अयोध्या विवाद: जमीन वापसी याचिका में सरकार का ‘मंदिर 2.0’ प्लान?

अयोध्या में गैर-विवादित जमीन को मूल मालिकों को वापस लौटाने की केंद्र सरकार की अर्जी 2019 चुनावों की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार की कोशिश है कि विवाद मुक्त जमीन पर अध्यादेश लाए बिना मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा। इस पहल का हिंदू संगठनों ने भी समर्थन किया है।

हाइलाइट्स

  • सरकार ने अयोध्या मेंगैर-विवादित जमीन मूल मालिकों को वापस लौटाने की अर्जी दी है
  • 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि गैर-विवादित जमीन को अलग से नहीं देखा जा सकता
  • अयोध्या विवाद में पक्षकार निर्मोही अखाड़े, हिंदू संगठनों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया
  • इसे गैर-विवादित जमीन पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करने की कोशिश माना जा रहा है
नई दिल्ली/प्रयागराज : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की अयोध्या मामले में गैर-विवादित जमीन मूल मालिकों को लौटाने के मामले पर हलचल तेज है। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में हो रही देरी पर संघ और हिंदू संगठनों के दबाव के बाद क्या यह सरकार का चुनाव से पहले नया ‘मंदिर प्लान’ है, इसको लेकर अटकलें लगने लगी हैं। प्रयागराज कुंभ में कैबिनेट की बैठक कर रहे योगी आदित्यनाथ ने केंद्र के इस कदम को सद्भाव के लिए जरूरी करार दिया। खबर है कि अयोध्या विवाद में पक्षकार निर्मोही अखाड़े ने सरकार के इस कदम का विरोध किया है।
क्या यह सरकार का ‘मंदिर 2.0’ प्लान है?
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दी गई अर्जी में 1993 में अधिग्रहीत 67 एकड़ जमीन को गैर-विवादित बताते हुए इसे इसके मालिकों को लौटाने की अपील की है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2010 में 2.77 एकड़ जमीन को विवादित बताते हुए 3 हिस्सों में बांट दिया था। अब केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में जो अर्जी दी है, उसमें उसने 0.313 एकड़ जमीन को ही विवादित बताते हुए संबंधित पक्षों को वापस सौंपने की अपील की है। इस 67 एकड़ में राम जन्मभूमि न्यास की 42 एकड़ जमीन शामिल है। सरकार के इस कदम को बिना अध्यादेश लाए गैर-विवादित जमीन पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या गैर-विवादित जमीन वापस मिल सकती है?
सरकार के इस मूव के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट गैर-विवादित जमीन को संबंधित मालिकों को लौटा सकता है। 2003 में असलम भूरे फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विवादित और गैर-विवादित जमीन को अलग करके नहीं देखा जा सकता। अधिग्रहित जमीन को उनके मालिकों को वापस लौटाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए जमीन मालिकों को कोर्ट में अर्जी दायर करनी होगी। इसके बाद राम जन्मभूमि न्यास ने अपनी गैर-विवादित जमीन 42 एकड़ पर अपना मालिकाना हक हासिल करने के लिए सरकार से गुहार लगाई। 2019 में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी में कहा है कि राम जन्मभूमि न्यास ने अपने हिस्से की गैर विवादित जमीन की मांग की है। à¤¸à¤°à¤•à¤¾à¤° का 'मंदिर 2.0' प्लान? के लिए इमेज परिणाम
मोदी सरकार ने याचिका में क्या दावा किया है
सुप्रीम कोर्ट में दी गई केंद्र की अर्जी में कहा गया है , ‘आवेदक (केंद्र) अयोध्या अधिनियम, 1993 के कुछ क्षेत्रों के अधिग्रहण के तहत अधिग्रहीत भूमि को वापस करने/ बहाल करने/सौंपने के अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए आवेदक ने न्यायालय की अनुमति के लिए यह आवेदन दाखिल कर रहा है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के इस्माइल फारुकी मामले में फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने माना था कि अगर केंद्र अधिग्रहीत की गई संपत्ति को उनके मूल मालिकों को लौटाना चाहे तो वह ऐसा कर सकता है। याचिका में केंद्र ने कहा, ‘इस अदालत की संविधान पीठ ने माना है कि 0.313 एकड़ के विवादित क्षेत्र के अलावा अतिरिक्त क्षेत्र अपने मूल मालिकों को वापस कर दिया जाए।’ याचिका में कहा गया कि राम जन्मभूमि न्यास (राम मंदिर निर्माण को प्रोत्साहन देने वाला ट्रस्ट) ने 1991 में अधिग्रहीत अतिरिक्त भूमि को मूल मालिकों को वापस दिए जाने की मांग की थी। उसने कहा, ‘एक पार्टी ‘राम जन्मभूमि न्यास’ (जिसकी लगभग 42 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई है) ने इस अदालत के संविधान पीठ के फैसले पर भरोसा करते हुए एक आवेदन दायर किया है।’

जमीन की पूरी कहानी
-1993 में 67 एकड़ जमीन का सरकार ने अधिग्रहण किया था। विवादित जमीन के आसपास की जमीन का अधिग्रहण इसलिए किया गया था ताकि विवाद के निपटारे के बाद उस विवादित जमीन पर कब्जे या उपयोग में कोई बाधा नहीं हो। इसमे करीब 42 एकड़ की जमीन रामजन्म भूमि न्यास की है
-1994 में इस्माइल फारूकी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि विवादित जमीन पर कोर्ट का फैसला आने के बाद गैर विवादित जमीन को उनके मूल मालिकों को वापिस लौटाने पर विचार कर सकती है
-1996 में सरकार ने रामजन्म भूमि न्यास की मांग ठुकरा दी। इसके बाद न्यास ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिसे कोर्ट ने 1997 में खारिज कर दिया।
-2002 में जब गैर-विवादित जमीन पर पूजा शुरू हो गई तो असलम भूरे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस याचिका पर सुनवाई के बाद 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने 67 एकड़ पूरी जमीन पर यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया।
-2003 में असलम भूरे फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित और गैर-विवादित जमीन को अलग करके नहीं देखा जा सकता। कोर्ट ने अधिग्रहित जमीन वापसी पर पक्षकारों से अर्जी मांगी। राम जन्मभूमि न्यास ने अपनी गैरविवादित जमीन 42 एकड़ पर अपना मालिकाना हक हासिल करने के लिए सरकार से गुहार लगाई।
-2019 में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी में कहा है कि राम जन्मभूमि न्यास ने अपने हिस्से की गैर विवादित जमीन की मांग की है। 

  • पक्षकारों की अलग-अलग राय

    केंद्र सरकार के सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या में गैर-विवादित जमीन को वापस लौटाने की अर्जी देने पर साधु- संतों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी फैसले का स्वागत किया है।


    लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर अयोध्या में गैर-विवादित जमीन पर यथास्थिति हटाने की मांग की है। इस पर अयोध्या के साधु-संतों और दोनों पक्ष (राम मंदिर-बाबरी मस्जिद) के पैरोकारों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी सरकार की याचिका का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, ‘हम केंद्र के इस कदम का स्वागत करते हैं। हम पहले भी कह चुके हैं कि हमें गैर-विवादित जमीन के इस्तेमाल की अनुमति मिलनी चाहिए।’
    केंद्र सरकार की 67 एकड़ जमीन की वापसी की याचिका पर राम जन्म भूमि मंदिर के पुजारी सत्येंद्र दास ने कहा कि केंद्र सरकार अविवादित 67 एकड़ अधिग्रहित भूमि को वापस ले सकती है लेकिन जबतक गर्भगृह की विवादित जमीन पर फैसला नहीं होता मंदिर निर्माण नहीं शुरू हो सकता। उन्होंने कहा, ‘कोर्ट लगातार तारीख देकर मंदिर-मस्जिद केस की सुनवाई टाल रहा है। इस पर जल्द फैसला आना चाहिए या सरकार संसद में कानून बना कर इस विवाद का हल कर अपने वादे पर खरा उतरे।’
    बाबरी मस्जिद के दूसरे पक्षकार हाजी महबूब ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘यह राजनीतिक खेल जिससे 1990 जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। न्यास को जमीन देने की मंशा सरकार ने जाहिर कर दी है जबकि अधिग्रहण के मकसद में साफ कहा गया है कि जिसके पक्ष में फैसला आएगा, उसे इसका हिस्सा आवंटित किया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि विवादित भूखंड को छोड़ कर कहीं भी मंदिर निर्माण किया जाए हमें ऐतराज नहीं है पर विवादित 2.77 एकड़ सुरक्षित रहना चाहिए।
    ‘याचिका 2014 में ही दायर हो जानी चाहिए थी’रामजन्म भूमि न्यास के लिए इमेज परिणाम
    राम जन्म भूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. राम विलास वेदांती ने कहा कि 67 एकड़ जमीन की वापसी की याचिका केंद्र सरकार का देर से उठाया गया पर अच्छा कदम है। उन्होंने कहा, ‘यह याचिका 2014 में जब बीजेपी की सरकार बनी उसी समय दायर होनी चाहिए थी। अब तक मंदिर का निर्माण भी चलता रहता और कोर्ट का फैसला भी आ गया होता। अब अगर कोर्ट में याचिका पर निर्णय होकर अविवादित जमीन न्यास को वापस मिल जाती है तो मंदिर निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।’ 
    वीएचपी ने किया सरकार के कदम का स्वागत

    विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, ‘हम सरकार द्वारा उठाए गए कदम का स्वागत करते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘तत्कालीन सरकार ने 1993 में कुल 67.703 एकड़ जमीन अधिगृहीत कर ली थी। इसमें राम जन्मभूमि न्यास की जमीन भी शामिल थी।’ उन्होंने कहा कि ‘विवादित ढांचा वाले जमीन सिर्फ 0.313 एकड़ की है। इसके अलावा राम जन्मभूमि न्यास सहित बाकी जमीन विवादित स्थल पर नहीं है। हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस अर्जी पर जल्द से जल्द फैसला लेगा।’ à¤°à¤¾à¤®à¤œà¤¨à¥à¤® भूमि न्यास के लिए इमेज परिणाम
    कोर्ट ने पहले कोई धार्मिक गतिविधि न होने देने का निर्देश दिया था

    बता दें कि केंद्र ने कोर्ट में कहा है कि वह गैर-विवादित 67 एकड़ जमीन इसके मालिक राम जन्मभूमि न्यास को लौटाना चाहती है। इस जमीन का अधिग्रहण 1993 में कांग्रेस की तत्कालीन नरसिम्हा राव सरकार ने किया था। कोर्ट में बाद में वहां यथास्थिति बनाए रखने और कोई धार्मिक गतिविधि न होने देने का निर्देश दिया था।
    केंद्र सरकार की याचिका के मुताबिक 0.313 एकड़ जमीन जिसपर विवादित ढांचा स्थित था, उसी को लेकर विवाद है। बाकी जमीन अधिग्रहित जमीन है। जबकि बाकी पक्षों का मानना है कि विवादित स्थल 2.77 एकड़ जमीन पर है जिसे इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तीन पक्षकारों में बराबर-बराबर बांट दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की संविधानपीठ ने 2003 में पूरी अधिग्रहित जमीन 67.707 एकड़ पर यथास्थिति बनाने का आदेश दिया था।
    • राम विलास वेदांती और हाजी महबूब

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *