फैक्ट चेक / धोती-कुर्ता पहने बुजुर्ग को कपड़ों पर नहीं उतारा था रेलवे अधिकारी ने, वायरल हो रहा झूठा दावा

क्या फेक : आरक्षित टिकट होने के बावजूद महात्मा गांधी की तरह धोती-कुर्ता और चप्पल पहनने के कारण वृद्ध को कोच अटेंडेंट और पुलिस ने शताब्दी ट्रेन में चढ़ने से रोका
क्या सच : बुजुर्ग पावर कार में चढ़ने वाले थे, उन्हें उनके आरक्षित कोच में चढ़ने के लिए कहकर पावर कार में चढ़ने से मना किया गया था
फैक्ट चेक डेस्क. सोशल मीडिया पर इन दिनों एक बुजुर्ग व्यक्ति की तस्वीर के साथ कुछ न्यूज लिंक शेयर की जा रही है। दावा किया जा रहा है कि इटावा के रेलवे स्टेशन पर एक वृद्ध यात्री को शताब्दी ट्रेन से इसलिए उतार दिया गया क्योंकि उन्होंने महात्मा गांधी की तरह धोती-कुर्ता और पैरों में रबर की चप्पल पहने थे।

यूजर्स 1893 में महात्मा गांधी को दक्षिण अफ्रीका में ट्रेन से अश्वेत होने के कारण उतारे जाने की घटना को इस घटना से जोड़कर भारतीय रेलवे की आलोचना कर रहे हैं।

क्या वायरल

इटावा रेलवे स्टेशन और बुजुर्ग की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा जा रहा है, “धोती-कुर्ता-चप्पल पहनने के कारण बुजुर्ग को टीटीई ने शताब्दी ट्रेन से उतारा। सन 1893 में अंग्रेजों ने महात्मा गांधी को ट्रेन से उतारा था, अब कौन से अंग्रेज आ गए हैं।”
#धोती-कुर्ता-चप्पल पहने बुजुर्ग को TTE ने उतारा शताब्दी ट्रेन से!

सन् 1893 में महात्मा गांधी को दक्षिण अफ्रीका में सिर्फ इसलिए ट्रेन से उतार दिया गया था,
क्योंकि वो #अश्वेत थे।#आजादी के 73 साल बाद भी ऐसा हुआ हैं,
यूपी के इटावा में 72 साल के वृद्ध रामअवध दास के साथ। pic.twitter.com/EMKdhpv14S

— Sushil Kumar Singh (@SushilK96168392) July 6, 2019
ख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने भी अपने ट्विटर हैंडल रेल मंत्री पीयुष गोयल को टैग करते हुए पोस्ट लिखी है।
उन्होंने लिखा, “बेशर्म अभिजात्य साम्राज्यवाद के ऐसे वर्णसंकर अधिकारी मेरे टैक्स के पैसे से वेतन पा रहे हैं? सारी सरकार 2 मिनट में सौ बार पूज्य बापू बोलती है और हमारे घर के बुजुर्गों को ऐसे धकियाते हो जैसे अंग्रेजों ने रेल से उतारा था! वक्त से तो डरो।”
बेशर्म आभिजात्य साम्राज्यवाद के ऐसे वर्णसंकर रेल अधिकारी मेरे टैक्स के पैसे से वेतन पा रहे हैं @PiyushGoyal ? सारी सरकार 2मिनट में सौ बार “पूज्य बापू” बोलती है और हमारे घर के बुज़ुर्गों को ऐसे धकियाते हो जैसे अंग्रेज़ों ने रेल से उतारा था ! वक़्त से तो डरोhttps://t.co/AjEHkvpLfr

— Dr Kumar Vishvas (@DrKumarVishwas) July 7, 2019
डॉ. कुमार विश्वास की पोस्ट को 16 हजार से ज्यादा लाइक्स के साथ करीब 4 हजार बार रीट्वीट किया गया है।
क्यों फेक

वायरल तस्वीर में दिख रहे व्यक्ति बाराबंकी के रहने वाले 82 साल के राम अवध दास हैं। उन्होंने 4 जुलाई को गाड़ी नंबर 12033 में आरक्षित टिकट लिया हुआ था।
दास के अनुसार जब वे निर्धारित कोच में चढ़ने गए तो कोच अटेंडेंट और पुलिस द्वारा उन्हें गाड़ी में नहीं चढ़ने दिया गया। जिसके कारण उनकी गाड़ी छूट गई।
राम अवध दास द्वारा इटावा स्टेशन पर दी गई लिखित शिकायत में कहीं भी कपड़ो या चप्पल को आधार बनाकर ट्रेन पर ना चढ़ने देने की बात नहीं लिखी है।

रेलवे ने मामले की जांच कर रिपोर्ट पेश की है। जिसमें बताया गया है कि राम अवध दास ट्रेन में निश्चित कोच की बजाय पावर कार में चढ रहे थे। जिसके लिए आरपीएफ ने उन्हें आरक्षित कोच में जाने के लिए कहा।
ट्रेन इटावा में दो मिनट रुकती है, इसलिए अपने कोच तक पहुंचने से पहले ही ट्रेन स्टेशन से रवाना हो गई और दास की ट्रेन छूट गई।”
गौरतलब है कि ट्रेन के पावर कार में जनरेटर लगे होते हैं और इसी कारण रामअवध दास को उस कोच में चढ़ने की बजाय आरक्षित कोच में चढ़ने के लिए कहा गया था।
अन्य कोच तक पहुंचने में देर होने के कारण ट्रेन छूटने की बात राम अवध दास की लिखित शिकायत में भी लिखी है।
जांच रिपोर्ट में लिखा है कि शिकायतकर्ता को दूसरी ट्रेन से भेजने का प्रयास किया गया लेकिन वे सड़क मार्ग से चले गए।
पड़ताल से स्पष्ट है कि भारतीय रेलवे द्वारा वेशभूषा के आधार पर ट्रेन में ना चढ़ने देने का दावा झूठा है। आवेदक को पावर कार में चढ़ने से मना किया गया था।

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