‘फेक नैरैटिव’ वाले पत्रकारों-बुद्धिजीवियों पर सर्जिकल स्ट्राइक है अशोक श्रीवास्तव की किताब ‘नरेंद्र मोदी सेंसर्ड’

दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र सभागार में पिछले दिनों ‘नरेंद्र मोदी सेंसर्ड’ पुस्तक का विमोचन किया गया। इस पुस्तक को वरिष्ठ पत्रकार और डीडी न्यूज़ के एंकर अशोक श्रीवास्तव ने लिखा है। इस पुस्तक के लोकार्पण पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री राम बहादुर राय, भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक केजी सुरेश, विश्वंभर श्रीवास्तव और पुस्तक के प्रकाशक अनिल गुप्ता भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार ने किया।

‘नरेंद्र मोदी सेंसर्ड’ किताब को पत्रकारों, पत्रकारिता पढ़ रहे स्टूडेंट्स और आम नागरिकों के लिहाज से बेहद रोचक माना जा रहा है। इस किताब में अशोक श्रीवास्तव ने सीधे-सीधे उन पत्रकारों-बुद्धिजीवियों को चुनौती दी है, जो यह कहते हैं कि मोदी राज में देश में अघोषित आपातकाल है और पत्रकारों को काम करने की आज़ादी नहीं है l

अशोक श्रीवास्तव का दावा है कि यह ‘फेक नैरैटिव’ है और इसे साबित करने के लिए उन्होंने कई दिलचस्प तथ्य दिए हैं। साथ ही वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के उस इंटरव्यू को आधार बनाया है, जो उन्होंने दूरदर्शन के लिए किया था और जो 2014 के लोकसभा चुनावों का सबसे विवादित इंटरव्यू बन गया था l

पुस्तक में अशोक श्रीवास्तव ने बेहद सरल भाषा में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को किस प्रकार मीडिया से बहिष्कृत किया गया और उस दौर में कैसे चंद दिनों में 40 पत्रकारों को निकाल दिया गया, इत्यादि अन्य रोचक घटनाओं का वर्णन किया है।

कार्यक्रम में राम बहादुर राय ने पुस्तक की तारीफ़ में कहा कि यह पुस्तक पत्रकारों के लिए ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी बेहद रोचक और दिलचस्प है, जो सच्ची घटना पर उपन्यास की तरह आनंद देती है।

हरिवंश नारायण ने इसे सत्य का दस्तावेज़ करार दिया। वहीं, के.जी सुरेश ने पत्रकारों को आपातकाल की याद कराते हुए कहा कि आज के जो पत्रकार अघोषित इमरजेंसी की बात कर रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि आपातकाल के समय पत्रकारों से झुकने को कहा गया तो कई पत्रकार रेंगने लग गए थे। पत्रकारों के दफ़्तर में एक इंस्पेक्टर बैठा करता था, जिसकी बग़ैर अनुमति के एक शब्द भी छापना अपने पत्र/पत्रिका को बंद करवाने का न्यौता माना जाता था। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक दरअसल ‘फेक नैरैटिव’ खड़ा करने वाले पत्रकारों-बुद्धिजीवियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक हैl

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