केरल में फैली हिंसा ,तनाव,राज्यपाल ने रिपोर्ट मांगी कानून व्यवस्था पर

तिरुवनंतपुरम :केरल के सबरीमाला मंदिर में दो महिलाओं के प्रवेश के बाद राज्य में हिंसा फैल गई है। राज्य में स्थिति तनावपूर्ण है और कई जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। गुरुवार को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह मुठभेड़ हुई। हिंसा को देखते हुए राज्यपाल पी सदाशिवम ने मुख्मंत्री पिनाराई विजयन से कानून व्यवस्था पर रिपोर्ट मांगी है। जानकारी के मुताबिक राज्य में 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं जिसमें 21 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी ऑफ इंडिया के कार्यकर्ताओं के साथ झगड़े में बीजेपी के तीन कार्यकर्ता चाकू से घायल हो गए थे। यह प्रदर्शन 55 वर्षीय चंद्रन उन्नीथन की मौत के बाद हिंसक हो गया था। वह सबरीमाला कर्मा समिति के कार्यकर्ता थे और सीपीएम कार्यकर्ताओं की पत्थरबाजी में घायल हो गए थे। पहले मुख्यमंत्री ने इस मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई थी लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि गहरे जख्मों की वजह से उनकी मौत हुई है।

  • सबरीमाला मंदिर में दो महिलाओं के प्रवेश के बाद हुए उग्र प्रदर्शन के मामले में पुलिस अबतक 1369 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
  • सबरीमाला मसले पर भाजपा नेता मिनाक्षी लेखी ने कहा, ‘यह मामला इतना आगे बढ़ा है, इसके पीछे एक ही शख्स का हाथ है और वो हैं केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन। महिलाओं को ‘हिजड़ा’ बनाकर रात को एक बजे लेकर जाना, अगर वो भक्त महिला थीं, तो दिन में आना चाहिए था, लेकिन रात को ऐसा किया गया।’
  • सबरीमाला कर्म समिति के कार्यकर्ता चंद्रन उन्नीथन की हत्या के मामले में दो सीपीआइएम कार्यकर्ताओं को पांडलम से गिरफ्तार किया गया। धारा 302 और 307 के तहत हुई गिरफ्तारी।
  • इस बीच त्रिशूर पुलिस ने गुरुवार को भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले करने के मामले में तीन एसडीपीआइ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है।


हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगाः मुख्यमंत्री

कई शहरों में राज्य परिवहन की बसें नहीं चल रही थीं वहीं कुछ प्राइवेट वाहन ही सड़क पर दिखाई दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हिंसा राजनीतिक रूप से फैलाई गई है। सरकार किसी भी रूप में हिंसा बर्दाश्त नहीं करेगी।
विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने विजयन को जवाब देते हुए कहा कि हिंसा तो होनी ही थी। उन्होंने कहा, ‘जब असंवेदनशील लोग राज्य में शासन करते हैं तो यह काला दिन तो देखना ही था।’ गुरुवार को राज्य में कांग्रेस ने काला दिवस मनाया। कई जगहों पर पत्रकारों पर भी हमले हुए। तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों ने एक मार्च भी निकाला। राज्य पुलिस के प्रमुख ने कहा कि पत्रकारों पर हुए हमले की जांच की जाएगी।
आपको बता दें कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र वर्ग के महिलाओं की एंट्री की इजाजत दे दी थी। हालांकि, इस फैसले के बाद अभी तक ‘प्रतिबंधित’ उम्र की एक भी महिला मंदिर में अयप्पा के दर्शन नहीं कर पाई थी। बुधवार को कनकदुर्गा और बिंदू ने दावा किया कि वे अयप्पा के दर्शन करने में सफल रहीं। इस खबर के बाद राज्य में जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए।

परंपरा को तोड़ने वाली दोनों महिलाएं हैं कौन ?

Sabrimala : परंपरा को तोड़ने वाली इन दोनों महिलाओं का माओवादियों से है क्‍या संबंध, जानें
एक दिन पहले जब मंदिर प्रशासन की कोशिशों के बावजूद दो महिलाएं मंदिर में प्रवेश करने में सफल हो गईं तो यकायक वह मीडिया की सुर्खियां बन गईं। लेकिन बेहद कम लोग जानते हैं कि आखिर ये महिलाएं कौन हैं
सबरीमाला को लेकर पिछले काफी समय से बवाल चल रहा है। इस पर बवाल  मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर है। एक दिन पहले जब मंदिर प्रशासन की कोशिशों के बावजूद दो महिलाएं मंदिर में प्रवेश करने में सफल हो गईं तो यकायक वह मीडिया की सुर्खियां बन गईं। लेकिन बेहद कम लोग जानते हैं कि आखिर ये महिलाएं कौन हैं। हम आपको यहां बता देते हैं कि मंदिर में प्रवेश करने वाली महिलाओं का नाम बिंदू और कनकदुर्गा है। इनमें से बिंदू अम्मिनी पेशे से प्रोफेसर हैं।

वहीं कनकदुर्गा सिविल सप्लाइ कॉर्पोरेशन आउटलेट में असिस्टेंट मैनेजर हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बिंदू और कनकदुर्गा की मुलाकात फेसबुक पर हुई थी। दोनों फेसबुक पेज नवोतन केरलम सबरीमालायीलेकु से जुड़ी हुई थीं जो कि एक फेसबुक पेज है, जिसे सबरीमाला में प्रवेश चाहने वाली महिलाओं ने बनाया है। आपको यहां पर ये भी बताना जरूरी होगा कि इस मंदिर में प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था जो महिलाओं के हक में था। इन दोनों महिलाओं ने इससे पहले 24 दिसंबर को भी मंदिर में प्रवेश की कोशिश की थी। इस मंदिर में प्रवेश करने वाली ये दोनों महिलाएं विवाहित हैं और दोनों के बच्चे भी हैं।

42 साल की बिंदू कानू सान्याल सीपीआई ऐक्टिविस्ट पार्टी में कुछ वक्त के लिए राज्य सचिव रह चुकी हैं। हालांकि, 10 साल से उन्होंने सक्रिय राजनीति छोड़ रखी है। बिंदू ने कानून की पढाई में मास्टर्स डिग्री ली है इसके बाद उन्होंने कई यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में पढाने का काम किया। इसमें कालीकट यूनिवर्सिटी शामिल है। अब वे कन्नूर यूनिवर्सिटी में कार्यरत हैं। वह पेशे से वकील भी हैं। 24 दिसबंर को प्रवेश न मिलने पर उन्होंने भूख हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थीं। उनकी इस धमकी के बाद उनके समर्थन में कुछ लोग सामने आए थे और मंदिर में प्रवेश कराने का भरोसा दिलाया था। बिंदू दलित एक्टिविस्ट भी हैं और लोगों के बीच लैंगिक समानता की बड़ी पैरोकार के रूप में जानी जाती हैं। बिंदू केरल के पतनमथित्ता जिले की रहने वाली हैं। मीडिया रिपोट्स की मानें तो वह अपने छात्रों में काफी लोकप्रिय हैं। बिंदू के पति हरिहरन भी कॉलेज में लेक्चरर हैं। वे भी पॉलिटिकल एक्टिविस्ट हैं। इनकी एक 11 साल की बेटी भी है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि मंदिर में प्रवेश करने वाली कनकदुर्गा का परिवार भी इस हक में नहीं था कि वह ऐसा करें। यहां तक की इस पूरी मुहिम के दौरान वह अपने परिवार के संपर्क में भी नहीं रही। आलम ये रहा है कि उनके परिवार ने ही उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करा दी थी। इसके बाद उन्‍होंने एक वीडियो जारी कर कहा था कि वह सुरक्षित हैं। कनक केरल राज्य सिविल सप्लाइज कारपोरेशन में अस्सिटेंट मैनेजर हैं और वो मलप्पुरम के अंगदीपुरम में पोस्टेड हैं। वो परंपरागत तौर पर केरल के धार्मिक नायर परिवार से हैं। 24 जनवरी को जब कनक ने सबरीमाला में जाने का प्रयास किया था तो इसके बाद इनके एरोकोड स्थित घर और उनके पति के अंगदीपुरम स्थित घर पर दक्षिणपंथी समूह के लोगों ने हमला भी किया था। गौरतलब है कि धार्मिक मान्यताओं के आधार पर इस सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल तक की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। मान्यता है कि रजस्वला उम्र वाली महिलाओं को भगवान अयप्पा के सामने नहीं आना चाहिए।सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से करीब 17 महिलाओं ने मंदिर में पहुंचने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाईं।

सबरीमाला मंदिर का पौराणिक इतिहास, अयप्पा स्वामी के दर्शन के लिए पार करनी पड़ती हैं 18 पावन सीढ़ियां…

sabarimala temple
भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है विश्‍व प्रसिद्ध सबरीमाला का मंदिर। यहां हर दिन लाखों लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने में महिलाओं के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है। करीब 800 साल पुराने इस मंदिर में ये मान्यता पिछले काफी समय से चल रही थी कि महिलाओं को मंदिर में प्रवेश ना करने दिया जाए। इसके कुछ कारण बताए गए थे। आओ जानते हैं इस मंदिर के और स्थिति के बारे में।
कौन थे अयप्पा?
1.भगवान अयप्पा के पिता शिव और माता मोहिनी हैं। विष्णु का मोहिनी रूप देखकर भगवान शिव का वीर्यपात हो गया था। उनके वीर्य को पारद कहा गया और उनके वीर्य से ही बाद में सस्तव नामक पुत्र का जन्म का हुआ जिन्हें दक्षिण भारत में अयप्पा कहा गया। शिव और विष्णु से उत्पन होने के कारण उनको ‘हरिहरपुत्र’ कहा जाता है। इनके अलावा भगवान अयप्पा को अयप्पन, शास्ता, मणिकांता नाम से भी जाना जाता है। इनके दक्षिण भारत में कई मंदिर हैं उन्हीं में से एक प्रमुख मंदिर है सबरीमाला। इसे दक्षिण का तीर्थस्थल भी कहा जाता है।
धार्मिक कथा के मुताबिक समुद्र मंथन के दौरान भोलेनाथ भगवान विष्णु के मोहिनी रूप पर मोहित हो गए थे और इसी के प्रभाव से एक बच्चे का जन्म हुआ जिसे उन्होंने पंपा नदी के तट पर छोड़ दिया। इस दौरान राजा राजशेखरा ने उन्हें 12 सालों तक पाला। बाद में अपनी माता के लिए शेरनी का दूध लाने जंगल गए अयप्पा ने राक्षसी महिषि का भी वध किया।
2.अय्यप्पा के बारे में किंवदंति है कि उनके माता-पिता ने उनकी गर्दन के चारों ओर एक घंटी बांधकर उन्हें छोड़ दिया था। पंडालम के राजा राजशेखर ने अय्यप्पा को पुत्र के रूप में पाला। लेकिन भगवान अय्यप्पा को ये सब अच्छा नहीं लगा और उन्हें वैराग्य प्राप्त हुआ तो वे महल छोड़कर चले गए। कुछ पुराणों में अयप्पा स्वामी को शास्ता का अवतार माना जाता है।
अयप्पा स्वामी का चमत्कारिक मंदिर :
भारतीय राज्य में शबरीमाला में अयप्पा स्वामी का प्रसिद्ध मंदिर है, जहां विश्‍वभर से लोग शिव के इस पुत्र के मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं। इस मंदिर के पास मकर संक्रांति की रात घने अंधेरे में रह-रहकर यहां एक ज्योति दिखती है। इस ज्योति के दर्शन के लिए दुनियाभर से करोड़ों श्रद्धालु हर साल आते हैं। सबरीमाला का नाम शबरी के नाम पर पड़ा है। वही शबरी जिसने भगवान राम को जूठे फल खिलाए थे और राम ने उसे नवधा-भक्ति का उपदेश दिया था।
बताया जाता है कि जब-जब ये रोशनी दिखती है इसके साथ शोर भी सुनाई देता है। भक्त मानते हैं कि ये देव ज्योति है और भगवान इसे जलाते हैं। मंदिर प्रबंधन के पुजारियों के मुताबिक मकर माह के पहले दिन आकाश में दिखने वाले एक खास तारा मकर ज्योति है। कहते हैं कि अयप्पा ने शैव और वैष्णवों के बीच एकता कायम की। उन्होंने अपने लक्ष्य को पूरा किया था और सबरीमाल में उन्हें दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।
यह मंदिर पश्चिमी घाटी में पहाड़ियों की श्रृंखला सह्याद्रि के बीच में स्थित है। घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और तरह-तरह के जानवरों को पार करके यहां पहुंचना होता है इसीलिए यहां अधिक दिनों तक कोई ठहरता नहीं है। यहां आने का एक खास मौसम और समय होता है। जो लोग यहां तीर्थयात्रा के उद्देश्य से आते हैं उन्हें इकतालीस दिनों का कठिन वृहताम का पालन करना होता है। तीर्थयात्रा में श्रद्धालुओं को ऑक्सीजन से लेकर प्रसाद के प्रीपेड कूपन तक उपलब्ध कराए जाते हैं। दरअसल, मंदिर नौ सौ चौदह मीटर की ऊंचाई पर है और केवल पैदल ही वहां पहुंचा जा सकता है।
सबरीमाला के :
एक अन्य कथा के अनुसार पंडालम के राजा राजशेखर ने अय्यप्पा को पुत्र के रूप में गोद लिया। लेकिन भगवान अय्यप्पा को ये सब अच्छा नहीं लगा और वो महल छोड़कर चले गए। आज भी यह प्रथा है कि हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर पंडालम राजमहल से अय्यप्पा के आभूषणों को संदूकों में रखकर एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। जो नब्बे किलोमीटर की यात्रा तय करके तीन दिन में सबरीमाला पहुंचती है। कहा जाता है इसी दिन यहां एक निराली घटना होती है। पहाड़ी की कांतामाला चोटी पर असाधारण चमक वाली ज्योति दिखलाई देती है।
पंद्रह नवंबर का मंडलम और चौदह जनवरी की मकर विलक्कू, ये सबरीमाला के प्रमुख उत्सव हैं। मलयालम पंचांग के पहले पांच दिनों और विशु माह यानी अप्रैल में ही इस मंदिर के पट खोले जाते हैं। इस मंदिर में सभी जाति के लोग जा सकते हैं, लेकिन दस साल से पचास साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर मनाही है। सबरीमाला में स्थित इस मंदिर प्रबंधन का कार्य इस समय त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड देखती है।
18 पावन सीढ़ियां
चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ यह मंदिर केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 175 किलोमीटर दूर पहाड़ियों पर स्थित है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 18 पावन सीढ़ियों को पार करना पड़ता है, जिनके अलग-अलग अर्थ भी बताए गए हैं। पहली पांच सीढ़ियों को मनुष्य की पांच इन्द्रियों से जोड़ा जाता है। इसके बाद वाली 8 सीढ़ियों को मानवीय भावनाओं से जोड़ा जाता है। अगली तीन सीढ़ियों को मानवीय गुण और आखिर दो सीढ़ियों को ज्ञान और अज्ञान का प्रतीक माना जाता है।
इसके अलावा यहां आने वाले श्रद्धालु सिर पर पोटली रखकर पहुंचते हैं। वह पोटली नैवेद्य (भगवान को चढ़ाई जानी वाली चीजें, जिन्हें प्रसाद के तौर पर पुजारी घर ले जाने को देते हैं) से भरी होती है। यहां मान्यता है कि तुलसी या रुद्राक्ष की माला पहनकर, व्रत रखकर और सिर पर नैवेद्य रखकर जो भी व्यक्ति आता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
कैसे पहुंचें मंदिर?
*तिरुअनंतपुरम से सबरीमाला के पंपा तक बस या निजी वाहन से पहुंचा जा सकता है।
*पंपा से पैदल जंगल के रास्ते पांच किलोमीटर पैदल चलकर 1535 फीट ऊंची पहाड़ियों पर चढ़कर सबरिमला मंदिर में अय्यप्प के दर्शन प्राप्त होते हैं।
*रेल से आने वाले यात्रियों के लिए कोट्टयम या चेंगन्नूर रेलवे स्टेशन नज़दीक है। यहां से पंपा तक गाड़ियों से सफर किया जा सकता है।
*यहां से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट तिरुअनंतपुरम है, जो सबरीमला से कुछ किलोमीटर दूर है।

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