बच्चों की जान बचाने वाले ‘सूरत के हीरो’ को क्यों धर दबोचा पुलिस ने?

सूरत में लोगों की जान बचाने के लिए जिसे हीरो बताया गया, पुलिस ने उसी को क्यों गिरफ्तार कर लिया?
लोगों ने सोशल मीडिया पर भार्गव को केतन बता खूब वीडियो शेयर किए.
गुजरात के सूरत अग्निकांड में एक नया अपडेट आया है. वो ये कि सूरत पुलिस ने तक्षशिला बिल्डिंग में कोचिंग चला रहे भार्गव बूटानी को पकड़ लिया है. ये बात हम आपको इससे पहले वाली स्टोरी में बता चुके हैं. लेकिन नया अपडेट ये है कि सूरत के जिस वीडियो में जो आदमी बच्चों को बचाता दिख रहा था और जिसे लोग हीरो बता रहे थे, पुलिस ने उसे ही पकड़ लिया है. Police arrests Bhargava bautani main accused in surat fire tragedyसोशल मीडिया पर ये शख्स खूब वायरल हुआ है

ये सब कुछ हुआ सोशल मीडिया पर फैलाए गए कन्फ्यूज़न की वजह से. दरअसल केतन जोरवाडिया नाम के शख्स ने हकीकत में 12 बच्चों की जान बचाई.

Ketan: There was smoke, I did not know what to do. I took the ladder, first helped the children get out of the place, managed to save 8-10 people. Later I managed to rescue 2 more students. Fire brigade came after 40-45 minutes. #SuratFire #Gujarat pic.twitter.com/k5f3HbecCI

— ANI (@ANI) May 25, 2019

उन्होंने जिस तरह से बच्चों की जान बचाई उसकी कोई तस्वीर या फिर वीडियो मौजूद नहीं है. लेकिन बचाए गए बच्चे मीडिया को दिए गए इंटरव्यू में उनकी तारीफ कर चुके हैं. उर्मी वकारीया ने कहा था:केतन ने जिन बच्चों की जान बचाई उनमें उर्मी वकारिया भी शामिल थीं.

भार्गव सर की वजह से आग की भेंट चढ़ रहे कई स्टूडेंट्स की जान बची. वह आग देखकर भागे नहीं, बल्कि आग का सामना करते हुए मुझे और मेरी दोस्त को बचाया. वह भगवान समान हैं, वो न होते तो हम नहीं बच पाते. उन्होंने हमें खिड़की से नीचे उतारा, तब केतन ने दूसरे लोगों के साथ हमारी जान बचाई.

केतन ने जिन बच्चों की जान बचाई उनमें उर्मी वकारिया भी शामिल थीं.उर्मी वकारीया ने खुद को बचाने के लिए केतन का शुक्रिया अदा किया था.
दरअसल कोचिंग में आग लगने के बाद भार्गव बुटानी ने दो बच्चों की जान बचाई. सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल भी हो रहा है. उसमें वो बिल्डिंग के ऊपर बच्चों को बचाता हुआ दिख रहा है. बच्चों के बचाने के दौरान भार्गव खुद भी चोटिल हुआ. लेकिन कन्फ्यूज़न यही हुई कि लोगों ने गलती से, वीडियो में दिख रहे भार्गव को केतन जोरवाडिया बता दिया. ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया गया.बच्चों को बचाने के लिए केतने इमारत पर चढ़ गए.

बच्चों को बचाने के लिए केतन इमारत पर चढ़ गए.
भार्गव बुटानी ने बच्चों को बचाने की पूरी कोशिश की, हालांकि लोगों ने भार्गव को ही केतन बता दिया.
इस अग्निकांड के बाद जब पुलिस ने मामले की जांच की. तो पता चला कि जो युवक बच्चों को बचा रहा था, वो ही कोचिंग का संचालक भार्गव बुटानी था. भार्गव बुटानी ही तक्षशिला बिल्डिंग में अवैध रूप से स्मार्ट क्लासेस चला रहा था. जब आग लगी तो वो बिल्डिंग में ही था और फिर खिड़की से बाहर निकलने के क्रम में उसने साथ के बच्चों को बचाने की पूरी कोशिश की.

दूसरा भार्गव बुटानी की सबसे बड़ी गलती थी कि वो पूरे अवैध तरीके से कोचिंग चला रहा था. बिंल्डिंग के ऊपर टेंट डाल कर बच्चों को पढ़ा रहा था. वहां किसी भी तरह से आग को बुझाने का सामान मौजूद नहीं था. जिस बिनाह पर पुलिस ने भार्गव की गिरफ्तारी कर ली.

पुलिस की गिरफ्तार में कोचिंग संचालक भार्गव बुटानी
हालांकि सोशल मीडिया इस गिरफ्तारी का विरोध कर रहा है. सोशल मीडिया पर लोगों को कहना है कि जिसने बच्चों को बचाने की पूरी कोशिश की उसे इस तरह से पकड़ना बिल्कुल गलत है.

केतन ने जान जोखिम में डाल 10 बच्चों को बचाया,अभिभावक  बोले- वह हमारे लिए मसीहा है

केतन जोरावाडिया (लाल घेरे में)केतन जोरावाडिया (लाल घेरे में)
 सूरत में कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में शुक्रवार को लगी आग में केतन जोरावाडिया ने अपनी सूझबूझ और साहस से 10 बच्चों की जिंदगी बचाई। जब आग में फंसे बच्चे इधर-उधर भाग रहे थे, तब जोरावाडिया ने अपनी जान जोखिम में डालकर इमारत के पिछले हिस्से में सीढ़ी की मदद से 8 से 10 बच्चों को नीचे उतारा। केतन ने शनिवार को बताया, “भारी धुआं निकल रहा था। मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूं। इस बीच एक लड़की नीचे कूदी। इसके बाद मुझसे रहा नहीं गया और मैंने तुरंत सीढ़ी ली और इमारत के पिछले हिस्से में लगाकर बच्चों को उतारने लगा। बाद में मैं दो और छात्रों को बचाने में कामयाब रहा।’

अभिभावक हुए आत्मविभोर

  1. केतन का कई अभिभावकों ने इस बात का आभार माना कि दुर्घटना के समय ईश्वर ने अपने प्रतिनिधि के रूप में उसको भेजा, जिसने अपनी जान की परवाह नहीं की और कई लोगों को बचाया। वह साक्षात मसीहा बनकर आया।
  2. 23 बच्चे इस हादसे में मारे गए

    केतन ने बताया आग की सूचना मिलने पर दमकल दस्ता 45 मिनट देरी से पहुंचा। दमकल की गाड़ियां लेकर आग बुझाने वाले कर्मचारी बिना सीढ़ी के ही मौके पर पहुंचे, जिससे बचाव काम में देरी हुई। हाईड्रोलिक सीढ़ी भी फायर ब्रिगेड के पास नहीं थी। शुक्रवार को लगी आग में 20 बच्चे जिंदा जलकर मारे गए थे, जबकि एक बच्चे की मौत कूदने से हुई थी। घायल दो और बच्चों की मौत होने से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है।

  3. परीक्षा का परिणाम आया, लेकिन नहीं रहीं छात्राएं

    गुजरात बोर्ड की कक्षा 12वीं की परीक्षा का शनिवार को नतीजे घोषित किए गए। हादसे में जान गंवाने वाली तीन छात्राएं आशादीप स्कूल की कक्षा 12वीं की यश्वी केवाड़िया, मानसी वर्सानी और हस्ती सुराणी भी इसमें पास हुई हैं। मानसी के पिता प्रवीणभाई ने कहा कि वह अच्छे अंकों से पास हुई है, लेकिन अपना रिजल्ट देखने के लिए संसार में नहीं है। वह फैशन डिजाइनिंग में करिअर बनाना चाहती थी।

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