अरविंद कुमार इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) प्रमुख, सामंत गोयल बने भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के हेड

भारत सरकार ने तेजतर्रार आईपीएस सामंत गोयल को भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ का हेड नियुक्त किया है. जानते हैं क्या है रॉ और ये कैसे काम करती है.

  • अरविंद कुमार और सामंत दोनों 1984 बैच के आईपीएस अफसर
  • कुमार राजीव जैन और सामंत अनिल धस्माना की जगह लेंगे

नई दिल्ली:  केंद्र सरकार ने आईबी और रॉ दोनों खुफिया एजेंसियों के नए प्रमुख नियुक्त किए हैं. अरविंद कुमार को इंटेलिजेंस ब्यूरो का प्रमुख बनाया गया तो सामंत गोयल रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के अगले प्रमुख होंगे. दोनों ही 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. अरविंद कुमार राजीव जैन और सामंत गोयल अनिल धसमाना की जगह लेंगे. अरविंद कुमार अभी तक IB की कश्मीर डेस्क पर नंबर टू की पोजिशन पर थे. पीएमओ में एक सीनियर अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया, ‘गृह मंत्री ने फाइल पर दस्तख्त कर दिए हैं और इसे पीएमओ भेज दिया दिया है. दोनों ही अधिकारी 30 जून से पद संभालेंगे.

जब साल 1990 में पंजाब में चरमपंथ अपने चरम पर था तो उसे नियंत्रित करने में गोयल ने मदद की थी. वह दुबई और लंदन में तैनात रहे हैं. गृह मंत्रालय में एक सीनियर अधिकारी ने एनडीटीवी से कहा, ‘उन्हें दुबई में और लंदन में इंचार्ज कॉन्सुलर के रूप में तैनात किया गया था.’

मोदी सरकार ने बुधवार अरविंद कुमार को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) का प्रमुख नियुक्त किया। वहीं, सामंत गोयल खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के डॉयरेक्टर बनाए गए। अरविंद कुमार और सामंत दोनों 1984 बैच के आईपीएस अफसर हैं। गोयल पंजाब कैडर और कुमार असम-मेघालय कैडर से हैं।

अरविंद कुमार से पहले राजीव जैन आईबी के प्रमुख थे। वहीं, अनिल धस्माना रॉ के डॉयरेक्टर पद पर तैनात थे। जैन और धस्माना दिसंबर 2016 में नियुक्त किए गए थे। लोकसभा चुनाव की वजह से दोनों को 6 महीने का एक्सटेंशन मिला था।

गोयल पाक एक्सपर्ट, अरविंद कश्मीर विशेषज्ञ

गोयल फरवरी में पाकिस्तान के बालाकोट एयर स्ट्राइक और 2016 सर्जिकल स्ट्राइक की रणनीति बनाने वाले अफसरों में शामिल हैं। गोयल को पाकिस्तान एक्सपर्ट माना जाता है। 1990 के दशक में उग्रवाद से जूझ रहे पंजाब के हालात को भी उन्होंने संभालने में भूमिका निभाई थी। वहीं, अरविंद कुमार को जम्मू-कश्मीर एक्सपर्ट माना जाता है। भारत सरकार ने आईपीएस सामंत गोयल को भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ का प्रमुख बनाया है. क्या है रॉ..ये कैसे काम करती है. ये भारत की इस सबसे महत्‍वपूर्ण खुफिया एजेंसी मानी जाती है. आइए जानते हैं कि इस संस्था के बारे में
भारत सरकार ने आईपीएस सामंत गोयल को भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ का प्रमुख बनाया है. क्या है रॉ..ये कैसे काम करती है. ये भारत की इस सबसे महत्‍वपूर्ण खुफिया एजेंसी मानी जाती है. आइए जानते हैं कि इस संस्था के बारे में रॉ का पूरा नाम रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) है. यह भारत के बाहरी खुफिया जासूसी मामलों को देखती हे. कई आतंकी हमलों को इसने नाकाम किया है.

रॉ का पूरा नाम रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) है. यह भारत के बाहरी खुफिया जासूसी मामलों को देखती हे. कई आतंकी हमलों को इसने नाकाम किया है.  रॉ का सिद्धांत ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ है, जिसका मतलब है कि जो शख्स धर्म की रक्षा करता है वह हमेशा सुरक्षित रहता है.

रॉ का सिद्धांत ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ है, जिसका मतलब है कि जो शख्स धर्म की रक्षा करता है वह हमेशा सुरक्षित रहता है.

रॉ का गठन 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद किया गया. इंदिरा गांधी सरकार ने भारत में एक खुफिया एजेंसी की जरूरत को महसूस किया. रॉ का गठन 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद किया गया. इंदिरा गांधी सरकार ने भारत में एक खुफिया एजेंसी की जरूरत को महसूस किया.

रॉ का कानूनी दर्जा अभी भी अस्पष्ट ही है. रॉ संसद के प्रति भी जवाबदेह नहीं है और यह सूचना के अधिकार कानून से भी बाहर है.                                  रॉ का कानूनी दर्जा अभी भी अस्पष्ट ही है. रॉ संसद के प्रति भी जवाबदेह नहीं है और यह सूचना के अधिकार कानून से भी बाहर है.

रॉ का गठन अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की तर्ज पर ही किया गया है. इसके ऑफिशियल्स को अमेरिका, यूके और इजरायल में ट्रेनिंग दी जाती है.  रॉ का गठन अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की तर्ज पर ही किया गया है. इसके ऑफिशियल्स को अमेरिका, यूके और इजरायल में ट्रेनिंग दी जाती है.

रॉ के ट्रेनीज को सेल्फ डिफेंस की कठिन ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है. खासतौर से जासूसी डिवाइस के इस्तेमाल के मामले में.  रॉ के ट्रेनीज को सेल्फ डिफेंस की कठिन ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है. खासतौर से जासूसी डिवाइस के इस्तेमाल के मामले में.

रॉ अधिकारी या एजेंट को फाइनेंशियल, इकोनॉमिक एनालिसिस, स्पेस टेक्नॉलाजी, इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी, एनर्जी सिक्योरिटी और साइंटिफिक विषयों की सारी जानकारी को दी जाती हैं. एक तरह से वह हर चीज का एकसपर्ट होता है.  रॉ अधिकारी या एजेंट को फाइनेंशियल, इकोनॉमिक एनालिसिस, स्पेस टेक्नॉलाजी, इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी, एनर्जी सिक्योरिटी और साइंटिफिक विषयों की सारी जानकारी को दी जाती हैं. एक तरह से वह हर चीज का एकसपर्ट होता है.

रिक्रूट को किसी एक फॉरेन लैंग्वेज में स्पेशलाइज किया जाता है और उसे जियो स्ट्रैटिजिक एनालिसिस से भी परिचित कराया जाता है. सीआईए, केजीबी, आईएसआई, मोसाद, एमआई6 जैसी घातक खुफिया एजेंसियों की केस स्टडीज भी पढ़ाई जाती है.

 रिक्रूट को किसी एक फॉरेन लैंग्वेज में स्पेशलाइज किया जाता है और उसे जियो स्ट्रैटिजिक एनालिसिस से भी परिचित कराया जाता है. सीआईए, केजीबी, आईएसआई, मोसाद, एमआई6 जैसी घातक खुफिया एजेंसियों की केस स्टडीज भी पढ़ाई जाती है.शुरुआत में रॉ में नियुक्ति आईबी, इंडियन पुलिस सर्विस, मिलिट्री या रेवेन्यू डिपार्टमेंट से होती है. खुफिया एजेंसी ने यूनिवर्सिटीज से स्टूडेंट्स को लेने की प्रक्रिया शुरू नहीं की है.  शुरुआत में रॉ में नियुक्ति आईबी, इंडियन पुलिस सर्विस, मिलिट्री या रेवेन्यू डिपार्टमेंट से होती है. खुफिया एजेंसी ने यूनिवर्सिटीज से स्टूडेंट्स को लेने की प्रक्रिया शुरू नहीं की है.

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