खतरा ! डेट म्यूचुअल फंड्स स्कीम में लगाया हैं पैसा तो हो सकता है भारी नुकसान

अगर आप म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक खास स्कीम में पैसा लगाने वाले निवेशक लगातार अपने वित्तीय सलाहकार को फोन कर रहे हैं या फिर उनसे इसको लेकर सलाह मांग रहे हैं.

सावधान! अगर इन म्यूचुअल फंड्स स्कीम में लगाया हैं पैसा तो हो सकता है भारी नुकसान, जानिए क्योंसावधान! अगर इन म्यूचुअल फंड्स स्कीम में लगाया हैं पैसा तो हो सकता है भारी नुकसान, जानिए क्यों
अगर आप म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक खास स्कीम में पैसा लगाने वाले निवेशक लगातार अपने वित्तीय सलाहकार को फोन कर रहे हैं या फिर इसको लेकर उनसे सलाह मांग रहे हैं. ये फंड्स स्कीम डेट म्यूचुअल फंड की है. इसमें पैसा लगाने वाले  निवेशकों की इन दिनों नींद उड़ी है, क्योंकि इस समय डेट फंड्स को लेकर लगातार निगेटिव खबरें आ रही है. इस पर एक्सपर्ट्स कहते हैं कि डेट फंड का संकट की शुरुआत IL&FS से हुई है. वहीं, अब दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड को लेकर बड़ी खबर आई है. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल और इक्रा ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड यानी DHFL के कॉमर्शियल पेपर प्रोग्राम की रेटिंग घटा दी है. कंपनी की लिक्विडिटी क्राइसिस की वजह से रेटिंग घटाई गई है. क्रिसिल ने कंपनी के कॉमर्शियल पेपर की रेटिंग A4+ से घटा कर ‘D’ यानी डिफॉल्ट कर दी है. इक्रा ने भी इसकी रेटिंग घटा कर D कर दी है. रेटिंग एजेंसियों का मानना है कि कंपनी निवेशकों को ब्याज का पेमेंट नहीं कर पाएगी.

दीवान हाउसिंग के साथ क्या हुआ-क्रिसिल ने कहा कि जून में कंपनी को कॉमर्शियल पेपर के एवज में 750 करोड़ रुपये का पेमेंट करना है लेकिन पैसा न होने की वजह से वो इसे पूरा करने में नाकाम रह सकती है. पहला कॉमर्शियल 7 जून को मेच्योर हो रहा है.डेट म्यूचुअल फंड्स स्कीम के लिए इमेज परिणाम

>> कंपनी के पास पैसा नहीं है कि वह अपने कर्ज चुका सके. वक्त पर फंड इकट्ठा करने की संभावना भी काफी कम दिख रही है.
>> कॉमर्शियल पेपर मेच्योरिटी में डिफॉल्ट कर जाएंगे. इक्रा ने भी इन्हीं कारणों का हवाला देकर कॉमर्शियल पेपर को डिफॉल्ट कैटेगरी में डाल दिया है.
>> DHFL के बयान में कहा गया है कि कंपनी पूरी कोशिश करेगी ब्याज का भुगतान वक्त पर हो जाए.
दीवान हाउसिंग के आखिर समस्या क्या है-DHFL सितंबर से लिक्विडिटी का संकट झेल रही है. दरअसल IL&FS की लिक्विडिटी क्राइसिस का असर इस कंपनी पर भी पड़ा.
>> जनवरी में फंड की हेराफेरी के आरोपों ने भी इसकी मुश्किलें बढ़ा दी. फरवरी में कंपनी से हर्शिल मेहता सीईओ के पद से हट गए लेकिन रिटेल बिजनेस के एक्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट बने रहे. पिछले महीने केयर रेटिंग और क्रिसिल ने कंपनी के डेट इंस्ट्रूमेंट्स की रेटिंग घटा दी थी.

>> इस वजह से भी कंपनी को नया फंड जुटाने में दिक्कत आई. अब कॉमर्शियल की रेटिंग घट कर D पर आ जाने से संकट और बढ़ गया है.

ऐसे में डेट म्यूचुअल फंडों का पैसा इन कंपनियों के बॉन्ड्स में फंस गया. आइए जानें अब क्या करें निवेशक…

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि मौजूदा स्थितियों से अगर जरूरत से ज्यादा परेशान हैं तो आप डेट म्यूचुअल फंड बेच सकते हैं. एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि उन डेट स्कीमों की पहचान करें जो आपके लिए संकट पैदा कर सकती हों. उदाहरण के लिए कुछ एफएमपी के साथ संकट हो सकता है. लेकिन, आप इनके बारे में तब तक कुछ ज्यादा नहीं कर सकते हैं जब तक इनकी मैच्योरिटी का समय नहीं आ जाता है. इस तरह आप केवल इंतजार कर सकते हैं.

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>> सेबी के वर्गीकरण के बाद निवेशकों के लिए स्कीमों से जुड़े जोखिम के प्रकार को समझना बहुत आसान हो गया है. निवेशकों को अपनी स्कीमों को देखना चाहिए. साथ ही इनसे जुड़े जोखिम को समझना चाहिए.
डेट फंड्स क्या होते हैं- डेट फंड ऐसे म्युचुअल फंड हैं जो निवेशकों का पैसा डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाते हैं. डेट इंस्ट्रूमेंट्स से मतलब – कॉल मनी, बॉन्ड, डिबेंचर्स, सरकारी सिक्योरिटीज, डिपॉजिट सर्टिफिकेट और कमर्शियल पेपर हैं. अलग अलग फाइनेंशियल लक्ष्यों के मुताबिक अलग अलग डेट फंड होते हैं.
डेट फंड कितनी तरह के होते हैं- डेट फंड कई तरह के होते हैं जैसे लिक्विड फंड, अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड, शॉर्ट टर्म फंड, गिल्ट फंड, इनकम फंड, क्रेडिट ऑप्युर्चनिटी फंड, मंथली इनकम प्लान और फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान.
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लिक्विड फंड्स किसे कहते हैं- बहुत कम वक्त के लिए निवेश करने वाले फंड लिक्विड फंड कहलाते हैं और लिक्विड फंड को मनी मार्केट फंड भी कहा जाता है. लिक्विड फंड में कुछ दिन से लेकर कुछ हफ्ते तक के लिए निवेश संभव होता है और अगर कुछ ज्यादा पैसा आ गया तो उसे इस फंड में शिफ्ट किया जा सकता है. इन फंड में कोई एक्जिट लोड नहीं लगता है.
लिक्विड फंड से रकम तुरंत बैंक अकाउंट में ट्रांसफर हो जाती है और इन फंड्स में बहुत थोड़े वक्त के लिए निवेश कर सकते हैं. ये फंड बहुत कम वक्त की सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं और इन सिक्योरिटीज में रकम डूबने का रिस्क ना के बराबर होता है. इनमें निवेश सबसे सुरक्षित लेकिन रिटर्न भी कम होता है.

अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड्स किसे कहते हैं-अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड में कुछ हफ्ते से 3 महीने तक निवेश संभव होता है और लिक्विड फंड के मुकाबले अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड में रिस्क ज्यादा होता है. दूसरे लॉन्ग टर्म फंड के मुकाबले कम रिस्क होता है और ये एफडी से ज्यादा रिटर्न देते हैं.

ये फंड उन निवेशकों के लिए जो अपना पैसा कुछ महीनों के लिए निवेश करना चाहते हैं. ये फंड अपना पोर्टफोलियो थोड़े पीरियड के लिए डेट इस्ट्रूमेंट में रखते हैं और ये फंड सरकारी सिक्योरिटीज, डिपॉजिट सर्टिफिकेट्स, कंपनियों और दूसरे फाइनेंस इंस्टिट्यूशंस में डिपॉजिट करते हैं.

शॉर्ट टर्म फंड्स क्या होते हैं- शॉर्ट टर्म फंड थोड़े ज्यादा वक्त के निवेश के लिए होते हैं और शॉर्ट टर्म फंड में आमतौर पर 3 महीने से 1 साल तक के लिए निवेश करते हैं.

ये फंड 1 साल या कुछ ज्यादा में मैच्योर हो जाते हैं. इसमें सरकारी सिक्योरिटीज और कंपनियों के कमर्शियल पेपर में निवेश किया जाता है और ब्याज दरों में बदलाव की वजह से लिक्विड और अल्ट्रा शॉर्ट टर्म के मुकाबले ज्यादा रिस्क होता है. शॉर्ट टर्म फंड्स ज्यादा रिस्क उठाने वाले निवेशकों के लिए बेहतर फंड होते हैं.

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