प्रश्नकाल रोक हुई जहरीली शराब से मोतों पर  सदन में चर्चा,उचित मुआवजा व तत्काल राहत न मिलने पर विपक्ष का वाक आऊट

विपक्ष ने मांगा आबकारी मंत्री व मुख्यमंत्री का इस्तीफा, पंत की दुखद घटना पर राजनीति न करने की सीख
देहरादून। विधानसभा सत्र के दूसरे दिन आज विपक्ष कांग्रेस ने ने जहरीली शराब से हुई मौत पर जमकर हंगामा काटते हुये आबकारी मंत्री व का नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग की और कहा कि पीडित अनुसूचित जाति से हैं,इसलिये सरकार असंवेदनशील बनी हुई है । विपक्ष के हंगामे को देख विधानसभाध्यक्ष ने नियम 310 में जहरीली शराब के मुद्दे पर प्रश्नकाल स्थगित कर चर्चा कराई जिसमें सरकार की ओर से जवाब संतोषजनक न बताते हुए वेल में आकर हंगामा किया । अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही जारी रखी तो कांग्रेस विधायक दल ने सदन से वाक आऊट कर मंडप की सीढियों पर धरना दे दिया। विपक्ष दोपहर भोजन के बाद भी सदन में नही लौटा और राज्यपाल अभिभाषण पर चर्चा विपक्ष की अनुपस्थिति में ही हुई ।

विधानसभा बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में प्रश्नकाल शुरू होने के पहले ही विपक्ष के विधायक प्रीतम सिंह व नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर इन्दिरा हृदयेश ने प्रश्नकाल रोककर रूड़की के भगवान पुर में जहरीली शराब से हुई मौतों नियम 310 में चर्चा कराने की मांग उठाई। संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने कि कार्यवाही के बिंदु 22 में वे वक्तव्य देंगें जिस पर विपक्ष चर्चा कर सकता है । डॉक्टर ह्दयेश इसके लिये नही मानी तो अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने नोटिस के ग्राह्यता पर सुनने की बात कही जिसमें डॉक्टर ह्दयेश ने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में एक सौ अधिक लोगों की जहरीली शराब पीने से मौत होने पर भी सरकार नही जागी । इसी से मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री तो छोडिये कोई बड़ा सरकारी अधिकारी तक मौके पर नही पहुंचा। यहां तक कि गरीब पीडितों को न अंतिम संस्कार और न ही उपचार में मदद मिली । वहां पिता-पुत्र तक की अर्थी उठी है। उनके घरों में न कुछ खाने को है,न बर्तन हैं,न राशन । उन्हांने कहा कि छोटे कर्मचारियों को दंडित कर बड़े अफसरों को बचाया गया। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि विभाग और पुलिस को क्षेत्र में चल रही कच्ची शराब की भट्टियों की जानकारी पहले से थी वरना दुर्घटना के तत्काल बाद अभियान क्यों चल गया ? क्या अफसर मौतों की प्रतीक्षा कर रहे थे ? उन्होने कहा कि सरकार का कोई नियंत्रण ही नही है। उन्होने पीडितों को तत्काल आर्थिक सहायता की मांग करते हुए कहा कि दो लाख रूपये तो विसरा की जांच के बाद मिलनी है ! तब तक पीडित क्या करेंगें ?
क्षेत्रीय विधायक ममता राकेश ने कहा कि जिस नानू की तेरहवीं थी,उसके दो दामादों की भी जहरीली शराब से मौत हो गई है। एक ऐसी लडकी के पति की मौत हो गई जिसकी छह माह पहले हुई शादी में वे शामिल हुई थी । लोगों ने लाशें और मरीज मोटर साईकिलों से ढाये । एक चंद्र मोहन ने उनके सामने दम तोडा । मैने अफसरों से अंतिम संस्कार में मदद मांगी तो अफसरों ने सरकारी आदेश न होने की बात कह दी । मौतें इतनी बडी संख्या में हुई कि उन्होने कहा कि लागों की आंखों की रोशनी चली गई और किडनी खराब हो गई तो ऐसे में 50 हजार रूपये से क्या होगा ? ममता राकेश ने प्रभावित विधवाओं को आंगनवाडियों में जगह देने की मांग की ।
प्रीतम सिंह ने कहा कि अगले दिन अपने रूडकी दौरे की बताते हुए कहा कि उनके तीन घंटे बाद जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पहुंचे। हालांकि बीच में सत्तारूढ दल के प्रदीप बतरा ने कहा कि वे उनके भी पहले अफसरों के साथ रूडकी ट्रामा सेंटर पहुंचे हुए थे लेकिन विपक्ष ने कहा कि राहत तो मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री ही दे सकते थे । उन्होने कहा कि 36 लोगों की मौत और 83 लोग जीवन मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं । उन्होने कहा कि विधायक ममता राकेश और वैध ठेके वालों ने विभाग को अवैध शराब की सूचना दी थी लेकिन कोई कार्रवाई नही की गई । सात फरवरी को घटना हुई लेकिन सरकार ने एसआईटी तक 11 को एसआईटी की घोषणा की जब हमने विधानसभा में नोटिस दिया । उन्होने सरकार में समन्वय न होने का आरोप लगाते हुए कहा कि 10 फरवरी को हरिद्वार और सहारनपुर के एसएसपी ने संयुक्त पत्रकार वार्ता कर बताया कि जहरीली शराब सहारनपुर से आई जबकि अगले दिन हरिद्वार एसएसपी ने बताया कि जहरीली शराब तेजूपुर में तैयार हुई । उधर, आबकारी निरीक्षक संघ ने पत्र लिखकर शिकायत की है कि उनके पास वाहन और सुरक्षा नही है। विपक्ष के अन्य विधायकों गोविन्द सिंह कुंजवाल, करण माहरा,राजकुमार, आदेश चौहान, हरीश धामी, मनोज रावत ने भी सरकार की आलोचना की !
उत्तराखंड विधानसभा सत्र में दूसरी बार नियम 310 के तहत चर्चा हो रही है. इससे पहले 2013 की आपदा के दौरान 310 के तहत चर्चा की गई थी.

कच्ची शराब बेचने वालों की अब आसानी से न होगी जमानत
,बनेगा एक सदस्यीय आयोग

देहरादून। आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने काम रोको प्रस्ताव का जवाब देते हुए सदन में कहा कि सरकार कच्ची शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए आबकारी अधिनियम धारा में इसी सत्र में परिवर्तन किया जायेगा ताकि दोषियों की जमानत आसानी न हो। अभी तक धारा 60 में आसानी से बेल मिल जाती थी ! उन्होने बताया कि जिस बालूपुर गांव में यह घटना हुई है वहां 2016 से अब तक 40 मुकदमें दर्ज हैं लेकिन जमानत आसानी से हो जाती है। और अपराधी बार कच्ची शराब का कारोबार करते रहते थे। उन्होने बताया कि सरकार कच्ची शराब प्रकरण पर एसआईटी से उच्च स्तरीय जांच कराकर आगे की कार्यवाही करेगी। शराब की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए विपक्ष के बताये बिन्दुओं के प्रकाश में सामाजिक जागरूकता अभियान भी चलाया जायेगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने घोषित की सदन की संयुक्त समिति
देहरादून। हरिद्वार की जहरीली शराब से तीन दर्जन मौतों की घटना पर सदन में चर्चा के बाद विपक्ष के आग्रह पर विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की एक संयुक्त समिति बनाने की घोषणा की है जो घटनास्थल का स्थलीय निरीक्षण कर सरकार को आगे कदम उठाने को सुझाव देगी । उन्होने समिति के सदस्यों ने नाम बाद में घोषित किये जाने की बात कही है।
नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर इन्दिरा हृदयेश कहा कि उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में कई बार विधानसभा पीठ ने सरकार को ऐसे निर्देश दिये हैं जो इतिहास का हिस्सा बन गये हैं ।

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