू

    अपनी लोकप्रियता और प्रतिभा के कारण १९२५ में कानपुर में हुए कांग्रेस अधिवेशन की वे अध्यक्षा बनीं और १९३२ में भारत की प्रतिनिधि बनकर दक्षिण अफ्रीका भी गईं। भारत की स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद वे उत्तरप्रदेश की पहली राज्यपाल बनीं। श्रीमती एनी बेसेन्ट की प्रिय मित्र और गाँधीजी की इस प्रिय शिष्या ने अपना सारा जीवन देश के लिए अर्पण कर दिया। २ मार्च १९४९ को उनका देहांत हुआ। १३ फरवरी १९६४ को भारत सरकार ने उनकी जयंती के अवसर पर उनके सम्मान में १५ नए पैसे का एक डाक टिकट Image result for ‘भारत कोकिला’ के नाम से मशहूर सरोजिनी नायडूभी जारी किया।

    राज्यपाल

    स्वाधीनता की प्राप्ति के बाद, देश को उस लक्ष्य तक पहुँचाने वाले नेताओं के सामने अब दूसरा ही कार्य था। आज तक उन्होंने संघर्ष किया था। किन्तु अब राष्ट्र निर्माण का उत्तरदायित्व उनके कंधों पर आ गया। कुछ नेताओं को सरकारी तंत्र और प्रशासन में नौकरी दे दी गई थी। उनमें सरोजिनी नायडू भी एक थीं। उन्हें उत्तर प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया। वह विस्तार और जनसंख्या की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा प्रांत था। उस पद को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं अपने को ‘क़ैद कर दिये गये जंगल के पक्षी’ की तरह अनुभव कर रही हूँ।’ लेकिन वह प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की इच्छा को टाल न सकीं जिनके प्रति उनके मन में गहन प्रेम व स्नेह था। इसलिए वह लखनऊ में जाकर बस गईं और वहाँ सौजन्य और गौरवपूर्ण व्यवहार के द्वारा अपने राजनीतिक कर्तव्यों को निभाया।

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