फैक्ट चेक : भारत की नहीं है बुजुर्ग मुस्लिम का कॉलर पकड़ने की फोटो

  • क्या फेक : एक बुजुर्ग मुस्लिम की पुलिस जवान द्वारा कॉलर पकड़ते हुए फोटो। कहा जा रहा ‘ये पुलिस वाला नहीं बीजेपी का कुत्ता है’
  • क्या सच : न ही ऐसी कोई घटना भारत में हुई और न ही यह फोटो भारत की है

फैक्ट चेक डेस्क. चुनाव समाप्त हो गये लेकिन नफरत फैलाने का एजेंडा खत्म नही हुआ ! खासतौर पर मुसलमानों के बीच भाजपा के लिये नफरत का एजेंडा चलाने के लिये ज्यादा मेहनत की भी जरूरत नही होती ! बस दुनिया में कही भी मुसलमान जैसे दिखते किसी इंसान पर हिंसा होती फोटो काफी है इसके लिये\

सोशल मीडिया में एक तस्वीर वायरल हो रही है। इसमें एक पुलिस का एक जवान एक बुजुर्ग मुस्लिम की कॉलर पकड़ता नजर आ रहा है। इस फोटो को ऐसे वायरल किया जा रहा है जैसे यह बीजेपी द्वारा करवाया जा रहा हो। जबकि न ही यह घटना भारत की है और न ही यह फोटो। पड़ताल में इसकी सच्चाई पता चली।

क्या वायरल
फेसबुक पर एक यूजर ने इस पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा कि ‘ये पुलिस वाला नहीं बीजेपी का कुत्ता है’

फेसबुक पर यूजर्स इस फोटो को पोस्ट कर रहे हैं।

  • पोस्ट में यह भी लिखा है कि ‘तीन दिन के अंदर ये हाथ जोड़ता हुआ नजर आएगा अगर अच्छे से वायरल हुआ तो, अगर मुससमान हो अगर नबी की सुन्नत से प्यार करते हो तो सभी ग्रुप्स में शेयर करो ‘
  • इस यूजर की वॉल से इस पोस्ट को 10 हजार से भी ज्यादा बार शेयर किया गया है।

क्यों फेक

  • पड़ताल में पता चला कि यह 6 साल पुरानी फोटो भारत की नहीं बल्कि बांग्लादेश की है।
  • रिवर्स सर्च में पता चला कि यह घटना 2013 की है। तब बांग्लादेश के मीडिया संस्थानों ने इस फोटो को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। बंगाली भाषा में 14 फरवरी 2013 को इसे प्रकाशित किया गया।

बांग्लादेश में इस घटना को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। वहां के मीडिया संस्थानों ने लिखा था कि अपोजिशन और पुलिस के बीच विवाद होने से ऐसी स्थिति बनी।

बांग्लादेश के एक अन्य अखबार में उस समय छपी खबर। इससे स्पष्ट होता है कि इस फोटो को भारत का बताकर भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है।

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