लखनऊ, ।  लोकसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन की चर्चा लंबे वक्त से जोरों पर है। कहा जा रहा था कि भाजपा और एनडीए के खिलाफ बिहार की तर्ज पर एक महागठबंधन बनाया जाएगा। इस महागठबंधन की चर्चा सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश को लेकर रही है। उत्तर प्रदेश इसलिए भी अहमियत रखता है क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में एनडीए ने यहां 80 में से 73 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिसमें से 71 सीटें तो अकेले भाजपा की झोली में आयी थीं।  लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में महागठबंधन को लेकर कांग्रेस की उम्मीदों पर सपा और बसपा ने पानी फेर दिया है।

देश के तीन राज्यों की सत्ता में वापसी के बाद कांग्रेस के लिए उम्मीद जगी थी कि उत्तर प्रदेश में होने वाले महागठबंधन में उसकी दावेदारी मजबूत होगी, उसके अरमानों पर पानी फिरता दिख रहा है. सूबे में सपा-बसपा के साथ होने वाले गठबंधन में कांग्रेस को दरकिनार किया जा सकता है. सपा-बसपा गठबंधन में सीटों का फॉर्मूला तकरीबन तय हो गया है. माना जा रहा है गठबंधन का औपचारिक ऐलान मायावती के जन्मदिन पर हो सकता है.

बसपा सूत्रों की मुताबिक यूपी में सपा-बसपा के साथ गठबंधन और सीटों के फॉर्मूला तय हो गया है. इस फॉर्मूले के तहत कांग्रेस के लिए अमेठी और रायबरेली छोड़ सकते हैं. इसके अलावा चौधरी अजीत सिंह की पार्टी आरएलडी को  2 से 3 सीटें मिल सकती है. आरएलडी के खाते में बागपत, मुजफ्फरनगर और कैराना संसदीय सीटें दी जाएगी.

सूत्रों की मानें तो दोनों पार्टियों ने सूबे की 80 लोकसभा सीटों में अपने लिए सीटें तय कर ली है. एक फॉर्मूले के मुताबिक बीएसपी 38 और सपा 37 सीटों पर चुनावी लड़ेगी. जबकि दूसरे फॉर्मूले के तहत बसपा 39 और सपा को 37 सीटों पर चुनावी मैदान में उतरेंगी. ऐसी स्थिति में आरएलडी को 2 सीटें मिल सकती है. कहा जा रहा है कि इस फॉर्मूले पर दोनों ही दलों के शीर्ष नेताओं के बीच सहमति भी बन चुकी है.

सपा और बसपा- दोनों पार्टियां कांग्रेस के साथ यूपी में गठबंधन करने के मूड में नहीं है. हाल ही में हुई पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी दोनों पार्टियां कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ी थीं. हालांकि नतीजों के बाद दोनों पार्टियों ने राजस्थान और मध्य प्रदेश में कांग्रेस को समर्थन दिया है.

ऐसी स्थिति में कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में अकेले चुनावी मैदान में उतरना पड़ सकता है. हालांकि गठबंधन की गुंजाइश बनी रहे, इस लिहाजा से सपा-बसपा कांग्रेस के गढ़ अमेठी और रायबरेली में गठबंधन प्रत्याशी नहीं उतारेंगी. साथ ही सपा अपने कोटे की कुछ सीटें भी अन्य छोटे दल जैसे निषाद पार्टी, पीस पार्टी को दे सकती है.

बसपा हर साल मायावती के जन्मदिन को बहुत धूमधाम से मनाती है. इसी दिन मायावती एक ब्लू बुक जारी जारी करती है जिसमें हर साल के उनके काम और बीएसपी के वैचारिक नजरिए को सामने रखा जाता है. लोकसभा चुनाव के लिहाज से इस बार एक बड़ा आयोजन कर सकती है. इस कार्यक्रम गैर कांग्रेसी और गैर बीजेपी दलों के नेताओं को आमंत्रित किया जा सकता है. सूत्रों का कहना है कि इसी दिन सूबे में गठबंधन का ऐलान होगा.

दरअसल राज्य में भाजपा के खिलाफ किलेबंदी में जुटी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने अपने कदम शुक्रवार को और आगे बढ़ाए। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नई दिल्ली स्थित बसपा सुप्रीमो मायावती के बंगले पर उनसे मुलाकात की। दोनों की तीन घंटे से अधिक चली बैठक में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर गठबंधन और सीटों के बंटवारे पर विस्तार से चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार गठबंधन में कांग्रेस के लिए तो कोई स्थान नहीं रहेगा लेकिन, सपा-बसपा और रालोद के साथ तीन-चार छोटे दलों को जगह मिल सकती है। हालांकि, इस संबंध में दोनों दलों के नेताओं ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद यह दूसरा अवसर था जब अखिलेश, मायावती से मिलने उनके बंगले पर पहुंचे। पूर्व में गोरखपुर और फूलपुर संसदीय सीट के उप चुनाव के पहले जब बसपा ने सपा को समर्थन देने का फैसला किया था, तब अखिलेश लखनऊ के माल एवेन्यू स्थित बसपा प्रमुख के बंगले पर धन्यवाद देने पहुंचे थे। इसके बाद ही भाजपा के खिलाफ दोनों दलों के बीच गठबंधन की नींव पड़ने लगी थी।

सूत्रों के अनुसार कुछ दिनों पहले भी अखिलेश की बसपा के कुछ महत्वपूर्ण नेताओं से दिल्ली में मुलाकात हुई थी। इसमें सीटों के बंटवारे पर भी बात हुई थी। शुक्रवार को अखिलेश ने नई दिल्ली के त्यागराज मार्ग स्थित मायावती के बंगले पर जाकर गठबंधन के संबंध में विस्तार से बात की।

सूत्रों के अनुसार मायावती और अखिलेश ने कांग्रेस को गठबंधन से बाहर ही रखने पर मुहर लगा दी है। हालांकि, अमेठी व रायबरेली सीट पर कांग्रेस के खिलाफ गठबंधन का प्रत्याशी नहीं उतारा जाएगा। गठबंधन में रालोद के साथ ही क्षेत्र विशेष में प्रभाव रहने वाले तीन से चार छोटे दलों को भी शामिल किया जा सकता है। रालोद को जहां दो से तीन सीटें देने की बात है वहीं अन्य छोटे दलों को एक से दो सीटें दी जाएंगी। छोटे दलों में पीस पार्टी, निषाद पार्टी, अपना दल और सुभासपा (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी) हो सकती है।

सूत्र बताते हैं कि सुभासपा का भाजपा को लेकर जो रुख है उससे सपा-बसपा नेताओं का मानना है कि आगे चल कर वह गठबंधन में शामिल हो सकती है। ऐसा होने पर उसे दो सीटें दी जा सकती हैं। किसी कारण से ऐसा न होने पर एक से दो सीटें कृष्णा पटेल की अपना दल को जा सकती हैं।

गठबंधन में एक सीट निषाद पार्टी व एक सीट पीस पार्टी को भी दी जा सकती है। ऐसे में बसपा जहां 36 से 37 सीटों पर वहीं सपा 34 से 36 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जरूरत पड़ने पर सपा अपने कोटे की सीटों में से किसी अन्य दल के साथ भी राजनीतिक सौदेबाजी कर सकती है।

अखिलेश और मायावती की इस मुलाकात के बाद राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि मायावती के जन्मदिन पर या फिर जनवरी में ही गठबंधन के संबंध में सार्वजनिक ऐलान कर दिया जाएगा। इस बीच मायावती नई दिल्ली से लखनऊ आ जाएंगी। लखनऊ में दोनों नेताओं की मौजूदगी पर गठबंधन पर और चर्चा आगे बढ़ेगी।