दुनिया में सबसे ज्यादा ट्रैफिक समस्या मुंबई में ! अंतरराष्ट्रीय सर्वे में दिल्ली चौथे स्थान पर

एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे में यह बात सामने आई है कि देश ही नहीं दुनिया में मुंबई को सबसे खराब ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है। एक सर्वे में मुंबई पहले तो दिल्ली चौथे स्थान पर है।

फाइल फोटो
हाइलाइट्स

  • दुनिया में ट्रैफिक की सबसे ज्यादा समस्या झेलते हैं मुंबईकर
  • आम दिनों की तुलना में 65% वक्त सड़क पर ज्यादा समय बिताते हैं लोग
  • अतंरराष्ट्रीय सर्वे में मुंबई पहले, दिल्ली चौथे स्थान पर
  • पहले चार शहर विकासशील देशों के, मजबूत इकॉनमी का संकेत
मुंबई :  सावधान: कई बड़े-बड़े शहर एक महामारी से बुरी तरह पीड़ित हैं। यह कोई संक्रामक बीमारी नहीं है और ना ही भूखे कीड़ों के झुंड से हुई तबाही। मगर फिर भी इसने करोड़ों लोगों का जीना दुश्‍वार कर दिया है। आखिर यह कौन-सी महामारी है? यह महामारी है, ट्रैफिक जाम।देश  में विकास के ट्रैक पर दौड़ाने के लिए यातायात को फर्राटा भरना जरूरी है। मसलन, लोगों के लिए घर से निकलकर दुकान, दफ्तर, फैक्ट्री, नर्सिग होम, स्कूल, कॉलेज .. इत्यादि मंजिल पर निर्धारित समय में पहुंचना काफी मुश्किल साबित हो रहा है।मुंबई के वाहनचालकों को देश ही नहीं दुनिया के सबसे खराब ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है। यह बात एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे में सामने आई है। देश की आर्थिक राजधानी में लोग सड़कों पर जाम लगने की स्थिति में खाली सड़कों की तुलना 65% ज्यादा वक्त बिताने को मजबूर होते हैं। यह जानकारी टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स 2018 में सामने आई है।
देश की राजधानी दिल्ली में 58% वक्त ज्यादा बिताना पड़ता है। दिल्ली और मुंबई के बीच कोलंबिया की राजधानी बगोटा दूसरे (63%) और पेरू की राजधानी लीमा (58%) तीसरे नंबर पर हैं। पहले चारों शहर विकासशील देशों के हैं। जीपीएस आधारित स्टडी में 8 लाख से ज्यादा आबादी वाले 400 शहरों का अध्ययन किया गया था।

मजबूत इकॉनमी का संकेत लेकिन हैं कई नुकसान
टॉमटॉम के वाइस प्रेजिडेंट राल्फ-पीटर शेफर ने बताया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रैफिक बढ़ता जा रहा है। यह दोनों, अच्छी बात भी है और बुरी भी। यह अच्छा है क्योंकि इससे मजबूत अंतरराष्ट्रीय इकॉनमी का संकेत मिलता है लेकिन इसका नुकसान यह है कि ट्रैफिक में बैठकर ड्राइवरों का समय खराब होता है, पर्यावरण पर भारी असर पड़ता ही है।

मुंबई ट्रैफिक जाम

मास ट्रांसपोर्ट को बढ़ावे की जरूरत
ट्रांसपोर्ट प्लानर बीना बालकृष्णन का कहना है कि देश में कार-सेंट्रिक पॉलिसी है और गाड़ियां खरीदने और इस्तेमाल करने पर कोई रोक नहीं है। टॉमटॉम इंडिया की जनरल मैनेजर बारबरा बेलपेर का मानना है कि मास ट्रांसपोर्ट को बढ़ाना देने वाले प्रॉजेक्ट्स के अलावा लोगों में प्राइवेट गाड़ियों का इस्तेमाल कम करने के लिए जागरूकता फैलानी चाहिए।

