डॉ. प्रभात कुमार ने संभाला यूपीपीएससी अध्यक्ष पद, कर्मचारियों में उत्साह

डॉ. प्रभात कुमार –
लखनऊ : 1985 बैच के आईएएस अफसर डॉ. प्रभात कुमार ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाल लिया है।
उनकी नियुक्ति से कर्मचारियों में उत्साह है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग कर्मचारी/अधिकारी संघ के अध्यक्ष दिनेश कुमार का कहना है कि, लगभग दो दशक के बाद प्रभात कुमार जैसे मुख्य सचिव स्तर के एक वरिष्ठ आईएएस को आयोग का अध्यक्ष बनाया जाना बड़ी उपलब्धि है।
अब पूरे विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि आयोग में नया ‘प्रभात’ होगा और अपनी प्रतिष्ठा के लिए संघर्ष करता आयोग एक सशक्त और प्रतियोगी प्रिय आयोग के रूप में अपनी प्रतिष्ठा प्राप्त करने में सफल होगा।पेपर लीक होने के साथ ही अन्य कई प्रतियोगी परीक्षा में धांधली के कारण चर्चा में आए उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग अध्यक्ष डॉ. अनिरुद्ध यादव का कार्यकाल 30 जून को पूरा हो गया। इनके स्थान पर सेवानिवृत आइएएस अधिकारी डॉ. प्रभात कुमार को उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया । डॉ. प्रभात कुमार के नाम पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने संस्तुति प्रदान की।

भर्तियों में भ्रष्टाचार को लेकर लंबे समय से चर्चा में रहे उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की साख बचाने की जिम्मेदारी अब प्रदेश के तेज तर्रार आइएएस अधिकारी रहे प्रभात कुमार की हैैं।डॉ. कुमार का कार्यकाल 62 वर्ष की उम्र तक रहेगा। 1985 बैच के आइएएस डॉ. प्रभात 30 अप्रैल को कृषि उत्पादन आयुक्त के साथ ही अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा, यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनकी स्वच्छ और भ्रष्टाचार विरोधी छवि है। उन्होंने सहकारिता समेत कई विभागों में भ्रष्टाचार की जांच की और भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाई। मेरठ के मंडलायुक्त, लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सहित कई अहम पदों पर डॉ. कुमार रहे हैैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. प्रभात कुमार की साख को देखते हुए उप्र लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष के लिए अपनी मंजूरी दी है। पिछली सरकारों में उप्र लोकसेवा आयोग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगते रहे हैैं। अभी हाल में ही एलटी ग्रेड परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक होने के मामले में परीक्षा नियंत्रक की गिरफ्तारी तक हुई। सरकार ने अब आयोग की छवि सुधारने के लिए पहल की है। राज्य की सेवाओं के बड़े पदों पर भर्तियों की सबसे बड़ी इस स्वायत्तशासी संस्था में डॉ. प्रभात कुमार की नियुक्ति से सुधार की उम्मीद बढ़ी है।

बेहद अहम माने जाने वाले पद कृषि उत्पादन आयुक्त तथा अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा के पद पर कार्यरत 1985 बैच के आइएएस अधिकारी डॉ. प्रभात कुमार बीती 30 अप्रैल को रिटायर हो गए थे। डॉ. प्रभात कुमार के रिटायर होने के बाद मुख्य सचिव के बाद दूसरी सबसे बड़ी कुर्सी एपीसी खाली हो गई थी।

मेरठ मंडल के कमिश्नर के रूप में कई घोटालेबाजों को जेल भेजने वाले डा. प्रभात कुमार से उम्मीद की जा रही है कि वह उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की बिगड़ गई छवि को सुधारने का प्रयास करेंगे। मृदभाषी डॉ. प्रभात कुमार आइएएस में आने से पहले चिकित्सक थे। मेरठ के मंडलायुक्त के रूप में प्रभात ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा अभियान चलाया। भ्रष्टाचार के कई घोटाले उजागर हुए। कई अधिकारी और कर्मचारी जेल भेजे गए। प्रदेश में अक्षम कर्मियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की शुरुआत डॉ. प्रभात कुमार ने ही मेरठ में शुरू की, जिसे बाद में प्रदेश भर में अभियान चलाकर लागू किया गया।

इसके साथ ही डॉ. प्रभात कुमार ने हिंडन नदी के पुनरुद्धार का बड़ा अभियान चलाया। डा. अनिरुद्ध सिंह यादव को 10 मई को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की संस्तुति पर राज्यपाल राम नाईक ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त कियाा था। उप्र लोकसेवा आयोग के मौजूदा अध्यक्ष डा.अनिरुद्ध सिंह यादव का एक भी शैक्षिक रिकॉर्ड आयोग कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की सीबीआई जांच कराने का मामला अब विवादित होता जा रहा है और मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

सरकार और आयोग के बीच तलवार खिंच गई और अपनी स्वायत्तता को लेकर आयोग ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में सरकार के विरुद्ध याचिका हाईकोर्ट में सरकार के विरुद्ध याचिका दाखिल करने के बाद लखनऊ तलब हुए आयोग के अध्यक्ष अनिरुद्ध यादव से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में मुलाकात की लेकिन इस मुलाकात का कोई सार्थक संदेश बाहर नहीं आ सका। लखनऊ में सीएम से मुलाकात के बाद भी अनिरुद्ध यादव नहीं झुके।

भ्रष्टाचार का खात्मा, संस्था का गौरव लौटाना अहम चुनौती

उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग (यूपीपीएससी) में लंबे समय से भर्तियों में भ्रष्टाचार का रोग लगा है। सत्ता संभालने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में यह भर्ती संस्थान अहम रहा है। करीब दो वर्ष पहले से ही सरकार यूपीपीएससी में ‘ऑपरेशन क्लीन’ कर चुकी है। समाजवादी पार्टी के शासनकाल की पांच साल की भर्तियों में भ्रष्टाचार खंगाल रही सीबीआइ अभी जांचों में उलझी है। इसी दौरान एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती का भ्रष्टाचार सामने आया है।

प्रदेश सरकार को दो वर्ष इंतजार के बाद अब यूपीपीएससी अध्यक्ष पद पर नियुक्ति का मौका मिला है। मौजूदा अध्यक्ष डा. अनिरुद्ध सिंह यादव की अध्यक्ष पद पर नियुक्ति 15 मार्च 2016 को हुई थी और 30 जून को अपना कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। सरकार ने भ्रष्टाचार की सर्जरी करने के लिए तेजतर्रार और साफ-सुथरी छवि के प्रशासनिक अफसर डा. प्रभात कुमार को नियुक्ति देने जा रही है। वरिष्ठ आइएएस डा. कुमार भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करने में खासे चर्चित रहे हैं। अब उन पर आयोग का भ्रष्टाचार खत्म करना अहम चुनौती होगी, क्योंकि इधर कुछ वर्षों से लगभग हर भर्ती पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। तमाम प्रकरण अब भी कोर्ट में लंबित हैं। यूपीपीएससी में अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति पाने वाले का कार्यकाल अधिकतम छह साल या 62 वर्ष की उम्र तक होता है। ऐसे में डा. कुमार यहां करीब 22 माह तक रहेंगे।

यह भी संयोग है कि आयोग के पूर्व अध्यक्ष रामसेवक यादव के कार्यकाल में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी की लिखित परीक्षा में घोटाला हुआ था। उस समय प्रतियोगी सड़क पर उतरे और लंबे समय तक आंदोलन चला था। बसपा शासनकाल में आयोग अध्यक्ष के रूप में आइएएस एसआर लाखा को 10 अक्टूबर 2008 को नियुक्ति मिली। इसके साथ ही सरकार ने स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी घोटाले की सीबीसीआइडी जांच के आदेश दिए। यह जांच कुछ माह बाद ठंडे बस्ते में चली गई, लेकिन पूर्व अध्यक्ष लाखा ने 11 मार्च 2011 तक रहकर अपनी कार्यशैली से प्रतियोगियों के बीच अलग जगह बनाई और आयोग की छवि बेहतर की। प्रतियोगी उनके कार्यकाल को स्वर्णिम करार देते हैं। इस समय भी आयोग की सीबीआइ जांच चल रही है और एसटीएफ के एलटी ग्रेड घोटाले की जांच करने के लिए कोर्ट में मामला विचाराधीन है। यूपीपीएससी से हर वर्ष प्रांतीय सेवा के अहम पदों पर चयन होता है।

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