भारतीय नौसेना दिवस है आज

4 दिसंबर का इतिहास

4 November History

  • फ्रांस के रसायन शास्त्री बर्टले का 1748 में जन्म हुआ।
  • 1796 – बाजीराव द्वितीयमराठा साम्राज्य के पेशवा बने।
  • वायसराय लॉर्ड विलियम बैन्टिक ने 1829 में सती प्रथा समाप्त की।
  • गोवा के मारगाव के अगस्टिनो लॉरेंसो ने 1860 में पेरिस विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि ली। वह विदेशी विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि लेने वाले पहले भारतीय बने।
  • इंग्लैंड में स्मॉग की 1952 में घनी परत के छा जाने के कारण हजारों लोगों की जान चली गई थी।
  • दक्षिणी अमरीका में ऐटलांटिक महासागर में स्थित बरमूदा द्वीप के बारे में 1952 में अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस की तीन पक्षीय कॉन्फ़ेन्स आरंभ हुई।
  • भारत और नेपाल के बीच 1959 में गंडक सिंचाई एवं विद्युत परियोजना पर हस्ताक्षर।
  • देश के पहले रॉकेट ‘रोहिणी आरएच 75’ का 1967 में थुम्बा से प्रक्षेपण हुआ।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच खराब होते हालात के मद्देनजर आपात सत्र बुलाया।
  • भारतीय नौसेना ने 1971 में पाकिस्तान नौसेना और कराची पर हमला किया।
  • मिस्र के विरुद्ध 1977 में अरब मोर्चा गठित।
  • हिजबुल्ला आतंकवादियों ने 1984 में कुवैत एयरलाइन के विमान का अपहरण कर चार यात्रियों की हत्या की।
  • सं.रा. अमेरिका डेविस कप 1995 में चैंपियन बना।
  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 1996 में मंगल ग्रह के लिए एक और अंतरिक्ष यान ‘मार्स पाथफ़ाउंडर’ प्रक्षेपित किया।
  • अशोक गहलोत 2003 में विधानसभा क्षेत्र से 12वीं राजस्थान विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए।
  • पेरू की मारिया जूलिया मांतिला गार्शिया को मिस वर्ल्ड 2004 चुना गया।
  • फिलीपींस के एक गाँव में 2006 में आये तूफ़ान के बाद ज़मीन धंसने से लगभग एक हज़ार लोगों की मौत।
  • प्रसिद्ध इतिहासकार रोमिला थापर को 2008 में क्लूज सम्मान के लिये चुना गया।
  • सीरिया में 2012 में हुए मोर्टार हमले में 29 लोगों की मौत।

4 दिसंबर को जन्मे व्यक्ति

  • इतिहासकार रमेश चंद्र मजूमदार का जन्म 1888 में हुआ।
  • प्रसिद्ध साहित्यकारों में से एक विद्याभूषण विभु का जन्म 1892 में हुआ।
  • प्रसिद्ध भारतीय भौतिक वैज्ञानिक श्रीनिवास कृष्णन का जन्म 1898 में हुआ।
  • भारत के आठवें राष्ट्रपति रामस्वामी वेंकटरमण का जन्म 1910 में हुआ।
  • हिंदी सिनेमा के अभिनेता मोतीलाल का जन्म 1910 में हुआ।
  • भारत के बारहवें प्रधानमंत्री इन्द्र कुमार गुजराल का जन्म 1919 में हुआ।
  • प्रसिद्ध भारतीय महिला खिलाड़ी सुनीता रानी का जन्म 1979 में हुआ।

4 दिसंबर को हुए निधन

    • हिन्दी में शिष्ट हास्य लिखने वाले कलाकारों में अग्रणी लेखक अन्नपूर्णानन्द का निधन 1962 में हुआ।
  • 4 दिसंबर के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव 
  • भारतीय नौसेना दिवसNaval Ensign of India.svg

    भारतीय नौसेना दिवसभारतीय नौसेना का लोगो.png प्रत्येक वर्ष 4 दिसम्बर को मनाया जाता है। यह 1971 की जंग में भारतीय नौसेना की पाकिस्तानी नौसेना पर जीत की याद में मनाया जाता है। 3 दिसंबर को भारतीय सेना पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाक सेना के ख़िलाफ़ जंग की शुरुआत कर चुकी थी। वहीं, ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत 4 दिसंबर, 1971 को भारतीय नौसेना ने कराची नौसैनिक अड्डे पर भी हमला बोल दिया था। इस यु्द्ध में पहली बार जहाज पर मार करने वाली एंटी शिप मिसाइल से हमला किया गया था। नौसेना ने पाकिस्तान के तीन जहाज नष्ट कर दिए थे। इसमें भारतीय नौसेना का आई.एन.एस. खुकरी भी पानी में डूब गया था। इसमें 18 अधिकारियों सहित लगभग 176 नौसैनिक सवार थे।

    ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’

    नौसेना प्रमुख एडमिरल एस.एम. नंदा के नेतृत्व में ऑपरेशन ट्राइडेंट का प्लान बनाया गया था। इस टास्क की जिम्मेदारी 25वीं स्क्वॉर्डन कमांडर बबरू भान यादव को दी गई थी। 4 दिसंबर, 1971 को नौसेना ने कराची स्थित पाकिस्तान नौसेना हेडक्वार्टर पर पहला हमला किया था। एम्‍यूनिशन सप्‍लाई शिप समेत कई जहाज नेस्‍तनाबूद कर दिए गए थे। इस दौरान पाक के ऑयल टैंकर भी तबाह हो गए। भारतीय नौसैनिक बेड़े को कराची से 250 किमी की दूरी पर रोका गया और शाम होने तक 150 किमी और पास चले जाने का आदेश दिया गया। हमला करने के बाद सुबह होने से पहले तेजी से बेड़े को 150 किमी वापस आ जाने को कहा गया, ताकि बेड़ा पाकिस्तानी बमवर्षकों की पहुंच से दूर हो जाए। हमला भी रूस की ओसा मिसाइल बोट से किया किया। ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत पहले हमला निपट, निर्घट और वीर मिसाइल बोट्स ने किया। सभी बोट्स चार-चार मिसाइलों से लैस थीं। बबरू भान यादव खुद निपट बोट पर मौजूद थे। पहले पी.एन.एस. खैबर, उसके बाद पीएनएस चैलेंजर और पीएनएस मुहाफिज को मिसाइल से बर्बाद कर पानी में डुबो दिया। इस हमले के बाद पाक नेवी सतर्क हो गई। उसने दिन-रात कराची पोर्ट के चारों तरफ छोटे विमानों से निगरानी रखनी शुरू कर दी।

    सात दिन तक जलता रहा कराची तेल डिपो

    कराची तेल डिपो में लगी आग की लपटों को 60 किलोमीटर की दूरी से भी देखा जा सकता था। ऑपरेशन खत्म होते ही भारतीय नौसैनिक अधिकारी विजय जेरथ ने संदेश भेजा, ‘फॉर पीजन्स हैप्पी इन द नेस्ट. रीज्वाइनिंग।’ इस पर उनको जवाब मिला, ‘एफ 15 से विनाश के लिए; इससे अच्छी दिवाली हमने आज तक नहीं देखी।’ कराची के तेल डिपो में लगी आग को सात दिनों और सात रातों तक नहीं बुझाया जा सका।

    भारतीय नौसेना भारतीय सेना का सामुद्रिक अंग है जो कि ५६०० वर्षों के अपने गौरवशाली इतिहास के साथ न केवल भारतीय सामुद्रिक सीमाओं अपितु भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की भी रक्षक है। ५५,००० नौसेनिकों से लैस यह विश्व की पाँचवी सबसे बड़ी नौसेना भारतीय सीमा की सुरक्षा को प्रमुखता से निभाते हुए विश्व के अन्य प्रमुख मित्र राष्ट्रों के साथ सैन्य अभ्यास में भी सम्मिलित होती है। पिछले कुछ वर्षों से लागातार आधुनिकीकरण के अपने प्रयास से यह विश्व की एक प्रमुख शक्ति बनने की भारत की महत्त्वाकांक्षा को सफल बनाने की दिशा में है।

    स्थापना 1612; 405 वर्ष पहले
    देश भारत
    निष्ठा भारत
    प्रकार नौसेना
    विशालता 67,228
    मुख्यालय Integrated Headquarters, Ministry of Defence (Navy)
    आदर्श वाक्य शं नो वरुणः (संस्कृत)
    Sham No Varunaḥ (IAST)
    May the Lord of the Water be auspicious unto us (English)
    Colours Navy blue, white
    मार्च (सीमा रक्षा) जय भारती (Victory to India)
    वर्षगांठ नौसेना दिवस: ४ दिसम्बर
    Operational fleet
    युद्ध के समय प्रयोग
    जालस्थल भारतीय नौसेना
    प्रयुक्त वायुयान
    लड़ाकू MiG-29K
    हैलीकॉप्टर HAL DhruvKamov Ka-28Kamov Ka-31Sea King Mk.42CUH-3 Sea King
    गश्ती Boeing P-8 Poseidon Ilyushin Il-38
    आवीक्षी IAI HeronIAI Searcher Mk II
    प्रशिक्षक BAE HawkHAL HJT-16

    इतिहास

    ब्रिटिश भारत

    भारतीय नौसेना का ध्वज

    भारतीय नौसेना का ध्वज, 2001 से 2004 तक

    भारतीय नौसेना का ध्वज, 1950 से 2001 तक

    भारतीय नौसेना सन् 1613 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी की युद्धकारिणी सेना के रूप में इंडियन मेरीन संगठित की गई। 1685 ई. में इसका नामकरण “बंबई मेरीन” हुआ, जो 1830 ई. तक चला। 8 सितंबर 1934 ई. को भारतीय विधानपरिषद् ने भारतीय नौसेना अनुशासन अधिनियम पारित किया और रॉयल इंडियन नेवी का प्रादुर्भाव हुआ। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय नौसेना का विस्तार हुआ और अधिकारी तथा सैनिकों की संख्या 2,000 से बढ़कर 30,000 हो गई एवं बेड़े में आधुनिक जहाजों की संख्या बढ़ने लगी।

    स्वतंत्रता पश्चात्

    भारतीय नौसेना दिवस के लिए इमेज परिणामस्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत की नौसेना नाम मात्र की थी। विभाजन की शर्तों के अनुसार लगभग एक तिहाई सेना पाकिस्तान को चली गई। कुछ अतिशय महत्व के नौसैनिक संस्थान भी पाकिस्तान के हो गए। भारत सरकार ने नौसेना के विस्तार की तत्काल योजना बनाई और एक वर्ष बीतने के पहले ही ग्रेट ब्रिटेन से 7, 030 टन का क्रूजर “ दिल्ली” खरीदा। इसके बाद ध्वंसक “ राजपूत“, “ राणा“, “ रणजीत“, “ गोदावरी“, “ गंगा” और “ गोमती” खरीदे गए। इसके बाद आठ हजार टन का क्रूजर खरीदा गया। इसका नामकरण “ मैसूर” हुआ। 1964 ई. तक भारतीय बेड़े में वायुयानवाहक, “ विक्रांत” (नौसेना का ध्वजपोत), क्रूजर “दिल्ली” एवं “मैसूर” दो ध्वंसक स्क्वाड्रन तथा अनेक फ्रिगेट स्कवाड्रन थे, जिनमें कुछ अति आधुनिक पनडुब्बीनाशक तथा वायुयाननाशक फ्रिगेट सम्मिलित किए जा चुके थे। “ ब्रह्मपुत्र“, “ व्यास“, “ बेतवा “, “ खुखरी,” “ कृपाण“, “ तलवार” तथा “ त्रिशूल” नए फ्रिगेट हैं, जिनका निर्माण विशेष रीति से हुआ है। “ कावेरी“, “ कृष्ण” और “ तीर” पुराने फ्रिगेट हैं जिनका उपयोग प्रशिक्षण देने में होता है। “कोंकण“, “कारवार“, “काकीनाडा” “कणानूर”, “कडलूर“, “बसीन” तथा “बिमलीपट्टम” से सुंरग हटानेवाले तीन स्क्वाड्रन तैयार किए गए हैं। छोटे नौसैनिक जहाजों के नवनिर्माण का कार्य प्रारंभ हो चुका है और तीन सागरमुख प्रतिरक्षा नौकाएँ, “अजय”, “अक्षय” तथा “अभय” और एक नौबंध “ध्रुवक” तैयार हो चुके हैं। कोचीन, लोणावला, तथा जामनगर में भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण संस्थान हैं। आई एन एस अरिहन्त भारत की नाभिकीय उर्जा पनडुब्बी है।

    • आई एन एस विक्रमादित्य INS Vikramaditya (R33) with a Sea Harrier.jpg– नवंबर 2013 में शामिल।
      भारतीय नौसेना पोत विक्रमादित्य
      देश (Flag of India.svg भारत)
      नाम: आई एन एस विक्रमादित्य
      स्वामी: भारतीय नौसेना
      Operator: भारतीय नौसेना
      निर्माता: ब्लैक ‍सी शिपयार्डमाइकोलयीव,
      निर्दिष्ट: दिसंबर 1978
      (as Baku)
      लांच: अप्रैल 17, 1982
      (एडमिरल गोर्शकोव नाम से)
      नवंबर 16, 2013
      (विक्रमादित्य नाम से)
      विनियुक्त: 16 नवम्बर 2013
      स्थिति: कार्यरत
      सामान्य विशेषताएँ
      वर्ग एवं प्रकार: युद्धपोत
      प्रकार: विमान वाहक
      टनधारिता: 44,500 tons
      विस्थापन: 44,570 tons full load
      लम्बाई: 283.1 m overall
      बीम: 51.0 m
      ऊंचाई: 60.0 m
      Draught: 10.2 m
      Decks: 22
      प्रणोदन: 4 shaft geared steam turbines, 140,000 hp
      चाल: 32 नॉट (59 किमी/घंटा)
      धारिता: 13500 miles at 18 knots
      Crew: 1600
      अस्र-शस्र: CADS-N-1 Kashtan CIWS
      Aircraft carried: 16 Mikoyan MiG-29K
      Or HAL Tejas
      Or Sea Harrier
      10 helicopters mix of
      Ka-28 helicopters ASW
      Ka-31 helicopters AEW
      HAL Dhruv

      आई एन एस (INS) विक्रमादित्य (Sanskritविक्रमादित्य, Vikramāditya, “सूर्य की तरह प्रतापी”) पूर्व सोवियत विमान वाहक एडमिरल गोर्शकोव का नया नाम है, जो भारत द्वारा हासिल किया गया है। पहले अनुमान था कि 2012 में इसे भारत को सौंप दिया जाएगा, किंतु काफी विलंब के पश्चात् 16 नवम्बर 2013 को इसे भारतीय नौसेना में सेवा के लिए शामिल कर लिया गया। दिसंबर अंत या जनवरी आरंभ में यह भारतीय नौसैनिक अड्डा कारवाड़ तक पहुंच जाएगा।

      विक्रमादित्य यूक्रेन के माइकोलैव ब्लैक ‍सी शिपयार्ड में 1978-1982 में निर्मित कीव श्रेणी के विमान वाहक पोत का एक रूपांतरण है। रूस के अर्खान्गेल्स्क ओब्लास्ट के सेवेरॉद्विनस्क के सेवमाश शिपयार्ड में इस जहाज की बड़े स्तर पर मरम्मत की गई। यह पोत भारत के एकमात्र सेवारत विमान वाहक पोत आई एन एस विराट का स्थान लेगा। इस पोत को नया रूप देने में भारत को 2.3 अरब डॉलर खर्च करने पड़े हैं।

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