दुर्घटना में घायल का बनाया वीडियो तो होगा केस

ट्रैफिक पुलिस सीसीटीवी की मदद से ऐसे वाहन चालकों की पहचान करेगी और मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई करेगी.

ध्यान रखें, अगर हादसे में घायल का बनाया वीडियो तो दर्ज होगा केसदुर्घटना में घायल का बनाया वीडियो तो दर्ज होगा केस
सड़क दुर्घटनाओं का शहर बनते जा रहे कोटा की जीवनदाता संस्था ने एक अहम पहल की है. कोचिंग सिटी में संस्था ने जीवन रक्षक कार एबुलेंस सेवा की शुरुआत की है. इस मुहिम में अब सड़क दुर्घटना घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाएगा. इस पहल में शहर के 100 लोगों ने शुरुआती दौर में ही इस मुहिम में रजिस्ट्रेशन करवाकर अपनी सेवाएं देने की शपथ ली है. इस मुहिम से जुड़े सभी सेवाभावी लोगों को सोशल मीडिया के जरिए एक ग्रुप बनाकर जोड़ा जाएगा, ताकि कोई दुघर्टना होने पर घायलों तक पहुंचकर उनको गोल्डन पीरियड के भीतर ही अस्पताल पहुंचाया जा सके.सड़क दुर्घटना में घायल तड़पता रहा और तमाशबीन वहां खड़े होकर वीडियो बनाते रहे. इस तरह की खबरें अक्सर सुनाई देती हैं. मानवता को शर्मसार कर देने वाली इस तरह की घटनाओं को देखते हुए अब गौमतबुद्ध नगर ट्रैफिक पुलिस ने ऐसे लोगों पर मामला दर्ज करने की तैयारी की है. इसके लिए ट्रैफिक पुलिस सीसीटीवी की मदद से ऐसे वाहन चालकों की पहचान करेगी और मोटर वाहन अधिनियम में कार्रवाई करेगी.

दुर्घटना के बाद तमाशबीन बने रहते हैं लोग

सड़क दुर्घटनाओं  में ज्यादातर मामलों में घायल की मौत समय पर इलाज न होने के कारण होती है. अधिकारियों के मुताबिक दुर्घटना होने पर वहां मौजूद लोग तमाशबीनों की तरह खड़े होकर घायल को देखते रहते हैं लेकिन कोई भी इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती नहीं कराता है, जिसके कारण ज्यादातर घायलों की मौत हो जाती है. यही नहीं, वहां मौजूद तमाशबीन घायल का वीडियो बनाने में जुट जाते हैं. नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे और यमुना एक्सप्रेस वे पर इस तरह के मामले देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है.

कार्रवाई कर मामला दर्ज किया जाएगा

गौतमबुद्ध नगर यातायात पुलिस ने फैसला किया है कि सड़क दुर्घटनाओं के दौरान वाहन रोककर बेवजह खड़े रहने वाले और मोबाइल से वीडियो बनाने वाले लोगों पर मोटर वाहन अधिनियम की धारा 122 व 177 के अंतर्गत कार्रवाई कर मामला दर्ज किया जाएगा. एक्सप्रेस वे और शहर के अन्य मार्गों पर लगे कैमरों की फुटेज के आधार पर ऐसे वाहनों का पता लगाया जाएगा और कार्रवाई की जाएगी.सड़क दुर्घटना के बाद घायलों के लिए पहला चार घंटा गोल्डन पीरियड होता है। इस दौरान यदि उन्हें बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराई गई तो मरीज को ज्यादा नुकसान होने से बचाया जा सकता है। रोड ऐक्सिडेंट के बाद गोल्डन पीरियड के अंदर केवल 25 फीसद मरीज ही अस्पताल पहुंच रहे हैं। कुछ तो अकुशल या झोलाछाप चिकित्सक के यहां पहुंच जाते हैं, जिससे काफी नुकसान हो जाता है। यह जानकारी शहर के प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय आनंद ने  दी। प्रस्तुत हैं लोगों के सवाल व चिकित्सक के जवाब :

सवाल : सड़क हादसों में घायल लोगों को तत्काल किस तरह के इलाज की आवश्यकता होती है?

जवाब : सड़क हादसे में घायल लोगों को तत्काल इलाज की जरूरत होती है। उन्हें सबसे पहले पास के अस्पताल पहुंचाकर प्राथमिक उपचार कराएं। क्योंकि दुर्घटना के बाद का पहला चार घंटा गोल्डेन पीरियड होता है। यदि सर में चोट है और खून बह रहा है, तो उस जगह को साफ कपड़े से बांध दें। ताकि खून का बहाव रूक जाए। मरीज के नाक व मुंह में खून जमा हो तो उसे साफ कर लें, ताकि उसे सांस लेने में परेशानी न हो। इसके अलावे मरीज को पेट के बल लिटाना चाहिए।

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