टिकट हमेशा फिसलता रहा उमेश के हाथ से

उमड़ पडा दून उमेश अग्रवाल की अंतिम यात्रा में

 भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष एवं व्यापारी नेता उमेश अग्रवाल का रविवार तड़के करीब 3.30 बजे निधन हो गया। लक्खीबाग स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें कैंसर था। बीते चार साल से सिंगापुर में उनका इलाज चल रहा था। चार दिन पहले ही वह अपने घर लौटे थे। उनके निधन से भाजपाइयों में शोक है।
 उनके पुत्र सिद्धार्थ और प्रांजल अग्रवाल ने बताया कि पिताजी पिछले कुछ वर्षों से कैंसर से पीड़ित थे। तड़के उनका निधन होने पर सुभाषनगर स्थित आवास पर लोगों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। दोपहर करीब तीन बजे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत उनके आवास पर पहुंचे।

उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री के साथ मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक हरबंस कपूर आदि ने उमेश अग्रवाल के पार्थिव शरीर को पार्टी के झंडे में लपेटा। इसके बाद अंतिम यात्रा निकाली गई। अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। लक्खीबाग स्थित श्मशान घाट पर बड़े बेटे सिद्धार्थ अग्रवाल ने उन्हें मुखाग्नि दी।

भाजपा नेता उमेश अग्रवाल –
 देहरादून:भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष एवं व्यापारी नेता उमेश अग्रवाल का रविवार तड़के करीब 3.30 बजे निधन हो गया। लक्खीबाग स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें कैंसर था। बीते चार साल से सिंगापुर में उनका इलाज चल रहा था। चार दिन पहले ही वह अपने घर लौटे थे। उनके निधन से भाजपाइयों में शोक है।भाजपा नेता उमेश अग्रवाल की अंतिम विदाई

उनके पुत्र सिद्धार्थ और प्रांजल अग्रवाल ने बताया कि पिताजी पिछले कुछ वर्षों से कैंसर से पीड़ित थे। तड़के उनका निधन होने पर सुभाषनगर स्थित आवास पर लोगों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। दोपहर करीब तीन बजे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत उनके आवास पर पहुंचे।

उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री के साथ मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक हरबंस कपूर आदि ने उमेश अग्रवाल के पार्थिव शरीर को पार्टी के झंडे में लपेटा। इसके बाद अंतिम यात्रा निकाली गई। अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। लक्खीबाग स्थित श्मशान घाट पर बड़े बेटे सिद्धार्थ अग्रवाल ने उन्हें मुखाग्नि दी।

केंद्रीय मंत्री निशंक ने जताया दुखभाजपा नेता उमेश अग्रवाल की अंतिम विदाई

भाजपा नेता उमेश अग्रवाल के निधन पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डाक्टर रमेश पोखरियाल निशंक ने उनके छोटे भाई दिनेश अग्रवाल को फोन कर सांत्वना दी। कहा कि उमेश अग्रवाल के निधन से पार्टी को बड़ी क्षति हुई है। पार्टी को मजबूत करने के लिए उनके द्वारा किए गए कार्य हमेशा याद किए जाएंगे। भाजपा परिवार हमेशा उनके परिवार के साथ खड़ा रहेगा।

अंतिम यात्रा में ये हुए शामिल à¤­à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ नेता उमेश अग्रवाल की अंतिम विदाई
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद अजय भट्ट, सांसद तीरथ सिंह रावत, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल, मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक गण हरबंस कपूर, विधायक विनोद चमोली, विधायक गणेश जोशी, विधायक खजान दास, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, विधायक उमेश शर्मा काऊ, भाजपा प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष ज्योति प्रसाद गैरोला,भाजपा महानगर अध्यक्ष विनय गोयल,व्यापारी नेता अनिल गोयल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, पूर्वमंत्रीगण हीरा सिंह बिष्ट, दिनेश अग्रवाल, युवा नेता कुंवर जपिंदर,  अधिवक्ता आरएस राघव, पार्षद सतीश कश्यप, अमिता सिंह, नीनू सहगल, महिपाल धीमान, व्यापारी नेता विपिन नागलिया, केंद्रीय मंत्री के विशेष कार्याधिकारी अजय बिष्ट, महेश पांडे, अनिल गर्ग, चंद्रगुप्त विक्रम, राकेश ओबेरॉय, राजेंद्र प्रसाद गोयल, पुनीत मित्तल, डाक्टर देवेंद्र भसीन, राजीव उनियाल, सुनील मैसोन, राजेश रावत आदि।भाजपा नेता उमेश अग्रवाल की अंतिम विदाई

विधायक और मेयर की भी दौड़ में रहे 
उमेश अग्रवाल विधानसभा चुनाव में धर्मपुर सीट से भाजपा टिकट के दावेदार थे। हालांकि अंतिम समय में टिकट विनोद चमोली को दे दिया गया था। इसके अलावा वह मेयर की भी दौड़ में शामिल थे। लेकिन, पार्टी ने सुनील उनियाल गामा को मेयर का टिकट दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी के थे करीबी 
उमेश अग्रवाल पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी के बेहद करीबी और विश्वसनीय लोगों में शुमार थे। जब खंडूड़ी मुख्यमंत्री थे तब सियासत में अग्रवाल का अच्छा दबदबा था। इसके अलावा उन्हें व्यापारी नेता के रूप में भी जाना जाता था। वह दून उद्योग व्यापार मंडल के संरक्षक थे। वहीं, प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के कार्यकारी अध्यक्ष भी रहे। इसके अलावा खंडूड़ी सरकार में वह गढ़वाल मंडल विकास निगम के अध्यक्ष भी रहे। भाजपा के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी भी बने। इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं।

प्रबल दावेदार रहे, मगर हमेशा फिसला टिकट
एक जमाने में धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में अपराजित से माने जाने वाले दिनेश अग्रवाल से टक्कर के लिए उमेश अग्रवाल को मजबूत दावेदार माना गया। मगर उन्हें टिकट नहीं मिल पाया। उन्होंने कई बार दावेदारी की। उनकी पकड़ को पार्टी महसूस भी करती थी, लेकिन टिकट हमेशा फिसल जाता था। 2012 में उनकी जगह प्रकाश सुमन ध्यानी को टिकट मिल गया था। इसी तरह 2017 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मेयर विनोद चमोली को भाजपा का टिकट मिल गया। अग्रवाल ने देहरादून नगर निगम के मेयर पद के टिकट के लिए भी दावेदारी की, लेकिन उनका नंबर नहीं लग पाया।

पिछले कुछ वर्ष रहे सिर्फ उपेक्षा के ही नाम

भाजपा नेता उमेश अग्रवाल पिछले कुछ वर्षों में पार्टी के स्तर पर उपेक्षित होते चले गए। इसका एक बड़ा कारण बीसी खंडूड़ी का खराब स्वास्थ्य के कारण भाजपा की राजनीति में कमजोर होना भी रहा। एक झटके में दून महानगर अध्यक्ष पद से उमेश अग्रवाल की विदाई कर दी गई। उनकी जगह वैश्य बिरादरी से ही विनय गोयल को दायित्व दे दिया गया। उमेश अग्रवाल सरकारी दायित्व के भी मजबूत दावेदार थे, लेकिन जब पहली सूची आई, तो उनका नाम गायब था।

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