आध्यात्मिक गुरु भय्यू महाराज ने गोली मार की आत्महत्या

बहुत ज्यादा तनाव में थे भय्यू जी महाराज, सुसाइड नोट में लिखा- थक गया हूं,मोदी से लेकर शिवराज तक के थे करीबी

भय्यू जी के खुद को गोली मारे जाने के बाद उन्हें इंदौर के बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

आध्यात्मिक गुरु भय्यू महाराज ने खुद को गोली मारकर की आत्महत्या

 इंदौर:मध्य प्रदेश से चौंकाने वाली खबर सामने आई है. यहां आध्यात्मिक गुरु भय्यू जी महाराज ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली है. भय्यू जी द्वारा खुद को गोली मारे जाने के बाद उन्हें इंदौर के बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

जानिए कौन थे भय्यू जी महाराज, मोदी से लेकर शिवराज तक के थे करीबीआध्यात्मिक गुरु भय्यू जी महाराज ने इंदौर में खुद को गोली मार ली. उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल में एडमिट किया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई. उन्हें कुछ माह पहले ही मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार ने राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया था.1968 को जन्मे भय्यू महाराज का असली नाम उदयसिंह देखमुख है. वे शुजालपुर के जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते हैं. हाल ही में वे ग्वालियर की डॉ. आयुषी शर्मा के साथ सात फेरे लेने के बाद सुर्ख़ियों में आए थे. लेकिन मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में इन्हें लोग भय्यूजी महाराज के नाम से जानते हैं.

  • जानिए कौन थे भय्यू जी महाराज, मोदी से लेकर शिवराज तक के थे करीबी

     भय्यूजी महाराज एक ऐसे आध्यात्मिक गुरु थे जो गृहस्थ जीवन जीते हैं. उनकी एक बेटी कुहू है. हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया था, जिसे इन्होंने लेने से इनकार कर दिया था.कभी मॉडलिंग करने वाले इस संत के देशभर में लाखों मानने वाले हैं. उन्हें हाईप्रोफाइल संत भी कहा जाता है. इसके पीछे वजह यह कि उनके देश के दिग्गज राजनेताओं से संपर्क हैं.जानिए कौन थे भय्यू जी महाराज, मोदी से लेकर शिवराज तक के थे करीबीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, शिवसेना के उद्धव ठाकरे, मनसे के राज ठाकरे, लता मंगेशकर, आशा भोंसले, अनुराधा पौडवाल समेत कई हस्तियां उनके जुड़ी हुई हैं !जी महाराज तब चर्चा में आए थे जब 2011 में अन्ना हजारे के अनशन को खत्म करवाने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने उन्हें अपना दूत बनाकर भेजा था. इसी के बाद  ही अन्ना ने उनके हाथ से जूस पीकर अनशन तोड़ा था.जानिए कौन थे भय्यू जी महाराज, मोदी से लेकर शिवराज तक के थे करीबीभय्यू पीएम बनने के पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी सद्भावना उपवास पर बैठे थे. उपवास को तुड़वाने के लिए उन्होंने भय्यू महाराज को आमंत्रित किया था ! भय्यु महाराज का सदगुरु दत्त धार्मिक ट्रस्ट नाम का ट्रस्ट भी चलता है. अपने ट्रस्ट के जरिए वह स्कॉलरशिप बांटते हैं. कैदियों के बच्चों को पढ़ाते हैं. किसानों को खाद-बीज मुफ्त बांटते हैं.वहीं, मर्सडीज जैसी महंगी गाड़ियों में चलने वाले भय्यू महाराज रॉलेक्स ब्रांड की घड़ी पहनते हैं. आलीशान भवन में रहते हैं.

    जानिए कौन थे भय्यू जी महाराज, मोदी से लेकर शिवराज तक के थे करीबीवहीं

    1. भैय्यूजी महाराज मॉडल रह चुके हैं. मॉडलिंग का करियर छोड़कर उन्होंने आध्यात्म का रास्ता चुना है. वे सियाराम शूटिंग के मॉडल रह चुके हैं.

    2. वह दूसरे आध्यात्मिक गुरु से बिल्कुल अलग थे. वह कभी खेतों की जुताई करते देखे जाते थे तो कभी क्रिकेट खेलते हुए. घुड़सवारी और तलवारबाजी में भी वे पारंगत थे.

    3. 29 अप्रैल 1968 में मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर में जन्मे भय्यूजी के चहेतों के बीच धारणा है कि उन्हें भगवान दत्तात्रेय का आशीर्वाद हासिल है. महाराष्ट्र में उन्हें राष्ट्र संत का दर्जा मिला हुआ है. वह सूर्य की उपासना करते हैं. घंटों जल समाधि करने का उनका अनुभव है.

    जानिए कौन थे भय्यू जी महाराज, मोदी से लेकर शिवराज तक के थे करीबी

    4. भैय्यूजी महाराज के ससुर महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे हैं. केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख से उनके करीबी संबंध हैं. बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी से लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत भी उनके भक्तों की सूची में हैं. महाराष्ट्र की राजनीति में उन्हें संकटमोचक के तौर पर देखा जाता है.

    5. भय्यूजी महाराज ग्लोबल वॉर्मिंग से भी चिंतित हैं, इसीलिए गुरु दक्षिणा के नाम पर एक पेड़ लगवाते हैं. अब तक 18 लाख पेड़ उन्होंने लगवाए हैं. आदिवासी जिलों देवास और धार में उन्होंने करीब एक हजार तालाब खुदवाए हैं. वह नारियल, शॉल, फूलमाला भी नहीं स्वीकारते.

    बहुत ज्यादा तनाव में थे भय्यू जी महाराज, सुसाइड नोट में लिखा- थक गया हूं

    पुलिस मामले की छानबीन कर रही है पुलिस मामले की छानबीन कर रही है

    इंदौर में आत्महत्या करने वाले आध्यात्मिक संत भय्यूजी महाराज का एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है. जिसमें उन्होंने आत्महत्या करने की वजह तनाव बताया. सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा- मैं जा रहा हूं. साथ ही उन्होंने सुसाइड नोट में परिवार की जिम्मेदारी संभालने की अपील की है.

    इंदौर में मंगलवार को भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मार ली थी. इसके बाद उन्हें फौरन अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. उन्होंने आत्महत्या के लिए अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर का प्रयोग किया था. सूत्रों के मुताबिक उनके पास से बरामद सुसाइड नोट के मुताबिक उनकी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है.

    उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा कि उनके परिवार में विवाद था. जिसकी वजह से वे अवसादग्रस्त हो गए थे. हालांकि पुलिस अभी भी मामले की छानबीन कर रही है.

    उनका सदगुरु दत्त धामिर्क ट्रस्ट नाम का ट्रस्ट भी चलता है. अपने ट्रस्ट के जरिए वह स्कॉलरशिप बांटते थे. कैदियों के बच्चों को पढ़ाते थे. और किसानों को खाद-बीज मुफ्त बांटते थे.

    कांग्रेस नेता माणिक अग्रवाल ने बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि वह बीजेपी और कांग्रेस दोनों के संपर्क में थे. बीजेपी उनसे लगातार उनके लिए काम करने को कह रही थी, जिसकी वजह से वो मानसिक दबाव में थे. उन्होंने कहा कि इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी उनकी मौत पर ट्वीट किया. उन्होंने कहा कि भय्यू जी महाराज की अचानक हुई मौत की खबर जान काफी दुख हुआ. मेरे उनके साथ व्यक्तिगत संबध थे, खबर सुनते ही मुझे झटका सा लगा.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, शिवसेना के उद्धव ठाकरे, मनसे के राज ठाकरे, लता मंगेशकर, आशा भोंसले, अनुराधा पौडवाल समेत कई हस्तियां उनके संपर्क में रहीं थी.

    खुद को गोली मारने से पहले भय्यूजी महाराज ने एक के बाद एक 6 ट्वीट किए थे. अपने आखिरी ट्वीट में उन्होंने लिखा, ”मासिक शिवरात्रि को ‘महाशिवरात्रि’ कहते हैं. दोनों पंचांगों में यह चन्द्र मास की नामाकरण प्रथा है, जो इसे अलग-अलग करती है. मैं सभी भक्तगणों को इस पवन दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं.”

    सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव थे भय्यूजी महाराज
    कई नेताओं के गुरु कहे जाने वाले भय्यूजी महाराज सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर काफी एक्टिव थे.

    ‘मासिक शिवरात्रि’ को ‘महाशिवरात्रि’ कहते हैं। दोनों पंचांगों में यह चन्द्र मास की नामाकरण प्रथा है, जो इसे अलग-अलग करती है। मै सभी भक्तगणों को इस पवन दिवस की बधाई एवं शुभकामनाये देता हु.

    5h5 hours ago

    Replying to

    Tweet करने के बाद आधे घंटे में ऐसा क्या हुआ कि को कि इन्होंने खुदखुशी कर ली। कहीं इसके पीछे बडी साजिश तो नही? RIP💐💐💐

  • He had been attacked in the past. Can’t believe he shot himself!!! Mystery….Mystery….Mystery

  • Replying to

    It may be possible that Congress may involved in this murder

  • ‘ पद्म श्री’,’ज्ञानपीठ पुरस्कार’,’पद्म भूषण’ से सम्मानित तेलुगु भाषा के प्रख्यात कवि थे। वे पांच दशकों से भी अधिक समय तक काव्य रचना में लगे रहे। आज उनकी पुण्यतिथि पर इस महान लेखक को विनम्र अभिवादन

    मंगलवार सुबह से ही वह एक के बाद एक ट्वीट कर रहे थे. पहले उन्होंने ट्विटर पर लोगों शिवरात्रि की शुभकामनाएं दी और फिर तेलुगु कवि नायारण रेड्डी को श्रद्धांजलि अर्पित की. 

    Padma Vibhushan was a Sanskrit-Tantra scholar, Indologist and philosopher. First appointed in 1914 a librarian, he was the Principal of Gov.Sanskrit College, Varanasi. today, I tribute on his death anniversary.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *