‘बोट से वोट’ की यात्रा पर प्रियंका गांधी, केवटअब इंदिरा की पोती की लगाएंगे नैया पार?

अशोक साहनी केवट तब 18 साल के थे जब उनकी नाव पर इंदिरा गांधी बैठी थीं। वक्त बदला है, अब वह इंदिरा की विरासत को लेकर आगे जा रहे हैं। अशोक कहते हैं कि हमने भगवान राम को नदी पार कराई थी, पीएम मोदी को भी कराई, प्रियंका को भी कराना हमारा फर्ज है।

हाइलाइट्स

  • कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वोटरों का मन टटोलने गंगा यात्रा पर
  • आयोजन के लिहाज से कांग्रेस के झंडों से नावों को सजाया गया है
  • इंदिराजी मेरी बोट पर 1977 में बैठी थीं, उस समय मैं 18 साल का था: अशोक
  • बोट चलाने वाले प्रियंका के साथ यात्रा को लेकर उत्साहित हैं
  • प्रयागराज :लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वोटरों का मन टटोलने गंगा यात्रा पर निकली हैं। चुनावी मैदान फतह करने के लिए ‘बोट पर चर्चा’ का आयोजन किया गया है। इस आयोजन के लिहाज से कांग्रेस के झंडों से नावों को सजाया गया है। चुनाव यात्रा कांग्रेस की है, प्रियंका गंगा यात्रा पर हैं लेकिन नाव चलाने वाले दो चेहरे न राजनीति जानते हैं, न पार्टी मानते हैं। उन्हें याद है तो उनका कर्तव्य और भगवान राम का वह किस्सा।

    पार्टी और प्रियंका के समर्थकों से इतर एक नाव में 59 वर्षीय अशोक साहनी केवट और उनके बेटे अभिषेक साहनी केवट (26) भी हैं। बता दें कि अशोक और अभिषेक मनैया घाट के किनारों पर अपना दो साल पुराना स्टीमर चलाते हैं। इन दिनों उनका स्टीमर प्रियंका की टीम ने किराए से लिया है। दरअसल, प्रियंका 2019 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अभियान चला रही हैं, जिसके तहत वह गंगा यात्रा के जरिए प्रयागराज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी तक का सफर कर रही हैं।
    ‘हमने भगवान राम को नदी के पार उतारा’
    इन सबमें दिलचस्प यह है कि केवट परिवार जाने-माने मल्लाह वर्ग से ताल्लुक रखता है, जिसकी यूपी के प्रमुख ओबीसी वर्ग में गिनती होती है। यह वर्ग वर्ष 2014 और 2017 में बीजेपी के साथ मजबूती से खड़ा रहा था। अशोक हंसते हुए कहते हैं, ‘हम नहीं जानते कि 2019 का चुनाव किस दिशा में जाएगा लेकिन हम केवट यात्रियों को जल यात्रा कराने के लिए जाने जाते हैं। जैसे कि हमने भगवान राम को नदी के पार उतारा था, उसी तरह से प्रियंकाजी अब नाव पर सवार हैं, हमने मोदीजी के साथ भी अपना फर्ज निभाया है।’

    ‘1977 में इंदिराजी मेरी बोट पर बैठी थीं’
    यात्रा के दौरान दो केवट स्टीमर का इंजन चला रहे थे। उनके आस-पास मीडियावालों और जल पुलिस के अधिकारियों का जमावड़ा लगा रहा। वे शायद इस बात से बेखबर थे कि वह गांधी परिवार की विरासत को अपने साथ ले जा रहे हैं। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से अशोक कहते हैं, ‘इंदिराजी मेरी बोट पर 1977 में बैठी थीं, उस समय मैं 18 साल का था। अब मैं पांच बच्चों का पिता हूं, मैं उन सभी को वह किस्से सुनाता हूं। उन्होंने मुझसे कहा था कि प्रियंकाजी के साथ तस्वीरें ले लेना और उन्हें फ्रेम करवा देना।’

    ‘नाव वालों को आजीविका की जरूरत’
    बोट चलाने वाले प्रियंका के साथ यात्रा को लेकर उत्साहित हैं। वे उन्हें आसपास के गांव दिखाते हैं, गंगा का किनारा दिखाते हैं। अशोक कहते हैं, ‘दिक्कतों का समाधान न करने की वजह से हम सरकार से नाराज हैं। नाववालों को आजीविका की जरूरत है। मेरा एक बेटा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ग्रैजुएट है और दूसरा इंजिनियर है। लेकिन हम चाहते हैं कि वे हमारे व्यवसाय में शामिल हों और उसे बढ़ाने में मदद करें।’

priyanka gandhi is a christian do not let her enter kashi vishwanath temple saints

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *