प्रतिस्पर्धिता सूचकांक: 10 अंक फिसला भारत,ब्रिक्स देशों में सबसे खराब प्रदर्शन वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल

आईएमएफ प्रमुख ने कहा- दुनिया की 90 फीसद अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका, भारत पर भी असर
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के सालाना वैश्विक प्रतिस्पर्धिता सूचकांक में भारत 68वें स्थान पर है. मंच ने कहा है कि कि वृहद आर्थिक स्थिरता और बाजार के आकार के मामले में भारत की रैंकिंग अच्छी है. लेकिन कुछ क्षेत्रों में भारत का प्रदर्शन खराब रहा है.
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: : अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टलीना जॉर्जिवा ने दुनिया भर में मंदी की आशंका जताई है. उन्होंने कहा कि ट्रेड वॉर वैश्विक अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं.अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि देशों के बीच व्यापार विवाद (ट्रेड वॉर) वैश्विक अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं. आईएमएफ की प्रबंध निदेशक के तौर पर अपने पहले संबोधन में क्रिस्टलीना जॉर्जिवा ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर दशक के सबसे निचले स्तर पर आने की आशंका है. उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था का भी जिक्र किया.
जॉर्जिवा ने कहा, ”भारत और ब्राजील जैसी बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में नरमी का असर अधिक ही देखने को मिल रहा है. चीन की आर्थिक वृद्धि दर भी धीरे-धीरे गिर रही है.” उन्होंने कहा कि शोध दिखाते हैं कि व्यापार विवादों का प्रभाव व्यापक है और देशों को अर्थव्यवस्था में नकदी डालने के साथ एकरूपता से प्रतिक्रिया करने के लिए तैयार रहना चाहिए.
जॉर्जिवा ने कहा कि करीब 40 उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर पांच प्रतिशत से अधिक रहेगी. जियॉर्जिएवा ने कहा कि अमेरिका और जर्मनी में बेरोजगारी की दर ऐतिहासिक निचले स्तर पर है. इसके बाद भी अमेरिका और जापान समेत यूरोप की विकसित अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक गतिविधियों में नरमी देखने को मिल रही है.
उन्होंने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था के सामने एक और बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन है. इसके समाधान के लिए उन्होंने कार्बन कर बढ़ाए जाने का आह्वान भी किया. अगले हफ्ते आईएमएफ-विश्वबैंक की सालाना बैठकें शुरू होनी हैं.
जॉर्जिवा ने कहा, ”दुनिया की 90 फीसद अर्थव्यवस्था के 2019 में मंदी के चपेट में आने की आशंका है. वैश्विक अर्थव्यवस्था वर्तमान में एक ही समय में कई कारकों की वजह (सिंक्रोनाइज्ड) से नरमी से गुजर रही है.’’ उन्होंने कहा कि इस व्यापक घोषणा का अर्थ है कि दुनिया की वृद्धि दर इस दशक की शुरुआत के बाद से अपने सबसे निचले स्तर तक पहुंच जाएगी.
जॉर्जिवा ने कहा कि आईएमएफ चालू और अगले वर्ष के लिए अपने वृद्धि दर अनुमान को घटा रहा है. हालांकि इसके आधिकारिक संशोधित आंकड़े वह 15 अक्टूबर को जारी करेगा. पहले आईएमएफ ने 2019 में वैश्विक वृद्धि दर 3.2 प्रतिशत और 2020 में 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था.
प्रतिस्पर्धिता सूचकांक: 10 अंक फिसला भारत,ब्रिक्स देशों में सबसे खराब प्रदर्शन वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल
वैश्विक प्रतिस्पर्धिता सूचकांक (Global Competitive Index) में भारत 10 स्थान फिसलकर 68वें स्थान पर आ गया है. जिनेवा स्थित विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) के सालाना वैश्विक प्रतिस्पर्धिता सूचकांक में भारत पिछले साल 58वें स्थान पर रहा था.
भारत इस साल ब्रिक्स देशों में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में एक है. विश्व आर्थिक मंच ने बुधवार को कहा कि वृहद आर्थिक स्थिरता और बाजार के आकार के मामले में भारत की रैंकिंग अच्छी है. वित्तीय क्षेत्र भी स्थिर है, लेकिन चूक की दर अधिक होने से बैंकिग प्रणाली प्रभावित हुई है.
सूचकांक के अनुसार, भारत का स्थान कंपनी संचालन के मामले में 15वां, शेयरधारक संचालन में दूसरा और बाजार आकार और अक्षय ऊर्जा नियमन में तीसरा रहा. नई खोज के मामले में भी भारत का प्रदर्शन अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर रहा और विकसित देशों के बराबर रहा.
हालांकि सूचना, संचार एवं प्रौद्योगिकी (आईसीटी) को अपनाने में खराब प्रदर्शन, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा क्षेत्र की खराब स्थिति और स्वस्थ जीवन की संभावना की खराब दर ने कई क्षेत्रों में अच्छे प्रदर्शन के असर को सीमित कर दिया. स्वस्थ जीवन की संभावना के मामले में भारत का स्थान 109वां रहा. यह अफ्रीका के बाहर के देशों में सबसे खराब में से एक है.
मंच ने कहा कि भारत में पुरुष कामगारों की तुलना में महिला कामगारों का अनुपात 0.26 है. इस मामले में भारत का स्थान 128वां रहा. प्रतिस्पर्धिता की रैंकिंग में भारत के बाद श्रीलंका 84वें, बांग्लादेश 105वें, नेपाल 108वें और पाकिस्तान 110वें स्थान पर रहा.
अध्ययन में कहा गया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था आर्थिक नरमी के लिये तैयार नहीं है. प्रतिस्पर्धिता रैंकिंग में सिंगापुर ने अमेरिका को हटाकर शीर्ष स्थान हासिल कर लिया. इसके बाद दूसरे स्थान पर अमेरिका, तीसरे पर हांग कांग, चौथे पर नीदरलैंड और पांचवें पर स्विट्जरलैंड रहा. ब्रिक्स देशों में चीन की स्थिति सबसे अच्छी रही और वह 28वें स्थान पर रहा.

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