भागवत बोले, ‘अंग्रेजी स्कूलों में प्रार्थना हिंदी में हो’

देहरादून में मोहन भागवत ने कहा कि राम मंदिर के लिए पूजा-अर्चना करें. मंदिर निर्माण के लिए राम नाम का जाप करें.

नई दिल्‍ली : उत्‍तराखंड के दौरे पर गए राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (आरएसएस) मोहन भागवत ने स्‍कूलों को लेकर बयान दिया है. देहरादून में उन्‍होंने कहा कि अंग्रेजी स्‍कूलों में भी प्रार्थना हिंदी में होनी चाहिए. उन्‍होंने स्‍कूलों के प्रधानाचार्यों से मुलाकात के दौरान यह भी कहा कि शिक्षा में बदलाव की आवश्यकता है. अब शिक्षा व्यवसाय बन गया है.

 

मोहन भागवत ने कहा कि भारत में रहने वालों को हिन्दू कहते हैं. कांग्रेस, सपा और मुस्लिम लीग को भी आरएसएस सहायता करता है. सच्चे मुसलमान को संघ से कोई खतरा नहीं. उन्‍होंने कहा कि अंग्रेजी स्कूलों में प्रार्थना हिंदी में होनी चाहिए. जनसंख्या बैलेंस रहनी चाहिए. अपने-अपने क्षेत्रों में संघ की शाखा लगाने वालों को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नसीहत देते हुए कहा कि राम मंदिर के लिए पूजा-अर्चना करें. मंदिर निर्माण के लिए राम नाम का जाप करें. इसके अलावा शाखा लगाने वालों को कहा कि सभी हिंदुओं को शाखा से जोड़ा जाए.

मोहन भागवत ने अपने क्षेत्रों में सर्वे करने के निर्देश दिए इसमें ये पता लगाया जाएगा कि किस क्षेत्र में कौन-कौन ऐसे लोग रहते हैं, जो कभी भी संघ की शाखा में देश के किसी भी हिस्से में गए. ये सर्वे 9 मई तक करने के निर्देश दिए गए.

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भगवान राम और ‘गो माता’ हिंदू संस्‍कृति का आधार हैं. इसके साथ ही कहा कि हर भारतीय को यह समझना चाहिए कि अयोध्‍या में राम मंदिर का निर्माण मूल स्‍थान पर ही होना चाहिए. उन्‍होंने कहा, ”हम राम के प्रति श्रद्धा रखते हैं. गो माता और राम हिंदू संस्‍कृति का आधार हैं. हर भारतीय को यह समझना चाहिए कि अयोध्‍या में राम मंदिर का निर्माण मूल स्‍थान पर ही होगा. यदि ऐसा होता है तो हिंदुत्‍व की पहचान पूरे विश्‍व में स्‍थापित हो जाएगी.”

यहां पर अपने चार दिवसीय प्रवास के दौरान रिटायर्ड अधिकारियों से बुधवार को संवाद के दौरान आरएसएस प्रमुख ने ये बात कही. इस दौरान मदरसों के बारे में उन्‍होंने कहा, ”मदरसों में भारतीयता का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए जोकि धर्मों के बीच कोई भेदभाव नहीं करता और शांति की बात कहता है.”

इसके साथ ही उन्‍होंने कहा, ”मुस्लिम अपनी उपासना पद्धति को अपनाने के लिए स्‍वतंत्र हैं लेकिन उनको यह समझना चाहिए कि हम एक ही देश और संस्‍कृति से ताल्‍लुक रखते हैं और हमारे पूर्वज एक ही हैं.” आरएसएस प्रमुख ने कहा कि केवल ये सामूहिक सोच ही सशक्‍त समाज और देश के निर्माण का मार्ग प्रशस्‍त कर सकती है.

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