नई दिल्ली, । राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील और अदालत में लंबे समय से अटके अयोध्या भूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है। सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी थी लेकिन कोर्ट ने इस मामले को फिलहाल, अगली सुनवाई तक के लिए टाल दिया। अब संभवतः 10 जनवरी के बाद ही राम जन्मभूमि मामले का भविष्य का रोडमैप तय होगा। जानिए इस मामले से जुड़ी अहम बातें।

1. सुप्रीम कोर्ट में तकरीबन आठ साल से लंबित अयोध्या भूमि मामले में मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई 10 जनवरी तक के लिए टाल दी है।

2. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ के समक्ष राम जन्मभूमि विवाद से जुड़ी कुल 15 याचिकाएं लगी हैं।

3. सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए बेंच का गठन, प्रक्रिया और तारीखों को तय करने का मामला फिलहाल टाल दिया है।

4. कोर्ट के सामने एक याचिका ये भी है, जिसमें मांग की गई है कि अगर तय समय में सुनवाई नहीं हो सकती तो कोर्ट अपने आदेश में कारण बताए कि एक तय समय में सुनवाई क्यों नहीं हो सकती।

5. अयोध्या भूमि विवाद को लेकर साल 2011 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

6. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में फैसला सुनाते हुए जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था।

7. इलाहाबाद कोर्ट के फैसले को रामलला सहित सभी पक्षकारों ने 13 अपीलों के जरिये सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से फिलहाल मामले में यथास्थिति कायम है।

8. हाल ही में प्रधानमंत्री ने एक साक्षात्कार में कहा है कि मामला कोर्ट में लंबित रहने तक अयोध्या मामले पर अध्यादेश नहीं लाया जाएगा।

9. दूसरी ओर संघ परिवार और साधू समाज सुनवाई में हो रही देरी के आधार पर अयोध्या में मंदिर बनवाने के लिए अध्यादेश लाने की मांग पर अड़ा है।

10. फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के आज सुनवाई टाल देने से मामले में 10 जनवरी के बाद ही कुछ फैसला संभव हो पाएगा। इस मामले में सभी पक्षकारों समेत राजनीतिक पार्टियों के लिए भी भविष्य की रणनीति को दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद: सुप्रीम कोर्ट में रोज हुई सुनवाई तब भी लगेंगे 8 महीने!

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में 533 एक्जीबिट, 87 गवाह जिन के बयान 14000 पन्नों में हैं और हजारों दस्तावेज हैं जो संस्कृत, उर्दू, अरबी, फारसी, हिंदी और अंग्रेज़ी में हैं. इन सब को पढ़ने में ही काफी समय लग सकता है.

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद: सुप्रीम कोर्ट में रोज हुई सुनवाई तब भी लगेंगे 8 महीने!

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट 10 जनवरी तक टाल दिया है. शुक्रवार को अदालत में दो अलग-अलग मामले सुनवाई के लिए सूचिबद्ध थे. एक विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर है और दूसरा एक जनहित याचिका है जिसमें इस मामले के जल्द सुनवाई करने की मांग की गई है.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ में विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर सुनवाई होनी थी. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2.67 अकड़ ज़मीन को तीन हिस्सों में बांट दिया था.एक हिस्सा राम लला विराजमान, एक हिस्सा निर्मोही अखाड़ा और एक हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया है. तीनों ही पक्षों ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में ये तय होना था कि इस मामले कि किस बेंच में सुनवाई होगी और सुनवाई कब से शुरू होगी. अब 10 जनवरी को इस पर फैसला होगा.
इस पर किसी तरह का आंकलन करना संभव नहीं और ये पूरी तरह चीफ जस्टिस पर निर्भर करता है. कुछ पक्षकार रोजाना सुनवाई कि मांग कर रहे हैं. इस पर भी फैसला चीफ जस्टिस या फिर उस बेंच पर निर्भर करता है जो इस मामले कोई सुनवाई करेगी.
अगर रोजाना सुनवाई भी होती है तो यह हफ्ते में सिर्फ मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को होगी. सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई के यही नियम है. अब सवाल यह है कि सुनवाई खत्म कब होगी. अगर इलाहाबाद हाई कोर्ट में हुई सुनवाई को देखे तो वहां 100 दिन सुनवाई हुई थी. अगर सुप्रीम कोर्ट में इसी रफ्तार से सुनवाई होती है तो कम से कम 8 महीने सुनवाई चल सकती है. हालांकि जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में इससे कहीं ज्यादा लंबी सुनवाई हो सकती है.
इस मामले में 533 एक्जीबिट, 87 गवाह जिन के बयान 14000 पन्नों में हैं और हजारों दस्तावेज हैं जो संस्कृत, उर्दू, अरबी, फारसी, हिंदी और अंग्रेज़ी में हैं. इन सब को पढ़ने में ही काफी समय लग सकता है. शुक्रवार को इसके अलावा एक जनहित याचिका पर भी सुनवाई होगी.
हरीनाथ राम नाम के वकील ने मांग की है कि इस मामले की जल्द सुनवाई कर निपटारा किया जाए क्योंकि ये करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा मामला है. हालांकि कोर्ट यह कई बार दोहरा चुका हाई की इस मामले की जल्द सुनवाई नहीं होगी.

अयोध्या विवाद: कब-कब क्या-क्या हुआ

1528: अयोध्या में मस्जिद का निर्माण। माना जाता है कि मुगल सम्राट बाबर ने यह मस्जिद बनवाई थी। इस कारण इसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था। हिन्दू उस स्थल को अपने आराध्य भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं और वहां राम मंदिर बनाना चाहते हैं।

1853: पहली बार इस स्थल के पास सांप्रदायिक दंगे हुए।

1859: ब्रितानी शासकों ने विवादित स्थल पर बाड़ लगा दी और परिसर के भीतरी हिस्से में मुसलमानों को और बाहरी हिस्से में हिन्दुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दे दी।

1949: भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गयीं। कथित रूप से कुछ हिन्दुओं ने ये मूर्तियां वहां रखवाई थीं।  मुसलमानों ने इस पर विरोध व्यक्त किया और दोनों पक्षों ने अदालत में मुकदमा दायर कर दिया।  सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित करके ताला लगा दिया।

1984: कुछ हिन्दुओं ने विश्व हिन्दू परिषद के नेतृत्व में भगवान राम के जन्मस्थल को मुक्त करने और वहाँ राम मंदिर का निर्माण करने के लिए एक समिति का गठन किया। बाद में इस अभियान का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता लालकृष्ण आडवाणी ने संभाल लिया।

 1986: फैजाबाद के ज़िला मजिस्ट्रेट  ने हिन्दुओं को प्रार्थना करने के लिए विवादित मस्जिद के दरवाजे पर से ताला खोलने का आदेश दिया। मुसलमानों ने इसके विरोध में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन किया।

1989: विश्व  हिन्दू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के लिए अभियान तेज किया और विवादित स्थल के नजदीक राम मंदिर की नींव रखी।

1990: विश्व  हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद को कुछ नुक़सान पहुंचाया। तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने वार्ता के जरिए विवाद सुलझाने के प्रयास किए मगर अगले वर्ष वार्ताएं विफल हो गईं।

1992: विश्व  हिन्दू परिषद, शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने 6 दिसम्बर को बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। इसके परिणामस्वरूप देश भर में हिन्दू और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे जिसमें 2000 से ज्यादा लोग मारे गए।

1998: अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने गठबंधन सरकार बनाई।

2001: बाबरी विध्वंस की बरसी पर तनाव बढ़ गया और विश्व हिन्दू परिषद ने विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण करने का अपना संकल्प दोहराया।

जनवरी 2002: अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री वाजपेयी ने अयोध्या समिति का गठन किया। वरिष्ठ अधिकारी शत्रुघ्न सिंह को हिन्दू और मुसलमान नेताओं के साथ बातचीत के लिए नियुक्त किया गया।

फरवरी 2002: भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को शामिल करने से इनकार कर दिया। विश्व हिन्दू परिषद ने 15 मार्च से राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू करने की घोषणा कर दी।  सैकड़ों हिन्दू कार्यकर्ता अयोध्या में इकठ्ठा हुए. अयोध्या से लौट रहे हिन्दू कार्यकर्ता जिस रेलगाड़ी में यात्रा कर रहे थे, उस पर गोधरा में हुए हमले में 58 कार्यकर्ता मारे गए।

13 मार्च, 2002: सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि अयोध्या में यथास्थिति बरकरार रखी जाएगी और किसी को भी सरकार द्वारा अधग्रिहीत जमीन पर शिलापूजन की अनुमति नहीं होगी।  केंद्र सरकार ने कहा कि अदालत के फैसले का पालन किया जाएगा।

15 मार्च, 2002: विश्व हिन्दू परिषद और केंद्र सरकार के बीच इस बात को लेकर समझौता हुआ कि विहिप के नेता सरकार को मंदिर परिसर से बाहर शिलाएं सौंपेंगे।  रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत परमहंस रामचंद्र दास और विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल के नेतृत्व में लगभग आठ सौ कार्यकर्ताओं ने सरकारी अधिकारी को अखाड़े में शिलाएं सौंपीं।

22 जून, 2002: विश्व हिन्दू परिषद ने मंदिर निर्माण के लिए विवादित भूमि के हस्तांतरण की मांग उठाई।

जनवरी 2003: रेडियो तरंगों के जरिए ये पता लगाने की कोशिश की गई कि क्या विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद परिसर के नीचे किसी प्राचीन इमारत के अवशेष दबे हैं, कोई पक्का निष्कर्ष नहीं निकला।

मार्च 2003: केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से विवादित स्थल पर पूजापाठ की अनुमति देने का अनुरोध किया जिसे ठुकरा दिया गया।

अप्रैल 2003: इलाहाबाद हाइकोर्ट के निर्देश  पर पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग ने विवादित स्थल की खुदाई शुरू की, जून महीने तक खुदाई चलने के बाद आई रिपोर्ट में कहा गया है कि उसमें मंदिर से मिलते जुलते अवशेष मिले हैं।

मई 2003: सीबीआई ने 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित आठ लोगों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किए।

जून 2003: कांची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की और उम्मीद जताई कि जुलाई तक अयोध्या मुद्दे का हल निश्चित रूप से निकाल लिया जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

अगस्त 2003: भाजपा नेता और उप प्रधानमंत्री ने विहिप के इस अनुरोध को ठुकराया कि राम मंदिर बनाने के लिए विशेष विधेयक लाया जाए।

अप्रैल 2004: आडवाणी ने अयोध्या में अस्थायी राममंदिर में पूजा की और कहा कि मंदिर का निर्माण जरूर किया जाएगा।

जुलाई 2004: शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने सुझाव दिया कि अयोध्या में विवादित स्थल पर मंगल पांडे के नाम पर कोई राष्ट्रीय स्मारक बना दिया जाए।

जनवरी 2005: लालकृष्ण आडवाणी को अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस में उनकी कथित भूमिका के मामले में अदालत में तलब किया गया।

जुलाई 2005: पांच हथियारबंद आतंकियों ने विवादित परिसर पर हमला किया जिसमें पांचों आतंकियों सहित छह लोग मारे गए, हमलावर बाहरी सुरक्षा घेरे के नजदीक ही मार डाले गए।

06 जुलाई 2005 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के दौरान ‘भड़काऊ भाषण’ देने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी को भी शामिल करने का आदेश दिया। इससे पहले उन्हें बरी कर दिया गया था।

28 जुलाई 2005 : लालकृष्ण आडवाणी 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में गुरुवार को रायबरेली की एक अदालत में पेश हुए। अदालत ने लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ आरोप तय किए।

04 अगस्त 2005: फैजाबाद की अदालत ने अयोध्या के विवादित परिसर के पास हुए हमले में कथित रूप से शामिल चार लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजा।

20 अप्रैल 2006 : कांग्रेस के नेतृत्ववाली यूपीए सरकार ने लिब्रहान आयोग के समक्ष लिखित बयान में आरोप लगाया कि बाबरी मस्जिद को ढहाया जाना सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा था और इसमें भाजपा, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, बजरंग दल और शिवसेना की मिलीभगत थी।

जुलाई 2006 : सरकार ने अयोध्या में विवादित स्थल पर बने अस्थाई राम मंदिर की सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ कांच का घेरा बनाए जाने का प्रस्ताव किया। इस प्रस्ताव का मुस्लिम समुदाय ने विरोध किया और कहा कि यह अदालत के उस आदेश के ख़िलाफ़ है जिसमें यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे।

19 मार्च 2007 : कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनावी दौरे के बीच कहा कि अगर नेहरू-गांधी परिवार का कोई सदस्य प्रधानमंत्री होता तो बाबरी मस्जिद न गिरी होती। उनके इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया हुई।

30 जून 2009: बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले की जांच के लिए गठित लिब्रहान आयोग ने 17 वर्षों के बाद अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपी।

सात जुलाई, 2009: उत्तर प्रदेश सरकार ने एक हलफ़नामे में स्वीकार किया कि अयोध्या विवाद से जुड़ी 23 महत्वपूर्ण फाइलें सचिवालय से गायब हो गई हैं।

24 नवम्बर, 2009: लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश। आयोग ने अटल बिहारी वाजपेयी और मीडिया को दोषी ठहराया और नरसिंह राव को क्लीन चिट दी।

20 मई, 2010: बाबरी विध्वंस के मामले में लालकृष्ण आडवाणी और अन्य नेताओं के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने को लेकर दायर पुनरीक्षण याचिका हाईकोर्ट में ख़ारिज।

26 जुलाई, 2010: रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई पूरी।

8 सितंबर, 2010: अदालत ने अयोध्या विवाद पर 24 सितंबर को फैसला सुनाने की घोषणा की.

24 सितम्बर 2010 को हाईकोर्ट लखनऊ के तीन जजों की बेंच ने फैसला सुनाया जिसमें मंदिर बनाने के लिए हिन्दुओं को जमीन देने के साथ ही विवादित स्थल का एक तिहाई हिस्सा मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिए दिए जाने की बात कही गयी। मगर यह निर्णय दोनों को स्वीकार नहीं हुआ। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर स्थगनादेश दे दिया।

9 मई 2011: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई। अब इस विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है।

27 सितंबर, 2018:  तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 2:1 के बहुमत से 1994 के एक फैसले में की गयी टिप्पणी पांच न्यायाधीशों की पीठ के पास नये सिरे से विचार के लिये भेजने से इंकार कर दिया था। इस फैसले में टिप्पणी की गयी थी कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है।

29 अक्टूबर, 2018: शीर्ष अदालत ने कहा था कि यह मामला जनवरी के प्रथम सप्ताह में उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होगा जो इसकी सुनवाई का कार्यक्रम निर्धारित करेगी।

4 जनवरी, 2019: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 10 जनवरी तक के लिए टली। तीन जजों की बेंच करेगी अब सुनवाई।