बड़ा फैसला:  पहली बार देश में ठेला-रेहड़ी आर्थिक सर्वेक्षण

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में आर्थिक सर्वेक्षण कराने का फैसला लिया गया है. इस बार इस सर्वेक्षण में ठेले , रेहड़ी, अपना रोजगार करनेवाले भी मेनस्ट्रीम में शामिल होंगे.कैबिनेट बैठक में सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण कराने का फैसला लिया था जो अगले 6 महीनों में पूरा हो जाएगा. जानकारी के मुताबिक, पांच सालों में होने वाला आर्थिक सर्वेक्षण अब हर तीन सालों पर किया जाएगा.

अब हर उस शख्स की आर्थिक गणना होगी जो अपने पैर पर खड़ा है. (फाइल)

वैसे यह सातवां आर्थिक सर्वेक्षण होगा, लेकिन यह सर्वेक्षण अपने आप में अनूठा होगा. पहली बार स्वरोजगार, चाहे वो किसी भी रूप में हो, उसकी गणना की जाएगी और पूरे देश के सामने पेश किया जाएगा. रोजगार को लेकर अमूमन हर सरकार विपक्ष के निशाने पर रहा है. मोदी सरकार 1.0 भी इससे अछूता नहीं रहा. इसलिय मोदी सरकार 2.0 ने इसको लेकर हो रही सियासत को खत्म करने का फैसला लिया. अब हर उस शख्स की आर्थिक गणना होगी जो अपने पैर पर खड़ा है.

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में आर्थिक सर्वेक्षण (आर्थिक जनगणना) कराने का फैसला लिया गया है. इस बार इस आर्थिक सर्वेक्षण (आर्थिक जनगणना) में ठेले , रेहड़ी, अपना रोजगार करने वाले भी मेनस्ट्रीम में शामिल होंगे. साथ ही, 27 करोड़ घरों और 7 करोड़ Establishment का आर्थिक सर्वेक्षण होगा. यह जून के आखिरी हफ्ते में शुरू होगा. इसके बाद 6 महीने में साफ हो जायेगा कि देश में रोजगार की स्थिति कैसी है. आपको बता दे कि वर्ष 2013 में आर्थिक जनगणना हुई है. हर 5 साल बाद देश भर में यह गणना होती है. पहले इस काम में परिषदीय स्कूलों अध्यापकों, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, आशा आदि को लगाया जाता था. अबकी बार देश भर की आर्थिक जनगणना का काम सीएससी एजेंसी को दिया गया है. एजेंसी अपने जनसेवा केंद्र संचालकों यानी वीएलई के माध्यम से पूरा कराएगी.
मिलेंगे नए अधिकार- एसकोर्ट सिक्योरिटी के रिसर्च हेड आसिफ इकाबल ने बताया कि आर्थिक जनगणना में ठेले रेहड़ी वालों को शामिल करने से ये सभी लोग मेनस्ट्रीम में शामिल हो जाएंगे. इनको लेकर भी सरकार भी नए कानून बनाएगी. ऐसे में उनको आसानी से कर्ज मिलने समेत कई अधिकार मिलेंगे.

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