भारत कोकिला सरोजिनी नायडू व भारतीय उपमहाद्वीप के विख्यात शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का जन्म हुआ था आज

13 फ़रवरी का इतिहास

दोस्तों आज जानते हैं 13 फ़रवरी का इतिहास के कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं के बारें मे, उन लोगों के जन्मदिन के बारे में जिन्होंने दुनिया में आकर बहुत बड़ा नाम किया साथ ही उन मशहूर लोगों के बारें मे जो इस दुनिया से चले गए।

13 February History

  • इंग्लैंड की रानी कैथरीन हवाई को 1542 में मौत के घाट उतार दिया गया।
  • फ्रांस के राजा हेनरी तृतीय का 1575 में रेम्स में राज्याभिषेक।
  • लंदन में 1601 में ईस्ट इंडिया कम्पनी की पहली यात्रा का नेतृत्व जान लैंकास्टर ने किया।
  • इटली के खगोलशास्त्री गैलीलियो को 1633 में रोम पहुँचने पर गिरफ़्तार कर लिया गया।
  • स्पेन ने पुर्तग़ाल को 1688 में एक अलग राष्ट्र स्वीकार किया।
  • विलियम और मैरी 1689 में इंग्लैंड के संयुक्त शासक घोषित हुए।
  • अमेरिका में 1795 में पहला स्टेट यूनिवर्सिटी उत्तरी कैरोलिना में खुला।
  • सन 1820 में फ़्रांसीसी तख्त के दावेदार डक की बेरी की हत्या कर दी गई।
  • नेपल्स के फ़्रांसीसी द्वितीय ने 1861 में ग्यूसेपी गैरिबाल्डी के आगे हथियार डाले।
  • अमेरिका में 1920 में बेसबॉल की नीग्रो नेशनल लीग स्थापित हुई।
  • सोवियत संघ ने 1945 में जर्मनी के साथ 49 दिन तक चले युद्ध के बाद हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पर कब्जा किया जिसमें एक लाख 59 हजार लोग मारे गये।
  • राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 1948 में आज ही के दिन आमरण अनशन शुरू किया।
  • सन 1959 में बच्चों की पसंदीदा बार्बी डॉल की बिक्री शुरू हुई।
  • सोवियत संघ ने 1966 में पूर्वी कजाखस्तान में परमाणु परीक्षण किया।
  • तुर्की ने 1975 में साइप्रस के उत्तरी भाग में अलग प्रशासन की स्थापना की।
  • पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1984 में नौसेना के लिए मुंबई स्थित मझगांव डॉक का शुभारंभ किया।
  • अमेरिका, ब्रिटेन तथा फ्रांस ने 1990 में जर्मनी को फिर से एकीकृत करने की सहमति दी।
  • अंतरिक्ष में क्षुद्रग्रह ‘इरोस’ पर 2001 में पहला मानव रहित यान उतरा।
  • सन 2003 में यश चोपड़ा को दादासाहब फालके पुरस्कार मिला।
  • भारतीय टीम ने 2004 में क्वालालम्पुर में दसवीं एशियाई निशानेबाजी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
  • इराक में 2005 में सद्दाम हुसैन के बाद हुए पहले चुनाव में शिया इस्लामिक मोर्चे की जीत।
  • उत्तर कोरिया 2007 में परमाणु कार्यक्रम बंद करने पर सहमत।

13 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति

  • 1995 में भारत के ऊँची कूद के खिलाड़ी वरुण भाटी का जन्म।
  • 1879 में भारत कोकिला कहे जाने वाली तथा स्वतंत्रता सेनानी सरोजिनी नायडू Sarojini Naidu in Bombay 1946.jpgका जन्म।सरोजिनी नायडू (१३ फरवरी १८७९ – २ मार्च १९४९) का जन्म भारत के हैदराबाद नगर में हुआ था। इनके पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय एक नामी विद्वान तथा माँ कवयित्री थीं और बांग्ला में लिखती थीं। बचपन से ही कुशाग्र-बुद्धि होने के कारण उन्होंने १२ वर्ष की अल्पायु में ही १२हवीं की परीक्षा अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण की और १३ वर्ष की आयु में लेडी ऑफ दी लेक नामक कविता रची। सर्जरी में क्लोरोफॉर्म की प्रभावकारिता साबित करने के लिए हैदराबाद के निज़ाम द्वारा प्रदान किए गए दान से “सरोजिनी नायडू” को इंग्लैंड भेजा गया था सरोजिनी नायडू को पहले लंदन के किंग्स कॉलेज और बाद में कैम्ब्रिज के गिरटन कॉलेज में अध्ययन करने का मौका मिला।वे १८९५ में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैंड गईं और पढ़ाई के साथ-साथ कविताएँ भी लिखती रहीं। गोल्डन थ्रैशोल्ड उनका पहला कविता संग्रह था। उनके दूसरे तथा तीसरे कविता संग्रह बर्ड ऑफ टाइम तथा ब्रोकन विंग ने उन्हें एक सुप्रसिद्ध कवयित्री बना दिया।Image result for सरोजिनी नायडू१८९८ में सरोजिनी नायडू, डॉ॰ गोविंदराजुलू नायडू की जीवन-संगिनी बनीं। १९१४ में इंग्लैंड में वे पहली बार गाँधीजी से मिलीं और उनके विचारों से प्रभावित होकर देश के लिए समर्पित हो गयीं। एक कुशल सेनापति की भाँति उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय हर क्षेत्र (सत्याग्रह हो या संगठन की बात) में दिया। उन्होंने अनेक राष्ट्रीय आंदोलनों का नेतृत्व किया और जेल भी गयीं। संकटों से न घबराते हुए वे एक धीर वीरांगना की भाँति गाँव-गाँव घूमकर ये देश-प्रेम का अलख जगाती रहीं और देशवासियों को उनके कर्तव्य की याद दिलाती रहीं। उनके वक्तव्य जनता के हृदय को झकझोर देते थे और देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए प्रेरित कर देते थे। वे बहुभाषाविद थी और क्षेत्रानुसार अपना भाषण अंग्रेजी, हिंदी, बंगला या गुजराती में देती थीं। लंदन की सभा में अंग्रेजी में बोलकर इन्होंने वहाँ उपस्थित सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया था।

    अपनी लोकप्रियता और प्रतिभा के कारण १९२५ में कानपुर में हुए कांग्रेस अधिवेशन की वे अध्यक्षा बनीं और १९३२ में भारत की प्रतिनिधि बनकर दक्षिण अफ्रीका भी गईं। भारत की स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद वे उत्तर प्रदेश की पहली राज्यपाल बनीं। श्रीमती एनी बेसेन्ट की प्रिय मित्र और गाँधीजी की इस प्रिय शिष्या ने अपना सारा जीवन देश के लिए अर्पण कर दिया। २ मार्च १९४९ को उनका देहांत हुआ। १३ फरवरी १९६४ को भारत सरकार ने उनकी जयंती के अवसर पर उनके सम्मान में १५ नए पैसे का एक डाक टिकट भी जारी किया।

    राज्यपालImage result for सरोजिनी नायडू

    स्वाधीनता की प्राप्ति के बाद, देश को उस लक्ष्य तक पहुँचाने वाले नेताओं के सामने अब दूसरा ही कार्य था। आज तक उन्होंने संघर्ष किया था। किन्तु अब राष्ट्र निर्माण का उत्तरदायित्व उनके कंधों पर आ गया। कुछ नेताओं को सरकारी तंत्र और प्रशासन में नौकरी दे दी गई थी। उनमें सरोजिनी नायडू भी एक थीं। उन्हें उत्तर प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया। वह विस्तार और जनसंख्या की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा प्रांत था। उस पद को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं अपने को ‘क़ैद कर दिये गये जंगल के पक्षी’ की तरह अनुभव कर रही हूँ।’ लेकिन वह प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की इच्छा को टाल न सकीं जिनके प्रति उनके मन में गहन प्रेम व स्नेह था। इसलिए वह लखनऊ में जाकर बस गईं और वहाँ सौजन्य और गौरवपूर्ण व्यवहार के द्वारा अपने राजनीतिक कर्तव्यों को निभाया।

