परमवीर यदुनाथ सिंह का बलिदान, कवि और गीतकार प्रदीप का जन्म, वैज्ञानिक डॉ आत्माराम और फ़िल्मकार ऋत्विक घटक का निधन हुआ था आज

6 फ़रवरी का इतिहास

6 फरवरी की तारीख देश-दुनिया के इतिहास में काफी अहम रही है। इसी दिन साल 1952 में एलिजाबेथ द्धितीय ने इंग्लैंड की महारानी की गद्दी संभाली थी। इसके साथ ही इसी दिन  2002 में भारत ने सीमा में घुस आया पाकिस्तान का जासूसी विमान को मार गिराया।इसके अलावा  6 फरवरी के दिन कई महान लोगों ने इस दुनिया को अलविदा किया है, वैसे ही कई महान शख्सियत ने जन्म लिया।अगर आप भी 6 फरवरी के इतिहास के बारे में जानना चाहते हैं तो, यह लेख आपके लिए मद्दगार साबित हो सकता है, तो आइए जानते हैं 6 फरवरी महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, 6 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति और 6 फ़रवरी को हुए निधन के बारे में जानकारी, जो कि इस प्रकार है –

6 February History

  • पुर्तग़ाल और स्पेन के बीच 1715 में युद्ध समाप्त हुआ।
  • हालैंड और ब्रिटेन के बीच 1716 में गठबंधन का नवीनीकरण।
  • 1778 में ब्रिटेन ने फ्रांस के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
  • फ्रांस ने अमेरिका को 1778 में मान्यता प्रदान की।
  • मैसाचुसेट्स 1788 में संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान को मानने वाला छठा राज्य बना।
  • सिंगापुर की खोज सर थॉमस स्टैमफ़र्ड रैफ़ेल्स ने 1819 की।
  • ओट्टो 1833 में आधुनिक समय में यूनान के पहले सम्राट बने।
  • अमेरिका- स्पेन के बीच 1899 में लड़ाई समाप्त।
  • अमेरिका के एरिजोना में 1911 में पहला वृद्धाश्रम खोला गया।
  • तीस वर्ष से अधिक की आयु की महिलाओं को 1918 में ब्रिटेन में मतदान करने का अधिकार मिला।
  • कार्डिनल एशिले रैट्टी 1922 में पोप चुने गए।
  • लीबिया के बेनगाजी शहर पर ब्रिटिश सेना ने 1941 में कब्जा किया।
  • ब्रिटेन नरेश जार्ज छठवें के निधन के बाद यानि सन 1952 में 26 साल की एलिजाबेथ द्वितिय ने इंग्लैंड की महारानी की गद्दी संभाली।
  • 1959 में भारत में केरल उच्च न्यायालय का न्यायाधीश के रूप में अन्ना चांडी को नियुक्त किया गया। वह उच्च न्यायालय में नियुक्त होने वाली पहली महिला न्यायाधीश बनी।
  • 1985 में ब्रिटिश उपन्यासकार जेम्स हेडली चेइज का स्विट्जलैंड में निधन।
  • जस्टिस मैरी गॉडरन 1987 में आस्ट्रेलियाई हाई कोर्ट की जज बनने वाली पहली महिला बनीं।
  • पाकिस्तान में सन 1994 से सार्वजनिक फ़ांसी पर प्रतिबंध लागू।
  • देश का पहला पेस मेकर बैंक 1999 में कोलकाता में स्थापित हुआ।
  • विदेश मंत्री टारजा हैलोनेन 2000 में फ़िनलैंड की प्रथम महिला राष्ट्रपति चुनी गईं।
  • 6 फरवरी, 2002 के दिन भारत ने सीमा में घुस आया पाकिस्तान के जासूसी विमान को मार गिराया था।
  • रुस ने संयुक्त राष्ट्र के बिना अनुमति लिए इराफ के खिलाफ सैनिक कार्रवाई किए जाने पर 6 फरवरी, 2003 के दिन अमेरिका को चेतावनी दी थी।
  • अमेरिका के पश्चिमी तटीय क्षेत्र में 6 फरवरी , साल 2008 को भयंकर तूफान आया , जिससे भारी तबाही हुई।
  • भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 6 फरवरी साल 2008 को आइसलैण्ड के राष्ट्रपति रैग्रा ग्रिमसन से बातचीत की।
  • 6 फरवरी, 2008 को ही देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए उद्योगपति एमपी जिंदल को उद्योग रत्न से नवाजा गया।
  • 6 फरवरी , साल 2009 में भारत ने नेपाल के साथ लगी अपनी सीमा पर तीन बड़े बांधों के निर्माण के लिए 9.45 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता दी।

6 फ़रवरी को जन्मे व्यक्ति 

6 फरवरी का दिन इसलिए भी अतिमहत्वपूर्ण दिन है क्योंकि इस दिन  अब्दुल गफ्फार खान, श्री संत समेत कई दिग्गज लोगों ने जन्म लिया और इस दुनिया में आकर बड़ा नाम किया, जिनके बारे में हमने नीचे बताया है –

  • 1890 में भारत रत्न सम्मानित महान् स्वतंत्रता सेनानी ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान का जन्म।
  • 1891 में उड़ान के क्षेत्र में अग्रणी डच-एंटन हरमान फ़ोकर का जन्म।
  • 1915 में प्रसिद्ध कवि और गीतकार प्रदीपKavi Pradeep 2011 stamp of India.jpg का जन्म।कवि प्रदीप (६ फ़रवरी १९१५ – ११ दिसम्बर १९९८) भारतीय कवि एवं गीतकार थे जो देशभक्ति गीत ऐ मेरे वतन के लोगों की रचना के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों की श्रद्धांजलि में ये गीत लिखा था। लता मंगेशकर द्वारा गाए इस गीत का तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में 26 जनवरी 1963 को दिल्ली के रामलीला मैदान में सीधा प्रसारण किया गया। गीत सुनकर जवाहरलाल नेहरू के आंख भर आए थे। कवि प्रदीप ने इस गीत का राजस्व युद्ध विधवा कोष में जमा करने की अपील की। मुंबई उच्च न्यायालय ने 25 अगस्त 2005 को संगीत कंपनी एचएमवी को इस कोष में अग्रिम रूप से भारतीय रुपया10 लाख जमा करने का आदेश दिया। .कवि प्रदीप का मूल नाम ‘रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी’ था। उनका जन्म मध्य प्रदेश प्रांत के उज्जैन में बदनगर नामक स्थान में हुआ। कवि प्रदीप की पहचान 1940 में रिलीज हुई फिल्म बंधन से बनी। हालांकि 1943 की स्वर्ण जयंती हिट फिल्म किस्मत के गीत “दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिंदुस्तान हमारा है” ने उन्हें देशभक्ति गीत के रचनाकारों में अमर कर दिया। गीत के अर्थ से क्रोधित तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने उनकी गिरफ्तारी के आदेश दिए। इससे बचने के लिए कवि प्रदीप को भूमिगत होना पड़ा.पांच दशक के अपने पेशे में कवि प्रदीप ने 71 फिल्मों के लिए 1700 गीत लिखे. उनके देशभक्ति गीतों में, फिल्म बंधन (1940) में “चल चल रे नौजवान”, फिल्म जागृति (1954) में “आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं”, “दे दी हमें आजादी बिना खडग ढाल” और फिल्म जय संतोषी मां (1975) में “यहां वहां जहां तहां मत पूछो कहां-कहां” है। इस गीत को उन्होंने फिल्म के लिए स्वयं गाया भी था।.

    आपने हिंदी फ़िल्मों के लिये कई यादगार गीत लिखे। भारत सरकार ने उन्हें सन 1997-98 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया।

    लोकप्रिय गीत

    • “ऐ मेरे वतन के लोगों” (कंगन)ye me
    • “सूनी पड़ी रे सितार” (कंगन)
    • “नाचो नाचो प्यारे मन के मोर” (पुनर्मिलन)
    • “चल चल रे नौजवान” (बंधन)
    • “चने जोर गरम बाबू” (बंधन)
    • “पीयू पीयू बोल प्राण पपीहे” (बंधन)
    • “रुक न सको तो जाओ” (बंधन)
    • “खींचो कमान खींचो” (अंजान)
    • “झूले के संग झूलो” (झूला)
    • “न जाने किधर आज मेरी नाव चली रे” (झूला)
    • “मैं तो दिल्ली से दुल्हन लायारे” (झूला)
    • “आज मौसम सलोना सलोना रे” (झूला)
    • “मेरे बिछड़े हुए साथी” (झूला)
    • “दूर हटो ऐ दुनियावालो हिंदुस्तान हमारा है” (किस्मत)
    • “धीरे धीरे आरे बदल” (किस्मत)
    • “पपीहा रे, मेरे पियासे” (किस्मत)
    • “घर घर में दिवाली है मेरे घर में अँधेरा” (किस्मत)
    • “अब तेरे सिवा कौन मेरा” (किस्मत)
    • “हर हर महादेव अल्लाह-ओ-अकबर” (चल चल रे नौजवान)
    • “रामभरोसे मेरी गाड़ी” (गर्ल्स स्कूल)
    • “ऊपर गगन विशाल” (मशाल)
    • “किसकी किस्मत में क्या लिखा” (मशाल)
    • “आज एशिया के लोगों का काफिला चला” (काफिला)
    • “कोयल बोले कु” (बाप बेटी)
    • “कान्हा बजाए बंसरी” (नास्तिक)
    • “जय जय राम रघुराई” (नास्तिक)
    • “कितना बदलगया इंसान” (नास्तिक)
    • “गगन झंझना राजा” (नास्तिक)
    • “तेरे फूलों से भी प्यार” (नास्तिक)
    • “साबरमती के संत” (जागृती)
    • “हम लाये हैं तूफ़ान से” (जागृती)
    • “चलो चलें माँ” (जागृती)
    • “आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ” (जागृती)
    • “तेरे द्वार खड़ा भगवान” (वामन अवतार)
    • “कहेको बिसरा हरिनाम, माटी के पुतले” (चक्रधारी)
    • “दूसरो का दुखड़ा दूर करनेवाले” (दशहरा)
    • “तुंनक तुंनक बोले रे मेरा इकतारा” (रामनवमी)
    • “पिंजरे के पंछी रे” (नागमणि)
    • “कोई लाख करे चतुराई” (चंडी पूजा)
    • “नई उम्र की कलियों तुमको देख रही दुनिया सारी” (तलाक़)
    • “बिगुल बजरहा आज़ादी का” (तलाक़)
    • “मेरे जीवन में किरण बनके” (तलाक़)
    • “मुखड़ा देखले प्राणी” (दो बहन)
    • “इन्सान का इंसान से हो भाईचारा” (पैग़ाम)
    • “ओ अमीरों के परमेश्वर” (पैग़ाम)
    • “जवानी में अकेलापन” (पैग़ाम)
    • “ओ दिलदार बोलो एक बार” (स्कूल मास्टर)
    • “आज सुनो हम गीत विदा का गारहे” (स्कूल मास्टर)
    • “सांवरिया रे अपनी मीरा को भूल न जाना” (आँचल)
    • “न जाने कहाँ तुम थे” (जिंदगी और ख्वाब)
    • “आजके इस इंसान को ये क्या होगया” (अमर रहे ये प्यार)
    • “सूरज रे जलते रहना” (हरिश्चंद्र तारामती)
    • “टूटगई है माला” (हरिश्चंद्र तारामती)
    • “जन्मभूमि माँ” (नेताजी सुभाषचंद्र बोस)
    • “सुनो सुनो देशके हिन्दू – मुस्लमान” (नेताजी सुभाषचंद्र बोस)
    • “भारत के लिए भगवन का एक वरदान है गंगा” (हर हर गंगे)
    • “ये ख़ुशी लेके मैं क्या करूँ” (हर हर गंगे)
    • “चल अकेला चल अकेला” (संबंध)
    • “तुमको तो करोड़ों साल हुए” (संबंध)
    • “जो दिया था तुमने एक दिन” (संबंध)
    • “अँधेरे में जो बैठे हो” (संबंध)
    • “सुख दुःख दोनों रहते” (कभी धूप कभी छाँव)
    • “हाय रे संजोग क्या घडी दिखलाई” (कभी धूप कभी छाँव)
    • “चल मुसाफिर चल” (कभी धूप कभी छाँव)
    • “जय जय नारायण नारायण हरी हरी” (हरिदर्शन)
    • “प्रभु के भरोसे हांको गाडी” (हरिदर्शन)
    • “मारनेवाला है भगवन बचानेवाला है भगवन” (हरिदर्शन)
    • “मैं इस पार” (अग्निरेखा)
    • “मैं तो आरती उतरूँ” (जय संतोषी माँ)
    • “यहाँ वहां जहाँ तहां” (जय संतोषी माँ)
    • “मत रो मत रो आज” (जय संतोषी माँ)
    • “करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं” (जय संतोषी माँ)
    • “मदद करो संतोषी माता” (जय संतोषी माँ)
    • “हे मारुती सारी रामकथा साकार” (बजरंगबली)
    • “बंजा हूँ मैं” (आँख का तारा)
    • “ऐ मेरे वतनके लोगों”
  • 1983 में भारतीय क्रिकेटर एस श्रीसंत का जन्म।

6 फ़रवरी को हुए निधन 

6 फरवरी के दिन कई दिग्गज लोग इस दुनिया को अलविदा भी कह गए, जिनके बारे में हम आपको नीचे बता रहे हैं –

  • 1793 में प्रसिद्ध इतालवी नाटककार कार्लो गोल्दोनी का निधन।
  • 1900 में सांख्यिकीविज्ञ अंग्रेज़ अधिकारी विलियम विलसन हन्टर का निधन।
  • 1931 में स्वतंत्र भारत देश के पहले पंतप्रधान जवाहरलाल नेहरू के पिताजी और नेता मोतीलाल नेहरू का लखनऊ में निधन।
  • 1948 में परमवीर चक्र सम्मानित भारतीय सैनिक नायक यदुनाथ सिंह का निधन।नायक जदुनाथ सिंह परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय सैनिक हैं। इन्होने भारत-पाकिस्तान युद्ध 1947 में अद्वितीय साहस का योगदान दिया तथा वीरगति को प्राप्त हुए। इन्हे यह सम्मान सन 1950 में मरणोपरांत मिला था। सिंह को 1941 में ब्रिटिश भारतीय सेना में शामिल किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इन्होने बर्मा में जापान के खिलाफ लड़ाई में भाग लिया था। उन्होंने बाद में भारतीय सेना के सदस्य के रूप में 1947 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में भाग लिया। 6 फरवरी 1948 को नौशेरा, जम्मू और कश्मीर के उत्तर में युद्ध में योगदान के कारण नायक सिंह को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।Image result for परमवीर चक्र सम्मानित भारतीय सैनिक नायक यदुनाथ सिंह

    प्रारंभिक जीवन

    सिंह का जन्म 21 नवंबर 1916 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के खजुरी गांव में हुआ था। इनके पिता बीरबल सिंह राठौर थे और माता का नाम यमुना कंवर था। वह आठ बच्चों (6 भाई और एक बहन) में तीसरे थे। सिंह ने अपने गांव के स्थानीय स्कूल में चौथी तक के मानक का अध्ययन किया था लेकिन वह अपने परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण अपनी शिक्षा को आगे नहीं बढ़ा सके। उन्होंने अपना बचपन का अधिकांश समय अपने खेत में कृषि कार्य में अपने परिवार की मदद करने में बिताया। खेल क्रीड़ा में उन्होंने कुश्ती की और अंततः अपने गांव के कुश्ती चैंपियन बन गए। अपने चरित्र और कल्याण के लिए, उन्हें “हनुमान भगत बाल ब्रह्मचारी” नाम से जाना जाता था। सिंह ने शादी नहीं की थी।

    सैन्य जीवन

    द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, सिंह को 21 नवंबर 1941 को फतेहगढ़ रेजिमेंटल सेंटर में ब्रिटिश भारतीय सेना के 7वें राजपूत रेजिमेंट में भर्ती किया गया था। अपने प्रशिक्षण को पूरा करने पर सिंह को रेजिमेंट के प्रथम बटालियन में तैनात किया गया था। 1942 के अंत के बाद, बटालियन को बर्मा अभियान के दौरान अराकन प्रांत में अराकन अभियान 1942–1943 के लिए तैनात किया गया था, जहां उन्होंने जापान के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

    भारत-पाकिस्तान युद्ध 1947

    अक्टूबर 1947 में जम्मू और कश्मीर में पाकिस्तानी हमलावरों द्वारा एक आक्रमण के बाद, भारतीय कैबिनेट की रक्षा समिति ने सेना के मुख्यालय को  सैन्य प्रतिक्रिया  का निर्देश दिया। एक ऐसे आपरेशन में 50 वीं पैरा ब्रिगेड, जिस में राजपूत रेजिमेंट जुड़ी हुई थी, को नौशेरा को सुरक्षित रखने हेतु सैन्य कार्यवाही के लिए तैनात किया गया था जिसके लिए झांगर में बेस बनाया गया था।

    खराब मौसम ने इस कार्रवाई पर प्रतिकूल असर डाला तथा 24 दिसंबर 1947 को झांगर पर पाकिस्तानियों ने कब्जा कर लिया जो रणनीतिक रूप से नौशेरा सेक्टर पर कब्ज़ा करने के लिए लाभप्रद था, जिससे उन्हें मीरपुर और पुंछ के बीच संचार लाइनों पर नियंत्रण मिल गया और एक शुरुआती बिंदु मिल गया जिससे  हमला किया जा सके। अगले महीने भारतीय सेना ने नौशेरा के उत्तर-पश्चिम में कई अभियान चलाए, जिसने पाकिस्तानी सेना को आगे बढ़ने को रोक दिया। 50वीं पैरा ब्रिगेड के कमांडिंग ऑफिसर ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान ने अपेक्षित हमले का मुकाबला करने के लिए आवश्यक व्यवस्था की थी। संभावित दुश्मन दृष्टिकोण पर छोटे समूहों में सैनिकों को तैनात किया गया था।Image result for परमवीर चक्र सम्मानित भारतीय सैनिक नायक यदुनाथ सिंह

    नौशेरा के उत्तर में स्थित टेंढर, एक ऐसा स्थान था जिसके लिए  सिंह की बटालियन जिम्मेदार थी। 6 फरवरी 1948 की सुबह 6:40 बजे पाकिस्तानी सेना ने टेंढर चौकियों पर हमला कर दिया। दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी होने लगी। धुंध और अंधेरे से हमलावर पाकिस्तानी सैनिकों को मदद मिली। जल्द ही टेंढर पर तैनात भारतीय सैनिकों ने देखा कि बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिक उनकी ओर बढ़ रहे हैं।

    सिंह टेंढर में नौ जवानों की टुकड़ी की कमान संभाले थे। सिंह और उनकी टुकड़ी पाकिस्तानी सेनाओं द्वारा अपनी स्थिति पर कब्जा करने के लिए लगातार तीन प्रयासों को विफल करने में सक्षम रहे थे। तीसरे हमले की समाप्ति तक चौकी पर तैनात 27 लोगों में से 24 लोग मारे गए या गंभीर रूप से घायल हो गए। सिंह ने एक कमांडर होने के नाते “अनुकरणीय” नेतृत्व का प्रदर्शन किया, और जब तक नौ गोलियां खाकर पूरी तरह घायल नहीं हो गए तब तक अपने जवानों को प्रेरित करते रहे। टेंढर की इस लड़ाई में  सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए थे ! यह नौशेरा की लड़ाई के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण क्षण साबित हुआ। इस बीच, ब्रिगेडियर उस्मान ने टेंढर को मजबूत करने के लिए तीसरी पैरा बटालियन, राजपूत रेजिमेंट की एक कंपनी को भेजा। यदि  सिंह द्वारा पाकिस्तानी सैनिकों को काफी समय तक उलझाये नहीं रखा जाता तो इन स्थानों पर पुनः कब्जा करना असंभव होता।

    सम्मान

    उन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 1950 में मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

  • 1965 में स्वतंत्रता सेनानी एवं पंजाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों का निधन।
  • 1976 में भारतीय लेखक और फ़िल्म निर्देशक ऋत्विक घटक Ritwik Ghatak (Young age photo).pngका निधन।ऋत्विक घटक (बांग्ला: ঋত্বিক (কুমার) ঘটকऋतिक (कुमार) घोटोक ; 4 नवम्बर 1925 – से 6 फ़रवरी 1976) एक बंगाली भारतीय फिल्म निर्माता और पटकथा लेखक थे। भारतीय फिल्म निर्देशकों के बीच घटक का स्थान सत्यजीत रे और मृणाल सेन के समान है।

    ऋत्विक घटक का जन्म पूर्वी बंगाल में ढाका में हुआ था (अब बांग्लादेश)। वे और उनका परिवार पश्चिम बंगाल में कलकत्ता में स्थानांतरित हो गये (अब कोलकाता) जिसके तुरंत बाद पूर्वी बंगाल से लाखों शरणार्थियों का इस शहर में आगमन शुरू हो गया, वे लोग विनाशकारी 1943 के बंगाल के अकाल और 1947 में बंगाल के विभाजन के कारण वहां से पलायन करने लगे थे। शरणार्थी जीवन का उनका यह अनुभव उनके काम में बखूबी नज़र आता है, जिसने सांस्कृतिक विच्छेदन और निर्वासन के लिए एक अधिभावी रूपक का काम किया और उनके बाद के रचनात्मक कार्यों को एक सूत्र में पिरोया. 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध ने भी, जिसके कारण और अधिक शरणार्थी भारत आये, उनके कार्यों को समान रूप से प्रभावित किया।

    रचनात्मक कैरियर

    1948 में, घटक ने अपना पहला नाटक कालो सायार (द डार्क लेक) लिखा और ऐतिहासिक नाटक नाबन्ना के पुनरुद्धार में हिस्सा लिया। 1951 में, घटक, इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन (IPTA) के साथ जुड़े. उन्होंने नाटकों का लेखन, निर्देशन और उनमें अभिनय किया और बेर्टोल्ट ब्रेश्ट और गोगोल को बंगला में अनुवादित किया। 1957 में, उन्होंने अपने अंतिम नाटक ज्वाला (द बर्निंग) को लिखा और निर्देशित किया।

    घटक ने फिल्म जगत में निमाई घोष के चिन्नामूल (1950) के साथ अभिनेता और सहायक निर्देशक के रूप में प्रवेश किया। चिन्नामूल के दो वर्ष बाद घटक की पहली पूर्ण फिल्म नागरिक (1952) आई, दोनों ही फ़िल्में भारतीय सिनेमा के लिए मील का पत्थर थीं। घटक ने शुरूआती कार्यों में नाटकीय और साहित्यिक प्रधानता पर ज़ोर दिया और एक वृत्तचित्रीय यथार्थवाद, जो लोक रंग मंचों से ली गयी शैली के प्रदर्शन से युक्त होता था, उसे ब्रेश्टीयन फिल्म निर्माण के उपकरणो के उपयोग के साथ संयोजित किया।

    अजांत्रिक (1958) घटक की पहली व्यावसायिक रिलीज थी, यह एक विज्ञान कथा विषय वाली कॉमेडी-ड्रामा फिल्म थी। निर्जीव वस्तु को दर्शाने वाली यह भारत की कुछ प्रारंभिक फिल्मों में से एक थी, जिसमें एक ऑटोमोबाइल को कहानी में एक चरित्र के रूप में पेश किया गया था।

    फिल्म मधुमती (1958), पटकथा लेखक के रूप में घटक की सबसे बड़ी व्यावसायिक सफलता थी, यह पुनर्जन्म के विषय पर बनी सबसे पहली फिल्मों में से एक थी। यह एक हिंदी फिल्म थी जो एक अन्य बंगाली निर्देशक बिमल राय द्वारा निर्देशित थी। इस फिल्म के लिए घटक ने सर्वष्ठश्रे कहानी के फिल्मफेयर पुरस्कार का अपना पहला नामांकन अर्जित किया।

    ऋत्विक घटक ने पूर्ण-लंबाई वाली आठ फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी सबसे प्रसिद्ध फ़िल्में, मेघे ढाका तारा (बादलों से छाया हुआ सितारा) (1960), कोमल गंधार (ई-फ्लैट) (1961) और सुवर्णरिखा (स्वर्ण रेखा) (1962), कलकत्ता पर आधारित एक त्रयी थी जिसमें शरणार्थी-जीवन की हालत को संबोधित किया गया जो विवादास्पद साबित हुई और कोमल गंधार (ई-फ्लैट) और सुवर्णरिखा के वाणिज्यिक विफलता के बाद उन्होंने 1960 के दशक की यादों पर फ़िल्में बनाना छोड़ दिया। तीनों फिल्मों में, उन्होंने एक बुनियादी कहानी और कभी-कभी एक परस्पर विरोधी यथार्थवादी कहानी का इस्तेमाल किया, जिसपर उन्होंने कई मिथक संदर्भों को दर्ज किया था, विशेष रूप से मदर डीलिवर्र का जिसे उन्होंने दृश्यों और ध्वनी के घने उपरिशायी के माध्यम से प्रस्तुत किया।

    1966 में घटक संक्षिप्त रूप से पुणे में स्थानांतरित हो गये, जहां उन्होंने भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (FTII) में शिक्षण किया। एफटीआईआई (FTII) में बिताए गये वर्षों के दौरान उन्होंने दो छात्र फिल्मों फीयर और रॉन्डेवू के निर्माण में योगदान किया।

    1970 के दशक में घटक फिल्म निर्माण में तब वापस लौटे, जब 1973 में एक बांग्लादेशी निर्माता ने महाकाव्य तिताश एक्टि नोदीर नाम (तितास एक नदी का नाम है) को वित्तपोषित किया। अत्यधिक शराब के सेवन और उसके फलस्वरूप होने वाले रोगों के कारण उनके खराब स्वास्थ्य की वजह से उनके लिए फ़िल्में बनाना मुश्किल हो गया। उनकी आखिरी फिल्म आत्मकथात्मक थी जिसका नाम था जुक्ति तोक्को आर गोप्पो (युक्ति, बहस और कहानी) (1974), जिसमें उन्होंने मुख्य चरित्र नील्कंठो (नीलकंठ) की भूमिका निभाई.[4] उनके नाम पर कई अधूरी फीचर और लघु फ़िल्में थीं।

    घटक के पिता सुरेश चंद्र घटक एक जिला मजिस्ट्रेट और साथ ही साथ एक कवि और नाटककार थे और उसकी मां का नाम इंदुबाला देवी था। वे उनके 11 वीं और सबसे छोटी सन्तान थे। उनके बड़े भाई मनीष घटक अपने समय के एक कट्टरपंथी लेखक, अंग्रेजी के प्रोफेसर और एक सामाजिक कार्यकर्ता थे, जो IPTA रंगमंच आंदोलन में उसके सुनहरे दिनों के दौरान गहरे रूप से शामिल थे और बाद में उन्होंने उत्तर बंगाल के तेभागा आंदोलन का नेतृत्व किया। लेखिका और कार्यकर्ता महाश्वेता देवी मनीष घटक की बेटी हैं। घटक की पत्नी सुरमा एक स्कूल शिक्षिका थीं और उनके पुत्र रित्बान एक फिल्म निर्माता है।

    असर और प्रभाव

    उनकी मृत्यु के समय (फरवरी 1976), घटक का प्राथमिक प्रभाव, पूर्व छात्रों के माध्यम से होता हुआ प्रतीत हुआ। हालांकि एफटीआईआई में उनका फिल्म शिक्षण कार्यकाल संक्षिप्त था, कभी उनके छात्र रहे मणि कौल, जॉन अब्राहम और विशेष रूप से कुमार शाहनी ने घटक के विचारों और सिद्धांतों को भारतीय कलात्मक सिनेमा की मुख्य धारा में आगे बढ़ाया, जिनका विस्तृत वर्णन उनकी किताब सिनेमा एंड आई में मिलता है। एफटीआईआई में उनके अन्य छात्रों में शामिल है बहुप्रशंसित फिल्म निर्माता सईद अख्तर मिर्जा और अदूर गोपालकृष्णन.

    घटक पूरी तरह से भारतीय व्यावसायिक फिल्म की दुनिया के बाहर थे। व्यावसायिक सिनेमा की कोई भी विशेषता (गायन और नृत्य, नाटकीयता, सितारे, चकाचौंध) उनके काम में नजर नहीं आती है। उनकी फ़िल्में आम जनता के बजाये छात्रों और बुद्धिजीवियों द्वारा देखी जाती थी। उनके छात्रों में भी कलात्मक सिनेमा या स्वतंत्र सिनेमा परंपरा में काम करने की प्रवृत्ति है।

    जबकि अन्य यथार्थवादी निर्देशक जैसे सत्यजीत रे अपने जीवन काल में ही भारत से बाहर दर्शक बनाने में सफल रहे, इस मामले में घटक इतने भाग्यशाली नहीं रहे। उनके जीवन काल के दौरान, उनकी फ़िल्में मुख्यतः भारत में ही सराही गई। सत्यजीत रे ने अपने सहयोगी को बढ़ावा देने के लिए यथा संभव प्रयास किये, लेकिन रे की उदार प्रशंसा भी घटक के लिए अंतरराष्ट्रीय ख्याति जुटा पाने में असमर्थ रही। उदाहरण के लिए, घटक की फिल्म नागोरिक (1952) शायद बंगाली कलात्मक फिल्मों में सबसे पहली थी, जिसके तीन वर्ष बाद रे की पाथेर पांचाली आई, लेकिन घटक की फिल्म 1977 में उनकी मृत्यु के पश्चात ही रिलीज़ हो पाई. उनकी पहली व्यावसायिक रिलीज अजांत्रिक (1958) भी निर्जीव वस्तुओं को, इस फिल्म में एक ऑटोमोबाइल, कहानी के चरित्र के रूप में चित्रित करने वाली पहली भारतीय फिल्मों में से एक थी, हर्बी फिल्मों के कई वर्ष पहले. घटक की बाड़ी थेके पालिए (1958)) की कहानी फ्रांकोइस त्रुफाउट की बाद की फिल्म दी 400 ब्लोज़ (1959) के समान थी, लेकिन घटक की फिल्म गुमनामी में रही जबकि त्रुफाउट की फिल्म आगे चल कर फ्रेंच न्यू वेव की सर्वाधिक प्रसिद्ध फिल्मों में से एक बनी। घटक की अंतिम फिल्मों में से एक, ए रिवर नेम्ड तितास (1973), एक हाइपरलिंक प्रारूप में कही जाने वाली सबसे पहली फिल्मों में से एक थी, जिसमें परस्पर जुड़ी कहानियों में कई पात्रों का एक संग्रह दिखाया गया और यह रॉबर्ट ऑल्ट्मन की फिल्म नैशविले (1975) से दो वर्ष पहले बनी।

    घटक की एकमात्र प्रमुख व्यावसायिक सफलता फिल्म मधुमति (1958) थी, जो एक हिंदी फिल्म है और उन्होंने इसकी पटकथा लिखी थी। पुनर्जन्म के विषय वाली यह सबसे पहली फिल्मों में से एक थी और यह माना जाता है की यह फिल्म बाद के कई भारतीय सिनेमा, भारतीय टेलीविजन और शायद विश्व सिनेमा में पुनर्जन्म के विषय का स्रोत बनी रही। यह अमेरिकी फिल्म दी रीइंकारनेशन ऑफ़ पीटर प्राउड (1975) और हिंदी फिल्म कर्ज़ (1980) के लिए प्रेरणा स्रोत बनी, जिनमें से दोनों ही फ़िल्में पुनर्जन्म से सम्बंधित थी और अपनी-अपनी संस्कृतियों पर प्रभावशाली रही। विशेष रूप से कर्ज़ को कई बार पुनर्निमित किया गया: कन्नड़ फिल्म युग पुरुष (1989), तमिल फिल्म एनाकुल ओरूवन (1984) और हालिया बॉलीवुड फिल्म कर्ज (Karzzzz) (2008) के रूप में. कर्ज़ और दी रीइंकारनेशन ऑफ़ पीटर प्राउड ने संभवतः अमेरिकी फिल्म चांसेज आर (1989) को प्रेरित किया। सबसे हालिया फिल्म जो सीधे मधुमति से प्रेरित हुई वह है हिट बॉलीवुड फिल्म ओम शांति ओम (2007) है, जिसके कारण बिमल रॉय की बेटी रिंकी भट्टाचार्य ने इस फिल्म पर साहित्यिक चोरी का आरोप लगाया और उसके निर्माता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। 

    निर्देशक के रूप में घटक के काम ने भी बाद के कई भारतीय फिल्म निर्माताओं पर प्रभाव डाला, जिनमें बंगाली फिल्म उद्योग और अन्यत्र के लोग भी शामिल थे। उदाहरण के लिए, मीरा नायर ने अपने फिल्म निर्माता बनने के कारण के रूप में घटक और रे का नाम उद्धृत किया।एक निर्देशक के रूप में घटक का प्रभाव भारत के बाहर बहुत देर से फैला; जिसकी शुरुआत 1990 के दशक में हुई, घटक की फिल्मों को पुनर्स्थापित करने की एक परियोजना और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों (और बाद के डीवीडी रिलीज) ने देर से ही सही तेजी से वैश्विक दर्शक उत्पन्न किए। 1998 में एशियाई फिल्म पत्रिका सिनेमाया द्वारा कराए गये सर्वकालिक महान फिल्म के लिए आलोचकों के मतदान में, सुवर्णरेखा को सूची में 11वां स्थान दिया गया। 2002 में सर्वकालिक महान फिल्म के लिए आलोचकों और निर्देशकों की दृष्टि और ध्वनि (साईट एंड साउंड) मतदान में मेघे ढाका तारा को सूचि में 231 स्थान पर और गंधार कोमल को 346 स्थान पर रखा गया। [2007 में, ब्रिटिश फिल्म संस्थान द्वारा करवाए गये 10 सर्वश्रेष्ठ बांग्लादेशी फिल्मों के लिए एक दर्शकों और आलोचकों के मतदान में ए रिवर नेम्ड तितास ने सूची में प्रथम स्थान हासिल किया।

    निर्देशक और पटकथा लेखक

    • नागोरिक (नागरिक) (1952)
    • अजांत्रिक (अयान्त्रिकदयनीय भ्रान्ति) (1958)
    • बाड़ी थेके पालिए (भगोड़ा) (1958)
    • मेघे ढाका तारा (बादलों से छाया हुआ सितारा) (1960)
    • कोमोल गंधार (ई-फ्लैट) (1961)
    • सुवर्णरेखा (1962/1965)
    • तिताश एक्टि नादिर नाम (तिताश एक नदी का नामक) (1973)
    • जुक्ति तोक्को आर गोप्पो (कारण, बहस और एक कहानी) (1974)

    पटकथा लेखक

    • मुसाफिर (1957)
    • मधुमती (1958)
    • स्वरलिपि (1960)
    • कुमारी मोन (1962)
    • दीपेर नाम टिया रोंग (1963)
    • राजकन्या (1965)

    अभिनेता (एक्टर)

    • तोथापी (1950)
    • चिन्नामूल (1951)
    • कुमारी मोन (1962)
    • सुवर्णरेखा (1962)
    • तितस एक्टि नादिर नाम (1973)
    • जुक्ति, तोक्को, आर गोप्पो (1974)

    लघु फ़िल्में और वृत्तचित्र

    • दी लाइफ ऑफ़ दी आदिवासिज़ (1955)
    • प्लेसेज ऑफ़ हिस्टोरिक इंटरेस्ट इन बिहार (1955)
    • सीजर (1962)
    • फीयर (1965)
    • रॉन्डेवूज़ (1965)
    • सिविल डिफेन्स (1965)
    • कल के वैज्ञानिक (1967)
    • ये क्यों (क्यों /एक प्रश्न) (1970)
    • आमार लेनिन (मेरा लेनिन) (1970)
    • पुरुलियर छाऊ (पुरुलिया का छाऊ नृत्य) (1970)
    • दुर्बार गाटी पद्मा (अशांत पद्म) (1971)

    अधूरी फ़िल्में और वृत्तचित्र

    • बेदेनी (1951)
    • कोतो ऑजानारे (1959)
    • बोगोलार बोंगोदोर्शों (1964-65)
    • रोंगेर ग़ोलाम (1968)
    • रामकिंकर (1975)

    शूटिंग से पहले बंद कर दी गई पटकथाएं

    • ओकाल बोसोंतो (1957)
    • अमृतोकुम्भेर सोंधाने (1957)
    • अर्जन सरदार (1958)
    • बोलिदान (1963)
    • अरोन्य्क (1963)
    • श्याम से नेहा लागी (1964)
    • संसार सिमानते (1968)
    • पद्दा नादिर माझी
    • नोतून फोसोल
    • राजा
    • सेई बिष्णुप्रिया
    • प्रिंसेस कोलाबोती
    • लोज्जा

    रंगमंच[

    • चोंद्रोगुप्तो (द्विजेनद्रलाल रे), अभिनेता
    • अचलायोतों (टैगोर) (1943), निर्देशक और अभिनेता
    • कालो सायोर (घटक) (1947-1948), अभिनेता और निर्देशक
    • कोलोंको (भट्टाचार्य) (1951), अभिनेता
    • दोलिल (घटक) (1952), अभिनेता और निर्देशक
    • कोतो धाने कोतो चाल (घटक) (1952)
    • ऑफिसर (गोगोल) (1953), अभिनेता,
    • इस्पात (घटक) (1954-1955), अमंचित
    • खोरीर गोंडी (बर्टोल्ट ब्रेश्ट)

    |ब्रेश्ट)

    • गैलिलियो चोरिट (ब्रेश्ट)
    • जागोरोन (अतीन्द्र मोज़ुमदार), अभिनेता
    • जोलोंतो (घटक)
    • जाला (घटक)
    • डाकघोर (टैगोर)
    • ढेऊ (बीरू मुखोपाध्याय)
    • ढेंकी स्वर्गे गेलो धान भोने (घटक/पानू पॉल)
    • नातिर पूजा (टैगोर)
    • नोबोंनो (भट्टाचार्य)
    • नीलदोरपन (दिनोंबोंधू मित्रा), अभिनेता
    • निचेर महल (गोर्की), अमंचित
    • नेताजीके नीये (घटक)
    • पोरित्रान (टैगोर)
    • फाल्गुनी (टैगोर)
    • बिद्यासागोर (बोनोफूल)
    • बिसर्जन (टैगोर)
    • वंगाबांदोर (पानू पॉल), अभिनेता
    • वोटर वेट (पानू पॉल), अभिनेता
    • मुसाफिरों के लिए (गोर्की), अभिनेता
    • मैकबेथ (शेक्सपियर), अभिनेता
    • राजा (टैगोर)
    • सांको (घटक), अभिनेता
    • सेई मेये (घटक), निदेशक
    • स्त्रीर पत्रो (टैगोर)
    • होजोबोराला (सुकुमार राय)

    पुस्तकें

    • ऋत्विक घोटोकेर गॉलपो (जिसमें लघु कहानियां “गाच्टी”, “शिखा”, “रूपकोथा”, “चोख”, “कॉमरेड”, “प्रेम”, “मार” और “राजा” भी शामिल है)
    • गैलिलियो चोरित (ब्रेश्ट द्वारा लिखे लाइफ ऑफ़ गैलीलियो का बंगाली अनुवाद)
    • जाला (नाटक)
    • दोलिल (नाटक)
    • मेघे ढाका तारा (पटकथा)
    • चोलोचित्रो, मानुस एबोंग आरो किछु
    • सिनेमा एंड आई, ऋत्विक मेमोरियल ट्रस्ट, कोलकाता
    • ऑन कल्चरल फ्रंट
    • रोज़ एंड रोज़ ऑफ़ फेंसेज़: ऋत्विक घटक ऑन सिनेमा, सीगल पुस्तक प्रा. लिमिटेड, कोलकाता
    • ऋत्विक घटक कहानियां, बांगला से रानी रे द्वारा अनुवादित नई दिल्ली, सृष्टि प्रकाशक और वितरक
  • 1983 में प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ आत्माराम का निधन।डॉ आत्माराम( सिंहल) (१२ अक्टुबर, १९०८ – ६ फ़रवरी १९८३) भारत के एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे। उनकी स्मृति में केन्द्रीय हिन्दी संस्थान द्वारा ‘आत्माराम पुरस्कार’ दिया जाता है। चश्मे के काँच के निर्माण में उनका उल्लेखनीय योगदान था। वे केन्‍द्रीय कांच एवं सिरामिक अनुसन्धान संस्‍थान के निदेशक रहे तथा २१ अगस्त १९६६ को वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के महानिदेशक का पद संभाला।

    जीवन परिचय

    डॉ आत्माराम का जन्म उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के पिलाना गाँव में हुआ था। आपके पिता लाला भगवानदास एक साधारण पटवारी थे।आत्माराम जी विज्ञान की शिक्षा अपनी भाषा में देने पर जोर देते थे। उनके जीवन में इतनी सादगी थी कि लोग सम्मान के साथ उन्हें गांधीवादी विज्ञानी कहा करते थे।

    शोध कार्य

    विज्ञान की शिक्षा प्राप्त करने के बाद आत्माराम ने कांच और सेरोमिक्स पर शोध आरंभ किया। ऑप्टिकल कांच अत्यंत शुद्ध कांच होता है और उसका उपयोग सूक्ष्मदर्शी और विविध प्रकार के सैन्य उपकरण बनाने में किया जाता है। भारत में यह कांच जर्मनी से आयात होता था। इस पर प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा व्यय होती थी। डॉ. आत्माराम ने बड़ी लगन के साथ शोध करके भारत में ही ऐसा कांच बनाने की विधि का अविष्कार कर लिया। इससे न केवल देश की आत्मनिर्भरता बढ़ी वरन् औद्योगिक क्षेत्र में उसके सम्मान में भी वृद्धि हुई। 1967 में आत्माराम जी को देश की प्रमुख वैज्ञानिक संस्था ‘वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद’ का महानिदेशक बनाया गया।

    हिंदी के पक्षधर

    डॉ. आत्माराम विज्ञान की शिक्षा अपनी भाषा में देने पर जोर देते थे। उन्होंने स्वयं लिखा था-

    “विद्यार्थि जीवन में अंग्रेज़ी का अभ्यास कम होने के कारण कैमिस्ट्री मेरी समझ में नहीं आती थी, परंतु जब एक बार डॉ. फूलदेव सहाय वर्मा ने रसायन विज्ञान की मूल बातें हिंदी में समझा दीं तो मेरी गाड़ी चल पड़ी।”

    शिक्षा

    • बी. एससी., कानपुर
    • एम.ससी., इलाहाबाद
    • पी.एचडी., इलाहाबाद

    सम्मान और पुरस्कार

    • शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार (1959)
    • पद्म श्री (1959)

      आत्माराम पुरस्कार

      ‘आत्माराम पुरस्कार’ भारत का एक प्रतिष्ठित सम्मान है, जो प्रसिद्ध वैज्ञानिक आत्माराम की स्मृति में दिया जाता है। यह पुरस्कार ‘केन्द्रीय हिन्दी संस्थान’ द्वारा प्रदान किये जाने वाले प्रमुख पुरस्कारों में से एक है। यह पुरस्कार वैज्ञानिक एवं तकनीकी साहित्य तथा उपकरण विकास के क्षेत्र में व्यक्ति के उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। ‘आत्माराम पुरस्कार’ ‘मानव संसाधन विकास मंत्रालय’, भारत सरकार के ‘केंद्रीय हिंदी संस्थान’ द्वारा प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार के अंतर्गत सम्मानित व्यक्ति को एक लाख रुपये की राशि उसके सम्मान स्वरूप प्रदान की जाती है। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष दो लोगों को प्रदान किया जाता है।

  • 1993 में टेनिस के जाने माने खिलाड़ी आर्थर ऐश का निधन।
  • 2001 में वरिष्ठ कांग्रसी नेता वी.एन. गाडगिल का निधन।
  • 2006 में आज़ाद हिन्द फ़ौज के अधिकारी गुरबख्श सिंह ढिल्लों का निधन।

6 फ़रवरी के महत्त्वपूर्ण उत्सव 

6 फरवरी के दिन को उत्सव के रूप में भी मनाते हैं –

  • वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह)।

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