भारत के स्वतंत्रता आंदोलन चौरीचौरा काण्ड हुआ था आज

4 फ़रवरी का इतिहास

4 फरवरी का दिन देश-दुनिया के इतिहास में काफी महत्वपूर्ण रहा। 4 फरवरी की तारीख इतिहास की कई महत्वपूर्ण घटनाओं की गवाह बनीं। इसी दिन साल 1924 को महात्मा गांधी को उनका स्वास्थ्य खराब होने के चलते उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया ! यही नहीं, इसी दिन साल 2004 में बेहद लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक लॉन्च किया गया। इसके अलावा इस दिन भारतीय नृत्य कथक शैली के आचार्य बिरजू महाराज समेत तमाम ऐसी शख्सियत ने जन्म लिया, जिन्होंने समाज में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं इसी दिन कई जानी-मानी शख्सियत यह दुनिया छोड़कर भी चले गए। आइए जानते हैं 4 फरवरी  की घटनाओं के बारे में –

4 February History

  • बांका महार भागवतभक्त ने 1318 में आज के दिन समाधि ली थी।
  • हंगरी के प्रिंस बेथलेन और रोम के सम्राट फर्डीनेंड द्धितीय के बीच 4 फरवरी साल 1620 को शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
  • शाहजहां को आगरा का सम्राट 1628 में घोषित किया गया था।
  • इटली के कैलब्रिया में 4 फरवरी 1783 को इतना विनाशकारी भूकंप आया, जिसमें करीब 50 हजार लोगों की जान चली गई।
  • सन 1789 में जॉर्ज वॉशिंगटन को अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में चुना गया।
  • इक्वाडोर की राजधानी क्वीटो में 4 फरवरी, 1797 को भीषण भूकंप आया, जिसमें करीब 41 हजार लोगों की मौत हो गई।
  • अमेरिका की पहली टेलीग्राफ कंपनी की स्थापना 4 फरवरी, 1847 में मैरीलैंड में की गई।
  • लोकमान्‍य तिलक के संपादन में दैनिक समाचार पत्र ‘केसरी’ का पहला अंक 1881 में आया था।
  • अमेरिका के शिकागों में 4 फरवरी, 1895 को पहले रोलिंग लिफ्ट पुल का उद्घाटन किया गया।
  • 4 फरवरी 1920 को लंदन और दक्षिण अफ्रीका के बीच पहली विमान सेवा की शुरुआत हुई।
  • भारत के स्वतंत्रता आंदोलन समय हुआ चौरीचौरा काण्ड 1922 को हुआ।                               चौरी-चौरा का शहीद स्मारक

    चौरी चौरा, उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के पास का एक कस्बा है जहाँ 5 फ़रवरी 1922 को भारतीयों ने ब्रिटिश सरकार की एक पुलिस चौकी को आग लगा दी थी जिससे उसमें छुपे हुए 22 पुलिस कर्मचारी जिन्दा जल के मर गए थे। इस घटना को चौरीचौरा काण्ड के नाम से जाना जाता है। इसके परिणामस्वरूप गांधीजी ने कहा था कि हिंसा होने के कारण असहयोग आन्दोलन उपयुक्त नहीं रह गया है और उसे वापस ले लिया था। चौरी-चौरा कांड के अभियुक्तों का मुक़दमा पंडित मदन मोहन मालवीय ने लड़ा और उन्हें बचा ले जाना उनकी एक बड़ी सफलता थी।

    क्या है चौरी-चौरा कांड

    चौरी-चौरा उत्तरप्रदेश के गोरखपुर जिले में एक गांव हैं. जो ब्रिटिश शासन काल में कपड़ों और अन्य वस्तुओं की बड़ी मंडी हुआ करता था. अंग्रेजी शासन के समय गांधीजी ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की थी. जिसका उद्देश्य अंग्रेजी शासन का विरोध करना था. इस आन्दोलन के दौरान देशवासी ब्रिटिश उपाधियों, सरकारी स्कूलों और अन्य वस्तुओं का त्याग कर रहे थे और वहाँ के स्थानीय बाजार में भी भयंकर विरोध हो रहा था. इस विरोध प्रदर्शन के चलते 2 फरवरी 1922 को पुलिस ने दो क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर लिया था. गिरफ़्तारी का विरोध करने के लिए करीब 4 हजार आन्दोलनकरियों ने थाने के सामने ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी की. इस प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की और जब प्रदर्शनकारी नहीं माने तो उन लोगों पर ओपन फायर किया गया. जिसके कारण तीन प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए. इसी दौरान पुलिसकर्मियों की गोलिया खत्म हो गई और प्रदर्शनकारियों को उग्र होता देख वह थाने में ही छिप गए.अपने साथी क्रांतिकारियों की मौत से आक्रोशित क्रांतिकारियों ने थाना घेरकर उसमे आग लगा दी. इस घटना में कुल 23 पुलिसकर्मियों की जलकर मौत हो गई थी. जिसमे तत्कालीन दरोगा “गुप्तेश्वर सिंह” भी शामिल थे. यह घटना जब गांधीजी को पता चली तो उन्होंने अपना असहयोग आंदोलन वापस ले लिया.

