देश में नहीं है कैश संकट, कुछ जगह अचानक मांग बढ़ने से दिक्कत

नई दिल्ली, 17 अप्रैल ! देश के कई हिस्सों में एक बार फिर कैश का संकट सामने आया है. कुछ जगह तो ये हालात नोटबंदी के जैसे हो गए हैं. कैश संकट के इस मुद्दे पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि उन्होंने पूरी स्थिति की समीक्षा की है. देश में कैश की कमी नहीं है, सिर्फ कुछ जगहों पर अचानक मांग बढ़ जाने से ये दिक्कत सामने आई है.

वित्तमंत्री ने मंगलवार को ट्वीट किया, मैंने देश की कैश समस्या की समीक्षा की है. बाज़ार और बैंकों में पर्याप्त मात्रा में कैश मौजूद है. जो एक दम दिक्कतें सामने आई हैं वो इसलिए है क्योंकि कुछ जगहों पर अचानक कैश की मांग बढ़ी है.

Arun Jaitley
@arunjaitley 

Have reviewed the currency situation in the country. Over all there is more than adequate currency in circulation and also available with the Banks. The temporary shortage caused by ‘sudden and unusual increase’ in some areas is being tackled quickly.

गौरतलब है कि देश के कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से एटीएम में कैश न उपलब्ध होने से फिर नोटबंदी जैसी परेशानी का माहौल बनने लगा. लोगों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए आखिरकार रिजर्व बैंक और सरकार को आगे आना पड़ा.

बता दें कि अरुण जेटली से पहले वित्त राज्यमंत्री शिवप्रताप शुक्ला ने भी बयान दिया था. उन्होंने कहा कि कैश की किल्लत दो-तीन दिन में दूर हो जाएगी और देश में नकदी की कोई कमी नहीं है. शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि फिलहाल रिजर्व बैंक के पास 1,25,000 करोड़ रुपये की नकदी है. समस्या बस कुछ असमानता की हालत बन जाने की वजह से हुई है. कुछ राज्यों में कम करेंसी है तो कुछ में ज्यादा. सरकार ने राज्यवार समितियां बनाई हैं और रिजर्व बैंक ने भी अपनी एक कमिटी बनाई है ताकि एक से दूसरे राज्य तक नकदी का ट्रांसफर हो सके.

उन्होंने कहा, ‘रिजर्व बैंक पैसों की राज्यों में असमानता को खत्म कर रहा है. एक राज्य से दूसरे राज्य में पैसे पहुंच रहे हैं. बिना रिजर्व बैंक के आदेश के ही प्रांतों में स्थ‍िति कैसे ठीक की जा सकती है, इसका अध्ययन कर रहे हैं. पैसे की कोई कमी नहीं है. नोटबंदी की तरह कमी नहीं होने देंगे. हालात ठीक हो जाएंगे.’

सरकार के अलावा रिजर्व बैंक भी इस समस्या सामने आने के बाद एक्टिव हो गया है. रिजर्व बैंक ने इन राज्यों में नकदी की आपूर्ति दुरुस्त करने के लिए कदम उठाए हैं और उम्मीद जताई है कि जल्दी ही हालात सामान्य हो जाएंगे. रिजर्व बैंक के सूत्रों का कहना है कि असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में लोगों के जरूरत से ज्यादा नकदी निकालने की वजह से यह संकट खड़ा हुआ है.

देश के कई राज्यों में कैश की किल्लत से नोटबंदी जैसे माहौल बन जाने के बाद अब सरकार और रिजर्व बैंक ने लोगों को परेशानी से निजात दिलाने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं. केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला Image result for केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्लाने  कहा कि कैश की किल्लत दो-तीन दिन में दूर हो जाएगी और देश में नकदी की कोई कमी नहीं है.

असमानता के बारे में बताते हुए शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि कुछ राज्य में पैसा ज्यादा चला गया है, कुछ में कम रह गया, लेकिन रिजर्व बैंक से इस बारे में बात हो गई है.

सरकारी सूत्रों का कहना है कि कई राज्यों में बैसाखी, बिहू और सौर नव वर्ष जैसे त्योहार होने की वजह से लोगों को ज्यादा नकदी की जरूरत थी. लोग नकदी का जमावड़ा न करने लगें और अफरा-तफरी न मचे इसके लिए वित्त मंत्रालय ने तत्काल रिजर्व बैंक के अधिकारियों के साथ बैठक की. सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने विभिन्न राज्यों के अधिकारियों और बैंक प्रमुखों से परामर्श भी किया.

सूत्रों का कहना है कि नकदी की उपलब्धता में ऐसे उतार-चढ़ाव होते रहते हैं. जैसे यदि किसी राज्य में डिमांड बढ़ जाती है तो दूसरे राज्य में आपूर्ति पर थोड़ा अंकुश लगा दिया जाता है. उदाहरण के लिए असम में शनिवार को बिहू त्योहार होने की वजह से उसके कुछ दिनों पहले नकदी की निकासी काफी बढ़ गई. इसलिए दूसरे कुछ राज्यों में आपूर्ति में कटौती करनी पड़ी. वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘अब आपूर्ति सामान्य हो गई है और हालात जल्दी ही सामान्य हो जाएंगे.’

इसके अलावा कर्नाटक में चुनाव करीब हैं, इसलिए वहां भी नकदी की मांग काफी बढ़ गई है. फसल के समय किसानों द्वारा भी नकदी की निकासी बढ़ जाती है. कई राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, इसकी वजह से इस मसले पर तत्काल राजनीति भी शुरू हो गई.

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इस पर चुटकी ली, तो एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इसका जवाब दिया. शिवराज सिंह ने कहा, ‘16.5 लाख करोड़ नोट छापे गए हैं और मार्केट में पहुंच चुके हैं. लेकिन 2000 के नोट कहां जा रहे हैं? कौन लोग नकदी संकट जैसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं? समस्या उत्पन्न करने की साजिश चल रही है और राज्य सरकार इसके बारे में सख्त कदम उठाएगी, हम केंद्र सरकार के संपर्क में भी हैं.’

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ में कुछ लोगों ने गुस्से में एक एटीएम में तोड़फोड़ की. रिजर्व बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी से पहले मार्केट में 500 और 1000 के नोटों का कुल सर्कुलेशन 17.74 लाख करोड़ रुपये मूल्य का था, जबकि इस समय बड़े नोटों का सर्कुलेशन 18 लाख करोड़ रुपये मूल्य से ज्यादा है.

पांच सौ के पर्याप्त नोट

बड़े नोटों की जमाखोरी के शिवराज सिंह के बयान पर शुक्ला ने कहा कि हमने वास्तविक स्थिति आपके सामने रख दी है. कुछ लोगों ने जमा किया होगा. उनकी आदत होगी.  लेकिन हमारी अर्थव्यवस्था सुदृढ़ है. हम किसी प्रकार की कोई परेशानी महसूस नहीं कर रहे. दो-तीन दिन की स्थिति है. हम उसको ठीक कर देंगे. हम पांच सौ के पर्याप्त नोट दे रहे हैं.

गौरतलब है कि देश के कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से एटीएम में कैश न उपलब्ध होने से फिर नोटबंदी जैसी परेशानी का माहौल बनने लगा. लोगों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए आखिरकार रिजर्व बैंक और सरकार को आगे आना पड़ा.

रिजर्व बैंक ने इन राज्यों में नकदी की आपूर्ति दुरुस्त करने के लिए कदम उठाए हैं और उम्मीद जताई है कि जल्दी ही हालात सामान्य हो जाएंगे. रिजर्व बैंक के सूत्रों का कहना है कि असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में लोगों के जरूरत से ज्यादा नकदी निकालने की वजह से यह संकट खड़ा हुआ है.

सरकारी सूत्रों का कहना है कि कई राज्यों में बैसाखी, बिहू और सौर नव वर्ष जैसे त्योहार होने की वजह से लोगों को ज्यादा नकदी की जरूरत थी. लोग नकदी का जमावड़ा न करने लगें और अफरा-तफरी न मचे इसके लिए वित्त मंत्रालय ने तत्काल रिजर्व बैंक के अधिकारियों के साथ बैठक की. सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने विभिन्न राज्यों के अधिकारियों और बैंक प्रमुखों से परामर्श भी किया.

बता दें कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश से लेकर गुजरात तक के कई शहरों में एटीएम से नकदी नहीं मिल रही है. बताया जा रहा है कि कई बैंकों की शाखाओं से भी लोगों को निराश लौटना पड़ रहा है. कहा जा रहा है कि बैंकों में बढ़ते एनपीए ने बैंकिंग प्रणाली को हिला कर रख दिया है. बैंकों की साख पर सवाल खड़ा हो गया है. इन्हें उबारने के लिए खातों में जमा रकम के इस्तेमाल की अटकलों ने ग्राहकों को डरा दिया है. ऐसे में पैसा निकालने की प्रवृत्ति एकाएक बढ़ गई है और एटीएम पर दबाव चार गुना तक बढ़ गया है.
उत्तर बिहार के ज्यादातर बैंकों में नकदी नहीं होने से शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में एटीएम व बैंक शाखाओं में रुपये के लिए हाहाकार मचा है. बिहार के मुजफ्फरपुर के बैंकों के करेंसी चेस्टों से समस्तीपुर, दरभंगा, गोपालगंज, सारण, सीवान, पूर्वी व पशिचमी चंपारण को नकदी दी जाती है. पिछले डेढ़ माह से इन जिलों में कैश की आपूर्ति नहीं हो रही है. इस कारण यहां भी कैश संकट गहरा गया है.

गुजरात में बैंकों और एटीएम में नकदी की किल्लत के कारण लोगों की मुश्किले थमने का नाम नहीं ले रही हैं. कुछ दिन पहले उत्तर गुजरात में पैदा हुए इस संकट ने अब लगभग पूरे राज्य में अपना पैर पसार लिया है. लोगों एक बार फिर नोटबंदी जैसे हालात का सामना करना पड़ रहा है. बैंकों ने नकदी निकालने की सीमा तय कर दी है, जबकि अधिकतर एटीएम में पैसा हीं नहीं है. गुजरात के महेसाणा, पाटन, साबरकांठा, बनासकांठा, मोडासा के अलावा अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत जैसे बड़े शहरों में भी नकदी संकट बना हुआ है.

बता दें कि पिछले साल मई में दो हजार के नोटों को छापना बंद कर दिया गया था. इसकी जगह पांच सौ और दो सौ रुपये के नोटों को लाया गया. इससे एटीएम में डाले जा रहे नोटों की वैल्यू कम हो रही है. अगर दो हजार के नोटों से एटीएम को भरा जाए तो 60 लाख रुपये तक आ जाते हैं. पांच सौ और सौ के नोटों से ये क्षमता महज 15 से 20 लाख रुपये रह गई है.

समस्या का एक कारण यह भी है कि 200 के नोट के लिए एटीएम तैयार नहीं हैं. अभी तक 30 फीसदी एटीएम ही 200 रुपये को लेकर कैलीब्रेट हो सके हैं.  70 फीसदी एटीएम 200 का नोट देने में सक्षम ही नहीं हैं. इतना ही नहीं ,आरबीआई की रैंडम जांच में पाया गया है कि करीब 30 फीसदी एटीएम औसतन हर समय खराब रहते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *