ट्यूनीशिया सरकार ने भी नकाब पर लगाया प्रतिबंध

ट्यूनीशिया के प्रधानमंत्री ने देश में हुए हमलों के बाद सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सरकारी कार्यालयों में नकाब पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि प्रधानमंत्री यूसुफ चाहेद ने एक सरकारी परिपत्र पर हस्ताक्षर किए हैंNBT

ट्यूनिश :ट्यूनीशिया के प्रधानमंत्री ने देश में हुए हमलों के बाद सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सरकारी कार्यालयों में नकाब पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि प्रधानमंत्री यूसुफ चाहेद ने एक सरकारी परिपत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें ‘सरकारी प्रशासनिक कार्यालयों एवं सरकारी संस्थानों में किसी भी व्यक्ति के मुंह ढक कर आने पर सुरक्षा कारणों से प्रतिबंध’ लगाने की बात की गई है।
ट्यूनिश में 27 जून को हुए दोहरे आत्मघाती बम विस्फोट के बाद कड़ी सुरक्षा के चलते नकाब पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस हमले में दो लोग मारे गए थे और अन्य सात घायल हो हुए थे। दुनिया की बहुत सी संस्कृतियों में औरतों को अपना सिर और बाल ढककर रखने की बात कही जाती है. इस्लाम में औरतों को अपने पिता और पति के अलावा अन्य सभी आदमियों के सामने खुद को ढककर रखने की बात कही जाती है. ऐसे में औरतें खुद को ढकने के लिए एक खास किस्म का परिधान इस्तेमाल करती हैं. भारत, पाकिस्तान, ईरान, इराक, अमेरिका, इंग्लैंड समेत पूरी दुनिया में बहुत सी मुस्लिम महिलाएं सिर से पांव तक एक बड़ा सा कपड़ा ओढ़ती हैं जिसे हिजाब कहा जाता है.

ऑस्ट्रिया , फ्रांस व बेल्जियम में पहले ही लग चुका है प्रतिबंध

जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने कहा है कि जहां तक कानूनी रूप से संभव हो सके जर्मनी में पूरी तरह से चेहरे को ढकने वाले नकाब पर प्रतिबंध लागाया जाना चाहिए. ब्रिटेन में नकाब या बुर्का पर कोई पाबंदी नहीं है.

ऑस्ट्रिया में पूरे चेहरे के नकाब पर बैन, फ्रांस व बेल्जियम में पहले ही लग चुका है प्रतिबंध
सिर्फ 150 ऑस्ट्रियाई मुस्लिम महिलाएं पूरे चेहरे का बुर्का पहनती हैं. (फाइल फोटो)ऑस्ट्रिया में सार्वजनिक जगहों पर पूरी तरह से चेहरे को ढकने वाले नकाब पर प्रतिबंध से संबंधित कानून रविवार (1 अक्टूबर) से प्रभावी हो गया. इस तरह अब महिलाएं सार्वजनिक जगहों पर नकाब नहीं पहन सकेंगी. बीबीसी की रपट के मुताबिक, सरकार के अनुसार, कानून में कहा गया है कि माथे से ठोड़ी तक का चेहरा जरूर दिखना चाहिए, यह ऑस्ट्रियाई मूल्यों की सुरक्षा के लिए है. यह कानून इस महीने के अंत में होने वाले आम चुनाव से पहले लागू किया गया है और माना जा रहा है कि इससे धुर दक्षिणपंथी फ्रीडम पार्टी को लाभ पहुंच सकता है. मुस्लिम समूहों ने इस कानून की आलोचना की है. मुस्लिम समूहों ने कहा है कि सिर्फ 150 ऑस्ट्रियाई मुस्लिम महिलाएं पूरे चेहरे का बुर्का पहनती हैं.

कानून मुस्लिमों के परदे बुर्का या नकाब पर प्रतिबंध लगाता है, लेकिन साथ ही यह मेडिकल फेस मास्क व जोकरों के मेकअप पर भी प्रतिबंध लगाता है. फ्रांस व बेल्जियम ने बुर्का पर प्रतिबंध 2011 में लागू किया था और इसी तरह का कदम नीदरलैंड (डच) की संसद उठाने जा रही है. जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने कहा है कि जहां तक कानूनी रूप से संभव हो सके जर्मनी में पूरी तरह से चेहरे को ढकने वाले नकाब पर प्रतिबंध लागाया जाना चाहिए. ब्रिटेन में नकाब या बुर्का पर कोई पाबंदी नहीं है.

इससे पहले ऑस्ट्रिया में बुर्का पहनने और सार्वजनिक स्थानों एवं इमारतों में चेहरा छुपाने वाली अन्य चीजों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. हालांकि सरकार ने कहा था कि ‘‘कुछ शर्तों के तहत’’ छूट होगी. इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों में जोकर की वेशभूषा, काम पर पहने जाने वाली चीजें जैसे मेडिकल मास्क और ठंड के मौसम में पहने जाने वाले स्कार्फ शामिल हैं. रविवार (1 अक्टूबर) से नयी पाबंदियां प्रभाव में आ गई.

पाबंदियों का उद्देश्य ‘‘एक खुले समाज में समाज का सामंजस्य सुनिश्चत करना है.’’ उल्लंघनकर्ताओं पर 150 यूरो तक जुर्माना लगाया जाएगा. यह कदम यूरोपीय संघ के अन्य देशों में उठाए गए कदमों जैसा है. यह पाबंदी आगंतुकों पर पर भी लागू होगी. यद्यपि बड़ी मात्रा में अरब पर्यटक छुट्टियां बिताने के लिए इस देश की यात्रा करते हैं.

हिजाब को लेकर पूरी दुनिया में बहुत सी धारणाएं हैं. जहां एक तरफ सऊदी अरब, ईरान, इराक में कई जगहों पर बिना अपने बाल ढके घर से बाहर निकली महिलाओं पर आदमी फब्तियां कसते हैं और औरतों को जान से मारने की धमकी भी देते हैं, वहीं यूरोप के बहुत से देशों में इसे पहनने पर बैन लगा हुआ है. डेनमार्क के प्रधानमंत्री के अनुसार उनके देश में कोई भी महिला अपना पूरा चेहरा ढककर पब्लिक में नहीं घूम सकती है.
जहां एक तरफ धार्मिक और सामजिक स्तर पर मुस्लिम महिलाओं के हिजाब को लेकर अवधारणाएं हैं, वहीं इसके प्रकार भी गैर-मुसलमानों को कंफ्यूज कर देते हैं. हिजाब, बुर्का, नकाब, अबाया, अल-अमीरा- इतने प्रकार लेकिन उनका काम एक ही, औरत का शरीर और बाल ढकना, ताकि उसे देखकर किसी आदमी का ‘ईमान‘ ना भटक जाए! बातचीत के दौरान इन पोशाकों को हम एक दूसरे की जगह प्रयोग कर लेते हैं लेकिन इन सभी में कुछ का कुछ मूलभूत अंतर है.
हिजाब: मॉडर्न इस्लाम में हिजाब का अर्थ का पर्दा. कुरान में हिजाब का ताल्लुक कपड़े के लिए नहीं, बल्कि एक पर्दे के रूप में किया गया है जो औरतों और आदमियों के बीच हो. कुरान में मुसलमान आदमियों और औरतों दोनों को ही शालीन कपड़े पहनने की हिदायत दी गई है. यहां कपड़ों के लिए खिमर (सिर ढकने के लिए) और जिल्बाब (लबादा) शब्दों का जिक्र है. हिजाब के अंतर्गत औरतों और आदमियों दोनों को ही ढीले और आरामदेह कपड़े पहनने को कहा गया है, साथ ही अपना सिर ढकने की बात कही गई है.ये है हिजाब

नकाब: नकाब या निकाब चेहरा छुपाने का कपड़ा होता है. इसमें सिर पूरी तरह से ढका हुआ होता है. नकाब में सिर्फ आंखें ही खुली होती हैं
इस्लाम में कहीं भी चेहरा ढकने की बात नहीं कही गई है बल्कि सिर्फ सिर और बाल को कपड़े से छिपाने का जिक्र है. लेकिन कट्टरपंथी देशों में औरतों को अपना चेहरा भी छिपाने का फरमान होता है. ऐसे में नकाब का काम होता है सिर, चेहरा को ढकते हुए सिर्फ आंखें खुली रखना. नकाब का यह कपड़ा औरतों के गले और कंधों को ढकते हुए सीने तक आता है. अमूमन यह काले रंग का कपड़ा होता है जिसे पिन की मदद से टांका जाता है.
बुर्का: भारत में अक्सर मुसलमान औरतों द्वारा पहने जाने वाले काले लबादे जैसी पोशाक को हम बुर्का कह देते हैं. दरअसल बुर्का उससे कुछ अलग होता है. नकाब का ही अगला स्तर बुर्का है. जहां नकाब में आंखों के अलावा पूरा चेहरा ढका होता है, बुर्के में आंखें भी ढकी होती हैं. आंखों के स्थान पर या तो एक खिड़कीनुमा जाली बनी होती है या कपड़ा हल्का होता है जिससे आर-पार दिख सके. सांस लेने और देखने के लिए बुर्के में होती है छोटी सी खिड़की
इसके साथ ही पूरे शरीर पर एक बिना फिटिंग वाला लबादा होता है. यह अक्सर एक ही रंग का हो होता है जिससे गैर-मर्दों को आकर्षित ना करे.
अल-अमीरा: यह दो कपड़ों का सेट होता है. एक कपड़े को टोपी की तरह सिर पर पहना जाता है. दूसरा कपड़ा थोड़ा बड़ा होता है जिसे सिर पर लपेटकर सीने पर ओढ़ा जाता है.अल-अमीरा: दो कपड़ों का सेट के लिए इमेज परिणामपोल्का डॉट कुवैती रैप हिजाब hi2184 फ्रंट
अबाया: यह वो पोशाक होती है जिसे भारत में बुर्का कहते हैं. दरअसल मिडिल ईस्ट में इसे अबाया कहा जाता है. यह एक लंबी ढकी हुई पोशाक होती है जिसे औरतें भीतर पहने किसी भी कपड़े के ऊपर डाल लेती हैं. इसमें सिर के लिए एक स्कार्फ होता है जिसमें सिर्फ बाल ढके होते हैं और चेहरा खुला होता है. अब फैशन के हिसाब से ये बहुत से रंगों का आने लगा है.फैशन के हिसाब से ये बहुत से रंगों के अबाया
दुपट्टा: पाकिस्तान और भारत में सलवार-कमीज के साथ मुसलमान औरतें सिर ढकने के लिए दुपट्टे का प्रयोग भी करती हैं. दुपट्टा सलवार-कमीज का ही हिस्सा होता है. इसका मुख्य उद्देश्य सिर ढकना होता है. दुपट्टा भी सिर ढकने के काम आता है
इस्लाम के अलावा भारत में बहुत जगहों पर हिंदू औरतों को भी सिर पर कपड़ा ओढ़ना पड़ता है. राजस्थान और हरियाणा की कई जगहों पर औरतों को चेहरा ढककर ही घर का सारा काम करना पड़ता है.

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