कोर्ट फैसला जल्द न आया तो सरकार के पास क्या है राम मंदिर बनाने का रास्ता?

सरकार के एक धड़े का मानना है कि बिना अध्यादेश के भी मंदिर का काम शुरू किया जा सकता है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को चुनाव में मिलेगा

नई दिल्‍ली:अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में तारीख पर तारीख पड़ती जा रही जिसके बाद कई नेता सुप्रीम कोर्ट पर भी हमला करने से गुरेज नहीं कर रहे हैं. दूसरी ओर सरकार में बैठा एक धड़ा और संघ के कुछ लोग राम मंदिर पर अध्यादेश लाने की बात भी कर रहे हैं. इस बीच सरकार सुप्रीम कोर्ट और अध्यादेश के बीच एक रास्ता निकालने की भी कोशिश कर रही है. सरकार के एक धड़े का मानना है कि बिना अध्यादेश के भी मंदिर का काम शुरू किया जा सकता है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को चुनाव में मिलेगा. संविधान विशेषज्ञ भी सरकार के इस धड़े की बात से सहमति जता रहे हैं.

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप की मानें, तो सरकार गैर विवादित जमीन पर जब चाहे मंदिर का निर्माण शुरू करा सकती है. इसके लिए सरकार को सिफ गैर-विवादित जमीन को मंदिर निर्माण करने वाले ट्रस्ट को स्थानांतरित करनी है, निर्माण का काम शुरू होने के बाद सरकार चाहे तो अध्यादेश ला सकती है या सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर सकती है.

अध्यादेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील एमएल लोहाटी की राय थोड़ी अलग है. लोहाटी का मानना है कि जब कोई मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा हो, तो ऐसे में सरकार को अध्यादेश लाने से बचना चाहिए. हालांकि, वो मान रहे हैं कि सरकार के पास अध्यादेश लाने का पूरा अधिकार है और सरकार जब चाहे अध्यादेश ला सकती है.
मंदिर बनाने की राह इतनी आसान भी नहीं है जितनी कि सरकार में बैठे लोग समझते हैं. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी सरकार की ओर से होने वाले इस तरह के किसी फैसले का विरोध करने की तैयारी हैं. उनका कहना है कि अयोध्या में किसी तरह के निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है. सरकार अगर कुछ भी हुआ तो वो सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे.

अयोध्‍या केस: 29 जनवरी को अगली सुनवाई, संवैधानिक बेंच से जस्टिस यूयू ललित हटे

अब जस्टिस ललित के खुद ही बेंच से हटने की बात कहने पर अयोध्‍या मसले पर नई संवैधानिक बेंच का गठन होगा.

अयोध्‍या केस: 29 जनवरी को अगली सुनवाई, संवैधानिक बेंच से जस्टिस यूयू ललित हटे

सुप्रीम कोर्ट ने मई 2011 में अयोध्‍या मसले पर हाई कोर्ट के निर्णय पर रोक लगाने के साथ ही विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया था.

राजीव धवन के सवाल उठाने के बाद चीफ जस्टिस ने बाकी जजों के साथ मशविरा किया. इस पर जस्टिस यूयू ललितImage result for अयोध्‍या मसले पर नई संवैधानिक बेंच ने सुनवाई से अपने आप को अलग करने की बात कही. हालांकि इस मुद्दे को उठाते हुए राजीव धवन ने कहा कि मुझे अफसोस है कि यह मसला उठाना पड़ रहा है. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि आपको अफसोस करने की कोई जरूरत नहीं है. आपने तो तथ्‍यों को पेश किया है.

अब जस्टिस ललित के खुद ही बेंच से हटने की बात कहने पर अयोध्‍या मसले पर नई संवैधानिक बेंच का गठन होगा. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी. उल्‍लेखनीय है कि यह पीठ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है.

5 जजों की संवैधानिक बेंच
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली इस पांच सदस्यीय संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति उदय यू ललित और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ शामिल थे. पांच सदस्यीय पीठ में न केवल मौजूदा प्रधान न्यायाधीश हैं बल्कि इसमें चार अन्य न्यायाधीश जो शामिल थे वे भविष्य में सीजेआई बन सकते हैं. न्यायमूर्ति गोगोई के उत्तराधिकारी न्यायमूर्ति बोबडे होंगे. उनके बाद न्यायमूर्ति रमण, न्यायमूर्ति ललित और न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की बारी आएगी.
शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने गत वर्ष 27 सितंबर को 2 :1 के बहुमत से मामले को शीर्ष अदालत के 1994 के एक फैसले में की गई उस टिप्पणी को पुनर्विचार के लिये पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेजने से मना कर दिया था जिसमें कहा गया था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है. मामला अयोध्या भूमि विवाद मामले पर सुनवाई के दौरान उठा था.

हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ 14 अपीेलें
अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से संबंधित 2.77 एकड़ भूमि के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 30 सितंबर, 2010 के 2:1 के बहुमत के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में 14 अपीलें दायर की गयी हैं. उच्च न्यायालय ने इस फैसले में विवादित भूमि सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान के बीच बराबर- बराबर बांटने का आदेश दिया था.

इस फैसले के खिलाफ अपील दायर होने पर शीर्ष अदालत ने मई 2011 में उच्च न्यायालय के निर्णय पर रोक लगाने के साथ ही विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया था.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *