प्रमुख क्रान्तिकारी, लेखक मन्मथनाथ गुप्त का जन्म तथा प्रसिद्ध क्रांतिकारी शचीन्द्रनाथ सान्याल का निधन हुआ था आज

7 फ़रवरी का इतिहास

7 फरवरी का दिन इतिहास का बेहद महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि इसी दिन पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को 2009 में डी. लिट् की उपाधि से नवाजा गया, इसके अलावा इतिहास में कई ऐसी घटनाएं घटित हुई, जो हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गईं।इसके अलावा 7 फरवरी के दिन भारत के मशहूर  बैंडमिंटन खिलाड़ी किदम्बी श्रीकांत समेत तमाम ऐसे व्यक्तियों ने जन्म लिया जिन्होंने दुनिया में आकर बड़ा नाम किया, इसके अलावा कई दिग्गज लोग इसी दिन इस दिन को अलविदा भी कह गए।

7 February History

  • प्रुशिया एवं आस्ट्रेलिया ने 1792 में फ़्रांस के ख़िलाफ़ एक समझौते पर हस्ताक्षर किये।
  • यूरोपीय देश बेल्जियम ने 1831 में संविधान स्वीकार किया।
  • अमेरिका के बाल्टिमोर में 1904 में जबरदस्त आग लगने से पन्द्रह सौ इमारतें जल कर खाक।
  • चलती ट्रेन से 1915 में पहली बार भेजा गया वायरलेस संदेश रेलवे स्टेशन को प्राप्त हुआ।
  • ब्रिटेन में रेलवे का राष्ट्रीयकरण 1940 में हुआ।
  • यूनाइटेड किंगडम ने थाईलैंड के खिलाफ युद्ध की घोषणा 1942 में की।
  • अमेरिका, ब्रिटेन, और रूस ने 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण पर चर्चा की।
  • अरब और यहूदियों ने 1947 में फिलीस्तीन को विभाजित करने के ब्रिटेन के प्रस्ताव को खारिज किया।
  • क्यूबा से सभी तरह के आयात पर अमेरिका ने 1962 में रोक लगाई।
  • जर्मनी की एक कोयला खदान में 1962 में हुए विस्फोट से लगभग 300 मज़दूरों की जान गयी।
  • अमेरिका ने 1965 में उत्तरी वियतनाम में लगातार हवाई हमले शुरु किये।
  • 1983 में कोलकाता में ईस्टर्न न्यूज एजेंसी की स्थापना।
  • जापान द्वारा 1987 में अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस (ए.एन.सी) को मान्यता।
  • 1999 में जार्डन के शाह हुसैन की मौत, अब्दुला नये शाह बने।
  • वाशिंगटन में भारत और अमेरिका के बीच गठित संयुक्त विरोधी दल की पहली बैठक 7 फरवरी , 2000 को शुरु हुई ।
  • एरियल शेरोन 7 फरवरी, 2001 में इजरायल के प्रधानमंत्री  ।
  • फ्रांस के प्रधानमंत्री ज्यां पियरे रैफरिन 7 फरवरी, 2003 में भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे।
  • नेपाल में स्थानीय निकायों के लिए 7 फरवरी , 2006 में वोटिंग हुई
  • इक्वाडोर का तंगुराही ज्वालामुखी 7 फरवरी, 2008 को फटा।
  • महाराष्ट्र के राज्यपाल एससी जमीर ने 2009 में स्वतंत्र भारत की 12वी तथा पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को डी॰ लिट् की उपाधि से नवाजा।
  • दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित 19वां अंतराष्ट्रीय पुस्तक मेला 7 फरवरी, 2010 को खत्म हुआ। मेला 9 दिनों तक चला जिसमें करीब 2 हजार प्रकाशकों ने हिस्सा लिया।
  • उत्तरी कोरिया ने कई संयुक्त राष्ट्र संधियों का उल्लंघन करते हुए 7 फरवरी, 2016 को बाह्रा अंतरिक्ष में सैटेलाइट लॉन्च किया था।

7 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति

7 फरवरी के दिन कई अहम दिग्गज व्यक्तियों ने जन्म लिया, जिन्होंने दुनिया में आकर बड़ा नाम किया

  • डॉ. भीमराव आम्बेडकर की पत्नी रमाबाई आम्बेडकर का जन्म सन 1898 में हुआ।
  • प्रमुख क्रान्तिकारी तथा लेखक मन्मथनाथ गुप्त का जन्म सन 1908 में हुआ। मन्मथनाथ गुप्त (जन्म: ७ फ़रवरी १९०८ – मृत्यु: २६ अक्टूबर २०००) भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रान्तिकारी तथा सिद्धहस्त लेखक थे। उन्होंने हिन्दी, अंग्रेजी तथा बांग्ला में आत्मकथात्मक, ऐतिहासिक एवं गल्प साहित्य की रचना की है। वे मात्र १३ वर्ष की आयु में ही स्वतन्त्रता संग्राम में कूद गये और जेल गये। बाद में वे हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के सक्रिय सदस्य भी बने और १७ वर्ष की आयु में उन्होंने सन् १९२५ में हुए काकोरी काण्ड में सक्रिय रूप से भाग लिया। उनकी असावधानी से ही इस काण्ड में अहमद अली नाम का एक रेल-यात्री मारा गया जिसके कारण ४ लोगों को फाँसी की सजा मिली जबकि मन्मथ की आयु कम होने के कारण उन्हें मात्र १४ वर्ष की सख्त सजा दी गयी। १९३७ में जेल से छूटकर आये तो फिर क्रान्तिकारी लेख लिखने लगे जिसके कारण उन्हें १९३९ में फिर सजा हुई और वे भारत के स्वतन्त्र होने से एक वर्ष पूर्व १९४६ तक जेल में रहे । स्वतन्त्र भारत में वे योजना, बाल भारती और आजकल नामक हिन्दी पत्रिकाओं के सम्पादक भी रहे। नई दिल्ली स्थित निजामुद्दीन ईस्ट में अपने निवास पर २६ अक्टूबर २००० को दीपावली के दिन उनका जीवन-दीप बुझ गया।मन्मथनाथ गुप्त का जन्म ७ फ़रवरी सन् १९०८ ई. को वाराणसी में हुआ। उनके पितामह (दादा जी) आद्यानाथ गुप्त बंगाल छोडकर सन् १८८० में ही हुगली से बनारस आ गये थे। मन्मथनाथ के पिता वीरेश्वर गुप्त पहले नेपाल के विराट नगर में प्रधानाध्यापक थे बाद में वे बनारस आ गये। मन्मथ की पढाई-लिखाई दो वर्ष तक नेपाल में हुई फिर उसे काशी विद्यापीठ में दाखिल करा दिया गया।

    कच्ची आयु में ही क्रान्तिकारी

    वे क्रान्तिकारी आन्दोलन के एक क्रियाशील सदस्य रहे, जिन दिनों की चर्चा बाद में उन्होंने अपनी पुस्तक ‘क्रान्तियुग के संस्मरण’ (प्रकाशन वर्ष: 1937 ई0) में की है। वे संस्मरण इतिहास के साथ-साथ अकाल्पनिक गद्य-शैली के अच्छे नमूने भी हैं। आपने क्रान्तिकारी आन्दोलन का एक विधिवत इतिहास भी प्रस्तुत किया है – भारत में सशस्त्र क्रान्तिकारी चेष्टा का इतिहास (प्रकाशन वर्ष:1939 ई.)।

    साहित्यिक अवदान

    गुप्त जी ने साहित्य की विभिन्न विधाओं में लिखा है। आपके प्रकाशित ग्रन्थों की संख्या 80 के लगभग है। कथा साहित्य और समीक्षा के क्षेत्र में आपका कार्य विशेष महत्व का है। बहता पानी (प्रकाशन वर्ष: 1955 ई.) उपन्यास क्रान्तिकारी चरित्रों को लेकर चलता है। समीक्षा-कृतियों में कथाकार प्रेमचंद (प्रकाशन वर्ष: 1946ई.), प्रगतिवाद की रूपरेखा (प्रकाशन वर्ष: 1953 ई.) तथा साहित्य, कला, समीक्षा (प्रकाशन वर्ष: 1954 ई.) की अधिक ख्याति हुई हैं।

    प्रमुख पुस्तकें

    मन्मथ जी की जो पुस्तकें चर्चा में रहीं उनके नाम इस प्रकार हैं

    • They Lived Dangerously – Reminiscences of a Revolutionary (मूलत: अंग्रेजी में 1969 का संस्करण)
    • भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन का इतिहास (संशोधित संस्करण:1993)
    • History of the Indian Revolutionary Movement (उपरोक्त पुस्तक के 1972 वाले संस्करण का अविकल अंग्रेजी अनुवाद)
    • Gandhi and His Times (1982)
    • Bhagat Singh and His Times (मूलत: अंग्रेजी में)
    • आधी रात के अतिथि
    • कांग्रेस के सौ वर्ष
    • दिन दहाड़े
    • सर पर कफन बाँध कर
    • तोड़म फोड़म
    • अपने समय का सूर्य:दिनकर
    • शहादतनामा

    मनोविश्लेषण में रुचि

    मनोविश्लेषण में आपकी काफ़ी रुचि रही है। आपके कथा-साहित्य और समीक्षा दोनों में ही मनोविश्लेषण के सिद्धांतों का आधार ग्रहण किया गया है। काम से संबंधित आपकी कई कृतियाँ भी हैं, जिनमें से ‘सेक्स का प्रभाव’ (प्रकाशन वर्ष: 1946 ई.) विशेष रूप से उल्लेखनीय है। बाद में वे भारत सरकार के प्रकाशन विभाग से भी सम्बद्ध रहे और आजकल पत्रिका का सम्पादन किया।

    भारत और विश्व साहित्य संगोष्ठी में शिरकत

    विज्ञान भवन, नई दिल्ली में “भारत और विश्व साहित्य पर प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी” में मन्मथनाथ गुप्त भी उपस्थित थे। एक भारतीय प्रतिनिधि ने जब उनके नेता राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ पर कलम और पिस्तौल के पुरोधा – पं० रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ शीर्षक से एक शोधपत्र प्रस्तुत किया तो मन्मथ जी बहुत खुश हुए और उन्होंने उसे शाबाशी देते हुए कहा – “क्रान्त जी ने तो आज साहित्यकारों की संसद में भगत सिंह की तरह विस्फोट कर दिया!”

  • भोजपुरी और हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता सुजीत कुमार का जन्म सन 1934 में हुआ।
  • मार्क्सवादी नेता एस. रामचंद्रन पिल्लै का जन्म सन 1938 में हुआ।
  • भारतीय अभिनेत्री अंकिता शर्मा का 7 फरवरी साल 1987 में जन्म हुआ।
  • अभिनेत्री प्राची शाह का 7 फरवरी, 1980 को जन्म हुआ।
  • भारत के प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी किदम्बी श्रीकान्त का जन्म सन 1993 में हुआ।

7 फ़रवरी को हुए निधन

7 फरवरी के दिन ही कई मशहूर शख्सियत इस दुनिया को अलविदा कह गई

 1942 में भारत के प्रसिद्ध क्रांतिकारी शचीन्द्रनाथ सान्याल का निधन।

शचींद्रनाथ सान्याल Image result for शचींद्रनाथ सान्याल(जन्म 1893, वाराणसी में – मृत्यु 1942, गोरखपुर में) क्वींस कालेज (बनारस) में अपने अध्ययनकाल में उन्होंने काशी के प्रथम क्रांतिकारी दल का गठन 1908 में किया। 1913 में फ्रेंच बस्ती चंदननगर में सुविख्यात क्रांतिकारी रासबिहारी बोस से उनकी मुलाकात हुई। कुछ ही दिनों में काशी केंद्र का चंदननगर दल में विलय हो गया ओर रासबिहारी काशी आकर रहने लगे।

क्रमशः काशी उत्तर भारत में क्रांति का केंद्र बन गई। 1914 में प्रथम महायुद्ध छिड़ने पर सिक्खों के दल ब्रिटिश शासन समाप्त करने के लिए अमरीका और कनाडा से स्वदेश प्रत्यावर्तन करने लगे। रासबिहारी को वे पंजाब ले जाना चाहते थे। उन्होंने शचींद्र को सिक्खों से संपर्क करने, स्थिति से परिचित होने और प्रारंभिक संगठन करने के लिए लुधियाना भेजा। कई बार लाहौर, लुधियाना आदि होकर शचींद्र काशी लौटे और रासबिहारी लाहौर गए। लाहौर के सिक्ख रेजिमेंटों ने 21 फ़रवरी 1915 को विद्रोह शुरू करने का निश्चय कर लिया। काशी के एक सिक्ख रेजिमेंट ने भी विद्रोह शुरू होने पर साथ देने का वादा किया।

योजना विफल हुई, बहुतों को फाँसी पर चढ़ना पड़ा और चारों ओर घर पकड़ शुरू हो गई। रासबिहारी काशी लौटे। नई योजना बनने लगी। तत्कालीन होम मेंबर सर रेजिनाल्ड क्रेडक की हत्या के आयोजन के लिए शचींद्र को दिल्ली भेजा गया। यह कार्य भी असफल रहा। रासबिहारी को जापान भेजना तय हुआ। 12 मई 1915 को गिरजा बाबू और शचीन्द्र ने उन्हें कलकत्ते के बंदरगाह पर छोड़ा। दो तीन महीने बाद काशी लौटने पर शचींद्र गिरफ्तार कर लिए गए। लाहौर षड्यंत्र मामले की शाखा के रूप में बनारस पूरक षड्यंत्र केस चला और शचींद्र को आजन्म कालेपानी की सजा मिली।

युद्धोपरांत शाही घोषणा के परिणामस्वरूप फरवरी, 1920 में वारींद्र, उपेंद्र आदि के साथ शचींद्र रिहा हुए। 1921 में नागपुर कांग्रेस में राजबंदियों के प्रति सहानुभूति का एक संदेश भेजा गया। विषय-निर्वाचन-समिति के सदस्य के रूप में शचींद्र ने इस प्रस्ताव का अनुमोदन करते हुए एक भाषण किया।

क्रांतिकारियों ने गांधी जी को सत्याग्रह आंदोलन के समय एक वर्ष तक अपना कार्य स्थगित रखने का वचन दिया था। चौरी चौरा कांड के बाद सत्याग्रह वापस लिए जाने पर, उन्होंने पुन: क्रांतिकारी संगठन का कार्य शुरू कर दिया। 1923 के प्रारंभ में रावलपिंडी से लेकर दानापुर तक लगभग 25 केंद्रों की उन्होंने स्थापना कर ली थी। इस दौरान लाहौर में तिलक स्कूल ऑव पॉलिटिक्स के कुछ छात्रों से उनका संपर्क हुआ। इन छात्रों में सरदार भगत सिंह भी थे। भगतसिंह को उन्होंने दल में शामिल कर लिया और उन्हें कानपुर भेजा। इसी समय उन्होंने कलकत्ते में यतींद्र दास को चुन लिया। यह वही यतींद्र हैं, जिन्होंने लाहौर षड्यंत्र केस में भूख हड़ताल से अपने जीवन का बलिदान किया। 1923 में ही कौंसिल प्रवेश के प्रश्न पर दिल्ली में कांग्रेस का विशेष अधिवेशन हुआ। इस अवसर पर शचींद्र ने देशवासियों के नाम एक अपील निकाली, जिसपर कांग्रेस महासमिति के अनेक सदस्यों ने हस्ताक्षर किए। कांग्रेस से अपना ध्येय बदलकर पूर्ण स्वतंत्रता लिए जाने का प्रस्ताव था। इसमें एशियाई राष्ट्रों के संघ के निर्माण का सुझाव भी दिया गया। अमेरिकन पत्र ‘न्यू रिपब्लिक’ ने अपीलल ज्यों की त्यों छाप दी, जिसकी एक प्रति रासबिहारी ने जापान से शचींद्र को भेजी। इस अधिवेशन के अवसर पर ही कुतुबद्दीन अहमद उनके पास मानवेंद्र राय का एक संदेश ले आए, जिसमें उन्हें कम्युनिस्ट अंतरराष्ट्रीय संघ की तीसरी बैठक में शामिल होने को आमंत्रित किया गया था।

इसके कुछ ही दिनों बाद उन्होंने अपने दल का नामकरण किया ‘हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’। उन्होंने इसका जो संविधान तैयार किया, उसका लक्ष्य था सुसंगठित और सशस्त्र क्रांति द्वारा भारतीय लोकतंत्र संघ की स्थापना। कार्यक्रम में खुले तौर पर काम और गुप्त संगठन दोनों शामिल थे। क्रांतिकारी साहित्य के सृजन पर विशेष बल दिया गया था। समाजवादी व्यवस्था की स्थापना के बारे में भी इसमें प्रचुर इंगित था। संविधान के शब्दों में ‘इस प्रजातंत्र संघ में उन सब व्यवस्थाओं का अंत कर दिया जाएगा जिनसे किसी एक मनुष्य द्वारा दूसरे का शोषण हो सकने का अवसर मिल सकता है।’ विदेशों में भारतीय क्रांतिकारियों के साथ घनिष्ठ संबंध रखना भी कार्यक्रम का एक अंग था। बेलगाँव कांग्रेस के अधिवेशन में गांधी जी ने क्रांतिकारियों की जो आलोचना की थी, उसके प्रत्युत्तर में शचींद्र ने महात्मा जी को एक पत्र लिखा। गांधी जी ने यंग इंडिया के 12 फ़रवरी 1925 के अंक में इस पत्र को ज्यों का त्यों प्रकाशित कर दिया और साथ ही अपना उत्तर भी।

लगभग इसी समय सूर्यकांत सेन के नेतृत्व में चटगाँव दल का, शचींद्र के प्रयत्न से, हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से संबंध हो गया। शचींद्र बंगाल आर्डिनेंस के अधीन गिरफ्तार कर लिए गए। उनकी गिरफ्तारी के पहले ‘दि रिह्वलूशनरी’ नाम का पर्चा पंजाब से लेकर वर्मा तक बँटा। इस पर्चे के लेखक और प्रकाशक के रूप में बाँकुड़ा में शचींद्र पर मुकदमा चला और राजद्रोह के अपराध में उन्हें दो वर्ष के कारावास का दंड मिला। कैद की हालत में ही वे काकोरी षडयत्रं केस में शामिल किए गए और संगठन के प्रमुख नेता के रूप में उन्हें पुन: अप्रैल, 1927 में आजन्म कारावास की सजा दी गई।Image result for शचींद्रनाथ सान्याल

1937 में संयुक्त प्रदेश में कांग्रेस मंत्रिमंडल की स्थापना के बाद अन्य क्रांतिकारियों के साथ वे रिहा किए गए। रिहा होने पर कुछ दिनों वे कांग्रेस के प्रतिनिधि थे, परंतु बाद को वे फारवर्ड ब्लाक में शामिल हुए। इसी समय काशी में उन्होंने ‘अग्रगामी’ नाम से एक दैनिक पत्र निकाला। वह स्वयं इसस पत्र के संपादक थे। द्वितीय महायुद्ध छिड़ने के कोई साल भर बाद 1940 में उन्हें पुन: नजरबंद कर राजस्थान के देवली शिविर में भेज दिया गया। वहाँ यक्ष्मा रोग से आक्रांत होने पर इलाज के लिए उन्हें रिहा कर दिया गया। परंतु बीमारी बढ़ गई और 1942 में उनकी मृत्यु हो गई।

क्रांतिकारी आंदोलन को बौद्धिक नेतृत्व प्रदान करना उनका विशेष कृतित्व था। उनका दृढ़ मत था कि विशिष्ट दार्शनिक सिद्धांत के बिना कोई आंदोलन सफल नहीं हो सकता। ‘विचारविनिमय’ नामक अपनी पुस्तक में उन्होंने अपना दार्शनिक दृष्टिकोण किसी अंश तक प्रस्तुत किया है। ‘साहित्य, समाज और धर्म’ में भी उनके अपने विशेष दार्शनिक दृष्टिकोण का ओर प्रबल धर्मानुराण का भी परिचय मिलता है।

  • 2010 में पंजाबी के प्रसिद्ध आलोचक डा. टी आर विनोद का निधन।

फरवरी के महत्वपूर्ण उत्सव

फरवरी को प्रेम का महीना कहा जाता है, वहीं 7 फरवरी से ही वैलेंटाइन डे वीक की शुरुआत होती है ! आइए जानते हैं 7 फरवरी को किन-किन उत्सवों के रुप में मनाया जाता है।

  • रोज डे
  • वन अग्नि सुरक्षा ( सप्ताह )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *