आम जन को बड़ी राहत, अटल आयुष्मान योजना/ सरकारी अस्पतालों में 54 टेस्ट फ्री

 देहरादून : अटल आयुष्मान योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में 54 मेडिकल टेस्ट निशुल्क होंगे। इससे पहले केवल 28 टेस्ट ही निशुल्क किए जाते थे। मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को निशुल्क चिकित्सा जांच कार्यक्रम के विस्तार को स्वीकृति दे दी।

सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावतमुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत
लोकसभा चुनाव से पहले 11651 आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय एक हजार रुपये बढ़ाने की लंबित मांग को मंजूरी दे दी है। औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एमएसएमई नीति 2018 में अब नए उद्योग लगाने का लाभ मार्च 2023 तक मिलेगा। इसके साथ सरकार ने संविदा आयुष चिकित्सकों के मानदेय में वृद्धि कर दी है। वहीं चिकित्सा विभाग में संविदा चिकित्सकों की नियुक्ति पर लगी रोक हटा दी है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में आए 20 प्रस्तावों में से 18 को मंजूरी मिल गई। शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि अटल आयुष्मान योजना के गोल्डन कार्ड धारकों की अब जिला अस्पतालों में 54 तरह की जांचें मुफ्त होंगी। इसमें पैथोलॉजी से लेकर दिल की बीमारी संबंधित जांचें शामिल हैं। शुक्रवार शाम को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में उक्त निर्णय लिए गए।  कैबिनेट बैठक के बाद शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मरीजों की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर 28 और जिला अस्पतालों में 30 तरह की जांचें ही मुफ्त होती थीं। लेकिन अब इन जांचों की संख्या बढ़ाकर 54 कर दी गई है। उक्त सुविधा अटल आयुष्मान योजना के गोल्डन कार्ड धारकों को ही मिलेगी। इसमें टीएलसी, डीएलसी, हीमोग्लोबिन, ईसीजी जैसी जांचें शामिल हैं। इससे सरकारी अस्पतालों में ही मरीज की ज्यादातर जरूरी जांचें अब मुफ्त हो सकेंगी।

एनडीएलडी लाइसेंस फीस 200 रुपये से 30 हजार रुपये की

आशा कार्यकर्ताओं को अब चार हजार रुपये मासिक मानदेय मिलेगा। इसके अलावा पांच हजार सालाना प्रोत्साहन राशि जारी रहेगी। आयुष विभाग में संविदा पर तैनात चिकित्सकों का सुगम, दुर्गम और अतिदुर्गम में 20 प्रतिशत मानदेय बढ़ा दिया है।
वहीं सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक पदों पर तैनात चिकित्सकों के लिए सप्ताह में दो बार ओपीडी में सेवाएं देने की अनिवार्य व्यवस्था को वैकल्पिक बना दिया है। संविदा पर कर्मचारियों की तैनाती पर सरकार की रोक से स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग बाहर कर दिए गए हैं। चिकित्सकों और मेडिकल कॉलेज संकायों में संविदा पर डाक्टर तैनाती किए जा सकते हैं।
मंत्रिमंडल ने दशकों पुरानी उत्तराखंड उत्तर प्रदेश नार्कोटिक्स ड्रग्स नियमावली में बदलाव कर दिया है। इसके तहत एनडीएलडी लाइसेंस फीस 200 रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दी है। एनडीएलडी (स्वापक औषधि लाइसेंस व्यापारी) का लाइसेंस अफीम पोस्त आदि नशीले पदार्थों की दवाओं के इस्तेमाल के लिए दिया जाता है।आयुष डॉक्टरों का वेतन बढ़ा: सरकार ने आयुष विभाग के अधीन कार्यरत चिकित्सकों का वेतन भी बढ़ा दिया है। पहले सुगम में तैनाती पर 36 हजार मासिक वेतन मिलता था, जिसे बढ़ाकर अब 45 हजार कर दिया गया है। दुर्गम में तैनाती का वेतन 40 से बढ़ाकर 50 हजार और अति दुर्गम में तैनाती का वेतन 44 हजार से बढ़ाकर 55 हजार प्रतिमाह कर दिया गया है। साथ ही एलोपैथिक चिकित्साधिकारियों को हफ्ते में दो दिन ओपीडी में बैठने की बाध्यता भी समाप्त कर दी गई है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के लिए चिकित्सा विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग को संविदा पर डॉक्टरों को नियुक्त करने के लिए एक साल की छूट दे दी गई है। साथ ही आशा फेसीलेटर को प्रति भ्रमण पर मिलने वाला भत्ता 250 से बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया है।उत्तराखंड एफडीए का गठन 
कौशिक ने बताया कि उत्तराखंड में दवाई, कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट के निर्माताओं और विक्रेताओं के साथ ही ब्लड बैंक पर नियंत्रण के लिए उत्तराखंड खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन का गठन किया गया है। इसमें पदों की संख्या भी 25 तक तय की गई है।