  • 1915 में भारत के प्रसिद्ध कवियों, लेखकों और साहित्यकारों में से एक गोपाल प्रसाद व्यास का जन्म।
  • 1911 में प्रसिद्ध शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ Image result for फ़ैज़ अहमद फ़ैज़का जन्म।फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (فیض احمد فیض‎), (१९११ – १९८४) भारतीय उपमहाद्वीप के एक विख्यात पंजाबी शायर थे जिनको अपनी क्रांतिकारी रचनाओं में रसिक भाव (इंक़लाबी और रूमानी) के मेल की वजह से जाना जाता है। सेना, जेल तथा निर्वासन में जीवन व्यतीत करने वाले फ़ैज़ ने कई नज़्म, ग़ज़ल लिखी तथा उर्दू शायरी में  आधुनिक प्रगतिवादी (तरक्कीपसंद) दौर की रचनाओं को सबल किया। उन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए भी मनोनीत किया गया था। फ़ैज़ पर कई बार कम्यूनिस्ट (साम्यवादी) होने और इस्लाम से इतर रहने के आरोप लगे थे पर उनकी रचनाओं में ग़ैर-इस्लामी रंग नहीं मिलते। जेल के दौरान लिखी गई उनकी कविता ‘ज़िन्दान-नामा’ को बहुत पसंद किया गया था। उनके द्वारा लिखी गई कुछ पंक्तियाँ अब भारत-पाकिस्तान की आम-भाषा का हिस्सा बन चुकी हैं, जैसे कि ‘और भी ग़म हैं ज़माने में मुहब्बत के सिवा’।

    जीवन-वृत्त

    उनका जन्म १३ फ़रवरी १९११ को लाहौर के पास सियालकोट शहर, पाकिस्तान (तत्कालीन भारत) में हुआ था। उनके पिता एक बैरिस्टर थे और उनका परिवार एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार था। उनकी आरंभिक शिक्षा उर्दू, अरबी तथा फ़ारसी में हुई जिसमें क़ुरआन को कंठस्थ करना भी शामिल था। उसके बाद उन्होंने स्कॉटिश मिशन स्कूल तथा लाहौर विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। उन्होंने अंग्रेजी (१९३३) तथा अरबी (१९३४) में ऍम॰ए॰ किया। अपने कामकाजी जीवन की शुरुआत में वो एमएओ कालेज, अमृतसर में लेक्चरर बने। उसके बाद मार्क्सवादी विचारधाराओं से बहुत प्रभावित हुए। “प्रगतिवादी लेखक संघ” से १९३६ में जुड़े और उसके पंजाब शाखा की स्थापना सज्जाद ज़हीर के साथ मिलकर की जो उस समय के मार्क्सवादी नेता थे। १९३८ से १९४६ तक उर्दू साहित्यिक मासिक अदब-ए-लतीफ़ का संपादन किया।

    सन् १९४१ में उन्होंने अपने छंदो का पहला संकलन नक़्श-ए-फ़रियादी नाम से प्रकाशित किया। एक अंग्रेज़ समाजवादी महिला एलिस जॉर्ज से शादी की और दिल्ली में आ बसे। ब्रिटिश भारतीय सेना में भर्ती हुए और कर्नल के पद तक पहुँचे। विभाजन के वक़्त पद से इस्तीफ़ा देकर लाहौर वापिस गए। वहाँ जाकर इमरोज़ और पाकिस्तान टाइम्स  का संपादन किया। १९४२ से लेकर १९४७ तक वे सेना में थे। लियाकत अली ख़ाँ की सरकार के तख़्तापलट की साजिश रचने के जुर्म में वे १९५१‍ – १९५५ तक कैद में रहे। इसके बाद १९६२ तक वे लाहोर में पाकिस्तानी कला परिषद् में रहे। १९६३ में उन्होंने योरोप, अल्जीरिया तथा मध्यपूर्व का भ्रमण किया और तत्पश्चात १९६४ में पकिस्तान वापस लौटे। वो १९५८ में स्थापित एशिया-अफ़्रीका लेखक संघ के स्थापक सदस्यों में से एक थे। भारत के साथ १९६५ के पाकिस्तान से युद्ध के समय वे वहाँ के सूचना मंत्रालय में कार्यरत थे।

    १९७८ में एशियाई-अफ़्रीकी लेखक संघ के प्रकाशन अध्यक्ष बने और १९८२ तक बेरुत (लेबनॉन) में कार्यरत रहे। १९८२ में वापस लाहौर लौटे और १९८४ में उनका देहांत हुआ। उनका आखिरी संग्रह “ग़ुबार-ए-अय्याम” (दिनों की गर्द) मरणोपरांत प्रकाशित हुई।

    चुनी रचनाएँ

    फ़ैज़ ने आधुनिक उर्दू शायरी को एक नई ऊँचाई दी। साहिर, क़ैफ़ी, फ़िराक़ आदि उनके समकालीन शायर थे। १९५१‍ – १९५५ की क़ैद के दौरान लिखी गई उनकी कविताएँ बाद में बहुत लोकप्रिय हुईं और उन्हें “दस्त-ए-सबा (हवा का हाथ)” तथा “ज़िन्दान नामा (कारावास का ब्यौरा)” नाम से प्रकाशित किया गया। इनमें उस वक़्त के शासक के ख़िलाफ़ साहसिक लेकिन प्रेम रस में लिखी गई शायरी को आज भी याद की जाती है –

    बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे
    बोल, ज़बाँ अब तक तेरी है
    तेरा सुतवाँ जिस्म है तेरा
    बोल कि जाँ अब तक तेरी है
    आईए हाथ उठाएँ हम भी
    हम जिन्हें रस्म-ए-दुआ याद नहीं
    हम जिन्हें सोज़-ए-मुहब्बत के सिवा
    कोई बुत कोई ख़ुदा याद नहीं
    लाओ, सुलगाओ कोई जोश-ए-ग़ज़ब का अंगार
    तैश की आतिश-ए-ज़र्रार कहाँ है लाओ
    वो दहकता हुआ गुलज़ार कहाँ है लाओ
    जिस में गर्मी भी है, हरकत भी, तवानाई भी
    हो न हो अपने क़बीले का भी कोई लश्कर
    मुन्तज़िर होगा अंधेरों के फ़ासिलों के उधर
    उनको शोलों के रजाज़ अपना पता तो देंगे
    ख़ैर हम तक वो न पहुंचे भी सदा तो देंगे
    दूर कितनी है अभी सुबह बता तो देंगे
    (क़ैद में अकेलेपन में लिखी हुई)
    निसार मैं तेरी गलियों के ऐ वतन
    के जहाँ चली है रस्म के कोई न सर उठा के चले
    गर कोई चाहने वाला तवाफ़ को निकले
    नज़र चुरा के चले, जिस्म-ओ-जाँ बचा के चले
    चंद रोज़ और मेरी जाँ, फ़क़त चंद ही रोज़
    ज़ुल्म की छाँव में दम लेने पर मजबूर है हम
    और कुछ देर सितम सह लें, तड़प लें, रो लें
    अपने अजदाद की मीरास हैं, माज़ूर हैं हम
    आज बाज़ार में पा-बेजौला चलो
    दस्त अफशां चलों, मस्त-ओ-रक़सां चलो
    ख़ाक़-बर-सर चलो, खूँ ब दामां चलो
    राह तकता है सब, शहर ए जानां चलो
    बोल कि होठ स्वतंत्र हैं तेरे
    बोल, जीभ अब तक तेरी है
    तेरा कसा हुआ शरीर है तेरा
    बोल कि प्राण अब तक तेरे है
    आईए हाथ उठाएँ हम भी
    हम जिन्हें पूजा करने का तरीक़ा याद नहीं
    हम जिन्हें प्रेम की भावनाओं (जज़बात) के सिवा
    कोई बुत कोई भगवान याद नहीं
    लाओ, सुलगाओ कोई ग़ज़ब के उत्साह की ज्वाला
    दीवानेपन की आग लाओ
    दहकता हुआ गुलज़ार (फूलों से भरपूर) लाओ
    जिस में गर्मी भी है, चलन भी, ऊर्जा भी
    अवश्य अपने जैसे लोगों का कोई गुट
    इस अन्धकार में दूरी पर मेरी प्रतीक्षा कर रहा होगा
    मेरी जलाई ज्वाला के शोले बेकार नहीं – वे उन्हें मेरी मौजूदगी के बारे में बताएँगे
    वो मुझे बचाने मुझ तक न भी पहुँच पाए, तो मुझे पुकारेंगे ज़रूर
    इस रात की प्रभात कितनी देर में होनी है, मुझे ख़बर दे देंगे
    (क़ैद में अकेलेपन में लिखी हुई)
    न्यौछावर हूँ मैं तेरी गलियों पर ऐ राष्ट्र
    कि जहाँ चली है प्रथा के कोई न सिर उठा के चले
    अगर कोई चाहने वाला सैर को निकले
    नज़र चुरा के चले, तन और प्राण बचा के चले
    कुछ दिन और मेरी प्रिय, केवल कुछ ही दिवस
    ज़ुल्म की छाँव में दम लेने पर मजबूर है हम
    और कुछ देर अत्याचार सह लें, तड़प लें, रो लें
    अपने पूर्वजों की देन (करनी का नतीजा) हैं, हम निर्दोष हैं
    आज बाज़ार में ज़ंजीरों में जकड़े पाँव के साथ चलो
    हाथ हिलाते हुए चलो, मस्त हुए नाचते हुए चलो
    धूल से भरा हुआ सिर लेकर चलो, ख़ून से लथपथ दामन लेकर चलो
    रास्ता देख रहा है वो, प्रियतमा के शहर चलो

    कविताएँ की सूची

    • मुझ से पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न माँग
    • रंग है दिल का मेरे
    • अब कहाँ रस्म घर लुटाने की
    • अब वही हर्फ़-ए-जुनूँ सबकी ज़ुबाँ ठहरी है
    • तेरी सूरत जो दिलनशीं की है
    • खुर्शीदे-महशर की लौ
    • ढाका से वापसी पर
    • तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
    • निसार मैं तेरी गलियों के अए वतन, कि जहाँ
    • आज बाज़ार में पा-ब-जौलाँ चलो
    • रक़ीब से
    • तेरे ग़म को जाँ की तलाश थी तेरे जाँ-निसार चले गये
    • बहार आई
    • नौहा
    • तेरी उम्मीद तेरा इंतज़ार जब से है
    • बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे
    • जब तेरी समन्दर आँखों में
    • आप की याद आती रही रात भर (मख़दूम* की याद में)
    • चश्मे-मयगूँ ज़रा इधर कर दे
    • चलो फिर से मुस्कुराएं (गीत)
    • चंद रोज़ और मेरी जान फ़क़त चंद ही रोज़
    • ये शहर उदास इतना ज़ियादा तो नहीं था
    • गुलों में रंग भरे, बादे-नौबहार चले
    • गर्मी-ए-शौक़-ए-नज़्ज़ारा का असर तो देखो
    • गरानी-ए-शबे-हिज़्रां दुचंद क्या करते
    • मेरे दिल ये तो फ़क़त एक घड़ी है
    • ख़ुदा वो वक़्त न लाये कि सोगवार हो तू
    • मेरी तेरी निगाह में जो लाख इंतज़ार हैं
    • कोई आशिक़ किसी महबूब से
    • तुम आये हो न शबे-इन्तज़ार गुज़री है
    • तुम जो पल को ठहर जाओ तो ये लम्हें भी
    • तुम मेरे पास रहो
    • चाँद निकले किसी जानिब तेरी ज़ेबाई का
    • दश्ते-तन्हाई में ऐ जाने-जहाँ लरज़ा हैं
    • दिल में अब यूँ तेरे भूले हुए ग़म आते हैं
    • मेरे दिल मेरे मुसाफ़िर
    • आइये हाथ उठायें हम भी
    • दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
    • नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तजू ही सही
    • न गँवाओ नावके-नीमकश, दिले-रेज़ा रेज़ा गँवा दिया
    • फ़िक्रे-दिलदारी-ए-गुलज़ार करूं या न करूं
    • नज़्रे ग़ालिब
    • नसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं
    • तनहाई
    • फिर लौटा है ख़ुरशीदे-जहांताब सफ़र से
    • फिर हरीफ़े-बहार हो बैठे
    • बहुत मिला न मिला ज़िन्दगी से ग़म क्या है
    • बात बस से निकल चली है
    • बेदम हुए बीमार दवा क्यों नहीं देते
    • इन्तिसाब
    • सोचने दो
    • मुलाक़ात
    • पास रहो
    • मौज़ू-ए-सुख़न*
    • बोल**
    • हम लोग
    • क्या करें
    • यह फ़स्ल उमीदों की हमदम*
    • शीशों का मसीहा* कोई नहीं
    • सुबहे आज़ादी
    • ईरानी तुलबा के नाम
    • सरे वादिये सीना
    • फ़िलिस्तीनी बच्चे के लिए लोरी
    • हम जो तारीक राहों में मारे गए
    • एक मन्जर
    • ज़िन्दां की एक शाम
    • ऐ रोशनियों के शहर
    • यहाँ से शहर को देखो * मन्ज़र
    • एक शहरे-आशोब* का आग़ाज़*
    • बेज़ार फ़ज़ा दरपये आज़ार सबा है
    • सरोद
    • वासोख़्त*
    • शहर में चाके गिरेबाँ हुए नापैद अबके
    • हर सम्त परीशाँ तेरी आमद के क़रीने
    • रंग पैराहन का, ख़ुश्बू जुल्फ़ लहराने का नाम
    • यह मौसमे गुल गर चे तरबख़ेज़ बहुत है
    • क़र्ज़े-निगाहे-यार अदा कर चुके हैं हम
    • वफ़ाये वादा नहीं, वादये दिगर भी नहीं
    • शफ़क़ की राख में जल बुझ गया सितारये शाम
    • कब याद में तेरा साथ नहीं, कब हाथ में तेरा हाथ नहीं
    • जमेगी कैसे बिसाते याराँ कि शीश-ओ-जाम बुझ गये हैं
    • हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है
    • जैसे हम-बज़्म हैं फिर यारे-तरहदार से हम
    • हम मुसाफ़िर युँही मस्रूफ़े सफ़र जाएँगे
    • मेरे दर्द को जो ज़बाँ मिले
    • हज़र करो मेरे तन से
    • दिले मन मुसाफ़िरे मन
    • जिस रोज़ क़ज़ा आएगी
    • ख़्वाब बसेरा
    • ख़त्म हुई बारिशे संग

    पुरस्कार/सम्मान

    • 1963 में उन्हें सोवियत रशिया से लेनिन शांति पुरस्कार प्रदान किया गया।
    • 1984 में नोबेल पुरस्कार के लिये भी उनका नामांकन किया गया था।
  • 1916 में भारतीय सेना के कमांडर जगजीत सिंह अरोड़ा का जन्म।
  • 1944 में भारतीय अभिनेता ओडूविल उन्नीकृष्णनन का जन्म।
  • 1949 में पहले भारतीय और 138 अंतरिक्ष यात्रियों में से एक राकेश शर्मा का जन्म।
  • 1978 में भारतीय अभिनेता अश्मित पटेल का जन्म।
  • 1958 में समकालीन कवयित्री रश्मि प्रभा का जन्म।
  • 1959 में समकालीन कवि कमलेश भट्ट कमल का जन्म।
  • 1945 में भारतीय सिनेमा के अभिनेता विनोद मेहरा का जन्म।

13 फ़रवरी को हुए निधन 

  • 1832 में प्रसिद्ध क्रांतिकारी बुधु भगत का निधन।
  • 1974 में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध गायक उस्ताद अमीर ख़ाँ का निधन।
  • 1976 में भारत के प्रसिद्ध तबला वादक अहमद जान थिरकवा का निधन।
  • 1988 में चीन के राष्ट्रपति चिंग चियांग कुमो की मृत्यु।
  • 2000 में बहुचर्चित पीनट्स कॉमिक पट्टी के सर्जक चार्ल्स शुल्ज का निधन।
  • 2008 में हिंदी सिनेमा के हास्य कलाकार राजेंद्र नाथ का निधन।
  • 2015 में दलित लेखन में अपना एक अलग स्थान रखने वाले साहित्यकार डॉ. तुलसीराम का निधन।

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