भय्यूजी महाराज की ‘अंतिम इच्छा’ में विनायक से परिजन हैरान, दूसरे सूइसाइड नोट पर शक

भय्यू महाराज के आश्रम में भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था, पत्नी का दखल बढ़ता जा रहा था, करीबी दूर होते गए ,ट्रस्ट के चेयरमैन का पद छोड़ चुके महाराज के मौसा का आश्रम से सटकर घर है पर 6 माह से मिलने नहीं आए।

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भय्यूजी महाराज की मंगलवार को हुई थी मौत।

हाइलाइट्स

  • आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज की इंदौर में मंगलवार को संदिग्ध मौत।
  • मौत के बाद दो सूइसाइड नोट आए सामने, पुलिस की तफ्तीश जारी।
  • दूसरे नोट में संपत्ति का हक सेवादार विनायक के नाम होने की बात।
  • रिश्तेदारों ने विनायक को दी ट्रस्ट से बाहर निकालने की धमकी।
  • बेटी कुहू और दूसरी पत्नी डॉ आयुषि की कलह से परेशान थे भय्यूजी।
  • अंतिम विदाई देने के लिए शिवराज सरकार के एक भी मंत्री नहीं पहुंचे ।
इंदौर :इंदौर में आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज के सूइसाइड नोट से नया विवाद खड़ा हो गया है। मंगलवार को कथित खुदकुशी से पहले भय्यूजी महाराज ने जो सूइसाइड नोट लिखा है, उसके दूसरे पन्ने में उन्होंने अपने पुराने सेवादार विनायक को संपत्ति के साथ सभी वित्तीय अधिकार सौंपने की इच्छा जाहिर की है। इसके बाद जहां एक ओर परिजन हैरान हैं, वहीं दूसरी ओर श्री सद्गुरु दत्ता धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट के सदस्य भी चिंतित हैं। वहीं इस दूसरे सूइसाइड नोट की सत्यता को लेकर अभी सस्पेंस कायम है।
इन सबके बीच अब एक संशय यह भी है कि भय्यूजी के निधन के बाद अब ट्रस्ट के मामलों में कौन फैसले लेगा। पुलिस हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स के जरिए भय्यूजी के कथित सूइसाइड नोट की लिखावट का मिलान कर रही है। वहीं सूत्रों के मुताबिक यह नोट भय्यूजी ने ही लिखा है, इस पर अभी थोड़ा शक है।
भय्यूजी महाराज के रिश्तेदारों और करीबियों का साफ कहना है कि वह सभी मामलों में विनायक के दखल से खुश नहीं थे। पूर्व एनसीपी एमएलए और भय्यूजी के करीबी दीपक सालुंखे का कहना है, ‘विनायक की तरफ से किसी तरह की आपत्ति का कोई सवाल नहीं है, क्योंकि यह शीशे की तरह साफ है कि संपत्ति पर परिवार का हक है और इस संबंध में जो कुछ भी होगा वह परिवार की तरफ से ही होगा।’
‘तो विनायक को कर देंगे बाहर’
अगर विनायक खुद अधिकार पाने के लिए जोर लगाते हैं, तो परिवार का क्या रुख होगा, इस सवाल पर उन्होंने कहा, ‘वह ट्रस्ट में आ-जा सकते हैं लेकिन अगर वह कुछ भी करते हैं तो उन्हें निकाल कर बाहर कर दिया जाएगा।’ भय्यूजी महाराज की बड़ी बहन के रिश्तेदार सालुंखे ने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने विनायक के साथ चर्चा की है। वहीं, विनायक से जब सूइसाइड नोट को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

17 साल की बेटी कुहू ने दोपहर 2.30 के करीब मेघदूत शवदाह गृह में चिता को अग्नि दी।

इससे पहले बुधवार को इंदौर में समर्थकों के जयकारे के बीच भय्यूजी महाराज का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनकी 17 साल की बेटी कुहू ने दोपहर 2.30 के करीब मेघदूत शवदाह गृह में चिता को अग्नि दी। वहीं, आश्रम में जब भय्यूजी महाराज का पार्थिव शरीर रखा हुआ था, उस दौरान परिवार में दरार साफ दिखी। शीशे के जिस ताबूत में भय्यूजी महाराज का पार्थिव शरीर रखा था, उसके दो अलग-अलग छोर पर कुहू और उनकी सौतेली मां डॉ. आयुषि शर्मा बैठी रहीं, लेकिन दोनों ने एक-दूसरे से नजरें नहीं मिलाईं।
शिवराज सरकार के मंत्री रहे नदारद
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले के अलावा महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पंकजा मुंडे, गिरीश महाजन और एकनाथ शिंदे ने अंतिम यात्रा में शिरकत की लेकिन मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार का कोई मंत्री वहां नहीं नजर आया। इंदौर के कलेक्टर निशांत वारवड़े ने कहा कि सरकार की ओर से वह नुमाइंदगी कर रहे हैं।
मंगलवार को दिए कलेक्टर के बयान के उलट भय्यूजी का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार नहीं किया गया। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को कलेक्टर वारवड़े ने बताया, ‘भय्यूजी महाराज ने राज्यमंत्री दर्जा लेने से इनकार कर दिया था। उनकी इस इच्छा को उनकी मौत के बाद बरकरार रखा गया।’
कंप्यूटर बाबा, योगेंद्र महंत भी पहुंचे
अंतिम संस्कार से पहले भय्यूजी महाराज का पार्थिव शरीर सुबह 10 बजे से दोपहर एक बजे तक सूर्योदय आश्रम में रखा गया। उनको श्रद्धांजलि देने वाले दर्शनार्थियों में कम्प्यूटर बाबा और योगेंद्र महंत समेत कई साधु-संत भी शामिल रहे। इन दोनों संतों को भी मध्य प्रदेश सरकार ने भय्यूजी के साथ ही राज्यमंत्री का दर्जा दिया था।

 भय्यू महाराज के स्प्रिंग वैली के बंगले में चले जाने के बाद परिवार के लोगों को भी तवज्जो नहीं मिल रही थी। कोई बंगले पर मिलने जाता तो उन्हें अंदर भी नहीं आने दिया जाता था। कह देते थे कि महाराज ध्यान की मुद्रा में हैं।  माताजी की तबीयत ठीक नहीं। वह सो रही हैं। घर में कोई नहीं है। इस तरह की बातें बताकर रिश्तेदारों को लौटा दिया जाता था। रिश्तेदार भी लगभग कट चुके थे। सूर्योदय आश्रम में भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था।

आयुषी का दखल ट्रस्ट की गतिविधियों में बढ़ता जा रहा था

महाराज के मौसा शरद एस. पंवार ने डेढ़ साल पहले ही ट्रस्ट का चेयरमैन पद छोड़ दिया था। उनका घर आश्रम से सटकर ही है, लेकिन छह महीने से वह महाराज से मिले तक नहीं थे। आश्रम की गतिविधियों में दखल खत्म हो गया था। ट्रस्ट के सचिव तुषार पाटिल ही सारी गतिविधियां देख रहे थे। हालांकि इसमें भी विनायक का दखल सबसे ज्यादा रहता था। महाराज के शुरुआती समय के साथी संजय यादव भी एक घटनाक्रम के बाद आश्रम की गतिविधि से दूर कर दिए गए थे।वहीं शादी के बाद से ही आयुषी का दखल ट्रस्ट की गतिविधियों में बढ़ता जा रहा था। एक साल से तो लगभग हर काम वही तय कर रही थीं। ट्रस्ट को मजबूती देने के लिए महाराज ने जल्द ही बड़ी मीटिंग लेना तय किया था।

बेटी का क्या होगा?
अायुषी से दूसरी शादी के बाद परिवार बिखर गया था। पहली पत्नी माधवी की बेटी कुहू शादी में भी नहीं आई थी। वह पुणे में ही रहकर पढ़ाई कर रही है। महाराज ही उससे मिलने वहां जाते थे। कुहू और आयुषी के बीच कहासुनी होती रहती थी। अब महाराज के निधन के बाद उसकी देखरेख की जिम्मेदारी उम्रदराज दादी पर आ गई है।

आश्रम में पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए उमड़े अनुयायी, महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में पहुंचे

9.30 बजे जैसे ही भय्यू महाराज के पार्थिव शरीर आश्रम पहुंचा अंतिम दर्शन करने के लिए  सुखलिया में भीड़ जुटने लगी थी। उनकी एक झलक पाने के लिए भक्तों का तांता लग गया।
अण्णा महाराज बोले- उनके कामों को आगे बढ़ाएंगे
संत अण्णा महाराज ने भय्यू महाराज को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देशभर में उन्होंने कई महान कार्य किए। जरूरतमदों और किसानों के लिए उनकी कई योजनाएं चल रही हैं। उनके कार्यों को सब मिलकर बढ़ाएंगे। केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र के बड़े नेता रामदास अठावले भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे और लोगों को ढांढस बंधाया।

बड़े नेताओं ने बनाई दूरी
भय्यू महाराज के अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि सभा में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के मुख्यमंंत्री , शहर के ज्यादातर पार्षद, विधायक, सांसद व मंत्री भी नहीं दिखाई दिए। धर्मगुरुओं में कम्प्यूटर बाबा ही पहुंचे थे। महापौर मालिनी गौड़ भी अंतिम दर्शन के लिए आश्रम पहुंची थीं।

वे ऐसे संत थे, जिनसे मिलकर सभी में ऊर्जा आती थी
– संत भय्यू महाराज के अंतिम संस्कार के बाद मुक्तिधाम में श्रद्धांजलि सभा हुई। महाराष्ट्र की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा- जब भी मैं संशय में होती तो वे सदैव बड़े भाई जैसे मेरा मार्गदर्शन करते। उनसे मिलकर नकारात्मक भाव समाप्त हो जाता था।

– महाराष्ट्र सरकार के पीडब्ल्यूडी मंत्री एकनाथ संभाजी ने कहा- संत भय्यू महाराज से मैं जितनी बार मिला उनका ओजस्वी मुख देखकर मेरा सारा तनाव चला जाता था। वे एक पिता, भाई और मित्र की तरह सभी की परेशानियों को सुनते और निराकरण करते थे।

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