अमेरिकी नागरिक का शव लाने की कोशिश में ‘खत्म’ हो सकते हैं सेंटिनल आदिवासी

आदिवासियों के लिए काम करने वाली संस्था सर्वाइवल इंटरनेशनल ने कहा है कि ऐसी कोशिशें भारतीय पुलिस और सेंटीनल आदिवासियों के लिए खतरनाक हो सकती हैं

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के पास नॉर्थ सेंटीनल द्वीप पर हुए एक 26 साल के अमेरिकी नागरिक जॉन एलन चाऊ की हत्या के बाद उनका शव लाने की कोशिशें की जा रही हैं. चाऊ की इस द्वीप पर रहने वाले आदिवासियों ने हत्या कर दी थी, क्योंकि वो उनकी तरफ से बार-बार दी जाने वाली चेतावनियों के बावजूद भी उनके द्वीप पर घुसने की कोशिश कर रहे थे.

ये द्वीप दुनिया भर में ऐसी जगहों में शामिल है, जहां अभी तक बाहरी दुनिया से कोई नहीं पहुंचा है. यहां रहने वाले आदिवासी भी बाहरी लोगों से मेलजोल नहीं करना चाहते.Image result for सेंटीनल आदिवासियों

आदिवासियों और पुलिस दोनों को खतरा

अंडमान की पुलिस जॉन एलन चाऊ के शव को वापिस लाने की कोशिशों में जुटी हुई है. वहीं आदिवासियों के लिए काम करने वाली एक संस्था ने अंडमान पुलिस से चाऊ का शव न लाने का अनुरोध किया है.

न्यूज18 हिंदी की खबर के मुताबिक, आदिवासियों के लिए काम करने वाली संस्था सर्वाइवल इंटरनेशनल ने कहा है कि ऐसी कोशिशें भारतीय पुलिस और सेंटिनल आदिवासियों के लिए खतरनाक हो सकती है. संस्था ने कहा कि अगर आदिवासियों को कोई रोग लग गया तो वह ‘खत्म’ हो जाएंगे.

संस्था की ओर से कहा गया, ‘फ्लू, खसरा या अन्य बाहरी बीमारी के घातक महामारी का खतरा बहुत वास्तविक है और इस तरह के किसी संपर्क के साथ यह खतरा बढ़ता है.’Image result for सेंटीनल आदिवासियों

शव लाने की कोशिश में लगे हुए हैं अधिकारी

बता दें कि इससे पहले रविवार को अधिकारियों ने द्वीप पर शव को तलाशने की फिर से कोशिश की थी. लेकिन इस अभियान के दौरान उनका सामना तीन-चार आदिवासियों से हुआ. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, यहां बोट से पहुंचे अधिकारी तट के करीब पहुंचे लेकिन जिस जगह पर चाऊ के शव के होने का अनुमान है, वहां आदिवासियों की गतिविधि देखी गई. वहां पुलिस को तीन-चार आदिवासी दिखे, जिसके चलते पुलिस तट पर उतर नहीं सकी.

पुलिस प्रमुख दीपेंद्र पाठक ने बताया कि तट से 400 मीटर पहले अधिकारियों ने दूरबीन की सहायता से देखा कि तीर-धनुष लिए हुए लोग वहां घूम रहे थे. आदिवासियों ने तीर के जरिए ही अमेरिकी नागरिक जॉन एलन चाऊ की ह‍त्‍या की थी.

पाठक ने बताया, ‘वे हमारी तरफ देख रहे थे और हम उनकी ओर नजर बनाए हुए थे.’ किसी भी तरह के टकराव से बचने के लिए नाव को वापस घुमा लिया गया. सेंटिनल लोगों में किसी भी तरह का डर न फैले इसके लिए पुलिस सोच-समझकर कदम उठा रही है.अमेरिकी नागरिक के शव लाने की कोशिश में 'खत्म' हो सकते हैं सेंटिनल के आदिवासी

इस जनजाति से एक बार संपर्क साध चुकी है भारतीय सरकार

ये जनजाति विश्व की कुछ पुरानी जनजातियों में से है, जिनका आधुनिक दुनिया से कोई संपर्क नहीं है. भारतीय सरकार ने भी यहां बिना अनुमति के जाने पर रोक लगा रखी है. यहां के लोग भी बाहरी लोगों से कोई संपर्क नहीं करना चाहते.

आज तक भारत की ओर से बस एक टीम इस जनजाति से संपर्क साध पाई है. उस टीम का नेतृत्व भारत के मानवविज्ञानी त्रिलोकनाथ त्रिपाठी ने किया था. उन्होंने 1960 में उनसे संपर्क साधा था. लेकिन कुछ मुलाकातों और उपहार में कुछ सामान लेने के बाद भी इस जनजाति ने उन्हें द्वीप में घुसने नहीं दिया था. बाद में उनसे संपर्क साधना बंद कर दिया गया और इस द्वीप पर बिना अनुमति के जाने को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया.

लेकिन अमेरिकी नागरिक जॉन एलन चाऊ की डायरी से पता चलता है कि वो वहां धर्म परिवर्तन के लिए यात्रा करना चाह रहे थे और इस आईलैंड तक पहुंचने के लिए उन्होंने अंडमान के कुछ मछुआरों को पैसे भी दिए थे.

टीएन त्रिपाठी ने इकोनॉमिक टाइम्स के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि चाऊ का शव लाना बहुत मुश्किल होगा. ये काम हेलीकॉप्टर से नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे बहुत शोर होगा. अथॉरिटी को पहले जनजाति की गतिविधियों को देखना होगा, फिर अपना एक्शन लेना होगा. लेकिन उन्हें फोर्स का इस्तेमाल नहीं करना होगा.

इस जनजाति से संपर्क साधना ठीक क्यों नहीं?

अगर इस जनजाति से संपर्क साधने की बात करें, तो ये उनके पूरी तरह से खत्म करने के खतरे के बराबर है. हमारी दुनिया से उनका संपर्क हजार सालों के बराबर होगा और इसके लिए न तो वो शारीरिक रूप से तैयार होंगे, न ही मानसिक रूप से. चूंकि वो खुद भी हमसे कोई संपर्क नहीं साधना चाहते, तो उनपर खुद को थोपना कहीं से भी सही नहीं.

वैसे भी क्या पता सालों से इस द्वीप पर रह रहे ये सेंटिनलीज खुद लुप्त होने की कगार पर हों.

द डिप्लोमैट में क्रिस्टॉफ इवानिक ने लिखा है कि कुछ रिसर्च में माना गया है कि हमारा वातावरण इतना बदल चुका है कि कल्पना करें कि अगर मध्य युग के किसी शख्स को हमारे वक्त में लाया जाए, तो हवा में बदलाव की वजह से ही उसकी जल्दी मौत हो जाएगी.

(फीचर्ड इमेज- सर्वाइवल इंटरनेशनल से साभार)

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