धर्म से बढ़कर है योग, समझने लगे हैं लोग,अतंराष्ट्रीय योग दिवस

ऐसा नहीं है कि इससे पहले लोग योग नहीं करते थे या योग के महत्व को समझते नहीं थे. लेकिन योग को एक खास दिन मिल जाने के बाद लोगों में इसे लेकर जागरूकता आई

International Yoga Day 2018: धर्म से बढ़कर है योग, जिसे लोग समझने लगे हैं
योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है. मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है, विचार, संयम और पूर्ति प्रदान करने वाला है. ये स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है. यह व्यायाम के बारे में नहीं है, लेकिन अपने भीतर एकता की भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज के विषय में है. हमारी बदलती जीवन- शैली में यह चेतना बनकर, हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकता है. तो आएं एक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को गोद लेने की दिशा में काम करते हैं.

27 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र की महासभा में अपने भाषण के दौरान इन शब्दों के साथ सबसे पहले योग दिवस की पहल की थी. इसके बाद 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र के 177 से ज्यादा सदस्य की तरफ से 21 जून को अतंराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई और 21 जून अंतराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित कर दिया गया. पीएम मोदी की पहल के बाद संयुक्त राष्ट्र में 90 दिनों के भीतर इस प्रस्ताव को पूर्णबहुमत से पारित कर दिया गया था, जो किसी दिवस प्रस्ताव के लिए सबसे कम समय था.

शायद ऐसा पहली बार हुआ होगा जब किसी दिवस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए लगभग पूरी दुनिया एकजुट हो गई हो. प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल को दुनिया के कई देशों ने अपना समर्थन दिया था. सबसे पहले समर्थन में आए नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री सुशील कोइराला. इसके बाद अमेरिका के साथ-साथ कनाडा, चीन, इजिप्ट जैसे कई देश पीएम मोदी के समर्थन में आए. और अंत में 21 जून को अंतराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की मंजूरी मिल गई.

इसके एक साल बाद यानी 2015 में जब दिल्ली के राजपथ पर पहला अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया तो उसके लिए भी खास तैयारियां की गई थीं. इस दिन को यादगार बनाने के लिए और योग के महत्व को समझाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के साथ बाबा रामदेव भी आगे आए. इस दिन करीब 36,000 लोगों ने एक साथ योग किया. इन सभी लोगों ने 35 मिनट में 21 योग आसन करके दिखाए. इसमें करीब 84 देशों के लोगों ने एक साथ भाग लिया और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना डाला.

People practise Metta Float Yoga at the adriatic cost in Meduli

जेल से लेकर जल तक हर जगह योग

इस दिन को इतने बड़े लेवल पर मनाने का अहम मकसद था. और वो था लोगों के बीच योग को लेकर जागरूकता फैलाना. लोगों को ये बताना कि योग दुनिया के लिए वो खजाना है जिसको पाकर नकारात्मक से नकारात्मक व्यक्ति पर भी सकारातमक प्रभाव पड़ने लगता है. दरअसल योग इनसान को शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है. शायद यही कारण है कि लोग अब योग के महत्व को समझने लगे हैं और अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में भी योग के लिए समय निकाल ही लेते हैं.                         Image result for मुस्लिम और ईसाई धर्म के लोग योग

ऐसा नहीं है कि इससे पहले लोग योग नहीं करते थे या योग के महत्व को समझते नहीं थे. लेकिन योग को एक खास दिन मिल जाने के बाद लोगों में इसे लेकर जागरूकता और फैल गई और तब ये निरंतर बढ़ती ही जा रही है. जेल से लेकर जल तक और मंदिर से लेकर स्कूल तक हर जगह योग की लोकप्रियता फैल चुकी है. योग के महत्तव को समझाने के लिए जगह-जगह योग शिविर लगाए जा रहे हैं जिसमें बड़ें बूढ़े तो क्या, बच्चे भी बढ़-चढ़ कर भाग लेते हुए नजर आते हैं. इतना ही नहीं देश के कई जेलों में भी अच्छे स्वास्थ्य और सकारात्मक मानसिकता के लिए कैदियों को योग का प्रशिक्षण दिया जाता है.

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योग को लेकर जारी है विवाद

हालांकि इस दौरान योग को लेकर लोगों में कुछ नकारात्मक बातें भी सामने आईं मगर फिर भी दुनियाभर में इसके विकास पर कोई खास असर नहीं पड़ा. दरअसल मुस्लिम और इसाई धर्म के लोग योग को हिंदु और बौद्ध धर्म से जुड़ी एक प्राचीन साधना के रूप में मानते हैं. कई इस्लामिक लोगों का मानना है कि  योग करना इस्लाम के खिलाफ है. विदेशों के कुछ पादरी तो योग को ‘शैतानी’ करार दे चुके हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें सूर्य नमस्कार और श्लोक तप को भी आसन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. और देखा जाए जो हिंदु देवताओं की अराधनाओं के लिए इन दोनों चीजों का इस्तेमाल होता है.

लाहौर में योग और प्राणायाम करते दिखे मुसलमान, पाक मीडिया में आई तस्वीर

पाकिस्तान से यह तस्वीर तब जारी हुई है जब हिंदुस्तान में मुसलमानों को योग के खिलाफ आवाज बुलंद करते देखा जाता है

पाकिस्तान के प्रतिष्ठित अखबार डॉन ने लाहौर से एक तस्वीर जारी की है जिसमें कई मुसलमानों को एक पार्क में योग करते दिखाया गया है.

डॉन के ई-पेपर में छपी इस तस्वीर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2018 पर लाहौर के शालीमार गार्डन में बुधवार सुबह योग और प्राणायाम करते मुसलमानों को दिखाया गया है.

'डॉन' के ई-पेपर से साभारपाकिस्तानी अखबार द डॉन के ई-पेपर से साभार

पाकिस्तान से यह तस्वीर तब जारी हुई है जब हिंदुस्तान में मुसलमानों को योग के खिलाफ आवाज बुलंद करते देखा जाता है. इतना ही नहीं, दुनिया के और भी कई देश हैं जो योग को हिंदू और बौद्ध मान्यताओं से जोड़ कर देखते हैं.

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के विलियम क्रीमर की एक रिपोर्ट की मानें तो दुनिया भर में कई मुस्लिम, ईसाई और यहूदी लोग योग को लेकर कई प्रकार के संदेह जाहिर करते हैं. ये लोग योग को हिंदू और बौद्ध धर्म से जुड़ी मान्यता मानते हैं और इसे साधना के रूप में लेते हैं. क्रीमर ने बताया है कि कैसे 2012 में ब्रिटेन में एक चर्च ने एक योग क्लास पर बैन लगा दिया था. क्रीमर की इस रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के पादरी जॉन शैंडलर योग को ‘शैतानी’ बता चुके हैं.

पाकिस्तानी अखबार डॉन ने 21 जून गुरुवार को एएफपी के हवाले से छापी एक खबर में बताया है कि हिंदुस्तान के मुसलमान भी योग के खिलाफ गाहे-बगाहे अपनी आवाज बुलंद करते दिखते हैं. डॉन ने भारत सरकार के आयुष मंत्रालय का भी जिक्र किया है जो देश-दुनिया में योग दिवस का आयोजन करता है.

आयुष मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक योग क्रिया के दौरान ओम और हिंदू वैदिक मंत्रों, श्लोकों का उच्चारण होना चाहिए. मुसलमान ओम और मंत्रों, श्लोकों के उच्चारण की खिलाफत करते रहे हैं. उनका मानना है कि ऐसे उच्चारण मुस्लिम मजहब के खिलाफ हैं और वे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से एक खास विचार थोपने का आरोप लगाते हैं.

सऊदी अरब में योग को मिला खेल का दर्जा
भारत में जहां योग और धर्म लेकर विवाद छिड़ा है, वहीं दूसरी ओर इस्लामिक देश सऊदी अरब में योग को एक खेल के तौर पर आधिकारिक मान्यता मिल गई है।
सऊदी अरब की ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री ने स्पोर्ट्स ऐक्टिविटीज के तौर योग सिखाने को पिछले साल ही आधिकारिक मान्यता दे दी है। सऊदी अरब में अब लाइसेंस लेकर योग सिखाया जा सकेगा।
खास बात यह है कि नोफ मारवाई नामक एक महिला को सऊदी अरब की पहली योग प्रशिक्षक का दर्जा भी मिल गया है। योग को खेल के तौर पर सऊदी में मान्यता दिलाने का श्रेय भी नोफ को ही जाता है। नोफ ने इसके लिए लंबे समय तक अभियान चलाया था। अरब योगा फाउंडेशन की फाउंडर नोफ का मानना है कि योग और धर्म के बीच किसी तरह का कॉन्फ़्लिक्ट नहीं है। आपको बता दें कि 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग को वैश्विक तौर पर स्वीकृति मिली थी और 21 जून को हर साल विश्व भर में योग दिवस मनाया जाता है।

नोफ मारवाई (तस्वीर साभार- ट्विटर)

मुसलमानों ने 1400 सालों से अपना रखा है योग: नदीम


दिन भर में 5 समय की नमाज में 23 बार वज्रासन करते है मुसलमान

प्रत्येक धर्म ने योग को किसी न किसी रूप में अपना रखा है। मुसलमानों ने भी 1400 साल से अधिक समय से अपने जीवन में योग अपना रखा है। मुसलमानों के लिये पांच समय की नमाज पढ़ना अनिवार्य है। इसमें मुसलमान प्रतिदिन 23 बार वज्रासन करते है। इसके अतिरिक्त नमाज में मुसलमानों द्वारा विभिन्न आसन तथा रोजाना योग मुद्रायें भी की जाती है।
उत्तराखंड प्रतिष्ठित समाज सेवी संस्था माकाक्स के केन्द्रीय अध्यक्ष तथा 40 कानूनी जागरूकता पुस्तकों के लेखक नदीमुद्दीन एडवाकेट ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उक्त जानकारी देते हुये बताय। इस अवसर पर नमाज को इस्लामिक योग बताते हुये इसके फायदें पर उनके द्वारा लिखित पुस्तक ”सेहत और खुशहाली की कंुजी नमाज और जकात” भी निःशुल्क उपलब्ध करायी गयी। नदीमुद्दीन लिखित इस पुस्तिका में स्पष्ट किया गया है। नमाज इस्लामिक योग भी कही जा सकती है। योगासन से जो फायदें प्राप्त किये जाते है वह भी सभी नमाज से भी प्राप्त किये जाते है। इस पुस्तक में नमाज की हर स्थििति के फायदों के साथ-साथ दुनिया से गरीबी दूर करने का रास्ता जकात के बारे में भी जानकारी दी गयी है।
नदीमुद्दीन ने बताया कि नमाज में बैठने की स्थिति बिल्कुल वज्रासन जैसी है और दिन भर की पांच अनिवार्य नमाजों में कुल 23 बार इस स्थििति में बैठना होता है। इस प्रकार नमाज पढ़ने वाला मुसलमान दिन भर में 23 बार वज्रासन करता है। यह सभी जानते है कि वज्रासन ही एक ऐसा आसान है जिसके लिये खाली पेट होना आवश्यक नहीं है।
इसके अतिरिक्त नमाज में भू नमन वज्रासन, दक्षासन, हस्तपादासन तथा सूर्य नमस्कार सहित विभिन्न योगासनांे की भी स्थिितियां की जाती है। नमाज के बाद तस्बीह में अंगूठे से अंगुलियों को मिलाकर ध्यान मुद्रा, पृथ्वी मुद्रा, वरूण मुद्रा, ज्ञान मुद्रा तथा आकाश मुद्रा सहित विभिन्न योग मुद्रायें भी स्वतः हो जाती है।
नदीमुद्दीन ने कहा कि प्रत्येक धर्म ने योग को किसी न किसी रूप में अपना रखा है इसलिये योग को किसी एक धर्म विशेष से नहीं जोड़ा जाना चाहिये और इसे साम्प्रदायिक सौहार्द बढ़ाने के लिये प्रयोग किया जाना चाहिये। योग के फायदें उठाने मे किसी को भी कोई संकोच नहीं होना चाहिये।

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ऐसे में ये विवाद उठना लाजिमी है. मगर योग से जुड़ने की चाह रखने वालों के लिए  ये सब बस एक सोच या नजरिए पर निर्भर करता है. बीबीसी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक ‘योग लंदन’ की सह संस्थापक रेबेका फ्रेंच बताती हैं कि ‘ये थोड़ा धार्मिक है, लेकिन ये आपके नज़रिए पर निर्भर करता है. अगर मैं चाहूं तो घुटने टेकने का मतलब प्रार्थना करना भी है और मैं ये भी सोच सकती हूं कि मैं तो सिर्फ झुक रही हूं.’ हालांकि अन्य धर्मों द्वारा इसे अपनाया जाना चाहिए या नहीं ये एक बहस का विषय का है.Image result for मुस्लिम और ईसाई धर्म के लोग योग

यही कारण है कि देश में जब पहला अतंराष्ट्रीय दिवस मनाया गया तो उसमें सूर्य नमस्कार और श्लोक जप को आधिकारिक कार्यक्रम से हटा दिया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग बिना किसी धर्म या जाति के भेदभाव के योग से जुड़ सकें और इसके महत्व को समझ सकें. खैर योग से जुड़े इन तमाम विवादों के बावजूद  इस तथ्य को भी नहीं नकारा जा सकता कि खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से ठीक रखने के लिए दुनिया भर के लोग अब योग से जुड़ने लगे हैं. योग आज पूरी दुनिया का एक मदत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है जिससे दुनिया के लगभग 190 से ज्यादा देश जुड़ चुके हैं.

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इस साल भी हुई खास तैयारियां

योग के महत्व को बरकरार रखते हुए इस साल भी देश में अंतराष्ट्रीय योग दिवस के लिए खास तैयारियां की गई हैं. चौथे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर गुरुवार को देशभर में बड़ी संख्या में योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किए गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देहरादून में योग कार्यक्रम में करीब 55 हजार लोगों के साथ बैठकर आसन किया. इसके अलावा, गृह मंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ में, नितिन गडकरी नागपुर में, सुरेश प्रभु चेन्नई, सदानंद गौड़ा गोवा, उमा भारती रुद्रप्रयाग, रामविलास पासवान हाजीपुर, अनंतकुमार बैंगलोर, रविशंकर प्रसाद पटना, जे.पी नड्डा शिमला में योग किया. इतना ही नहीं इस योग दिवस पर सीआरपीएफ, बीएसएफ और सीआईएस जैसे शसस्त्र पुलिस बलों सुरक्षा कर्मी भी आगे आए और करीब 50 हजार लोगों के साथ दिल्ली के लाल किले पर आयोजित योग समारोह में हिस्सा लिया.

लोगों में योग को लेकर बढ़ती लोकप्रियता से एक बात तो साफ है कि योग केवल ईश्वर की अराधना के लिए सिमट कर नहीं रह गया है, बल्कि ये अपना दायरा बढ़ा चुका है और धर्म से कई ज्यादा ऊपर उठ चुका है. कहीं न कहीं लोगों को भी ये बात अब समझ में आने लगी है.

–अदिति शर्मा 

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