पुण्य स्मृतिःदो बार पीएम बनते-बनते रह गये जगजीवन राम की पारी खत्म की बेटे की नंगी तस्वीरों ने

अपने बेटे सुरेश राम जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम के लिए इमेज परिणामकी न्यूड तस्वीरों के चलते जगजीवन राम का प्रधानमंत्री बनने का सपना हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो गया.बाबू जगजीवन राम की राजनीतिक विरासत आज कांग्रेस पार्टी के नेताओं के लिए अचानक उपयोगी दिखाई देने लगी है. जब बीजेपी ने राष्ट्रपति पद के लिए दलित वर्ग से जुड़े नेता को अपना उम्मीदवार बनाया तो कांग्रेस पार्टी को जगजीवन राम की याद आई और उनकी बेटी मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया. अपने जीवन के अंतिम सालों में जगजीवन राम चाहते थे कि वो फिर से कांग्रेस पार्टी में शामिल हों, लेकिन इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को यह स्वीकार नहीं था.  ये नेता दो बार बन सकता था पीएम, लेकिन बेटे की कुछ तस्वीरों के चलते खत्म हो गई पॉलिटिक्सजगजीवन राम

आजादी के आंदोलन के दौरान जिन नेताओं ने भारत के भविष्य को गढ़ने में ऐतिहासिक योगदान दिया, उनमें बाबू जगजीवन राम का नाम अगली पंक्ति में शामिल है. आज भी उनके जिक्र के साथ 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की याद आना स्वाभाविक है. एक सफल रक्षा मंत्री के तौर पर बाबू जगजीवन राम ने पाकिस्तान को बुरी तरह परास्त करने में बड़ी भूमिका निभाई थी.
मटका फोड़ दलितों से भेदभाव का विरोध किया
दलित समुदाय से होने के कारण उनको बचपन से ही सामाजिक भेदभाव और छुआछूत का शिकार होना पड़ा. बिहार के आरा के जिस स्कूल में वो पढ़ते थे, वहां हिंदू और मुसलमान छात्रों के लिए पीने के पानी के अलग-अलग मटके रखे जाते थे. जब दलित समुदाय के छात्रों ने हिंदू छात्रों के लिए रखे मटके से पानी पिया तो कथित ऊंची जाति के छात्रों ने उसका विरोध किया. स्कूल के प्रिंसिपल ने दलितों के लिए एक और मटका रखवा दिया. छात्र जगजीवन राम ने दलितों के लिए रखे मटके को फोड़कर अपना विरोध प्रकट किया. अंत में प्रिंसिपल ने तीसरा मटका न रखने का निर्णय लिया. स्कूल की इस घटना ने बाबू जगजीवन राम के राजनीतिक जीवन की दिशा तय कर दी.
बीएचयू में भी बने भेदभाव का शिकार
एक बार जब बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संस्थापक मदन मोहन मालवीय 1925 में आरा के इस स्कूल में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए तो मदन मोहन मालवीय जगजीवन राम के लिए इमेज परिणामजगजीवन राम की भाषण कला से काफी प्रभावित हुए. फर्स्ट डिविजन में मैट्रिक पास करने के बाद जगजीवन राम ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में दाखिला लिया. यहां भी जगजीवन राम को सामाजिक भेदभाव और छुआछूत का शिकार होना पड़ा. यहां तक कि नाई ने उनके बाल काटने से मना कर दिया. जगजीवन राम ने विश्वविद्यालय में होने वाले इस भेदभाव के खिलाफ पीड़ितों को एकजुट कर विरोध प्रकट किया.
बांग्लादेश के निर्माण के वक्त थे रक्षामंत्री
जगजीवन राम के पिताजी ब्रिटिश आर्मी से रिटायर होने के बाद शिव नारायणी संप्रदाय के महंत हो गए थे. बाबू जगजीवन राम भी हिंदू महासभा के सदस्य थे. हिंदू महासभा के माध्यम से जगजीवन राम छुआछूत और सामाजिक भेदभाव को खत्म करना चाहते थे. बांग्लादेश के निर्माण के वक्त जगजीवन राम रक्षा मंत्री थे. वह कृषि मंत्री के तौर पर भी उतने ही सफल रहे. पहली हरित क्रांति को साकार रूप देने में उनकी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता.
50 साल का संसदीय जीवन
बाबू जगजीवन राम के संसदीय जीवन का इतिहास 50 साल का रहा, जो एक विश्व रिकॉर्ड है. 1938 से 1979 तक लगातार कैबिनेट के सदस्य बने रहने का रिकॉर्ड भी जगजीवन राम के नाम पर है. 1946 में नेहरूजी की प्रोविजनल कैबिनेट में जगजीवन राम सबसे युवा मंत्री के रूप में शामिल हुए थे. जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम के लिए इमेज परिणामजनता के साथ-साथ वो सांसदों के बीच भी लोकप्रिय बने रहे.
इंदिरा ने लगा दी इमरजेंसी और पीएम बनने से रह गए
1977 में जब इंदिरा गांधी के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से संवैधानिक संकट पैदा हुआ था, तब सबसे पहले इंदिरा गांधी जगजीवन राम से मिलने उनके निवास पर गईं थीं. इंदिरा ने उनसे वादा किया था कि यदि उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटना पड़ा तो वो ही अगले प्रधानमंत्री होंगे.
26 जून, 1975 को देश में इमरजेंसी लगाए जाने के बाद कुछ महीनों तक इंदिरा गांधी और जगजीवन राम के रिश्ते सामान्य रहे, लेकिन सरकार और पार्टी से जुड़े कई निर्णयों पर दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं. 1977 में आपातकाल हटने के बाद जगजीवन राम ने हेमवती नंदन बहुगुणा के साथ मिलकर कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया. चौधरी चरण सिंह और बाबू जगजीवन राम के लिए इमेज परिणामउन्होंने ‘कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी’ नाम से नई पार्टी का गठन कर लिया. बाद में जयप्रकाश नारायण के कहने पर जनता पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा.
जब दूसरी बार प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए
जनता पार्टी की जीत के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद पर दावा पेश किया, लेकिन मोरारजी देसाई के सामने उनका दावा टिक नहीं पाया. इसका एक कारण इमरजेंसी के पक्ष में दिया भाषण भी रहा. वो मोरारजी के शपथ कार्यक्रम में नहीं गए. फिर जयप्रकाश नारायण के अनुरोध पर वो मोरारजी कैबिनेट में शामिल हुए. जगजीवन राम ने भी भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए इमेज परिणामप्रधानमंत्री पद की दौड़ के दौरान ही चौधरी चरण सिंह के समर्थकों ने उनके बेटे सुरेश राम के कथित सेक्स स्कैंडल को उजागर किया था.चौधरी चरण सिंह और बाबू जगजीवन राम के लिए इमेज परिणाम
फिर जब 1979 में मोरारजी की सरकार दोहरी सदस्यता के मामले पर गिर गई तो एक बार फिर चौधरी चरण सिंह और बाबू जगजीवन राम के बीच राजनीतिक युद्ध हुआ. इंदिरा गांधी चाहती थीं कि युवा तुर्क चंद्रशेखर यह जिम्मेदारी लें कि जगजीवन राम उनके हितों के खिलाफ कुछ नहीं करेंगे तो वो प्रधानमंत्री बन सकते हैं.
जनता पार्टी संसदीय दल में बहुमत के बावजूद राष्ट्रपति संजीव रेड्‍डी ने जगजीवन राम को शपथ नहीं दिलाई. इस तरह दूसरी बार बाबू जगजीवन राम प्रधानमंत्री पद की लड़ाई हार गए. 1980 में इंदिरा गांधी के दोबारा सत्ता में लौटने के बाद जगजीवन राम ने बहुत कोशिश की वह फिर से कांग्रेस में शामिल हो जाएं, लेकिन इंदिरा गांधी ने उनको माफ नहीं किया.जगजीवन राम ने भी भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए इमेज परिणाम
न्यूड तस्वीरों के चलते खत्म हुआ राजनीतिक करियर
प्रधानमंत्री न बनने के पीछे एक कारण 1978 में सूर्या नाम की एक पत्रिका में जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम को यूपी के बागपत जिले के गांव की एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाते हुए आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया जाना भी रहा. इन तस्वीरों ने सियासी गलियारे में तूफान ला दिया. इस स्कैंडल में सुरेश राम के साथ दिख रही युवती दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज की छात्रा थी.जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम के लिए इमेज परिणाम कहा जाता है कि इसके बाद सुरेश ने उससे शादी भी की थी. लेकिन सुरेश की मौत के बाद जगजीवराम के परिवारवालों ने उसका बहिष्कार कर दिया था.
कहा जाता है इसमें उन्हीं के पार्टी के कई नेता शामिल थे. इन नेताओं में केसी त्यागी, ओमपाल सिंह और एपी सिंह का नाम अप्रत्यक्ष रूप से आता है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार इस चर्चित सेक्स स्कैंडल का सूत्रधार खुशवंत सिंह को माना जाता है. संबंधित इमेजवह उस समय कांग्रेस के अखबार नेशनल हेराल्ड के प्रधान संपादक और मेनका की पत्रिका सूर्या के कंसल्टिंग एडिटर थे. वही बंद लिफाफे में तस्वीरें लेकर पहुंचे थे.संबंधित इमेज
सूर्या पत्रिका की संपादक इंदिरा गांधी की बहू मेनका गांधी थीं. जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम के लिए इमेज परिणामइस सेक्स स्कैंडल का जिस वक्त खुलासा हुआ उस वक्त जगजीवन राम, मोरारजी देसाई की सरकार में रक्षा मंत्री थे. उनकी गिनती कद्दावर नेताओं में होती थी, लेकिन स्कैंडल ने उनके पीएम बनने के सपने को हमेशा के लिए तोड़ दिया. इससे उनका करियर ही खत्म हो गया.

दलित महिलाओं को पानी पिलाने के लिए नियुक्त किया
केंद्रीय मंत्री के तौर पर एक बार जब वो पुरी के जगन्नाथ मंदिर में दर्शन के लिए गए तो उनको प्रवेश की अनुमति मिल गई, लेकिन उनकी पत्नी इंद्रा देवी को इजाजत नहीं दी गई. मंदिर प्रशासकों के इस निर्णय के विरोध में जगजीवन राम ने भी भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने से इनकार कर दिया. इंद्रा देवी ने अपनी डायरी में लिखा, ‘इस घटना से भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने की इच्छा पूरी तरह खत्म हो गई. अपने भक्तों के बीच भेदभाव करने वाला दुनिया का जगन्नाथ कैसे हो सकता है?’
बाबू जगजीवन राम ने दलित होने के नाते बचपन से ही सामाजिक स्तर पर होने वाले भेदभाव का सामना किया था, लेकिन इस भेदभाव के खिलाफ लड़ाई करते हुए उन्होंने कभी भी किसी समुदाय के प्रति दुराभाव नहीं दिखाया. रेल मंत्री के रूप में उन्होंने रेलवे स्टेशनों पर हिंदू और मुस्लिम पानी की व्यवस्था को खत्म कर के दलित महिला को पानी पिलाने के लिए नियुक्त किया था.
बाबू जगजीवन राम की राजनीतिक विरासत आज कांग्रेस पार्टी के नेताओं के लिए अचानक उपयोगी दिखाई देने लगी है. जब बीजेपी ने राष्ट्रपति पद के लिए दलित वर्ग से जुड़े नेता को अपना उम्मीदवार बनाया तो कांग्रेस पार्टी को जगजीवन राम की याद आई और उनकी बेटी मीरा कुमारजगजीवन राम के लिए इमेज परिणाम को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया. अपने जीवन के अंतिम सालों में जगजीवन राम चाहते थे कि वो फिर से कांग्रेस पार्टी में शामिल हों, लेकिन इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को यह स्वीकार नहीं था.

(सुरेश बाफना)

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