परमवीर अल्बर्ट एक्का का बलिदान और भोपाल यूनियन कार्बाइड गैस लीक कांड हुआ था आज

3 दिसंबर का इतिहास

दोस्तों आज जानते हैं 3 दिसंबर का इतिहास के कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं के बारें मे, उन लोगों के जन्मदिन के बारे में जिन्होंने दुनिया में आकर बहुत बड़ा नाम किया साथ ही उन मशहूर लोगों के बारें मे जो इस दुनिया से चले गए।

3 December History

लार्ड कार्नवालिस ने 1790 में आपराधिक मामलों में न्याय की ताकत मुशिर्दाबाद के नवाब से छीन कर अपने हाथ में कर ली और सदर निजामत अदालत को कोलकाता स्थानांतरित कर दिया।

  • बाजी राव द्वितीय को 1796 में मराठा साम्राज्य का पेशवा बनाया गया।
  • एंड्रयू जैक्सन 1828 में अमेरिका के सातवें राष्ट्रपति चुने गए।
  • अंग्रेज़ों ने 1824 में मद्रास और मुंबई से कुमुक मंगा कर फिर कित्तूर का किला घेर लिया।
  • वायसराय लॉर्ड विलियम बैंटिक ने 1829 में भारत में सती प्रथा पर रोक लगायी।
  • फ्रांसीसी भौतिकशास्त्री जॉर्जेज क्लाउड द्वारा 1910 में विकसित विश्व के पहले नियोन लैम्प का पहली बार पेरिस के मोटर शो में प्रदर्शन।
  • तुर्की, बुल्गारिया, सर्बिया, यूनान और मोंटेगरो ने 1912 में युद्धविराम समझौता किया।
  • भारत और नेपाल ने 1959 में गंडक सिंचाई और विद्युत परियोजना के समझौते पर हस्ताक्षर किये।
  • भारत का पहला रॉकेट (रोहिणी आर एच 75) को 1967 में थुम्बा से प्रक्षेपित किया गया।
  • इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति सुकर्णो 1967 में नजरबंद किये गए।
  • भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में युद्ध शुरू होने के बाद देश में आपातकाल लागू हुआ।
  • होन्डुरान के सेना जनरल ओस्वाल्डो लोपेज अरेलानो ने 1972 में राष्ट्रपति रमोन क्रुज का तख्ता पलट किया।
  • एक हालैंड (डच) यात्री विमान 1974 में श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में सभी 191 यात्रियों की मौत हो गई।
  • सन 1975 में लाओस गणराज्य घोषित।
  • जीन बेडेल बोकासा ने 1977 में स्वयं को मध्य अफ्रीकी साम्राज्य का सम्राट घोषित किया।
  • भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से 1984 में जहरीली गैस लीक होने से लगभग 15000 लोग मारे गए और कई हजार व्यक्ति शारीरिक विकृति के शिकार हो गए।यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन (यूनियन कार्बाइड) संयुक्त राज्य अमेरिका की रसायन और बहुलक  बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है और वर्तमान में कम्पनी में 3,800 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। 1984 में कम्पनी के भारत के राज्य मध्य प्रदेश के शहर भोपाल स्थित संयंत्र से मिथाइल आइसोसाइनेटनामक गैस के रिसाव को अब तक की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटना माना जाता है, जिसने कम्पनी को इसकी अब तक की सबसे बड़ी बदनामी दी है। यूनियन कार्बाइड को इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार पाया गया, लेकिन कम्पनी ने इस त्रासदी के लिए खुद को जिम्मेदार मानने से साफ इंकार कर दिया जिसके परिणामस्वरूप लगभग 15000 लोगों की मृत्यु हो गयी और लगभग 500000 व्यक्ति इससे प्रभावित हुए। 6 फ़रवरी 2001 को यूनियन कार्बाइड, डाउ केमिकल कंपनी की एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बन गयी। इसी वर्ष कम्पनी के गैस पीड़ितों के साथ हुए एक समझौते और भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के शुरुआत के साथ भारत में इसका अध्याय समाप्त हो गया। यूनियन कार्बाइड अपने उत्पादों का अधिकांश डाउ केमिकल को बेचती है। यह डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज का एक पूर्व घटक भी है।सन 1920 में, इसके शोधकर्ताओं ने प्राकृतिक गैस द्रवों जैसे कि इथेन और प्रोपेन से इथिलीन बनाने की एक किफायती विधि विकसित की जिसने आधुनिक पेट्रोरसायन उद्योग को जन्म दिया। आज, यूनियन कार्बाइड के पास इस उद्योग से जुड़ी सबसे उन्नत प्रक्रियायें और उत्प्रेरक प्रौद्योगिकियां हैं और यह विश्व की कुछ सबसे किफायती और बड़े पैमाने की उत्पादन सुविधाओं का प्रचालन करती है। विनिवेश से पहले विभिन्न उत्पाद जैसे कि एवरेडी और एनर्जाइज़र बैटरीज़, ग्लैड बैग्स एंड रैप्स, सिमोनिज़ कार वैक्स और प्रेस्टोन एंटीफ्रीज़ आदि कम्पनी के स्वामित्व के आधीन थे। डाउ केमिकल कंपनी द्वारा कम्पनी के अधिगहण से पहले इसके इलेक्ट्रॉनिक रसायन, पॉलीयूरेथेन इंटरमीडिएट औद्योगिक गैसों और कार्बन उत्पादों जैसे व्यवसायों का विनिवेश किया गया।

    भोपाल गैस त्रासदी

    यूनियन कार्बाइड के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग

    भोपाल गैस त्रासदी एक औद्योगिक दुर्घटना थी जो भारत के राज्य मध्य प्रदेश के भोपाल शहर में यूनियन कार्बाइड, के एक कीटनाशक संयंत्र में घटी थी। 3 दिसम्बर 1984, की आधी रात को कम्पनी के संयंत्र से अकस्मात हुए विषाक्त मिथाइल आइसोसाइनेट गैस और अन्य रसायनो के रिसाव की चपेट में संयंत्र के आसपास के इलाकों में रहने वाले लगभग 500000 लोग आये थे। पहली आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार तत्काल मरने वालों की संख्या 2259 थी। मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार कुल 3787 व्यक्तियों की मृत्यु गैस के रिसाव के परिणामस्वरूप हुई थी। गैर सरकारी अनुमानो के अनुसार 8,000-10,000 व्यक्तियों की मौत गैस रिसाव के 72 घंटे के भीतर हो गई थी और लगभग 25,000 व्यक्ति अब तक गैस से संबंधित बीमारियों से मर चुके हैं। 40,000 से अधिक स्थायी रूप से विकलांग, अंधे और अन्य गैस व्याधियों से ग्रसित हुए थे, सब मिला कर 521.000 लोग गैस से प्रभावित हुए।

    क्या हुआ था भोपाल में उस रात ?

    संयंत्र- फ़ाइल फ़ोटोभोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड के इस संयंत्र से गैस रिसी थी

    भोपाल में गैस त्रासदी पूरी दुनिया के औद्योगिक इतिहास की सबसे बड़ी दुर्घटना है. तीन दिसंबर, 1984 को आधी रात के बाद सुबह मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में यूनियन कार्बाइड की फैक्टरी से निकली ज़हरीली गैस ने हज़ारों लोगों की जान ले ली थीं.उस सुबह यूनियन कार्बाइड के प्लांट नंबर ‘सी’ में हुए रिसाव से बने गैस के बादल को हवा के झोंके अपने साथ बहाकर ले जा रहे थे और लोग मौत की नींद सोते जा रहे थे. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस दुर्घटना के कुछ ही घंटों के भीतर तीन हज़ार लोग मारे गए थे.हालांकि ग़ैरसरकारी स्रोत मानते हैं कि ये संख्या करीब तीन गुना ज़्यादा थी. मौतों का ये सिलसिला बरसों चलता रहा. इस दुर्घटना के शिकार लोगों की संख्या हज़ारों तक बताई जाती है. गैस का रिसाव यूनियन कार्बाइड की फैक्टरी से करीब 40 टन गैस का रिसाव हुआ था.

    इसकी वजह थी टैंक नंबर 610 में ज़हरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का पानी से मिल जाना. इससे हुई रासायनिक प्रक्रिया की वजह से टैंक में दबाव पैदा हो गया और टैंक खुल गया और उससे रिसी गैस ने हज़ारों लोगों की जान ले ली. सबसे बुरी तरह प्रभावित हुई कारखाने के पास स्थित झुग्गी बस्ती.वहाँ हादसे का शिकार हुए वे लोग जो रोज़ीरोटी की तलाश में दूर-दूर के गाँवों से आ कर वहाँ रह रहे थे. अधिकांश व्यक्ति निद्रावस्था में ही मौत का शिकार बने. लोगों को मौत की नींद सुलाने में विषैली गैस को औसतन तीन मिनट लगे. ऐसे किसी हादसे के लिए कोई तैयार नहीं था. यहाँ तक कि कारखाने का अलार्म सिस्टम भी घंटों तक बेअसर रहा जबकि उसे बिना किसी देरी के चेतावनी देना था. हाँफते और आँखों में जलन लिए जब प्रभावित लोग अस्पताल पहुँचे तो ऐसी स्थिति में उनका क्या इलाज किया जाना चाहिए, ये डॉक्टरों को मालूम ही नहीं था. 

    डॉक्टरों की मुश्किलें

    शहर के दो अस्पतालों में इलाज के लिए आए लोगों के लिए जगह नहीं थी. वहाँ आए लोगों में कुछ अस्थाई अंधेपन का शिकार थे, कुछ का सिर चकरा रहा था और साँस की तकलीफ तो सब को थी. एक अनुमान के अनुसार पहले दो दिनों में क़रीब 50 हज़ार लोगों का इलाज किया गया.  शुरू में डॉक्टरों को ठीक से पता नहीं था कि क्या किया जाए क्योंकि उन्हें मिथाइल आइसोसाइनेट गैस से पीड़ित लोगों के इलाज का कोई अनुभव ही नहीं था. हालांकि गैस रिसाव के आठ घंटे बाद भोपाल को ज़हरीली गैसों के असर से मुक्त मान लिया गया था.लेकिन 1984 में हुए इस हादसे से अब भी यह शहर उबर नहीं पाया है.

  • रूस के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्वाच्योव और अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने 1989 में शीत युद्ध खत्म होने की घोषणा की।
  • ताइवान में 1994 में पहला स्वतंत्र स्थानीय चुनाव सम्पन्न।
  • विश्व प्रसिद्ध गिटार वादक चार्ली ली बर्ड का 1999 में निधन।
  • विसिट फ़ॉक्स 2000 में मैक्सिको के नये राष्ट्रपति निर्वाचित।
  • ऑस्ट्रेलिया ने 2000 में वेस्टइंडीज को टेस्ट मैच में हराकर लगातार 12 टेस्ट मैच जीतने का रिकार्ड बनाया।
  • यूएनईपी ने 2002 में भारत समेत सात उष्णकटिबंधीय देशों में जैव विविधता के अध्ययन के लिए 2 करोड़ 60 लाख डालर जारी किया।
  • मुंबई में हुई 23 नवंबर की आतंकवादी घटना के बाद 2008 में आज के दिन महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री विलासराव देशमुख ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया।
  • फिलीपींस में 2012 में आये ‘भूफा’ तूफान से कम से कम 475 लोगों की मौत।

3 दिसंबर को जन्मे व्यक्ति

  • इटली के विख्यात राजनेता और इतिहासकार निकोलो मैक्यावेले का फ़लोरेन्स नगर में जन्म 1469 में हुआ।
  • भारत के एक प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस का जन्म 1882 में हुआ।
  • भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 1884 में हुआ।
  • प्रसिद्ध भारतीय इतिहासकार रमेश चन्द्र मजूमदार का जन्म 1888 में हुआ।
  • स्‍वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस का जन्म 1889 में हुआ।
  • हिन्दी के यशस्वी कथाकार और निबन्ध लेखक यशपाल का जन्म 1903 में हुआ।
  • हिन्दी साहित्य के अध्ययनशील एवं मननशील रचनाकार शिवनारायण श्रीवास्तव का जन्म 1913 में हुआ।
  • भारतीय भाषाविद विनोद बिहारी वर्मा का जन्म 1937 में हुआ।
  • जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के बीच लोकप्रिय रहे जनकवि रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ का जन्म 1957 में हुआ।
  • टेस्ट क्रिकेट मैच में दोहरा शतक बनाने वाली पहली भारतीय महिला मिताली राज का जन्म 1982 में हुआ।

3 दिसंबर को हुए निधन

  • परमवीर चक्र सम्मानित भारतीय सैनिक लांस नायक अल्बर्ट एक्का का निधन 1971 में हुआ।लांस नायक अलबर्ट एक्का (27 दिसम्बर 1942 – 3 दिसम्बर 1971) एक भारतीय सैनिक थे जो भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 में हिली की लड़ाई में वीरगति को प्राप्त हो गए थे। इन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।अलबर्ट एक्का का जन्म 27 दिसम्बर, 1942 को झारखंड के गुमला जिला के डुमरी ब्लाक के जरी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम जूलियस एक्का, माँ का नाम मरियम एक्का और पत्नी का नाम बलमदीन एक्का था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा सी सी स्कूल पटराटोली से की थी और माध्यमिक परीक्षा भिखमपुर मिडल स्कूल से पास की थी। इनका जन्म स्थल जरी गांव चैनपुर तहसील में पड़ने वाला एक आदिवासी क्षेत्र है जो झारखण्ड राज्य का हिस्सा है। एल्बर्ट की दिली इच्छा भारतीय सेना में जाने की थी, जो दिसंबर 1962 को पूरी हुई। सेना में भर्ती होने से पहले अलबर्ट एक्‍का बाइक पर बैठकर उड़ती चिड़िया पर धनुष से निशाना लगा देते थे. अलबर्ट एक्‍का ने जनजातिय रीति-रिवाज के चलते बलमदिना एक्का को भगाकर उससे शादी की थी. शादी के बाद घर-परिवार का खर्च चलाने के लिए अलबर्ट एक्‍का ने फौज ज्‍वाइन किया था.

    उन्होंने सेना में बिहार रेजिमेंट से अपना कार्य शुरू किया। बाद में जब 14 गार्ड्स का गठन हुआ, तब एल्बर्ट अपने कुछ साथियों के साथ वहाँ स्थानांतरित कर किए गए। एल्बर्ट एक अच्छे योद्धा तो थे ही, यह हॉकी के भी अच्छे खिलाड़ी थे। भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 में अलबर्ट एक्का वीरता, शौर्य और सैनिक हुनर का प्रदर्शन करते हुए अपने इकाई के सैनिकों की रक्षा की थी।14 गार्ड्स को पूर्वी सेक्टर में अगरतल्ला से 6.5 किलोमीटर पश्चिम में गंगासागर में पाकिस्तान की रक्षा पंक्ति पर कब्जा करने का आदेश मिला। दुश्मन ने इस अवस्थान (पोजीशन) की मजबूत मोर्चाबन्दी कर रखी थी। भारत के लिए इस अवस्थान पर नियंत्रण करना बहुत आवश्यक था, क्योंकि अखौरा पर कब्जा करने के लिए इसका काफी महत्व था। लांस नायक अल्बर्टएक्का पूर्वी मोर्चे पर गंगासागर में दुश्मन की रक्षा पंक्ति पर हमले के दौरान “बिग्रेड आफ द गार्ड्स बटालियन’ की बाईं अग्रवर्ती कम्पनी में तैनात थे।इन्होंने देखा कि पाकिस्तानी सैनिक भारतीय सैनिकों पर लाइट मशीनगन से गोलियों की बौछार कर रहे हैं।इनका धैर्य जवाब दे गया तो इन्होंने अकेले ही पाकिस्तानी बंकर पर धावाबोल दिया। उन्होंने बन्दूक से दो पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया, इसके बाद पाकिस्तानी मशीनगनें खामोश हो गयीं।यद्यपि इस कार्रवाई में वह गम्भीर रूप से घायल हो गए थे! किन्तु उन्होंने इसकी चिन्ता नहीं की और अपने साथियों सहित आगे बढ़ने लगे। शत्रु के अनेक बंकर नष्ट करते हुए वह पाकिस्तानी अवस्थानों पर कब्जा करते हुए आगे बढ़ते चले गए। किन्तु हमारे सैनिक अपने लक्ष्य के अनुसार उत्तरी किनारे पर पहुंचे ही थे कि पाकिस्तानी सैनिकों ने एक सुरक्षित भवन की दूसरी मंजिल से गोलियों की बौछार शुरू कर दी। इस गोलीबारी में हमारे कुछ सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए और बाकी आगे नहीं बढ़ सके। एक बार फिर से अल्बर्ट एक्का ने साहसिक कार्रवाईकरने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने घावों और दर्द की चिन्ता नहीं की और रेंगते हुए उस भवन तक जा पहुंचे। और धीरे से उसके पास बने बंकर के एक छेद से हथगोला दाग दिया, जिससे एकपाकिस्तानी सैनिक मर गया और दूसरा घायल हो गया। परन्तु इतना ही पर्याप्त नहीं था, क्योंकि पाकिस्तानी मशीनगन गोलियों की बौछार कर ही रही थी

    दो मंजिला मकान से लगातार हो रही थी फायरिंग-इनके लक्ष्य के उत्तरी छोर पर पाक शत्रु दल द्वारा एक दो मंजिला मकान से एक लाइट मशीनगन से लगातार धुंआधार गोलियों की बौछार हो रही थी।-लेकिन वो धीरे-धीरे रेंगते हुए दुश्मन के उक्त दो मंजिले मकान तक पहुंचकर एका-एक उक्त बंकर के एक छेद से दुश्मनों पर एक हैंड ग्रेनेड फेंक दिया।-हैंड ग्रेनेड फटते ही दुश्मनों के बंकर के अंदर खलबली मच गई। इसमें दुश्मन के कई सैनिक मारे गए। पर उक्त लाइट मशीनगन चलती ही रही। जिससे भारतीय सैन्य दल को खतरा बना रहा। अल्बर्ट उक्त बंकर में घुसकर दुश्मन के पास पहुंचे और अपने बंदूक के बायनेट से वार कर दुश्मन सैनिक को मौत के घाट उतार दिया।

    -इससे दुश्मन एवं उसके लाइट मशीनगन की आवाज एक साथ बंद हो गई।मगर इस दौरान गंभीर रूप से घायल होने के कारण कुछ ही पलों में अल्बर्ट एक्का शहीद हो गए।इस अभियान के समय वे काफी घायल हो गये और ३ दिसम्बर १९७१ में इस दुनिया से विदा हो गए। भारत सरकार ने इनके बलिदान को देखते हुए मरणोपरांत सैनिकों को दिये जाने वाले उच्चतम सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया था।

  • भारत के ख्याति प्राप्त हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद का निधन 1979 में हुआ।
  • पुर्तगाल के प्रधानमंत्री फ्रांसिसको साकाल्नरो का निधन 1980 में हुआ।
  • सूरीनाम को 1975 में नीदरलैंड की दासता से मुक्त कराने वाले नेता हेंक एरोन का निधन 2000 में हुआ।
  • फ़िल्म अभिनेता और निर्माता देव आनंद का निधन 2011 में हुआ।

3 दिसंबर के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव

  • भोपाल गैस त्रासदी दिवस
  • विश्व विकलांग दिवस

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