निशंक के कैबिनेट मंत्री बनने से उत्तराखंड की राजनीति पर होंगे पांच बड़े असर

निशंक को कैबिनेट मंत्री बनाने के पीछे राज्य में सत्ता संतुलन को साधने की कोशिशों के रूप में देखा जा रहा है.मोदी कैबिनेटः निशंक के कैबिनेट मंत्री बनने से ये 5 बड़े असर होंगे उत्तराखंड की राजनीति पररमेश पोखरियाल निशंक के कैबिनेट मंत्री बनने का राज्य की राजनीति पर असर होना लाज़िमी है.

मुख्यमंत्री के बाद किसी राज्य में यदि कोई दूसरा पावर सेंटर होता है तो वह होता है केन्द्रीय मंत्री. उत्तराखण्ड जैसे छोटे राज्य के लिए तो यह मसला और भी बड़ा हो जाता है. रमेश पोखरियाल निशंक के मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने के बाद ये चर्चायें गर्म हो गई हैं कि राज्य की राजनीति में इसका क्या फर्क पड़ेगा. इसे समझने के लिए पांच आधारों का विश्लेषण करते हैं.

मोदी-अमित शाह से नजदीकी
निशंक के मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय मिलने से उनकी नज़दीकी नरेन्द्र मोदी और अमित शाह से काफी बढ़ जाएगी. इसका असर यह होगा कि राज्य के भाजपा नेताओं का निशंक के प्रति झुकाव बढ़ेगा. पार्टी आलाकमान तक बात पहुंचाने के लिए निशंक एक बड़े सूत्रधार हो सकते हैं. जिन नेताओं को अपनी बात राज्य की लीडरशिप से उपर पहुंचानी होगी उनके लिए निशंक एक बड़ी उम्मीद होंगे.

सत्ता-संतुलन


निशंक को कैबिनेट मंत्री बनाने के पीछे राज्य में सत्ता संतुलन को साधने की कोशिशों के रूप में देखा जा रहा है. बम्पर मैजॉरिटी वाली त्रिवेन्द्र सरकार की भविष्य में कोई निरंकुशता न बढ़े, इसके लिए पार्टी आलाकमान ने सत्ता संतुलन को साधने का प्रयास किया है.

जातीय समीकरण

उत्तराखण्ड की राजनीति को हमेशा ही ठाकुर-ब्राह्मण फैक्टर के हिसाब से सजाया जाता रहा है. दलित प्रतिनिधित्व का भी ध्यान रखा जाता रहा है. हालांकि 2014 में बनी मोदी सरकार में इस नज़रिए को लगभग नज़रअंदाज किया गया था. पांचों सीटें जीतने के बावजूद मोदी सरकार के दो साल के कार्यकाल के बाद साल 2016 में एक दलित चेहरे अजय टम्टा को मंत्री बनाया गया था.

2017 में विधानसभा के चुनाव में जीत के बाद ठाकुर जाति के त्रिवेन्द्र सिंह रावत को सीएम बनाया गया लेकिन, ब्राह्मण समाज को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट से ही संतोष करना पड़ा. इस बार निशंक को कैबिनेट मंत्री बनाकर मोदी सरकार ने ब्राह्मण जाति के लोगों को बड़ा प्रतिनिधित्व दिया है. दलितों को सहेजने के लिए उसके पास यशपाल आर्या और रेखा आर्या हैं जो राज्य सरकार में मंत्री हैं.

सेकेण्ड लाइन लीडरशिप की तैयारी

उत्तराखण्ड में भाजपा के पास ब्राह्मण नेताओं का टोटा है. कुमाऊं में जाना-पहचाना चेहरा अजय भट्ट का तो हैं लेकिन, गढ़वाल में उसके पास सिर्फ़ और सिर्फ़ रमेश पोखरियाल निशंक हैं. लिहाजा निशंक को बड़ी जिम्मेदारी देकर पार्टी सेकेण्ड लाइन लीडरशिप के लिए उन्हें तैयार कर रही है.

राज्य की राजनीति से दूरी

निशंक के केन्द्र में कैबिनेट मंत्री बन जाने से अब इस बात की संभावना है कि वह राज्य की राजनीति से दूर हो जाएंगे क्योंकि मोदी मंत्रिमण्डल में आने के बाद उन्हें देशभर की जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी. लिहाज़ा उन्हें राज्य की राजनीति के लिए उतना समय नहीं मिल पाएगा. इससे राज्य के दूसरे पावरफुल भाजपा नेताओं को थोड़ा और पैर पसारने की गुंजाइश मिल सकती है.

57 मंत्रियों की बदौलत मोदी 2.0 देश को आगे ले जाने को तैयार है. 2014 में पीएम मोदी की कैबिनेट में 45 लोग थे. इसबार देश का दारोमदार 57 कन्धों पर है. बात अगर मोदी 2.0 कैबिनेट पर हो तो 57 लोगों में 36 पुराने हैं जबकि 2019 में पीएम मोदी ने 21 नए लोगों को मौका दिया है और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है. इस बार की कैबिनेट का यदि अवलोकन किया जाए तो मिलता है कि एक तरफ जहां कुछ लोग ऐसे हैं जो अपना पड़ डिजर्व करते हैं तो वहीं उन लोगों की भी संख्या ठीक ठाक है जो या तो किसी दबाव में या फिर अपनी पुरानी वफादारी के कारण नए मंत्रिमंडल में शामिल किये गए हैं.

यूं तो नए मंत्रिमंडल में तमाम लोग हैं. मगर मोदी 2.0 में यदि वाकई किसी का साथ उसके भाग्य ने दिया है, तो वो और कोई नहीं बल्कि भाग्य पर भरोसा रखने और उसी के चलते विवादों में आने वाले रमेश पोखरियाल निशंक हैं.

रमेश पोखरियाल निशंक, उत्तराखंड, मोदी 2.0, मानव संसाधन विकास मंत्री निशंक के एचआरडी मिनिस्टर बनाए जाने के बाद बड़ा सवाल ये है कि क्या वो इस दौरान अपनी जुबान पर लगाम रखेंगे

अब इसे किस्मत की मेहरबानी कहें, मोदी की सुनामी कहें या फिर इनकी खुद की मेहनत और लोकप्रियता उत्तराखंड के हरिद्वार से कांग्रेस के अंबरीश कुमार के खिलाफ चुनाव लड  उन्हें 2. 5 लाख वोटों से हराकर सांसद बने निशंक मोदी 2. 0 में मानव संसाधन मंत्री बनाए गए हैं.

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बात यदि निशंक की खासियतों पर हो तो इनकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये मस्तिष्क से साहित्यकार और मन से कवि हैं. राष्ट्रवादी कवि के रूप में मशहूर निशंक कितने बड़े साहित्य प्रेमी है इसे ऐसे समझा जा सकता है कि अब तक निशंक के 10 कविता संग्रह, 12 कहानी संग्रह, 10 उपन्यास, 6 बाल साहित्य सहित कुल 40 से ज्यादा किताबें छप चुकी हैं. निशंक कहानी, कविता, लघुकथा, खण्ड काव्य, बाल साहित्य, ट्रेवल, उपन्यास सब कुछ लिख लेते हैं.

निशंक भले ही साहित्य प्रेमी हों मगर इनका विवादों से पुराना नाता है. बात 2014 की है. संसद में फुल अटेंडेंस रखने वाले निशंक 2014 में दी स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर बिल पर चर्चा कर रहे थे. चर्चा अच्छी चली मगर उस वक़्त उन्होंने सबको हैरत में डाल दिया जब उन्होंने ये कहा कि ‘विज्ञान ज्योतिष के सामने बौना है. ज्योतिष ही सबसे बड़ी साइंस है. असल में तो ज्योतिष, साइंस से बहुत ऊपर है. हमें इसे प्रमोट करना चाहिए. हम आज न्यूक्लियर साइंस की बात करते हैं लेकिन कश्यप ऋषि ने एक लाख साल पहले ही न्यूक्लियर टेस्ट कर लिया था. हमें ट्रांसप्लांट की भी जानकारी थी.’निशंक का इतना कहना भर था विवाद शुरू हो गए. एक ऐसा बड़ा वर्ग सामने आ गया जिसने कहा कि निशंक अपनी दकियानूसी बातों  के दम पर अंधविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं.

जैसा कि हम बता चुके हैं निशंक का विवादों से पुराना नाता है. तो यहां ये भी बताना बहुत जरूरी है कि निशंक के ऊपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं. चाहे उत्तराखंड में बिजली परियोजनाओं के आवंटन का घोटाला रहा हो या फिर कुंभ के आयोजन में ठेकेदारों और प्रभावशाली लोगों और कंपनियों को फ़ायदा पंहुचाने के आरोप हों पूर्व में ऐसे तमाम मौके आए हैं जब निशंक की वजह से न सिर्फ पार्टी बल्कि खुद प्रधानमंत्री मोदी तक शर्मिंदा हुए हैं.

बहरहाल अब जबकि एक लम्बे वक़्त के बाद निशंक फिर चर्चा में हैं. तो देखना दिलचस्प रहेगा कि उनकी सोच बदली है या अब भी वो अपने कोमल ह्रदय के आगे मजबूर हैं और विज्ञान, ज्योतिष, राजनीति सब एक करेंगे.

बात बहुत साफ है. देश और देश की जनता दोनों ही गुजरी बातों को भूल चुकी है. ऐसे में निशंक के लिए भी ये जरूरी हो गया है कि वो एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री की तरह बर्ताव करें. हम ऐसा इसलिए भी कह कह रहे हैं क्योंकि भारत एक विशाल लोकतंत्र है और देश के प्रधानमंत्री मोदी के कारण दुनिया भर की नजरे भारत पर हैं ऐसे में अगर फिर निशंक ने कुछ अनाप शनाप कह दिया तो फिर इस बार उसे सही करना खुद देश के प्रधानमंत्री के लिए भी बहुत मुश्किल होगा.

निशंक भी डिग्री विवाद में घिरे, नाम के आगे डॉक्टर पर उठे सवाल

मोदी सरकार की दूसरी पारी में बने मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी डिग्री विवाद में खुद को घिरा पा सकते हैं. उनकी डी लिट की दो उपाधियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक.मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक..
नए बने मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी कथित फेक डिग्री विवाद में खुद को घिरा पा सकते हैं. नाम के आगे डॉक्टर लगाने के उनके शौक ने उन्हें श्रीलंका स्थित एक अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय से दो-दो मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया. जबकि यह विश्वविद्यालय श्रीलंका में पंजीकृत ही नहीं है.दरअसल, 90 के दशक में कोलंबो की ओपेन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने रमेश पोखरियाल निशंक को शिक्षा में योगदान के लिए एक डी लिट (Doctor of Literature) की डिग्री दी. इसके कुछ वर्षों बाद उन्हें एक और डी लिट डिग्री उसी विश्वविद्यालय से मिली. इस बार विज्ञान में योगदान के लिए उन्हें दूसरी डिग्री दी गई चौंकाने वाली बात रही कि यह विश्वविद्यालय श्रीलंका में न तो विदेशी और न ही घरेलू विश्वविद्यालय के तौर पर रजिस्टर्ड है. श्रीलंका के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इसकी पुष्टि भी की. इस बाबत पिछले साल देहरादून में फाइल हुई एक आरटीआई पर उनके बायोडाटा के बारे में आधी-अधूरी जानकारी आई.इतना ही नहीं उनकी सीवी और  पासपोर्ट में अलग-अलग जन्मतिथि दर्ज है. सीवी के अनुसार पोखरियाल का जन्म 15 अगस्त 1959 को हुआ, जबकि उनके पासपोर्ट में 15 जुलाई 1959 है.

5 जुलाई 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी जिले के पिनानी गांव में जन्मे निशंक ने हेमवती बहुगुना गढ़वाल विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की. उनके पास पीएचडी (ऑनर्स) और डी. लिट (ऑनर्स) की भी डिग्री है. वह जोशीमठ स्थ‍ित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संचालित सरस्वती श‍िशु विद्या मंदिर में श‍िक्षक के रूप में भी अपनी सेवा दे चुके हैं.

निशंक ने दी सफाई

रमेश पोखरियाल निशंक ने सफाई देते हुए कहा कि जहां तक मेरी अलग-अलग जन्मतिथि का सवाल है. हिन्दू जन्मपत्री और स्कूल में मेरी जन्मतिथि अलग है. ऐसा सामान्य तौर पर सबके साथ होता है. मैंने इस पर कभी ध्यान नहीं दिया. मैंने अलग अलग जन्मतिथि से कभी कोई लाभ नहीं लिया.

ईरानी की डिग्री पर विपक्ष उठाता रहा है सवाल

पिछली सरकार में जब स्मृति ईरानी मानव संसाधन एवं विकास मंत्री थीं तो उनकी डिग्री पर भी विपक्ष सवाल उठाता रहा.विपक्ष का कहना था कि 2004 और 2014 के शैक्षणिक योग्यता में स्मृति ईरानी ने अलग जानकारी दी. 2004 में स्मृति ने एफिडेविट में दिल्ली यूनिवर्सिटी से आर्ट डिग्री में स्नातक होने की बात लिखी. वहीं 2014 में उन्होंनें अमेठी से राहुल के खिलाफ चुनाव लड़ने के दौरान 1994 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से कॉमर्स पार्ट-1 में स्नातक होने की बात लिखी. इस बार लोकसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेस ने डिग्री को लेकर हमला बोला था.

 निशंक का सियासी सफर

1991 – कणर्प्रयाग से लगातार 3 बार विधायक रहे.

1997 – उत्तर प्रदेश में पहली बार कल्याण सिंह मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री.

1999 – रामप्रकाश गुप्त की सरकार में भी संस्कृति मंत्री बने

2000 – उत्तराखंड सरकार का गठन होने पर वित्त, राजस्व, कर, पेयजल सहित 12 विभागों के मंत्री बने.

2007 – उत्तराखंड का चिकित्सा स्वास्थ्य और विज्ञान प्रौद्धोगिकी मंत्री बनाया गया.

2009 – उत्तराखंड में बीजेपी सरकार में मुख्यमंत्री बने.

2012 – देहरादून के डोईवाला से विधायक बनें.

2014 और 2019- हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र से सांसद बने.

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