नेशनल हेराल्ड / हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा, वोरा के खिलाफ चार्जशीट 

पूर्व मुख्यमंत्री सिंह हुड्डा।पूर्व मुख्यमंत्री सिंह हुड्डा।

पानीपत. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह की परेशानी बढ़ती ही जा रही है।सीबीआई ने शनिवार को नेशनल हेराल्ड प्लॉट आवंटन मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इसमें कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड का नाम भी शामिल है। हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने मामले को आगे बढ़ाने और चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति दी थी। भूपेंद्र सिंह हुड्डा पूर्व मुख्यमंत्री हैं, इसलिए उन पर केस चलाने से पहले राज्यपाल की अनुमति लेनी जरूरी थी।

एसोसिएटड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) के अखबार नेशनल हेराल्ड के लिए पंचकूला में नियमों के खिलाफ पंचकूला में जमीन आवंटन का आरोप है। इस मामले में सतर्कता विभाग ने मई 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर केस दर्ज किया गया। यह मामला हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) की शिकायत पर दर्ज हुआ है। हुडा के अध्यक्ष तत्कालीन मुख्यमंत्री होते हैं। यह गड़बड़ी हुड्डा के कार्यकाल में हुई, इसलिए उनके खिलाफ यह मामला दर्ज हुआ है।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और मोतीलाल वोरा के खिलाफ शनिवार को आरोप पत्र दायर किया। केंद्रीय एजेंसी सीबीआई ने एक विशेष अदालत में आरोपपत्र दायर किया। मामले के जांच अधिकारी सीबीआई के डीएसपी आरएस गुंजाल चार्जशीट लेकर क़ोर्ट में पेश हुए। सीबीआई का आरोप है कि जमीन के टुकड़े को दोबारा आवंटित करने की वजह से राजकोष को 67 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।

एजेंसी ने हरियाणा के तात्कालीन मुख्यमंत्री हुड्डा (जो कि उस समय हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हूडा) के अध्यक्ष भी थे) और एजेएल के अध्यक्ष वोरा और कंपनी पर भारतीय दंड संहिता की आपराधिक षडयंत्र से संबंधित धाराओं और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं।

आरोपपत्र में सीबीआई ने कहा है कि 24 अगस्त 1982 को पंचकूला सेक्टर-6 स्थित 3360 वर्गमीटर का प्लॉट नंबर सी-17 तत्कालीन सीएम चौधरी भजनलाल ने अलॉट कराया। कंपनी को इस पर 6 माह में निर्माण शुरू कर दो साल में काम पूरा करने का समय मिला था।

लेकिन, कंपनी 10 साल में भी निर्माण कार्य पूरा नहीं करा पाई थी। 30 अक्तूबर 1992 को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) ने अलॉटमेंट रद्द करके प्लॉट रिज्यूम कर लिया।

आरोपपत्र में कहा गया है कि दोबारा यही जमीन एजेएल को 2005 में उसी दर पर फिर दे दी गई। यह हूडा के अध्यक्ष हुड्डा द्वारा किया गया मानदंडों का उल्लंघन था। 26 जुलाई 1995 को हुडा के मुख्य प्रशासक भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एस्टेट ऑफिसर के आदेश के खिलाफ कंपनी की अपील खारिज कर दी। 14 मार्च 1998 को कंपनी की ओर से आबिद हुसैन ने चेयरमैन हुडा को प्लाट की अलाटमेंट बहाली के लिए अपील की।
14 मई 2005 को चेयरमैन हुडा ने अफसरों को एजेएल कंपनी के प्लाट अलॉटमेंट की बहाली की संभावनाएं तलाशने को कहा। लेकिन, कानून विभाग ने अलॉटमेंट बहाली के लिए साफ तौर पर इनकार कर दिया।
18 अगस्त 1995 को फ्रेश अलॉटमेंट के लिए आवेदन मांगे गए। इसमें एजेएल कंपनी को भी आवेदन करने की छूट दी गई। 28 अगस्त 2005 को हुड्डा ने एजेएल को ही 1982 की मूल दर पर प्लाट अलॉट करने की फाइल पर साइन कर दिए। साथ ही कंपनी को छह माह में निर्माण शुरू कर एक साल में काम पूरा करने को भी कहा गया। सीएम हुडा ने भी पुराने रेट पर प्लॉट अलॉट करने के आदेश दिए।

धारा 409 हटाई

सीबीआई ने धारा 120-बी, 420, 13 (1) रीड विद, 13 (2) तहत भूपेंद्र सिंह हुड्डा व मोती लाल वोरा के सीबीआई कोर्ट में शनिवार को चार्जशीट दाखिल की है। सीबीआई द्वारा जब केस दर्ज किया गया था तो अन्य धाराओं के साथ 409 भी लगाई थी, लेकिन शनिवार को दाखिल की गई चार्जशीट में 409 धारा नहीं लगाई गई है।

 

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