    चौरी-चौरा कांड मुकदमा और सजा

    9 जनवरी 1923 के दिन चौरी-चौरी कांड के लिए 172 लोगों को आरोपी बनाया गया था और फांसी की सजा दे दी गई थी. इलाहाबाद हाई कोर्ट में पी.आई.एल दायर की गई थी. इस कांड में क्रांतिकारियों की ओर से मुकदमा पंडित मदन मोहन मालवीय ने लड़ा था. जिसके बाद 19 मुख्य आरोपी अब्दुल्ला, भगवान, विक्रम, दुदही, काली चरण, लाल मुहम्मद, लौटी, मादेव, मेघू अली, नजर अली, रघुवीर, रामलगन, रामरूप, रूदाली, सहदेव, सम्पत पुत्र मोहन, संपत, श्याम सुंदर व सीताराम को इस घटना के लिए फांसी दी गई थी और बाकी लोगों को सबूतों के अभाव के चलते छोड़ दिया गया या फिर यह कहे की मदन मोहन मालवीय के द्वारा सुनवाई के दौरान दिए तथ्यों से कोर्ट को उन्हें छोड़ना पड़ा.

    इतिहासकार मानते हैं कि गुप्तेश्वर सिंह ने एक फरवरी को भगवान अहीर को लाठियों से पीटा न होता तो शायद 4 फरवरी की भयावह आग लगती ही नहीं और न ही गुप्तेश्वर सिंह अपने 23 सहयोगियों के साथ मरते न भगवान अहीर समेत 19 लोग फांसी पर चढ़ते.

    चौरी-चौरा कांड का प्रभाव

    गांधीजी चौरी-चौरा कांड से बहुत नाराज थे. जिसके कारण उन्होंने असहयोग आन्दोलन वापस ले लिया था. गाँधीजी इस निर्णय से रामप्रसाद बिस्मिल और उनके नौजवान साथियों से नाराज थे. जिसके कारण कांग्रेस दो विचारधाराओ में विभाजित हो गई. एक था नरम दल और दूसरा गरम दल. शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, राम प्रसाद बिस्मिल और चंद्रशेखर आजाद जैसे कई क्रांतिकारी गरम दल के नायक बने.

    Chauri Chaura kand in hindi

    लेकिन ये हमारे लिए दुर्भाग्य का विषय था कि चौरी-चौरा थाने में 23 पुलिसवालों की स्मृति में तो पार्क बनाया गया मगर इन शहीदों की याद में लंबे समय तक कोई स्मारक नहीं था. पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने चौरी-चौरा की घटना के 60 साल बाद शहीद स्मारक भवन का 6 फरवरी, 1982 को शिलान्यास किया था. जबकि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. नरसिम्हा राव ने 19 जुलाई, 1993 को इसका लोकार्पण किया. चौरी-चौरा के आंदोलनकारियों की याद में बना यह स्मारक आज रख-रखाव के अभाव में बदहाल हो चुका है.

    परिणाम

    इस घटना के तुरन्त बाद गांधीजी ने असहयोग आन्दोलन को समाप्त करने की घोषणा कर दी। बहुत से लोगों को गांधीजी का यह निर्णय उचित नहीं लगा।विशेषकर क्रांतिकारियों ने इसका प्रत्यक्ष या परोक्ष विरोध किया। गया कांग्रेस में रामप्रसाद बिस्मिल और उनके नौजवान सहयोगियों ने गांधीजी का विरोध किया। १९२२ की गया कांग्रेस में खन्नाजी ने व उनके साथियों ने बिस्मिल के साथ कन्धे से कन्धा भिड़ाकर गांधीजी का ऐसा विरोध किया कि कांग्रेस में फिर दो विचारधारायें बन गयीं – एक उदारवादी या लिबरल और दूसरी विद्रोही या रिबेलियन। गांधीजीजी विद्रोही विचारधारा के नवयुवकों को कांग्रेस की आम सभाओं में विरोध करने के कारण हमेशा हुल्लड़बाज कहा करते थे।

