आपके फाइनैंशल प्रोफाइल को सूट करता है नैशनल पेंशन स्कीम(NPS)  ?

अगर आप नैशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) में सिर्फ टैक्स बचाने के लिए निवेश करने की सोच रहे हैं, तो इसके फायदे-नुकसान पर गौर कर लीजिए। इसमें मिलने वाला रिटर्न मार्केट से जुड़ा होता है। निवेश के इस इंस्ट्रूमेंट्स में आपका पैसा काफी लंबे वक्त तक फंसा रहता है।

सुनील धवन
नैशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) की लोकप्रियता टैक्स सेविंग प्रॉडक्ट के रूप में तेजी से बढ़ रही है। इसमें मिलने वाला रिटर्न मार्केट से जुड़ा होता है। अगर आप सिर्फ टैक्स बचाने के लिए एनपीएस में पैसा लगाने की सोच रहे हैं तो उससे पहले इसके नफा-नुकसान पर गौर कर लीजिए। इसका सबसे बड़ा फायदा निवेश की कम लागत है। अभी इस पर फंड मैनेजमेंट चार्ज 0.01 पर्सेंट है। इसका मतलब यह है कि 10 लाख रुपये के कॉर्पस पर आपको सिर्फ 100 रुपये की फी देनी पड़ेगी। इससे लंबे समय में रिटर्न बढ़ाने में मदद मिलती है। NPS में निवेश से जुड़ी जरूरी बातों की जानकारी हम यहां दे रहे हैं।
जमा की गई पूरी रकम की निकासी पर टैक्स छूट नहीं मिलती। 60 साल की उम्र के बाद आप इससे 60 पर्सेंट जमा रकम ही निकाल सकते हैं। बची हुई 40 पर्सेंट से आपको एन्युइटी का भुगतान किया जाएगा। आप जो 60 पर्सेंट रकम निकाल सकते हैं, उसमें से 40 पर्सेंट पर टैक्स छूट दी गई है। बाकी की 20 पर्सेंट रकम पर आपको टैक्स चुकाना पड़ेगा। इस पर टैक्स बचाने के लिए आप 70 साल तक की उम्र तक रकम न निकालें या आप इस 20 पर्सेंट से भी एन्युइटी खरीदें।

लंबे समय तक फंसा रहता है पैसा
एनपीएस को रिटायरमेंट की खातिर पैसा बचाने के लिए लॉन्च किया गया है। आमतौर पर दो स्टेज होते हैं, जब कोई रिटायरमेंट के लिए बचत करता है। पहला पैसा जमा कराने का दौर होता है, जिसमें रिटायरमेंट की उम्र तक निवेश जारी रखा जाता है। दूसरे फेज में आपको एन्युइटी या पेंशन मिलनी शुरू होती है। 18 से 60 साल का कोई भी शख्स एनपीएस को ज्वाइन कर सकता है। 60 साल की उम्र होने पर इससे दो तरह से पैसे निकाले जा सकते हैं। पहले तो आप 60 पर्सेंट तक रकम एकमुश्त निकाल सकते हैं। बाकी बची हुई रकम से आपको ताउम्र एन्युइटी का भुगतान किया जाता है। 

100% इक्विटी ऑप्शन नहीं
रिटायरमेंट के लिए लंबे समय तक बचत करनी पड़ती है। कई स्टडी से पता चला है कि डेट, गोल्ड और रियल एस्टेट की तुलना में इक्विटी मार्केट से इन्फ्लेशन एडजस्टेड सबसे अधिक रिटर्न आज तक मिला है। लॉन्ग टर्म एनपीएस में आपको ई फंड में 75 पर्सेंट तक रकम इक्विटी में लगाने का विकल्प मिलता है। वैसे इसमें भी आमतौर पर 50 पर्सेंट हिस्सा डेट प्रॉडक्ट्स में लगाया जाता है। यंग इनवेस्टर्स को एग्रेसिव लाइफसाइकल फंड (एलसी-75) के जरिये 75 पर्सेंट तक कॉर्पस इक्विटी में लगाने की आजादी मिलती है।

ऐक्टिव फंड मैनेजमेंट नहीं
एनपीएस को अभी पैसिव फंड की तरह मैनेज किया जाता है। कई एनपीएस फंड अलग-अलग बेंचमार्क से जुड़े हैं। इसलिए अगर आप एनपीएस में निवेश नहीं करना चाहते तो एक्टिवली मैनेज्ड इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड के जरिये भी रिटायरमेंट के लिए बचत कर सकते हैं। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) आगे चलकर एनपीएस में भी एक्टिव फंड मैनेजमेंट की इजाजत देने पर विचार कर रहा है। 

