पुण्यतिथि:जात-पात के सख्त खिलाफ थे लाल बहादुर शास्त्री नाम में कभी नहीं लगाया सरनेम

11 जनवरी का इतिहास

दोस्तों आज जानते हैं 11 जनवरी का इतिहास के कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं के बारें मे।
11 January History

  • पहली लाटरी का शुभारम्भ 1569 में इंग्लैण्ड में हुआ।
  • मुगल साम्राज्य के सम्राट जहांगीर ने ईस्ट इंडिया कंपनी को सूरत में कारखाना लगाने की इजाजत 1613 में दी।
  • ब्रिटिश राजदूत सर थॉमस रो ने अजमेर में जहांगीर से 1616 में मुलाकात की।
  • ब्रैडेनबर्ग और फ़्राँस के बीच 1681 में रक्षा गठबंधन हुआ।
  • स्पेन नरेश जोकिन मुरात ने नेपोलियन बोनापार्ट का साथ 1753 में छोड़ दिया।
  • 1759 में अमेरिका के फिलाडेल्फिया में पहली जीवन बीमा कंपनी की शुरूआत।
  • चिंग थांग खोंबा मणिपुर के राजा 1779 में बने।
  • डायबटीज के मरीजों को पहली इंसुलिन 1922 में दी गई थी।
  • जापान ने मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर पर 1942 में कब्जा किया।
  • यूनानी गृहयुद्ध में संघर्ष विराम 1945 में हुआ।
  • भारत के अख़बारी काग़ज़ का उत्पादन 1955 में प्रारम्भ हुआ।
  • 1962 में हिमस्खलन से पेरुवियन एंडेस गाँव में तीन हज़ार मौतें हुई।
  • बांग्लादेश को 1973 में पूर्वी जर्मनी ने मान्यता प्रदान की।
  • सुरक्षा परिषद ने खाड़ी युद्धविराम का उल्लघंन करने के लिए 1993 में चेतावनी दी।
  • सोमालिया में दो वर्ष से चल रहे संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक अभियान 1995 में समाप्त।
  • जॉर्डन के शाह हुसैन 1996 में अपनी पहली सार्वजनिक यात्रा पर इजरायल के सबसे बड़े शहर तेल अवीव पहुंचे।
  • लुईस फ़्रेचेट (कनाडा) 1998 में सं.रा. संघ की उपमहासचिव नियुक्त।
  • भारत और इंडोनेशिया के बीच 2001 में पहली बार रक्षा समझौता।
  • रिलायंस ने बी.एस.एन.एल. को 2005 में 84 करोड़ रुपये चुकाए।
  • 2009 में हुए 66 वें गोल्डन ग्लोब अवार्ड में स्लमडॉग मिलियनेयर को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला।
  • सोमालिया के बुलो मारेर में एक फ्रांसिसी बंधक को छुड़ाने के प्रयास में 2013 में फ्रांस के एक सैनिक की मौत। इस दौरान 17 आतंकवादी भी मारे गये।

11 जनवरी को जन्मे व्यक्ति 

  • भारतीय राजनीतिज्ञ शिबु सोरेन का जन्म 1944 में हुआ।
  • बाल मजदूरी के खिलाफ आवाज उठाने वाले नोबल विजेता कैलाश सत्‍यार्थी का जन्‍म 1954 में हुआ।
  • भारतीय क्रिकेटर राहुल द्रविड़ का जन्म 1973 में हुआ।
  • भारत के प्रसिद्ध कवियों में से एक श्रीधर पाठक का जन्म 1860 में हुआ।
  • प्रसिद्ध अमरीकी दार्शनिक तथा मनोवैज्ञानिक विलियम जेम्स का जन्म 1842 में हुआ।

11 जनवरी को हुए निधन

  • जय जवान जय किसान का नारे देने वाले तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का 1966 में निधन।

    पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री मौत से पहले फोन पर हुई एक बात को लेकर थे परेशान, वो चीजें भी गायब थीं जिनको रखते थे हमेशा अपने पास

    पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादु�पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर

     देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 11 जनवरी यानि आज 53वीं पुण्यतिथि है। जय जवान जय किसान का नारा देने वाले शास्त्री ने अपने कार्यकाल में देश को कई संकटों से उबारा। वे 18 महीने तक देश के प्रधानमंत्री रहे। आइए जानते हैं उनसे जुड़े कुछ किस्से…

    फैमिली ने मौत पर उठाए थे सवाल

    – सोवियत संघ के ताशकंद में 10 जनवरी, 1966 को भारत और पाकिस्‍तान ने एक समझौते पर दस्‍तखत किए थे। उसी रात ताशकंद में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का निधन हो गया था।
    – शास्‍त्री के निधन के बाद परिजनों ने उनकी मौत पर सवाल उठाए थे। उनके बेटे अनिल शास्त्री के मुताबिक लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद उनका पूरा चेहरा नीला हो गया था, उनके मुंह पर सफेद धब्बे पाए गए थे।
    – उन्‍होंने कहा था कि शास्‍त्री के पास हमेशा एक डायरी रहती थी, लेकिन वह डायरी नहीं मिली। इसके अलावा उनके पास हरदम एक थर्मस रहता था, वो भी गायब था। इसके अलावा पोस्टमार्टम भी नहीं हुआ था, जिससे उनकी मौत संदेहजनक मानी जाती है।

    नैयर ने बताया था क्या हुआ था उस रात

    – शास्त्री जी की मौत के वक्त उनके होटल में ही मौजूद पत्रकार कुलदीप नैयर ने अपनी आत्मकथा बियॉन्ड द लाइंस और इंटरव्यू में उनकी मौत और उनसे जुड़े कुछ किस्सों के बारे में बताया था।
    – कुलदीप बताते हैं उस समय भारत-पाकिस्‍तान समझौते की खुशी में होटल में पार्टी थी। वे बताते हैं कि उनकी नींद दरवाजे की दस्तक से खुली। सामने एक रूसी औरत खड़ी थी, जो उनसे बोली, “यॉर प्राइम मिनिस्टर इज दाइंग।”
    – नैयर तेजी से कोट पहनकर नीचे आए। वहां पर रूसी प्रधानमंत्री कोसिगिन खड़े थे। एक पलंग पर शास्त्री जी का छोटा सा शरीर सिमटा हुआ था। नैयर बताते हैं वहां जनरल अयूब भी पहुंचे।

    फोन पर हुई थी पत्नी से बात, परेशान थे शास्त्री जी

    – नैयर बताते हैं देर रात शास्त्री जी ने अपने घर पर फोन किया था। फोन उनकी सबसे बड़ी बेटी ने उठाया था। फोन उठते ही शास्त्री बोले, ‘अम्मा को फोन दो।’ शास्त्री अपनी पत्नी ललिता को अम्मा कहा करते थे।
    – उनकी बड़ी बेटी ने जवाब दिया, अम्मा फोन पर नहीं आएंगीं। शास्त्री जी ने पूछा क्यों? जवाब मिला क्योंकि आपने हाजी पीर और ठिथवाल पाकिस्‍तान को दे दिया है। वो बहुत नाराज हैं। शास्त्री को इस बात से बहुत धक्का लगा।
    – नैयर बताते हैं इसके बाद शास्त्री जी परेशान होकर कमरे में चक्कर लगाने लगे। हालांकि कुछ देर में उन्होंने फिर अपने सचिव को फोन किया। वो भारत में नेताओं की प्रतिक्रिया जानना चाहते थे। उन्हें आलोचना भरी दो प्रतिक्रियाएं मिली थीं।

    यह एकमात्र दौरा था जब उनकी पत्नी नहीं गई थीं उनके साथ

    – लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल ने एक इंटरव्यू में बताया था कि लंबे वक्त तक उनकी मां कहती रहीं कि अगर वे शास्त्री जी के साथ इस दौरे पर ताशकंद गई होतीं तो शास्त्री जी जिंदा होते।
    – उन्होंने बताया कि वैसे ये अकेला दौरा था, जब उनकी पत्नी उनके साथ नहीं गई थीं। ये बहुत ही कूटनीतिक दौरा था तो विदेश मंत्रालय ने उन्हें न जाने का सुझाव दिया था।
    – शास्त्री जी की मौत के बाद पत्नी ललिता ने उनकी अस्थियों को काफी वक्त तक संभालकर रखा, जिसे बाद में इलाहाबाद के संगम में प्रवाहित किया गया।
    – ललिता शास्त्री की इच्छा थी कि दिल्ली में शास्त्री जी की समाधि के पास ही उनकी भी समाधि बने, हालांकि उनकी ये इच्छा अधूरी ही रह गई। 1993 में ललिता जी का भी देहांत हो गया।

    शास्त्री जी की सादगी

    – शास्त्री की सादगी का एक क़िस्सा कुलदीप नैयर ने एक इंटरव्यू में सुनाया था। उन्होंने बताया था कि जब कामराज योजना के तहत लाल बहादुर शास्त्री मंत्री नहीं रहे तो मैं एक बार उनके घर गया। पूरे घर में अंधेरा था और शास्त्रीजी एक कमरे में बैठे थे।
    – मैंने उनसे पूछा कि आपने घर में अंधेरा क्यों कर रखा है? उनका जवाब था, अब मैं मंत्री नहीं रहा। बिजली का बिल तो मुझे ही भरना पड़ेगा। मेरे पास इतने पैसे नहीं कि मैं बिजली का बिल भर पाऊं।”
    – नैयर ने बताया कि शास्त्री जी ने एक बात और कही कि दाल और सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। अब हम दिन के खाने में सिर्फ एक दाल और सब्जी ही खाते हैं। उस समय शास्त्री को सांसद के तौर पर 500 रुपए मिलते थे।

    मुश्किलों से भरा था बचपन

    – पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। उनके पिता स्कूल शिक्षक थे। जब लाल बहादुर शास्त्री केवल डेढ़ वर्ष के थे तभी उनके पिता का निधन हो गया था।
    – बचपन से ही शास्त्री को काफी गरीबी और मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई जगह इस बात का भी जिक्र किया गया है कि पैसे नहीं होने पर वे तैरकर नदी पार कर स्कूल जाया करते थे।

    17 साल की उम्र में पहली बार गए जेल, आम लाने पर पत्नी का विरोध

    – स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान शास्त्री करीब 9 साल तक जेल में रहे। असहयोग आंदोलन के लिए पहली बार वह 17 साल की उम्र में जेल गए, लेकिन बालिग न होने की वजह से उन्हें छोड़ दिया गया।
    – इसके बाद वे सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिए 1930 में ढाई साल के लिए जेल गए। 1940 और फिर 1941 से लेकर 1946 के बीच भी जेल में रहे। शास्त्री जी ने करीब 9 साल जेल में बिताए।
    – जब वे जेल में थे तब उनकी पत्नी चुपके से दो आम छिपाकर ले आई थीं। इस पर खुश होने की बजाय उन्होंने उनके खिलाफ ही धरना दे दिया था। शास्त्री जी का तर्क था कैदियों को जेल के बाहर की चीज खाना कानून के खिलाफ है।

    दहेज में लिए खादी के कपड़े

    – शास्त्री जी जात-पात के सख्त खिलाफ थे। तभी उन्होंने अपने नाम के पीछे सरनेम नहीं लगाया। शास्त्री की उपाधि उनको काशी विद्यापीठ से पढ़ाई के बाद मिली थी।
    – वहीं अपनी शादी में उन्होंने दहेज लेने से इनकार कर दिया था। लेकिन ससुर के बहुत जोर देने पर उन्होंने कुछ मीटर खादी के कपड़े दहेज के तौर पर लिए थे।

    जय जवान जय किसान का दिया था नारा

    – 1964 में जब शास्त्री प्रधानमंत्री बने तब देश में खाने कई चीजें आयात करनी पड़ती थीं। 1965 में पाकिस्‍तान से जंग के दौरान देश में भयंकर सूखा पड़ा। तब उन्होंने देशवासियों से एक दिन का उपवास रखने की अपील की।
    – उन्होंने कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए ‘जय जवान जय किसान’ का नारा दिया। हालांकि 1965 में भारत-पाक युद्ध विराम के बाद उन्होंने ये भी कहा था कि हमने पूरी ताकत से लड़ाई लड़ी, अब हमें शांति के लिए पूरी ताकत लगानी है।

  • भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता अजय घोष का 1962 में निधन।
  • ध्रुपद-धमार शैली के गायक राम चतुर मल्लिक का 1990 में निधन।
  • शेरपा तेनज़िंग के साथ माउन्ट एवरेस्ट के प्रथम आरोहनकर्ता और समाजसेवी सर एडमंड हिलेरी का 2008 में निधन।

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