जींद उपचुनाव 12 हजार वोटों से जीती बीजेपी , कांग्रेस के सुरजेवाला तीसरे नंबर पर

रामगढ़ उपचुनाव में जीत के साथ कांग्रेस ने मारी राजस्थान में सेंचुरी

बीजेपी, कांग्रेस, आईएनएलडी और नवगठित जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के लिए नाक का सवाल बन चुके जींद विधानसभा उपचुनाव में विजयी प्रत्याशी बीजेपी के कृष्ण मिड्ढा ने 12 हजार 235 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। उन्हें कुल 50 हजार 566 वोट मिले।

बीजेपी के मिड्ढा और कांग्रेस नेता सुरजेवाला
हाइलाइट्स

  • हरियाणा की जींद विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी की दमदार जीत
  • बीजेपी प्रत्याशी कृष्ण मिड्ढा ने दिग्विजय चौटाला को 12,935 वोटों से दी शिकस्त
  • जींद उपचुनाव में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला तीसरे नंबर पर रहे
  • राजस्थान के रामगढ़ में कांग्रेस प्रत्याशी शाफिया जुबैर ने 12,228 वोटों से जीत दर्ज की हरियाणा की जींद विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने परचम लहरा दिया है। यहां हुए उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी कृष्ण मिड्ढा ने कांग्रेस और जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज कर लिया। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला इस चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे।
    बीजेपी, कांग्रेस, आईएनएलडी और नवगठित जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के लिए नाक का सवाल बन चुके जींद विधानसभा उपचुनाव में विजयी प्रत्याशी बीजेपी के कृष्ण मिड्ढा ने 12 हजार 235 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। उन्हें कुल 50 हजार 566 वोट मिले। नतीजों में कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला को मुंह की खानी पड़ी और वह 22740 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। वहीं जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के दिग्विजय चौटाला ने कमबैक किया है। उन्होंने 37631 वोटों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। वहीं आईएनएलडी को केवल 3454 मत ही हासिल हुए।
    रणदीप सुरजेवाला ने स्वीकार की हार 
    कांग्रेस के कद्दावर नेता तथा उपचुनाव में पार्टी की तरफ से प्रत्याशी बने रणदीप सुरजेवाला ने अपनी हार स्वीकार करते हुए कहा, ‘मैं उम्मीद करता हूं कि सीएम मनोहरलाल खट्टर और कृष्णा मिड्ढा जी जींद के लोगों का सपना पूरा करेंगे। मुझे पार्टी की तरफ से एक जिम्मेदारी दी गई थी, जिसको मैंने पूरी क्षमता के साथ पूरा किया। मैं कृष्णा मिड्ढा जी को बधाई देता हूं।’
    सामने बड़े नेता भी थे, सबको हराया- मिड्ढा 
    बीजेपी प्रत्याशी कृष्ण मिड्ढा ने जीत के बाद कहा, ‘मैं उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं, जिन्होंने पार्टी और मुझे सपॉर्ट किया। यह सभी लोगों की जीत है। इस चुनाव में हमारे सामने बड़े नेता भी थे, लेकिन हमने उन्हें भी हरा दिया। हम प्रधानमंत्री के द्वारा लॉन्च की गई योजनाओं को लोगों के बीच ले जाने का काम करेंगे।’
    ‘बहुकोणीय उपचुनाव, 75 फीसदी मतदान’
    जींद में 28 जनवरी को हुए बहुकोणीय उपचुनाव में करीब 75 फीसदी मतदान हुए थे। यहां से आईएनएलडी से दो बार विधायक रहे हरि चंद मिड्ढा के अगस्त 2018 में निधन के कारण यह उपचुनाव हुआ था। बीजेपी ने दिवंगत हरि चंद मिड्ढा के बेटे कृष्ण मिड्ढा को अपने टिकट पर मैदान में उतारा तो कांग्रेस ने रणदीप सुरजेवाला को प्रत्याशी बनाया। इनके अलावा जेजेपी ने अजय चौटाला के छोटे बेटे दिग्विजय चौटाला को उम्मीदवार बनाया।

राजस्थान के रामगढ़ विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की शाफिया जुबैर खान ने 12,228 वोटों से जीत हासिल कर ली है। इसी के साथ राजस्थान के विधानसभा में कांग्रेस के पास बहुमत के जादुई आंकड़े से महज एक सीट कम रह गई है। अभी तक कांग्रेस के पास 99 सीटें थीं जबकि सहयोगी आरएलडी के साथ एक सीट मिलाकर कांग्रेस ने यहां सरकार बनाई थी। अब कांग्रेस के पास 100 सीटें हैं।
इस लिहाज से कांग्रेस के लिए रामगढ़ विधानसभा सीट शुरू से ही अहम मानी जा रही थी। यह जीत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए भी खास है। वह अपनी पहली परीक्षा में पास हो गए हैं। अशोक गहलोत ने जीत पर कहा, ‘मैं खुश हूं कि लोगों ने सोच-विचारकर कदम उठाया है। उन्होंने सही फैसला किया है। मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं और उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने ऐसे समय में संदेश दिया है जब इसकी जरूरत थी। यह पार्टी को लोकसभा चुनाव के लिए प्रोत्साहित करेगा।’
इस सीट पर विधानसभा चुनाव के पहले बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के उम्मीदवार प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह के निधन के कारण चुनाव स्थगित कर दिए गए थे। रामगढ़ में कांग्रेस ने शाफिया जुबैर खान पर भरोसा जताया था, वहीं बीजेपी ने सुखवंत सिंह और बीएसपी ने जगत सिंह को मैदान में उतारा था। रामगढ़ में दूसरे नंबर पर बीजेपी रही। सुखवंत सिंह को 71,083 वोट मिले। लोकसभा चुनाव से पहले हुए इस आखिरी उपचुनाव को काफी अहम माना जा रहा था क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में राजस्थान में बीजेपी को क्लीन स्वीप मिली थी।

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 रकबर खान मॉब लिंचिंग मामले में चर्चा में आया था रामगढ़

रामगढ़ सीट राजस्थान के अलवर जिले में आती है। यह अलवर की सबसे हॉटसीट मानी जाती है। पिछले कुछ समय से मॉब लिंचिंग के कारण अलवर और रामगढ़ सुर्खियों में रहा। यह वही क्षेत्र है जहां पिछले साल कथित गोरक्षकों ने गोतस्करी के संदेह में रकबर खान की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस मामले में पूरे देश का ध्यान रामगढ़ की ओर खींचा था और संसद में भी इस मामले को उठाया गया था। 

 10 बार कांग्रेस यहां से जीत चुकी है

कांग्रेस का मानना है कि इस मामले में बीजेपी और उसके स्थानीय नेता ज्ञानदेव आहूजा की काफी किरकरी हुई थी जो बीजेपी की हार की मुख्य वजह रही। जीत के बाद कांग्रेस की प्रत्याशी शाफिया खान ने मीडिया से कहा कि ध्रुवीकरण की राजनीति के चलते ही बीजेपी को यहां हार मिली है। उन्होंने कहा कि रकबर खान की हत्या के मामले में रामगढ़ को काफी बदनाम किया गया था। उन्होंने कहा, ‘लोगों को पता है कि हम काम करने में यकीन करते हैं।’ 
बीएसपी ने लगाई वोटों में सेंध

रामगढ़ में इस बार कांग्रेस, बीजेपी के साथ बीएसपी के प्रत्याशी के बीच भी मुकाबला था। बीएसपी के वजह से कांग्रेस को कुछ वोटों का नुकसान भी उठाना पड़ा। कांग्रेस का मानना है कि उनका वोटबैंक दलित भी है इस वजह से बीएसपी ने उनके वोटों पर सेंध लगाने का काम किया है वरना जीत का आंकड़ा और अधिक होता। 
कांग्रेस का हौसला बुलंद

रामगढ़ में पलड़ा कांग्रेस का ही भारी रहा है। यहां अब तक 14 विधानसभा चुनावों में 10 बार कांग्रेस और 4 बार बीजेपी जीती है। बीजेपी के ज्ञानदेव आहूजा यहां से तीन बार विधायक रह चुके हैं। वहीं शाफिया के पति जुबैर खान भी इस सीट से 3 बार विधायक रह चुके हैं। रामगढ़ की इस जीत से अब आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का हौसला और मजबूत हो गया है। अब कांग्रेस की निगाहें राज्य की 25 लोकसभा सीटों पर है।

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