आयुष्मान भारत में अस्पतालों में भर्ती होने की संख्या दोगुनी

योजना के तहत दिसंबर में भर्ती होने वालों की संख्या औसत तौर पर 10 हजार रोजाना है, जबकि अक्टूबर में यह संख्या 2000-5000 थी। आंकड़ों की मानें तो अक्टूबर से अब तक भर्ती होने वालों की संख्या में 47 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

हाइलाइट्स

  • पिछले तीन महीनों में दोगुनी हुई आयुष्मान भारत के तहत भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या
  • सबसे ज्यादा संख्या प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने वालों की बढ़ी है
  • स्कीम के डेप्युटी चीफ का कहना है कि जागरूकता के कारण स्कीम को यह सफलता मिली है
  • दिसंबर में औसत तौर पर 10 हजार लोग प्रतिदिन इलाज के लिए भर्ती हो रहे हैं
 नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी योजना आयुष्मान भारत के तहत अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या पिछले 3 महीने में दोगुनी हो गई है। नैशनल हेल्थ एजेंसी के ताजा आंकड़े बताते हैं कि पूर्व अधिकृत 897 करोड़ रुपये में 77 प्रतिशत ऐंजियोप्लास्टी, जॉइंट और वाल्व रिप्लेसमेंट के लिए भर्ती होने वाले मरीजों पर खर्च हुए हैं।
योजना में दिसंबर में भर्ती होने वालों की संख्या औसत तौर पर 10 हजार रोजाना है, जबकि अक्टूबर में यह संख्या 2000-5000 थी। आंकड़ों की मानें तो अक्टूबर से अब तक भर्ती होने वालों की संख्या में 47 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। 23 सिंतबर को लॉन्च हुई इस स्कीम के तहत अब तक 6.73 लाख लोग अपना इलाज करा चुके हैं।
यूपी, बिहार और झारखंड में, जहां स्वास्थ्य सेवाएं बहुत अच्छी नहीं हैं, में भर्ती होने वालों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। इस योजना के तहत यूपी में अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या पिछले एक महीने में 70 प्रतिशत बढ़ी है, वहीं झारखंड में 67 प्रतिशत और बिहार में 50 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

यह आंकड़ा इसलिए मायने रखता है क्योंकि प्राइवेट अस्पतालों में महंगा इलाज होने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं अब तक गरीब तबके से दूर थी। अधिकारियों ने बताया कि डेंटल सर्जरी और सामान्य इलाज लेने वाली की संख्या लगातार बढ़ रही है।
आयुष्मान भारत के डेप्युटी चीफ एग्जिक्यूटिव दिनेश अरोरा ने बताया, ‘इस स्कीम के बारे में जागरूकता फैलाने की वजह से संख्या में यह परिवर्तन आया है। आशा और पोस्टल डिपार्टमेंट के जरिए प्रधानमंत्री की तरफ से लिखे गए पत्र 7.5 करोड़ इसका फायदा मिलने वालों को दिए जा चुके हैं। जैसे-जैसे लोग इसे लेकर जागरूक हो रहे हैं, वैसे-वैसे यह स्कीम और मजबूत हो रही है।’

अरोड़ा ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने वालों की संख्या सबसे ज्सादा 65 प्रतिशत है। लोगों को गंभीर समस्याओं में भी अच्छा इलाज मिल रहा है।

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