‘ तीन तलाक मामलों की कार्रवाई में आ रही परेशानी’:गयूर उल हसन रिज़वी

‘इसलिए तीन तलाक के मामलों की कार्रवाई में आ रही है परेशानी’फोटो- गयूर उल हसन रिज़वी.

नई दिल्ली।तीन तलाक के मामले को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा. इसे लेकर एक बार फिर से केंद्र सरकार ने अपने कदम के बारे में दोहरा दिया है. तुरंत वाले तीन तलाक के मामले में पीड़िताओं को अकेला नही छोड़ा जाएगा. अब बस जरूरत है कि पूरा विपक्ष भी राज्यसभा में मिलकर तीन तलाक बिल को पास कराए. ये कहना है राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन गयूर उल हसन रिज़वी का.

बात करते हुए गयूर उल हसन रिज़वी ने कहा, “तीन तलाक से जुड़े मामलों की शिकायतें हमारे पास भी आती हैं. लेकिन परेशानी ये है कि अभी तक तीन तलाक बिल सिर्फ लोकसभा में पास हुआ है. राज्यसभा में पास होना बाकी है. जिसके चलते पुलिस और दूसरे स्तर पर इस मामले में कार्रवाई करने में दिक्कत आती है.

पुलिस में उलझ जाता है मामला

गयूर उल हसन रिज़वी ने कहा कि होता ये है कि तीन तलाक का मामला सबसे पहले पुलिस के पास जाता है. जबकि पुलिस को इस मामले में कोई जानकारी नहीं होती है. इसके चलते मामला वहां उलझकर रह जाता है. लेकिन इस मामले में केंद्र सरकार की जो सबसे अच्छी मंशा है और हम भी अपने कमीशन में आने वाले मामले में करते हैं वो ये कि सबसे पहले दोनो पक्षों को बैठाकर बातचीत कराते हैं. कोशिश होती है कि दोनों में सुलह हो जाए.

रिज़वी ने कहा, ”घर-परिवार बिगड़े न. जब समझौते की बात पर लड़का पक्ष तैयार नहीं होता है तो इसमें आगे की कार्रवाई की जाती है. और सबसे बड़ी बात ये कि बीजेपी और पीएम नरेंद्र मोदी भी इस मामले में एक बार फिर से अपनी बात को दोहरा चुके हैं.”

मुसलमान केस जीत भी गए तो क्या 100 करोड़ हिंदू मस्जिद बनने देंगे?

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन गयूर उल हसन रिजवी  ने कहा है, ‘मंदिर-मस्जिद विवाद के चलते देश का मुसलमान परेशान और डरा हुआ है। लेकिन सुन्नी वक्फ बोर्ड और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस बात को नहीं समझ रहे हैं। मान लीजिए अगर मुसलमान कोर्ट से केस जीत भी जाते हैं तो भी क्या 100 करोड़ हिंदू बाबरी मस्जिद बनने देंगे?’
रिजवी ने कहा, अल्पसंख्यक आयोग के पास शिकायतें आती हैं कि कहीं मुसलमानों को नमाज पढ़ने से रोका जा रहा है तो कहीं धर्मस्थल को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। गुड़गांव का उदाहरण हमारे सामने है। गांव-देहात में भी मुसलमान मंदिर-मस्जिद विवाद के चलते परेशान हो रहा है। ऐसे में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद को खत्म करने का रास्ता यही है कि कोर्ट के बाहर दोनों पक्ष बैठकर बात करें। मंदिर बनाने की इजाजत दे दी जाए। इसी में मुसलमानों का बड़प्पन भी है।
लेकिन इसी के साथ मुसलमान एक प्रस्ताव यह भी रख सकते हैं कि अयोध्या के बाद कहीं और किसी दूसरी मस्जिद पर इस तरह का विवाद खड़ा नहीं किया जाएगा। यही इस विवाद का हल है। इस संबंध में देश के कई संगठनों ने हमसे सीधे मिलकर बात भी की है और ईमेल भी किए हैं। इस संबंध में हम 14 नवंबर को एक बैठक भी करने जा रहे हैं।”

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