  • महात्मा गांधी को ख़राब स्वास्थ्य के कारण 1924 में बिना किसी शर्त के मुंबई जेल से छोड़ दिया गया।
  • न्यूयॉर्क के लेक प्लेसिड में 4 फरवरी, 1932 को तीसरे शीतकालीन ओलंपिक का शुभारंभ हुआ।
  • भारत की सातवीं आर्मी बर्मा पर 1944 में जापान ने हमला किया था।
  • श्रीलंका 1948 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ।
  • भारत -पाकितान के बीच 1953 में कश्मीर के मुद्दे पर पहली बार बात हुई थी।
  • अमेरिका ने 4 फरवरी, 1965 को नेवादा में परमाणु परीक्षण किया था।
  • सन 1976 में लोक सभा को एक साल के लिये बढ़ा दिया गया था।
  • श्रीलंका के पहले राष्ट्रपित जूलियस जयवर्धन ने 4 फरवरी, 1978 को राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण की थी।
  • एर्नाकुलम को 1990 में भारत का सबसे पहला शिक्षित राज्य घोषित किया था।
  • अफगानिस्तान में 4 फरवरी, 1998 को भीषण भूकंप आया जिसमें करीब 4 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई।
  • दुनिया को बदलने वाली सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक को मार्क ज़ुकेरबर्ग ने 2004 में लांच किया था।
  • अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी  ने 4 फरवरी, 2006 को ईरान के एटमी हथियार बनाए जाने के मामले को सुरक्षा परिषद में भेजा।
  • अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति अलगोर को 4 फरवरी, 2007 को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण पुरस्कार मिला।
  • पाकिस्तान में आतंकवादियों ने सुरक्षा बलो पर 4 फरवरी, 2008 को फिदायन हमला किया।
  • 4 फरवरी 2009 को ही बाबा रामदेव को उनकी सेवाओं के लिए इंडियन अकादमी ऑफ एक्यूप्रेशर विज्ञान के द्धारा लाइव टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्ममानित किया गया।
  • 4 फरवरी, साल 2014 को सत्या नडेला को दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के नए सीईओ नियुक्त किया गया।

4 फरवरी को जन्मे व्यक्ति

भीमसेन जोशी और बिरजू महाराज समेत 4 फरवरी के दिन कई ऐसी शख्सियत ने भी जन्म लिया, जिन्होंने दुनिया में आकर अपना बड़ा नाम किया है। उनके बारे में हमने आपको नीचे बताया है –

  • सोवियत संघ के राष्ट्रपति क्लिमेंट बोरोशिलोव का 4 फरवरी, 1881 को जन्म हुआ था।
  • मशहूर स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष एम.ए.अय्यंगार का 4 फरवरी 1891 को जन्म हुआ था।
  • 1909 में बल्लेबाज़ और भारतीय अंपायर का विदर्भा में जन्म हुआ था।
  • 1922 में मशहूर शास्त्रीय गायक पंडित भीमसेन जोशी Image result for पंडित भीमसेन जोशीका जन्म हुआ था।
  • 1924 में भारत के नवें उपराष्ट्रपति कोचेरिल रमन नारायण का जन्म हुआ था।
  • 1938 में देश के मशहूर कथक कलाकार बिरजू महाराजImage result for बिरजू महाराज का जन्‍म हुआ था।
  • 1974 में भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर का जन्‍म हुआ था।
  • भारत के प्रसिद्द गायक संदीप आचार्य का 4 फरवरी, 1984 को जन्म हुआ था।
4 फरवरी को हुए निधन 

4 फरवरी के दिन कई दिग्गज व्यक्ति यह दुनिया छोड़कर चले गए, जिनके बारे में हमने नीचे लिखा है –

  • 1934 में भारत के देशभक्त मधुसूदन दास का निधन हुआ था।
  • भोपाल रियासत के आखिरी नवाब हमीदुल्लाह खान का भी 4 फरवरी, 2002 को निधन हो गया।
  • 1974 में प्रसिद्ध गणितज्ञ सत्येन्द्र नाथ बोसImage result for गणितज्ञ सत्येन्द्र नाथ बोस का निधन हुआ था।
  • 2001 में क्रिकेटर पंकज रॉय का निधन हुआ था।
  • 2002 में प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता भगवान दादा का निधन हुआ था।
  • महिला लेखक बानो कुदसिया ने 4 फरवरी , 2017 को अपनी अंतिम सांस ली।

4 फरवरी के महत्वपूर्ण दिवस

4 फरवरी को महत्वपूर्ण उत्सव के रुप में माना गया है, विश्व कैंसर दिवस के रूप में भी मनाया जाता है जिनके बारे में नीचे लिखा गया है –

  • विश्‍व कैंसर दिवस
  • वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह)
  • चौरी-चौरा दिवस

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