एन्युइटी की शर्त से डायवर्सिफिकेशन में बाधा
एनपीएस में 60 साल की उम्र होने पर 40 पर्सेंट फंड तुरंत एन्युइटी स्कीम में लगानी पड़ती है। इसे किसी इंश्योरेंस कंपनी से खरीदना पड़ता है। यह पैसा जिंदगीभर के लिए ब्लॉक हो जाता है। मान लीजिए कि आपने एनपीएस में कुल 50 लाख रुपये जमा किए तो 60 साल की उम्र होने पर 20 लाख रुपये (जो कुल रकम का 40 पर्सेंट है) से आपको तुरंत एन्युइटी स्कीम खरीदनी पड़ेगी, जिससे आपको जिंदगी भर पेंशन मिलेगी (अगर आप 60 साल से पहले स्कीम से निकलते हैं तो 80 पर्सेंट फंड आपको एन्युइटी में लगाना होगा)।
इसका मतलब यह है कि 20 लाख रुपये इनवेस्टर को कभी वापस नहीं मिलेंगे। इस रकम से फैमिली मेंबर्स की पेंशन के विकल्प हैं, लेकिन उन्हें कम पेंशन मिलेगी। एनपीएस में आपको पूरी रकम अपने मन से निवेश करने की आजादी नहीं मिलती। वहीं, रिटायरमेंट के बाद आपके पास सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम, पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम, म्यूचुअल फंड, बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट आदि में निवेश की आजादी रहती है। आप इन प्रॉडक्ट्स में अपने कैश की जरूरत को देखते हुए निवेश कर सकते हैं। एनपीएस खाता खोलने पर सीमित बचत हो तो यह आजादी खत्म हो जाती है। म्यूचुअल फंड के सिस्टेमैटिक विदड्रॉल प्लान में रिटायरमेंट के वक्त मिली रकम रखी जा सकती है, जिससे मिलने वाले पैसों से आप रेगुलर इनकम की जरूरत पूरी कर सकते हैं। एसडब्ल्यूपी का इस्तेमाल लिक्विड, बॉन्ड और इक्विटी फंड्स में किया जा सकता है। इससे टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न एन्युइटी की तुलना में अधिक रहता है।

एन्युइटी पर भी लगता है टैक्स 
एन्युइटी के जरिये आपको जो पैसा मिलता है, उस पर टैक्स देना होता है। इसलिए पेंशन के तौर पर आपको जो पैसा मिलेगा, वह कुल टैक्स लायबिलिटी में जुड़ेगा। दूसरी तरफ, म्यूचुअल फंड से डिविडेंड के रूप में जो पैसा मिलता है, उस पर टैक्स नहीं देना होता। Image result for नेशनल पेंशन स्कीम

प्रिंसिपल के एक हिस्से पर टैक्स
एन्युइटी का जो पैसा आपको पेंशन के रूप में मिलता है, उसमें आपका मूलधन भी शामिल होता है। एन्युइटी के टैक्सेबल होने का मतलब यह है कि आपको जमा की गई अपने हिस्से की रकम पर भी टैक्स चुकाना पड़ेगा। इसमें सिर्फ ब्याज पर टैक्स नहीं वसूला जाता, जैसा कि दूसरे प्रॉडक्ट्स के साथ होता है। अगर महंगाई दर के असर को हटा दें तो इस स्थिति में आपने 60 साल की उम्र तक जो पैसा जमा किया है, उतना ही आपको एन्युइटी के रूप में वापस मिलता है।

एन्युइटी के लिए इस्तेमाल होने वाली रकम वापस नहीं मिलती
एन्युइटी खरीदने वाली रकम निवेशक को नहीं मिलती। एनपीएस खाते में जब यह पैसा होता है, तभी उससे आपको एन्युइटी खरीदनी पड़ती है। इसमें पेंशन के लिए 10 तरह के विकल्प हैं- मसलन, खुद के लिए ताउम्र पेंशन, मौत के बाद पत्नी को पेंशन, उनके भी ना रहने पर फंड उत्तराधिकारी को लौटाए जाने आदि।

एन्युइटी पर रिटर्न काफी कम

अभी कई पेंशन ऑप्शंस के तहत एन्युइटी पर 6 पर्सेंट सालाना का रिटर्न मिलता है। इतने कम रिटर्न का मतलब यह है कि आप लॉन्ग टर्म में महंगाई दर से अधिक मुनाफा नहीं कमा पाएंगे। इससे एन्युइटी में जमा पैसों की वैल्यू घटेगी। जब ब्याज दरों में कमी हो रही है तो तब तक कम रिटर्न से दिक्कत नहीं होती, बशर्ते इंश्योरेंस कंपनियां भी ब्याज दर न घटाएं।

आखिरी बात
यह बहुत लंबी अवधि का प्रॉडक्ट है। इसलिए एनपीएस एकाउंट खोलने से पहले इसके नफा-नुकसान पर गौर करें। पहले इसका अंदाजा लगाएं कि रिटायरमेंट के बाद हर महीने आपको कितनी रकम की जरूरत पड़ेगी। इसमें महंगाई और औसत उम्र का ख्याल रखें। आप रिटायरमेंट के लिए की जाने वाली बचत को म्यूचुअल फंड और एनपीएस सहित अलग-अलग प्रॉडक्ट्स में लगाएं। इसके लिए सिर्फ एनपीएस में बचत करना ठीक नहीं होगा। एन्युइटी से जहां आपको रिटायरमेंट के बाद बुनियादी खर्च पूरे करने के लिए पैसे मिल जाएंगे, वहीं दूसरे जरियों से जमा की गई रकम का इस्तेमाल अन्य जरूरतों के लिए किया जा सकता है।

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