लखनऊ [शोभित मिश्र]। प्रदेश में गौवंश के अवशेष मिलने के बढ़ते मामले के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति काफी प्रभावित हो रही है। तीन दिसंबर को बुलंदशहर में हिंसा से पहले करीब तीन वर्ष पहले ग्रेटर नोएडा के दादरी में भी भीड़ गोवंश अवशेष मिलने के बाद काफी हिंसक हो गई थी। गोवंश अवशेष को परखने की किट से अब इसका निराकरण हो सकता है।

पोर्टेबल बीफ डिटेक्शन किट से अब पुलिस को किसी मांस की जांच कर तुरंत पता चल सकेगा कि वह गोमांस है या नहीं। गोहत्या और गोमांस के सेवन पर भारत के ज्यादातर राज्यों में प्रतिबंध है। कुछ राज्यों में तो गोमांस पर बने कानून को तोडऩे वाले के लिए उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।

करीब तीन वर्ष पहले 17 सितंबर, 2015 को दादरी के बिसाहड़ा में उन्मादी भीड़ ने अखलाक की पीट पीटकर सिर्फ इसलिए हत्या कर दी क्योंकि संदेह था कि उसके घर गोमांस पक रहा था। तीन दिसंबर को सूबे के बुलंदशहर के स्याना में भी मवेशियों के अवशेष मिलने पर हिंसा भड़की और इंस्पेक्टर सुबोध सहित एक अन्य की हत्या कर दी गई। प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इस तरह की छिटपुट घटनाएं होती रहती हैं। इन्हें रोकने के लिए भारत सरकार की मदद से उत्तर प्रदेश सरकार ने अहम कदम उठाया है। सरकार जल्द ही सभी जिलों को एक ऐसी मोबाइल बीफ डिटेक्शन किट देने जा रही है जो महज 50 मिनट में बता देगी कि घटनास्थल पर पाये गए अवशेष गोवंश के हैं या नहीं। लखनऊ में पांच दिसंबर को तकनीकी सेवाएं मुख्यालय में इसका डिमांस्टेशन किया गया, जो सफल रहा।

प्रदेश के कस्बों में अक्सर मवेशियों के अवशेष पाये जाने पर संदेह जताया जाता है कि वे गोवंश के हैं। इस बात को लेकर साम्प्रदायिक टकराव की नौबत बन आती है और कभी-कभी हिंसक रूप ले लेती है। पुलिस अवशेषों की जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) में भेजती है और रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं। तब तक तनाव और आशंका बनी रहती है और सियासी हवा भी मिलती रहती है। यह स्थितियां आगे न बनें इसके लिए मोबाइल बीफ डिटेक्शन किट का प्रयोग शुरू किया जा रहा है। अभी तक मोबाइल बीफ डिटेक्शन किट का प्रयोग गुजरात और महाराष्ट्र में किया जा रहा है। अब उत्तर प्रदेश इस किट का प्रयोग करने वाला देश का तीसरा राज्य होगा। तकनीकी सेवाएं मुख्यालय ने पिछले वर्ष दिसंबर में ‘बीफ डिटेक्शन किट’ खरीदने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। केंद्र सरकार ने राज्यों में पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत इसके लिए उत्तर प्रदेश को दो करोड़ 25 लाख का बजट दिया है। शासन ने प्रति जिला तीन लाख रुपये में किट खरीदने की अनुमति दे दी है। यह किट फील्ड यूनिट की गाडिय़ों में लगेंगी।

कैसे काम करेगी किट

नई किट एलिजा मेथड पर आधारित है। इस तरीके में किट में रंग परिवर्तन से पता जाता है कि किसी सैंपल में मनचाहा पदार्थ मौजूद है। इसके लिए सैंपल को किट में डालना होता है। अगर सैंपल में बोवाइन यानि गोजातीय मांस होगा, तो केवल 30 मिनट के अंदर रंग के बदलने से उसका पता चल जाएगा। फिलहाल ऐसे किसी सैंपल की लैब में जांच करवाने में पारंपरिक डीएनए मेथड का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें लंबा समय लगने के कारण मवेशियों के मासूम व्यापारियों को भी कई बार तब तक जेल में बंद रखना पड़ता है। मोबाइल किट का दाम लगभग 8,000 रूपये होगा।

सात साल तक की सजा का प्रावधान

हाईकोर्ट की अधिवक्ता वंदना पांडेय के मुताबिक मौजूदा कानून में 3/5क/8 ‘गोवध क्रूरता अधिनियम’ के अंतर्गत सात साल की सजा व दस हजार के जुर्माने का प्राविधान है। रासुका लगाने का भी प्रावधान है।

11 राज्यों में गो-हत्या पर प्रतिबंध

गो वंश यानी गाय, बछड़ा, बैल और सांड की हत्या पर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा छत्तीसगढ़ के साथ दो केंद्र शासित राज्यों- दिल्ली, चंडीगढ़ में प्रतिबंध लागू है।

63 घटनाओं में 28 मारे गए

डाटा वेबसाइट इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट के अनुसार साल 2010 से 2017 के बीच ऐसी 63 घटनाएं हुई जिनमें 28 की जान चली गई। गोवंश से जुड़ी हिंसा के 97 प्रतिशत मामले वर्ष 2014 के बाद हुए।

महीने भर में मिल जाएंगी किट

तकनीकी सेवाएं के एडीजी आशुतोष पाण्डेय ने बताया कि अभी तो किट का डिमांस्ट्रेशन चल रहा है। निदेशक विधि विज्ञान प्रयोगशाला डॉ अर्चना त्रिपाठी के अनुसार बीफ डिटेक्शन किट खरीदने की प्रक्रिया चल रही है, महीनेभर के अंदर ही सभी जिलों के फील्ड यूनिट स्टाफ को किट वितरित कर दी जाएंगी।

भारतीय लैब ने बना लिया ‘बीफ डिटेक्शन किट’

भारत की एक सरकारी लैब में पोर्टेबल ‘बीफ डिटेक्शन किट’ विकसित की गयी हैं. इनसे पुलिस को किसी मांस की जांच कर तुरंत पता चल सकेगा कि वह गोमांस है या नहीं.    

Indien Fleisch Markt (UNI)

गोहत्या और गोमांस के सेवन पर भारत के ज्यादातर राज्यों में प्रतिबंध है. कुछ राज्यों में तो गोमांस पर बने कानून को तोड़ने वाले के लिए उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है. महाराष्ट्र की सरकारी फोरेंसिक साइंस लैब के निदेशक केवाई कुलकर्णी ने बताया, “पिछले आठ महीनों से हम बीफ का पता लगाने वाली ऐसी किट बनाने पर काम कर रहे थे. अब अगस्त के महीने में इन्हें महाराष्ट्र और मुंबई पुलिस को वितरित कर दिया जाएगा.”

कुलकर्णी ने बताया कि नई किट ‘एलिजा मेथड’ पर आधारित है. इस तरीके में किट में रंग परिवर्तन से पता जाता है कि किसी सैंपल में मनचाहा पदार्थ मौजूद है. इसके लिए सैंपल को किट में डालना होता है. अगर सैंपल में बोवाइन यानि गोजातीय मांस होगा, तो केवल 30 मिनट के अंदर रंग के बदलने से उसका पता चल जाएगा.defaultये हैं भारत के बीफ खाने वाले

Indien Neu Delhi Hindu Protest gegen Rindfleisch-Konsum (picture-alliance/AP Photo/S. Das)हाल के महीनों में गोमांस को लेकर भारत में कई बार बवाल हुआ है.

भारत के कई हिस्सों से बीते महीनों में गोमांस रखने का शक जता कर स्वघोषित गोरक्षकों ने कई लोगों को निशाना बनाया है. इन हिंसक वारदातों के शिकार ज्यादातर मुसलमान लोग हुए हैं, जिनमें से कई वैध रूप से पशुओं को खरीदने या बेचने ले जा रहे थे. भारत के मांस कारोबार में बहुत बड़ी संख्या में मुसलमान लगे हुए हैं.

हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरक्षा के नाम पर दूसरों को जान तक से मार डालने वालों की निंदा की है. लेकिन आलोचक कहते हैं कि 2014 में दक्षिणपंथी भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से ऐसे स्वघोषित गोरक्षकों की हिम्मत बढ़ी है और यह सरकार इंसानों की जान से ज्यादा गायों की जान की चिंता करती है.

भारत के स्थानीय मीडिया में ‘बीफ डिटेक्शन किट’ की खबर आते ही विपक्षी दल कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने ट्विटर पर टिप्पणी की, “गलत प्राथमिकताओं का भयानक मामला. बीफ की पहचान करने वाली किट्स पर सरकारी संसाधनों को खर्च करने से अधिक महत्वपूर्ण क्या हमारे पास कुछ नहीं बचा है!”