निकाय चुनाव 2018:  मूल रूप से ‘कांग्रेसी’ निर्दलियों वार्ड सदस्यों की सूची होगी जारी ?

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंहकांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह

नगर निकाय चुनाव परिणामों के बाद वार्ड सदस्य पदों पर निर्दलियों की संख्या सबसे ज्यादा दिखाई दे रही हो, लेकिन जल्द ही यह संख्या कम हो जाएगी। इसकी जगह कांग्रेस के सदस्यों का बढ़ता और चमकता आंकड़ा दिखाई पड़ सकता है।  दरअसल, कांग्रेस का दावा है कि उसने एक, दो नहीं, बल्कि पूरे 49 नगर निकायों में वार्ड सदस्यों के पदों पर किसी भी उम्मीदवार को चुनाव चिन्ह आवंटित नहीं किया था। इसकी वजह, चुनाव में आंतरिक कलह से बचना था।
अब पार्टी निर्दलीय बतौर जीते, लेकिन मूल रूप से कांग्रेसी वार्ड सदस्यों की सूची तैयार कर रही है। इसे जल्द ही जारी कर दिया जाएगा। वैसे, तमाम निर्दलियों को अपना बताने के मामले में भाजपा भी पीछे नहीं है। मगर वह इसकी सूची जारी करेगी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है।

551 निर्दलीय जीते

राज्य निर्वाचन आयोग ने अभी तक 1064 में से 1063 निर्वाचित वार्ड सदस्यों की सूची जारी की है। चमोली जिले के पोखरी नगर पंचायत के नतीजे अभी घोषित नहीं हुए हैं। वहां पर एक वार्ड के लिए दोबारा से मतदान कराया जा रहा है। इस निकाय के वार्ड सदस्यों के लिए भी पार्टी ने चुनाव चिन्ह नहीं दिए हैं। वार्ड सदस्यों के घोषित नतीजों के बाद पूरे प्रदेश में जो स्थिति बनी है, उसमें 551 निर्दलीय जीते हैं।
भाजपा के 323 वार्ड सदस्यों को जीत हासिल हुई है। कांग्रेस के खाते में 181 का आंकड़ा दर्ज हुआ है। अन्य दलों की बात करें, तो बसपा के चार, आप के दो और यूकेडी और सपा के एक-एक वार्ड सदस्य चुने गए हैं। तकनीकी तौर पर कांग्रेस के वार्ड सदस्यों की संख्या भाजपा के मुकाबले काफी कम दिख रही है, लेकिन बुधवार को कांग्रेस नई जानकारी के साथ मीडिया से मुखातिब हुए।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के अनुसार, 53 निकायों में वार्ड सदस्यों के चुनाव में चिन्ह आवंटित नहीं किए थे। बहुत बड़ी संख्या में कांग्रेस के निर्दलीय वार्ड सदस्य बने हैं। इनकी सूची तैयार की जा रही है, जिसे जल्द ही घोषित कर दिया जाएगा।Image result for उत्तराखंड कांग्रेस ' निर्दलियों वार्ड सदस्यों

इन निकायों में कांग्रेस ने नहीं दिए थे चुनाव चिन्ह

नगर निगम-हल्द्वानी
नगर पालिका परिषद-नैनीताल, रामनगर, भवाली, मंगलौर, बडकोट, चिन्यालीसौड़, गोपेश्वर, जोशीमठ, गौचर, कर्णप्रयाग, देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, धारचूला, डीडीहाट, चंपावत, टनकपुर, अल्मोड़ा, रानीखेत-चिनियानौला, सितारगंज, खटीमा, महुआखेड़ागंज

नगर पंचायत-सुल्तानपुर पट्टी, शक्तिगढ़, नानकमता, महुवाडाबरा, कालाढूंगी, लालकुआं, भीमताल, भिकियासैंण, द्वाराहाट, गंगोलीहाट, लोहाघाट, बनबसा, बेरीनाग, अगस्त्यमुनि, ऊखीमठ, तिलवाड़ा, गैरसैंण, थराली, पीपलकोटी, कीर्तिनगर, झबरेड़ा, भगवानपुर, पिरान कलियर, पुरोला, नौगांव, नंदप्रयाग

 दहेज उत्पीड़न के मामले में फंसीं कांग्रेस मेयर प्रत्याशी, पुलिस ने पति समेत किया गिरफ्तार

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उत्तराखंड की काशीपुर कोतवाली पुलिस ने कांग्रेस से मेयर प्रत्याशी रहीं मुक्ता सिंह व उनके पति रविन्द्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में तीन अन्य आरोपी अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। कांग्रेस नेत्री की गिरफ्तारी के विरोध में कार्यकर्ताओ ने कोतवाली गेट पर प्रदर्शन कर धरना दिया। बीती 29 सिंतबर को गिरीताल कॉलोनी निवासी प्रियंका (पुत्री महेश वर्मा ) ने कुंडेश्वरी निवासी मुक्ता सिंह, उनके पति रविन्द्र सिंह, पुत्र शशांक सिंह समेत जेठ जेठानी के खिलाफ दहेज के लिए प्रताड़ित करने व जबरन गर्भपात कराने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था।
इस मामले में पूर्व विवेचना अधिकारी ने पति के अलावा अन्य के पक्ष में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। एसएसपी ने इस मामले में विवेचना अधिकारी मंजू पवार व दरोगा पीडी जोशी को निलंबित कर दिया था। इस मामले की विवेचना उपनिरीक्षक जय प्रकाश को सौंपी गई थी। पुलिस ने गुरुवार को आरोपी दम्पति को गिरफ्तार कर लिया।
बता दें कि दिसंबर 2011 को हिंदू रीति-रिवाज के साथ मुक्ता की शादी शशांक सिंह के साथ हुई थी। इस दौरान पिता ने सामर्थ्य के अनुसार आई-20 कार समेत दहेज भी दिया था। लेकिन कुछ समय बाद ही ससुरालियों ने उसे फिर से दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
ससुरालियों ने दहेज में 50 लाख रुपये और एंडेवर कार की मांग की। इतनी बड़ी डिमांड पूरी न करने पर पति शशांक, ससुर रविंदर सिंह, सास मुक्ता सिंह, जेठ अनुराग व जेठानी दीपाली ने मारना पीटना शुरू कर दिया। इसके बाद मई 2015 में वह मायके आ गई। आरोप लगाया था कि इस बीच सास मुक्ता सिंह ने पीड़िता का दो बार गर्भपात भी करा दिया था।

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