अन्य प्रमुख फैसले

– उत्तराखंड प्रांतीय सशस्त्र पुलिस नियमावली बनाने को मंजूरी।
– 108 सेवा संचालित कर रही कंपनी का कार्यकाल 31 मार्च तक बढ़ाया।
– उत्तराखंड खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन का गठन।
– जिम कार्बेट राष्ट्रीय पार्क की फाउंडेशन को 5.5 करोड़ की आय खर्च करने की अनुमति।
– नायब तहसीलदारों के 101 रिक्त पदों पर अस्थाई तैनाती का अधिकार जिलाधिकारियों को दिया।
– गेहूं खरीद का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1840 रुपये प्रति कुंतल और 20 रुपये बोनस को स्वीकृति।

स्कूल एडॉप्शन प्रोग्राम: अब कॉरपोरेट संभालेंगे और संवारेंगे उत्तराखंड के सरकारी स्कूल

प्रदेश के खस्ताहाल सरकारी विद्यालयों में ढांचागत सुविधाएं बढ़ाने के लिए सरकार ने स्कूल एडॉप्शन प्रोग्राम शुरू किया है। राज्य मंत्रिमंडल ने योजना पर अपनी मुहर लगा दी। इसके तहत स्वयं सेवी संस्थाएं व कॉरपोरेट हाउस स्कूलों को गोद लेकर वहां ढांचागत सुविधाएं व शिक्षा की गुणवत्ता सुधार सकेंगे।
इसके तहत खस्ताहाल व जर्जर हालत वाले विद्यालयों पर विशेष फोकस रहेगा। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में प्रत्येक जिले में एक समिति का गठन किया जाएगा, जो स्कूलों का चयन करेगी। इसके बाद उन्हें गोद लेने की इच्छुक स्वयं सेवी संस्थाओं और कॉरपोरेट हाउस को उनकी व्यवस्था दी जाएगी। योजना के तहत वह स्कूलों में भवन निर्माण, मरम्मत करने के साथ ही फर्नीचर, पाठ्य सामग्री, खेल कूद का सामान और बच्चों के लिए अन्य सामग्री प्रदान कर सकते हैं। इसके साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए पुस्तकालय, पत्र-पत्रिकाओं और अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था भी कर सकते हैं। पहले चरण में केवल उन्हीं स्कूलों को गोद दिया जाएगा, जिनकी हालत ज्यादा खराब है।
सीएसआर से मिले फर्नीचर
प्रदेश के सैकड़ों विद्यालयों को पिछले कुछ सालों के दौरान सीएसआर से फर्नीचर समेत अन्य सामान मिला है। अकेले ओएनजीसी सैकड़ों विद्यालयों को फर्नीचर दे चुुका है। इसके अलावा कई अन्य कॉरपोरेट हाउस व स्वयं सेवी संस्थाएं भी इस काम में आगे आई हैं। उन्होंने स्कूलों में फर्नीचर के साथ ही वाटर प्यूरीफायर, पंखे, पाठ्य सामग्री समेत अन्य सामान उपलब्ध कराए हैं।
डीएम ऊधमसिंह नगर ने दिया प्रस्ताव
स्कूल एडॉप्शन प्रोग्राम का प्रस्ताव जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर डा. नीरज खैरवाल ने दिया था। उन्होंने अपने जिले के कुछ विद्यालयों में निजी संस्थाओं के साथ मिलकर सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव दिया। राज्य मंत्रिमंडल को यह प्रस्ताव अच्छा लगा, जिसके बाद उसे राज्य स्तर पर लागू करने पर सहमति बनी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *