खूंटी गैंगरेप: महिला आयोग ने जांच के लिए गठित की 3 सदस्यीय टीम

पाँच लड़कियों का हथियारों के बल पर ‘गैंग रेप’,पादरी समेत 12 से पुलिस पूछताछ,दुष्कर्मी का फोटो स्कैच भी जारी, पता  बताने वाले को 50 हजार रू. इनाम

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

रांची, 22 जून ! रांची से सटे खूंटी जिले में एक एनजीओ की पांच कार्यकर्ताओं का अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म के मामले में एक पादरी समेत 12 लोगों से पुलिस ने पूछताछ की है. मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है.

वहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग ने झारखंड के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए कहा है. आयोग ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया है. आयोग ने कहा कि यह टीम पूरे मामले की जांच करेगी.

वहीं, इस मामले को लेकर पुलिस की छापेमारी जारी है. खूंटी पुलिस ने एक दुष्कर्मी का फोटो स्कैच भी जारी किया है. साथ ही इस शख्स का पता  बताने वाले को 50 हजार रूपये इनाम देने की बात की है.

पुलिस के मुताबिक  इलाके के पत्थलगड़ी समर्थकों ने  जंगल में  गैंगरेप को अंजाम दिया. पीड़ित लड़कियां स्वयंसेवी संस्था से जुड़ी थीं और इनका दोष सिर्फ इतना था कि ये लोग कुछ दिनों से मानव तस्करी के खिलाफ जनजागरूकता अभियान  चला रही थीं.

दो दिन पहले पीड़ित नाबालिग लड़कियां सुदूर गांव में नुक्कड़ नाटक करने आई थीं. पुलिस के मुताबिक उसी वक्त पत्थलगड़ी समर्थकों ने उनका अपहरण कर उनके साथ रेप किया.

इलाके में पहले से तनाव

यह घटना खूंटी मुख्यालय से करीबन पचास किलोमीटर दूर कोचांग गांव की  है. खूंटी का यह इलाका नक्सल प्रभावित है. नक्सल संगठन PLFI का यह गढ़ माना जाता है. साथ ही पत्थलगड़ी की घटनाओं को लेकर इन इलाकों में पहले से तनाव है.

ऐसे में पुलिस भी इन इलाकों में जाने से परहेज करती है. मामले में कोचांग स्कूल के फादर को पुलिस ने पुछताछ के लिये गुरुवार देर शाम खूंटी थाना लेकर आई. मामले में फादर पर पुलिस को सहयोग नहीं करने और घटना की जानकारी नहीं देने का आरोप है. वैसे फादर को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया. पुलिस  ने आरोपियों पर अपहरण, दुष्कर्म और एमएमएस बनाने का मामला दर्ज किया है.फिलहाल इस मामले में पीड़िताओं का बयान दर्ज कर लिया गया है.  पीड़िताओं का मेडिकल जांच भी कराया गया है.झारखंड

पाँच लड़कियों का हथियारों के बल पर ‘गैंग रेप’

झारखंड के आदिवासी बहुल खूंटी ज़िले में पाँच युवतियों के साथ कथित गैंग रेप के आरोप में एक मिशनरी स्कूल के फ़ादर समेत सात अन्य लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है.खूंटी के पुलिस अधीक्षक अश्विनी सिन्हा ने मीडिया को बताया, “खूंटी ज़िले में एक ग़ैर सरकारी संस्था के लिए काम करने वाली पाँच लड़कियों के साथ गैंग रेप के आरोप में कोचांग स्थित मिशनरी स्कूल के फ़ादर समेत सात अन्य लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है.”उन्होंने बताया कि पुलिस ने एक आरोपी की तस्वीर जारी की है. उसकी सूचना देने वाले को पचास हज़ार रुपये का ईनाम देने की भी घोषणा की गई है.

मामला क्या है?

जिस कोचांग गाँव की ये घटना है वो झारखंड की राजधानी रांची से क़रीब 80 किलोमीटर दूर है.रांची के डीआईजी ऐ वी होमकर ने बीबीसी को बताया है कि मंगलवार, 19 जून को एक ग़ैर सरकारी संस्था ‘आशा किरण’ की एक टीम कोचांग गाँव गई थी.ग्यारह लोगों की ये टीम मानव तस्करी के ख़िलाफ़ एक जागरूकता अभियान के तहत नुक्कड़ नाटक करने इस गाँव पहुँची थी.गाँव के बाज़ार में नुक्कड़ नाटक करने के बाद संस्था के ये लोग एक स्थानीय मिशनरी स्कूल पहुँचे.

पुलिस के मुताबिक, इन लड़कियों के स्कूल पहुँचते ही मोटरसाइकिल सवार कुछ लोग स्कूल पहुँचे और हथियारों के बल पर पाँच लड़कियों का अगवा कर लिया. साथ ही टीम में शामिल तीन पुरुष सदस्यों के साथ भी अपराधियों ने मारपीट की.इसके बाद अभियुक्तों ने पास के जंगल में ले जाकर गैंग रेप को अंजाम दिया.होमकर ने बताया कि 20 जून को इस घटना की ख़बर सामने आई. ख़बर मिलने के तुरंत बाद ही खूंटी ज़िले के उपायुक्त अपनी टीम के साथ इस मामले में जानकारियाँ जुटाने में लग गये थे.21 जून को एक पीड़िता की तलाश करने के बाद उससे लंबी पूछताछ की गई. फ़िलहाल पीड़िता पुलिस की निगरनी में सुरक्षित हैं. उनका मेडिकल चेकअप कराया गया है.

पुलिस के हवाले से इस मामले से जुड़ीं अन्य बातें:

  • कोचांग गाँव के उस मिशन स्कूल के फ़ादर और आशा किरण संस्था की पदाधिकरियों ने तत्काल पुलिस या प्रशासन को इस घटना की कोई जानकारी नहीं दी थी.
  • पुलिस लड़कियों की संस्था से जुड़ीं दो सिस्टर से भी पूछताछ कर रही है कि किन परिस्थितियों में वो घटना पर चुप्पी साधे रहीं. स्कूल की दो टीचरों से भी पूछताछ की गई है.
  • मामले की तफ़्तीश के लिए खूंटी ज़िले के पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में 3 विशेष टीमें इस घटना पर अलग-अलग काम कर रही हैं.
  • दुष्कर्म को लेकर किसी किस्म के वीडियो बनाये जाने का साक्ष्य पुलिस को नहीं मिला है.

पत्थलगड़ी समर्थकों का हाथ

पुलिस को ये भी संदेह है कि इस घटना में पत्थलगड़ी समर्थकों का हाथ हो सकता है, क्योंकि कोचांग गाँव में पहले पत्थलगड़ी की गई थी.पत्थलगड़ी तथा नक्सल प्रभावित और दुर्गम इलाक़ा होने के कारण पुलिस अपनी कार्रवाई में एहतियात बरत रही है.इस मामले में आशा किरण संस्था का पक्ष जानने के लिए वहाँ की सिस्टर से  संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिला.महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली आलोका कहती हैं कि इस मामले को पत्थलगड़ी से जोड़कर देखना ठीक नहीं है.उन्होंने कहा कि झारखंड में महिला सुरक्षा को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं और हर महीने सूबे में औसतन 110 बलात्कार की घटनाएं होती हैं.

पत्थलगड़ी आंदोलन के पीछे धर्मांतरण कराने वाली ताक़तें: मुख्यमंत्री रमन सिंह

सर्व आदिवासी समाज ने कहा कि आदिवासियों की ज़मीनों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है. ऐसे में उनका अपने हक़ के लिए लड़ना स्वभाविक है. कांग्रेस ने कहा कि प्रदेश सरकार आदिवासियों की समस्याओं को समझ नहीं पा रही है.

Khunti: Tribals hold bows and arrows near a Patthalgarhi spot at Maoist-affected village Siladon under Khunti district of Jharkhand on Tuesday. The Patthalgarhi movement says that the “gram sabha” has more weight than either the Lok Sabha or the Vidhan Sabha in scheduled areas. PTI Photo (PTI5_1_2018_000146B)

पत्थलगड़ी आंदोलन के तहत गांवों के बाहर एक पत्थर लगाकर ग्रामसभा के अधिकारों के बारे में बताया जाता है. (फोटो: पीटीआई)

रायपुर: आदिवासी बहुल झारखंड से शुरू हुआ आदिवासियों का आंदोलन ‘पत्थलगड़ी’ अब छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में फैल गया है. इस आंदोलन के बाद पुलिस ने जहां इसके मुखिया समेत आठ लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है वहीं मुख्यमंत्री ने इस आंदोलन के पीछे धर्मांतरण को बढ़ावा देने वालों का हाथ होने की बात कही है.राज्य के आदिवासी बहुल जशपुर ज़िले के बछरांव गांव में पिछले महीने 22 अप्रैल को ओएनजीसी के पूर्व अधिकारी जोसेफ तिग्गा और उनके सहयोगी तथा भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी एचपी किंडो ने आदिवासियों को एकत्र कर पत्थलगड़ी कार्यक्रम का आयोजन किया था.

आयोजन के बाद स्थानीय मीडिया में यह मामला सामने आया. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बगीचा क्षेत्र के गांवों में ग्रामसभा का आयोजन किया गया और गांव के बाहर पत्थर गड़ाकर पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र के गांवों में बाहरी व्यक्ति के प्रवेश को निषिद्ध कर दिया गया. इसके बाद प्रशासन हरकत में आया.हालांकि बाद में क्षेत्र में माहौल तब बिगड़ गया जब 28 अप्रैल को आदिवासियों ने पुलिस का घेराव किया. इसके बाद पुलिस ने तिग्गा और किंडो समेत आठ लोगों को गिरफ़्तार कर लिया.

जशपुर क्षेत्र के पुलिस अधिकारियों के मुताबिक क्षेत्र में पत्थलगड़ी के आयोजन के बाद नारायणपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत बुठुंगा गांव में दो समूहों में झड़प के बाद इलाके में तनाव फैल गया और ग्रामीणों ने ज़िला प्रशासन के अधिकारियों और पुलिस का घेराव किया था.इसके बाद पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ़्तार कर लिया.

पुलिस के मुताबिक तिग्गा और जोसेफ पर आरोप है कि उन्होंने पत्थलगडी़ के नाम पर लोगों को प्रशासन के ख़िलाफ़ भड़काया था जिससे क्षेत्र में तनाव फैला.ज़िले के गांवों में जब पत्थलगड़ी आंदोलन शुरू हुआ तब गांवों के बाहर पत्थर लगाया गया जिसमें सबसे ऊंची है ग्राम सभा लिखा गया था. वहीं साथ ही एक बोर्ड भी लगाया गया जिसमें जनजातियों के रूढ़ी और प्रथा को विधि का बल प्राप्त होने तथा विधानसभा या राज्यसभा द्वारा बनाया गया कोई भी सामान्य क़ानूनों का अनुसूचित क्षेत्रों में लागू नहीं होने की जानकारी दी गई थी. साथ ही इसमें यह भी कहा गया था कि लोकसभा और विधानसभा से ऊंचा स्थान ग्रामसभा को प्राप्त है. बोर्ड में लिखा गया कि आदिवासी ही इस देश के असली मालिक हैं.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गांवों में इसके माध्यम से तनाव नहीं फैले इसलिए यह कार्रवाई की गई है.पत्थलगड़ी को लेकर सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक अरविंद नेताम कहते हैं कि गांवों में ख़ासकर अनुसूचित क्षेत्रों में पत्थलगड़ी का कार्यक्रम होता रहा है. देश में पंचायती राज व्यवस्था के लागू होने के बाद यह एक रिवाज के रूप में सामने आया. इसके माध्यम से गांव के बाहर एक छोटी सी दीवार की तरह बनाया जाता है या पत्थर लगाकर ग्राम सभा के अधिकारों के बारे में बताया जाता है.

नेताम कहते हैं कि देश में आदिवासियों के हितों में कई क़ानून बने लेकिन इन क़ानूनों का पालन ठीक तरीके से नहीं हुआ. इससे आदिवासी समाज ठगा हुआ महसूस कर रहा है.वह कहते हैं कि देश में पंचायत (एक्सटेंशन टू सेडूल एरिया) ऐक्ट (पेसा) क़ानून बनाया गया. लेकिन अभी तक इसका ठीक तरीके से पालन नहीं हो रहा है. आदिवासी क्षेत्रों की ज़मीनों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है. क्षेत्र में उद्योगों की भरमार हो गई है. ऐसे में आदिवासियों का अपने हक़ के लिए लड़ना स्वभाविक है. हालांकि पुलिस को बंधक बनाना या क़ानून को अपने हाथों में लेना उचित नहीं है.

नेताम कहते हैं कि इन आंदालनों को राजनीतिक दल अपने नज़रिये से देखते हैं और अपने हिसाब से इसकी व्याख्या करते हैं जो ठीक नहीं है.राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के मुताबिक राज्य सरकार अनुसूचित क्षेत्रों में संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में असफल रही है. इसलिए इस तरह के आंदोलन हो रहे हैं.

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री शैलेष नितिन त्रिवेदी कहते हैं कि आदिवासियों की मांग है कि उनके क्षेत्र के लिए बनाए गए संवैधानिक प्रावधानों को लागू किया जाए. लेकिन सरकार उनकी समस्याओं को समझ नहीं पा रही है. कांग्रेस इस मामले की जांच के लिए 17 सदस्यीय समिति का भी गठन किया है.इधर मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस आंदोलन को ही असंवैधानिक क़रार दिया है. सिंह का कहना है कि यह देश में कैसे संभव है कि कोई भी व्यक्ति किसी गांव में प्रवेश नहीं कर सकता है.मुख्यमंत्री कहते हैं कि यह षड़यंत्र है. एक प्रकार की ताक़त है जो धर्मांतरण को बढ़ावा देना चाहती है. रमन सिंह कहते हैं कि इस आंदोलन का विरोध राज्य के सभी आदिवासी विधायक, सांसद, नेता और आम जनता कर रही है.

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