खोजकर्ताओं के मुताबिक, ट्रैफिक जाम में बार-बार फँसने से आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। एक हालिया अध्ययन यहाँ तक बताता है कि जिस वक्‍त एक व्यक्‍ति ट्रैफिक जाम में फँसता है तब से लेकर एक घंटे तक उसे दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। द न्यू ज़ीलैंड हैरल्ड रिपोर्ट करता है कि “दौरे का खतरा अचानक बढ़ने की शायद सबसे बड़ी वजह हैं, गाड़ी से निकलनेवाला धुआँ, शोर-शराबा और तनाव।”

हवा में ज़हर

ज़्यादातर गाड़ियों से निकलनेवाले धुएँ में नाइट्रोजन ऑक्साइड और कैंसर पैदा करनेवाले कुछ पदार्थ होते हैं। कई गाड़ियाँ, खासकर वे जो डीज़ल इंजन से चलती हैं, धुएँ के साथ बड़ी तादाद में छोटे-छोटे कण हवा में छोड़ती हैं। ये लोगों की सेहत के लिए बहुत बड़ा खतरा बने हुए हैं। अंदाज़ा लगाया गया है कि हर साल, करीब 30 लाख लोग प्रदूषित हवा से मर रहे हैं जो ज़्यादातर, गाड़ियों से निकलती है। एक रिपोर्ट कहती है कि यूरोपीय देशों के बच्चों को फेफड़े के जितने संक्रमण होते हैं, उनमें से 10 प्रतिशत, प्रदूषित हवा में मौजूद बेहद छोटे-छोटे कणों की वजह से होते हैं और जिन इलाकों में ट्रैफिक जाम की समस्या ज़्यादा है वहाँ पर संक्रमण का प्रतिशत और भी ज़्यादा है।

पृथ्वी के वातावरण को होनेवाले खतरे के बारे में भी ज़रा सोचिए। गाड़ियों से निकलनेवाले नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड अम्ल वर्षा का एक कारण हैं। अम्ल वर्षा से झीलों और नदियों का पानी खराब होता है, उनमें मौजूद प्राणियों को खतरा होता है और तरह-तरह के पेड़-पौधों को भी नुकसान होता है। इतना ही नहीं, गाड़ियों से बड़ी मात्रा में निकलनेवाला कार्बन डाइऑक्साइड, हालात को और भी बदतर बना रहा है। यही वह गैस है जो पृथ्वी के तापमान को बढ़ाने के लिए सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदार है। इससे पृथ्वी ग्रह के लिए और भी कई खतरे पैदा हो रहे हैं।

ज़्यादा दुर्घटनाएँ

जैसे-जैसे गाड़ियों की आवाजाही बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे लोगों की जान को खतरा भी बढ़ता जा रहा है। हर साल, करीब 10 लाख से ज़्यादा लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं और यह संख्या तेज़ी से बढ़ती जा रही है। कुछ इलाकों के मुकाबले दूसरे इलाकों में दुर्घटनाएँ ज़्यादा हो रही हैं। मिसाल के लिए, यूरोपियन कमीशन के खोजकर्ताओं ने पता लगाया कि “ग्रीस के हर 10 लाख में से 690 लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं जबकि स्वीडन में सिर्फ 120.”

ट्रैफिक जाम से एक और मुसीबत उठ रही है जो कुछ सालों से चर्चा का विषय बनी हुई है। वह है ड्राइवरों का एक-दूसरे पर भड़ास निकालना। आज ऐसे वाकये आम हो गए हैं जिनमें एक ड्राइवर दूसरे ड्राइवर पर अपना गुस्सा उतारता है। अमरीका के ‘राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात सुरक्षा प्रबंधन’ के किए एक सर्वे के मुताबिक, ड्राइवरों ने बताया कि उनके आग-बबूला होने का एक कारण है, “ट्रैफिक जाम की बढ़ती समस्या।”

एक आर्थिक महामारी

ट्रैफिक जाम से पैसे भी बरबाद होते हैं। एक अध्ययन ने दिखाया कि अकेले कैलिफॉर्निया के लॉस एन्जलस शहर में एक साल में ट्रैफिक जाम की वजह से 4 अरब लीटर ईंधन बरबाद होता है। इससे और भी कई तरह के नुकसान होते हैं, जैसे बिज़नेस में तरक्की के मौके हाथ से निकल जाना, प्रदूषण की वजह से बीमार पड़ने पर इलाज का खर्चा सो अलग, साथ ही सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ने से होनेवाला नुकसान।

ट्रैफिक जाम से होनेवाले ये सभी तरह के नुकसान साथ मिलकर देशों की आर्थिक हालत को कमज़ोर कर देते हैं। एक अध्ययन के मुताबिक, अगर ट्रैफिक जाम में सिर्फ ईंधन और समय की बरबादी को लें, तो इससे अमरीका के लोगों को हर साल करीब 68 अरब डॉलर (46 खरब रुपए) खर्च करने पड़ते हैं। दूर पूरब के देशों के बारे में फिलीपीन स्टार नाम के अखबार की एक रिपोर्ट ने कहा: “जैसे टैक्सी का मीटर दौड़ता है, वैसे ही यहाँ के देशों को ट्रैफिक जाम की वजह से हर साल अरबों पेसोस (मुद्रा) का जो घाटा होता वह लगातार बढ़ता जा रहा है।” यूरोप में करीब 100 खरब रुपए खर्च होने का अंदाज़ा लगाया गया है।ट्रैफिक समस्या के लिए इमेज परिणाम

आज ट्रैफिक कितना होगा?

ट्रैफिक की समस्या हल करने की लाख कोशिशों के बावजूद यह बदतर ही होती गयी है। अमरीका के ‘टैक्सस यातायात संस्थान’ ने अपने देश के 75 शहरी इलाकों का जब सर्वे लिया, तो पाया कि सन्‌ 1982 में ट्रैफिक जाम की वजह से पूरे साल के दौरान लोगों के औसतन 16 घंटे बेकार गए थे, मगर इसके बाद से हर साल यह गिनती बढ़ती गयी और सन्‌ 2000 तक 62 घंटे हो गए। दिन-भर में पहले 4.5 घंटे तक ट्रैफिक जाम हुआ करता था मगर अब 7 घंटे तक होता है। रिपोर्ट कहती है कि “सर्वे जब से शुरू हुआ है, तब से लेकर आज तक इन सभी इलाकों में ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ती गयी है। अब ट्रैफिक जाम का वक्‍त पहले से बढ़ रहा है, पहले से ज़्यादा सड़कें इसकी चपेट में आ रही हैं और पहले से ज़्यादा आवाजाही की वजह से ट्रैफिक बढ़ रहा है।”

दूसरे देशों से भी कुछ ऐसी ही रिपोर्टें मिली हैं। यूरोपियन कमीशन की निगरानी में काम कर रहे खोजकर्ता इस नतीजे पर पहुँचे हैं: “अगर हम अपने यातायात के तरीके में भारी बदलाव नहीं करेंगे, तो अगले दस साल के अंदर यह हाल होगा कि पूरे-के-पूरे शहर सड़क पर खड़े-खड़े बेकार में इंतज़ार करते नज़र आएँगे।”

एशियाई देशों का भी कुछ यही हाल है। टोक्यो तो ट्रैफिक जाम के लिए बदनाम है ही, अब जापान के दूसरे शहर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। फिलीपींस में कुछ ऐसी रिपोर्टें आम हैं, जैसे मनिला बुलेटिन अखबार की यह रिपोर्ट: “काम पर जाने और घर लौटने के समय के दौरान, सड़कों पर ट्रैफिक की मानो बाढ़ आ जाती है, हज़ारों यात्री बेसब्री से इंतज़ार की घड़ियाँ गिनते नज़र आते हैं।”

यह कहना वाजिब होगा कि फिलहाल लगता है कि ट्रैफिक की समस्या का पूरी तरह हल नहीं होगा। ट्रैफिक में फँसना—काम से आते-जाते वक्‍त ट्रैफिक जाम (अँग्रेज़ी) किताब का लेखक ऐन्थनी डाउन्ज़ इस नतीजे पर पहुँचा: “भविष्य में होनेवाले ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए चाहे किसी भी तरह के नियम बनाए जाएँ, फिर भी दुनिया के तकरीबन सभी हिस्सों में इस समस्या के और भी बढ़ने की गुंजाइश है। इसलिए मेरी यही सलाह है: इसकी आदत लगा लीजिए।”ट्रैफिक समस्या के लिए इमेज परिणाम

आप क्या कर सकते हैं?

इन हालात को ध्यान में रखते हुए आप इस भारी उलझन का सामना कैसे कर सकते हैं? अगर आप उन करोड़ों लोगों में से एक हैं जो आए दिन ट्रैफिक जाम में फँसते हैं, तो आप कुछ ऐसे ज़रूरी कदम उठा सकते हैं ताकि आपकी सेहत और आपके मिज़ाज पर इसका बुरा असर न पड़े।

▪ पहले से तैयार रहिए। कई लोग घर से निकलने से पहले ही पस्त हालत में होते हैं। एक तो वे सुबह देर से उठते हैं। फिर फटाफट नहाते, तैयार होते और नाश्‍ता करते हैं। अब काम पर देर से पहुँचने का खयाल उनको परेशान करने लगता है। और ऊपर से ट्रैफिक जाम उनको और तनाव में डाल देता है। इसलिए अगर आप जानते हैं कि आज ट्रैफिक रहेगा, तो थोड़ा जल्दी निकलिए। तब आप ट्रैफिक जाम में फँसने से बच सकेंगे। आवाजाही का तनाव—कारण, नतीजे और मुकाबला करने के तरीके (अँग्रेज़ी) किताब के मुताबिक, “तनाव कम करना हो, तो सफर की शुरूआत पिछले दिन या रात से शुरू की जानी चाहिए।” किताब आगे कहती है: “सुबह की भाग-दौड़ कम करने के लिए रात को ही अपने या अपने बच्चों के लिए कपड़े, ब्रीफकेस, और दोपहर का खाना, सब कुछ तैयार कर लीजिए।” ज़ाहिर-सी बात है कि रात को अच्छी नींद लेना भी ज़रूरी है। सुबह जल्दी उठने के लिए, रात को जल्दी सोना ज़रूरी है।

सुबह जल्दी उठने के और भी कई फायदे हैं। ट्रैफिक में बहुत देर तक फँसे रहने से मांस-पेशियों में तनाव आ जाता है और उनका लचीलापन भी कम हो जाता है। इसलिए हो सके तो क्यों न सुबह थोड़ी-बहुत कसरत कर लें? नियमित तौर पर कसरत करने से आप चुस्त-दुरुस्त रहेंगे और ट्रैफिक जाम से होनेवाले शारीरिक तनाव का बेहतर तरीके से मुकाबला कर पाएँगे। इतना ही नहीं, जल्दी उठने से आप अच्छा नाश्‍ता भी कर सकते हैं। वरना उलटा-सीधा खाकर या खाली पेट ट्रैफिक जाम में फँसे रहना तनाव को और भी बढ़ा सकता है।ट्रैफिक समस्या के लिए इमेज परिणाम

तनाव कम करने का एक और तरीका है, हमेशा इस बात का ध्यान रखना कि आपकी गाड़ी अच्छी हालत में हो। ट्रैफिक जाम के बीच में गाड़ी खराब हो जाने से जितनी परेशानी उठानी पड़ती है, उतनी शायद ही किसी और बात से हो, खासकर तब जब मौसम खराब हो। इसलिए पहले से गाड़ी के ब्रेक, टायर, एअर कंडिशनर, हीटर, आगे का शीशा साफ करनेवाले वाइपर, डीफ्रोस्टर और दूसरे ज़रूरी हिस्सों का सही रख-रखाव कीजिए। ट्रैफिक जाम में छोटी-से-छोटी दुर्घटना भी आपको दुविधा में डाल सकती है। और हाँ, यह तो आपको हरगिज़ नहीं भूलना है कि गाड़ी में ईंधन काफी हो।

▪ जानकारी रखिए। सफर शुरू करने से पहले अच्छा होगा अगर आप कुछ खास हालात का पता लगा लें, जैसे खराब मौसम, सड़क का निर्माण, कुछ देर के लिए बंद किए गए रास्ते, दुर्घटनाएँ और दिन के दौरान ट्रैफिक पर असर करनेवाले दूसरे हालात। टी.वी. या अखबारों से आप यह सब पता लगा सकते हैं। और आप जो रास्ता लेते हैं, उसके इलाके का नक्शा भी साथ रखिए। फिर आप दूसरी सड़कों से भी वाकिफ होंगे, और इस तरह मुसीबतवाली जगहों से बच सकते हैं।

▪ आराम से बैठिए। गाड़ी की खिड़कियों को इतना खुला रखिए और सीट को इस तरह रखिए कि आप आराम से बैठ सकें। अगर गाड़ी में रेडियो, टेप-रेकॉर्डर या सी.डी. प्लेयर है, तो आप अपना मनपसंद संगीत सुन सकते हैं। कुछ तरह की मधुर धुनें दिल को सुकून पहुँचाती हैं और तनाव कम कर सकती हैं। इस तरह के कदम उठाने से आप ट्रैफिक जाम के शोर-शराबे से भी बच सकते हैं।*

▪ वक्‍त का फायदा उठाइए। ट्रैफिक थम जाने पर वक्‍त का फायदा उठाने का एक बढ़िया तरीका है, कुछ अच्छी बातों के बारे में सोचना। ट्रैफिक के बिगड़ते हालात के बारे में मन-ही-मन कुढ़ने के बजाय, दिन-भर के काम के बारे में सोचने की कोशिश कीजिए। अगर आप गाड़ी में अकेले हैं तो यह वक्‍त, आपको कुछ ज़रूरी कामों के बारे में सोचने और बिना किसी रुकावट के फैसले करने का भी अनोखा मौका दे सकता है।ट्रैफिक समस्या के लिए इमेज परिणाम

अगर आप सवारी हैं तो आगे गाड़ियों की लंबी कतार को यूँ ही देखते रहने से आपका तनाव और बढ़ सकता है। इसलिए समय का अच्छा इस्तेमाल करने की पहले से योजना बनाइए। चाहें तो आप अपने साथ अपनी मनपसंद किताब या अखबार ले सकते हैं। या फिर अगर आपके पास लैपटॉप कंप्यूटर है तो आप पिछले दिन का मेल पढ़ सकते हैं। कुछ लोगों को शायद खत लिखना या अपने लैपटॉप कंप्यूटर पर कुछ काम निपटा लेना ठीक लगे।

▪ सही नज़रिया रखिए। अगर आपके यहाँ ट्रैफिक जाम रोज़ की समस्या है, तो उम्मीद कीजिए कि आज भी आप ट्रैफिक जाम में फँसेंगे और उसके मुताबिक योजना बनाइए। कई शहर ऐसे हैं जहाँ ट्रैफिक जाम की समस्या का कभी हल नहीं होगा। किताब ट्रैफिक में फँसना—काम से आते-जाते वक्‍त ट्रैफिक जाम कहती है: “जिन महानगरों में काम पर जाते या घर लौटते वक्‍त ट्रैफिक जाम की समस्या है, वहाँ भविष्य में हालात के सुधरने के कोई लक्षण नहीं दिखाई दे रहे।” इसलिए यह कबूल करना सीखिए कि ट्रैफिक जाम भी आपकी ज़िंदगी का हिस्सा है, और उस हालात का ज़्यादा-से-ज़्यादा फायदा उठाने की कोशिश कीजिए!

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