कमजोर पटकथा, निर्देशन व स्मृतियों पर टिकी गढ़वाली फिल्म — मेजर निराला !

दमदार पक्ष गढ़वाली संवाद व नरेंद्र सिंह नेगी का गीत व संगीत — भूपत सिंह बिष्ट
गढ़वाली फिल्म मेजर निराला कमजोर स्क्रीन प्ले व साधारण निर्देशन के कारण “घर ज्वैं” जैसी भव्यता का अहसास कराने में असफल है। फिल्म की कहानी पूर्व मुख्यमंत्री और लोकप्रिय सांसद रमेश पोखरियाल निशंक के उपन्यास मेजर निराला पर आधारित है।
फिल्म का दमदार पक्ष गढ़वाली संवाद व नरेंद्र सिंह नेगी का गीत व संगीत है। अनुराधा निराला व नरेंद्र सिंह नेगी के स्वर में सजे गीत फिल्म की धरोहर बन गए हैं। गढ़वाली सैनिकों का आह्वान गीत अपने चित्रांकन में नरेंद्र सिंह नेगी के साथ पूरा न्याय नही करता है।
पटकथा की कमजोरी के कारण फिल्म की कहानी को फ्लैश बैक के सहारे ही हर बार आगे बढ़ाया गया है। फलस्वरूप कहानी की लय टूटी है और फिल्म में कर्णप्रिय गीतों के बावजूद गहरा प्रभाव नही छोड़ पाती है। Image result for गढ़वाली फिल्म मेजर निराला
मेजर निराला किस दुश्मन से लड़े, गाँव में किसकी पगार लगाई, पाँच साल डेपुटेशन में कौन से देश गए, प्राइमरी स्कूल, कालेज या कमीशन पाने तक की उपलब्धियाँ बस संवाद बोलकर ही हासिल कर ली गई हैं।
फिल्म की कहानी सपाट हैImage result for गढ़वाली फिल्म मेजर निराला

— गरीब विधवा माँ का इकलौता बेटा मुफलिसी में पलकर तमाम बाधाओं के बावजूद गढ़वाल राइफल में मेजर बनता है और अपने गांव से जुड़ा रहता है। विधवा मां बिना सुख भोगे दुनिया छोड़ देती है फिर मेजर निराला की पत्नी गाँव में रहकर ही अपने बेटे का लालन पालन करती है। मेजर निराला का लड़का गाँव की संगत में बरबाद हो जाता है। बेटे की नालायकी से गुस्सा होकर मेजर निराला एक दिन उस पर बंदूक तान देता है लेकिन गोली का शिकार होकर माँ मारी जाती है।
मेजर निराला को पंद्रह साल की कैद हो जाती है। जेल से छूटने के बाद मेजर निराला का बेटा भी फौज में कैप्टन हो जाता है और गाँववाले मेजर निराला को अपना लेते हैं।Image result for गढ़वाली फिल्म मेजर निराला
फिल्म के कलाकार दर्शनीय हैं

– मेजर निराला राजेश मालगुड़ी कहीं स्थूल भी नजर आते हैं। हिंदी फिल्मों के जाने – पहचाने चेहरे हेमन्त तिवारी और हिमानी भट्ट शिवपुरी गढ़वाली फिल्म मेजर निराला के मेहमान कलाकार हैं। देवकी भौजाई ऊर्फ हिमानी पर दो दृश्य फिल्माये गए हैं। हेमन्त तिवारी ने डोटियाल के रोल में अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है।
फिल्म के डायलाग प्रभावी हैं। गिने – चुने पात्रों के इर्द गिर्द घूमती फिल्म मँच पर चल रहे नाटक सी लगती है, जबकि कैमरा पौड़ी नगर, मसूरी और देवप्रयाग तक पहुँचा है।
फोटोग्राफी साधारण है और कैमरा उत्तराखंड की नैसर्गिक सुंदरता और धरोहर स्थल जैसे बद्रीनाथ या देवप्रयाग में गंगा संगम नही देख पाते हैं।Image result for गढ़वाली फिल्म मेजर निराला
निर्देशन बेहद कमजोर है

— मेजर निराला का अपनी कैप कन्धे के बैज के नीचे बार – बार खोसना कमीशन अफसर की वेशभूषा कोहास्यास्पद बनाता है। फिल्म की एडिटिंग (संकलन) भी त्रुटिपूर्ण हैं — एक ही सीन में मेजर निराला की कैप कभी बांये और कभी दांये कंधे पर अखरती है।
नैशनल स्कूल आफ ड्रामा, पूना फिल्म इंस्टीटयूट, बम्बई फिल्म इंडस्ट्री, देहरादून और अन्य महानगरों में आज पारंगत कलाकारों और तकनीशियनों की भारी संख्या है और ऐसे में मेजर निराला में आर्ट और स्क्रिप्ट को लेकर काफी कमियां रह गई हैं।Image result for गढ़वाली फिल्म मेजर निराला
फिर भी लम्बे अंतराल के बाद आयी आँचलिक बोली भाषा की फिल्म मेजर निराला को देखा जा सकता है। राजनेता व साहित्यकार रमेश पोखरियाल निशंक की फिल्म निर्माता बेटी आरूषि निशंक बधाई की हकदार है।
हिमश्री बैनर तले निर्मित मेजर निराला दो घंटे की फिल्म है और इस के निर्देशक गणेश वीरान, मुख्य कलाकार राजेश मालगुड़ी व रेखा बधानी हैं। 

-देहरादून के स्वतंत्र पत्रकार भूपत सिंह बिष्ट Image result for भूपत सिंह बिष्टकी फेसबुक पोस्ट से साभार

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